छात्र आंदोलन ने फिर पकड़ी रफ्तार: बिहार-बंगाल में सैकड़ों गिरफ्तार, प्रवक्ता आशुतोष रांका की चेतावनी- 'मंगलवार तक FIR वापस लें, नहीं तो फिर सड़कों पर उतरेंगे छात्र'
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों के प्रदर्शन (Jantar Mantar Protest) में दर्ज मुकदमे अब तक वापस नहीं हुए हैं। CJP ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए जेपी नड्डा
Published at : 27 Jul 2026, 01:13 PM IST
Updated : 10:08 AM IST
· 11 Sep 2026
Students Arrested in Bihar Bengal Protesters Demand FIR Cancellation Warning Issued
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लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना हर नागरिक और छात्र का अधिकार है, लेकिन कई बार शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी हिंसक रूप ले लेते हैं। देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर हाल ही में ऐसे ही एक बड़े बवाल का गवाह बना था। प्रदर्शनकारी छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के बीच हुए उस टकराव के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच मुकदमों को वापस लेने का एक समझौता हुआ था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक छात्रों पर दर्ज की गई एफआईआर (FIR) निरस्त नहीं हुई हैं।READ ALSO:-मेरठ में कांवड़ यात्रा पर 'महा-एक्शन': ढाबों पर प्याज-लहसुन बैन, मांस-मदिरा की दुकानें होंगी सील, 12 फीट से ऊंचे DJ की 'नो-एंट्री'
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इस वादाखिलाफी से छात्रों और राजनीतिक गलियारों में भारी रोष पनप रहा है। ख़बरीलाल (Khabreelal) की इस एक्सक्लूसिव और विस्तृत रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि आखिर मुकदमों की वापसी में पेंच कहां फंसा है, पुलिस की क्या मजबूरी है और CJP ने सरकार को क्या अल्टीमेटम दिया है।
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Dear @JPNadda@DrJitendraSingh ji, \r\n \r\nWe are observing a complete breach of the agreement regarding no police action against the protestors. Hundreds of students have been arrested in Bihar and Bengal, and hundreds are being surveilled/harrassed in Delhi and other states. Multiple…
क्या है वर्तमान स्थिति? 20 मामलों में फंसी है छात्रों की गर्दन
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जंतर-मंतर पर हुए उस उग्र विरोध-प्रदर्शन और उसके बाद भड़की हिंसा के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कई मुकदमे दर्ज किए थे। आधिकारिक सूत्रों और पुलिस के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में लगभग 20 अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें सैकड़ों अज्ञात और नामजद छात्रों को आरोपी बनाया गया है।
14 मामले: ये सीधे तौर पर हिंसक विरोध-प्रदर्शन, सरकारी काम में बाधा डालने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और बिना अनुमति के बैरिकेड्स तोड़ने से जुड़े हैं।
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1 मामला: यह मामला सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना इजाजत ड्रोन (Drone) उड़ाने को लेकर दर्ज किया गया है, जो राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में एक गंभीर अपराध माना जाता है।
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अन्य मामले: शेष मुकदमे प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और कवरेज कर रहे पत्रकारों (Journalists) पर हुए जानलेवा हमलों और मारपीट से संबंधित हैं।
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छात्रों के भविष्य (जैसे सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और विदेश यात्रा) पर इन मुकदमों का सीधा और नकारात्मक असर पड़ता है। यही कारण है कि समझौते के बाद छात्रों को उम्मीद थी कि ये केस तुरंत वापस हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें अब तक गृह मंत्रालय या सरकार की तरफ से केस वापस लेने का कोई लिखित आदेश (Written Order) प्राप्त नहीं हुआ है।
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केस वापसी की लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया
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कानून के जानकारों का कहना है कि एक बार एफआईआर दर्ज होने के बाद उसे वापस लेना केवल एक मौखिक आदेश से संभव नहीं है। दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार और उपराज्यपाल (LG) के अधीन आती है, इसलिए यहां की कानूनी प्रक्रिया थोड़ी अधिक जटिल है।
मुकदमे वापस लेने के लिए निम्नलिखित कानूनी प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होता है:
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सरकारी आदेश: सबसे पहले केंद्र सरकार या संबंधित मंत्रालय को आधिकारिक तौर पर दिल्ली पुलिस को मामले वापस लेने का निर्देश देना होगा।
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LG की मंजूरी: आदेश मिलने के बाद दिल्ली पुलिस का अभियोजन पक्ष (Prosecution Department) दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) को एक विस्तृत पत्र लिखेगा। इस पत्र में अनुरोध किया जाएगा कि जनहित या समझौते को देखते हुए पुलिस इन मामलों में आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करना चाहती।
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अदालत का अंतिम फैसला: LG से हरी झंडी मिलने के बाद, पुलिस के वकील संबंधित मजिस्ट्रेट या अदालत को सूचित करेंगे। इसके बाद अदालत सीआरपीसी (अब बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत मामलों को रद्द करने (Quash) पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी।
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पत्रकारों पर हमले के मामले नहीं होंगे वापस: यहां यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि केवल वे मामले वापस लिए जा सकते हैं जिनमें शिकायतकर्ता खुद दिल्ली पुलिस है। जिन मुकदमों में पत्रकारों या आम नागरिकों ने मारपीट की नामजद शिकायत दर्ज कराई है, वे मामले तब तक वापस नहीं हो सकते जब तक कि पीड़ित पत्रकार खुद अदालत में जाकर अपनी सहमति (Consent) न दे दें।
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CJP का फूटा गुस्सा: केंद्रीय मंत्रियों को किया सीधे टैग
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सरकार की इस सुस्ती और लेटलतीफी से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धैर्य अब जवाब दे गया है। CJP के मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक जोरदार अभियान छेड़ दिया है।
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उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को सीधे टैग करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। रांका ने अपने पोस्ट में लिखा, "हम स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई पुलिस कार्रवाई न करने के लिए जो समझौता हुआ था, उसका अब पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है। सरकार अपने वादे से मुकर रही है।"
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प्रवक्ता ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, बिहार और बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों पर खुफिया तरीके से नजर रखी जा रही है और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
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CJP की 4 प्रमुख और सख्त मांगें
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स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए CJP ने सरकार के सामने अपनी चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
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तुरंत FIR वापसी: प्रदर्शनकारी छात्रों, युवाओं और लॉजिस्टिक्स में मदद करने वाले बैकस्टेज वॉलंटियर्स के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तुरंत और बिना किसी शर्त के वापस ली जाएं।
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हिरासत से रिहाई: जिन भी छात्रों को पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए।
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भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं: सरकार यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस आंदोलन को लेकर (चाहे वह दिल्ली पुलिस हो, सीबीआई/ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां हों, या बीजेपी शासित राज्यों की पुलिस हो) कोई भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
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लिखित समझौता और टाइमलाइन: कानूनी मामलों को वापस लेने से जुड़ा पूरा 'लिखित समझौता' और उसकी तय समय-सीमा (Timeline) सरकार मंगलवार तक सार्वजनिक रूप से साझा करे।
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मंगलवार का अल्टीमेटम: फिर भड़क सकती है आंदोलन की आग
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CJP ने इस बार आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने अपने बयान के अंत में सरकार को खुली चेतावनी देते हुए कहा है, "यदि सरकार हमारी मांगों को अनसुना करती है और मंगलवार तक लिखित समय-सीमा हमारे साथ साझा नहीं की जाती है, तो हमारे पास दोबारा सड़कों पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हम मजबूर होकर एक बार फिर विशाल और उग्र विरोध-प्रदर्शन करेंगे।"
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राजधानी दिल्ली में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। छात्रों का भविष्य दांव पर है और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मंगलवार तक केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। क्या छात्रों को मुकदमों से राहत मिलेगी, या फिर दिल्ली की सड़कें एक बार फिर से नारों और प्रदर्शनों से गूंज उठेंगी?
Sabse pehle comment karne wale banein.