खबरीलाल डेस्क
खबरीलाल (Khabreelal) विशेष राजनीतिक रिपोर्ट:
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देश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों के आंदोलन ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र की सत्तासीन मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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​कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष और यूपीए की पूर्व चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने सीधे तौर पर मोदी सरकार की कार्यशैली, शिक्षा नीतियों और पुलिस की बर्बरता पर सवाल खड़े किए हैं। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि मौजूदा केंद्र सरकार ने अपने 'अहंकार, कायरता और क्रूरता' की सभी हदें पार कर दी हैं। आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में सरकार को किन-किन मुद्दों पर घेरा है।
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'लोकतांत्रिक सरकार को ऐसी हिंसा शोभा नहीं देती'

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सोनिया गांधी ने अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ (The Hindu) में प्रकाशित अपने एक विस्तृत लेख के माध्यम से देश के युवाओं और छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि एक लोकतांत्रिक देश की चुनी हुई सरकार को अपने ही देश के युवाओं के साथ ऐसा हिंसक व्यवहार बिल्कुल शोभा नहीं देता।
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​सोनिया गांधी ने कहा, "छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना, उनकी चिंताओं को सुनना और उनके सवालों का जवाब देना किसी भी सरकार की सबसे बड़ी नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। छात्र देश भर में फैले पेपर लीक (Paper Leak) माफियाओं पर सरकार से सीधा जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय उनके दमन पर उतर आई है।"
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​उन्होंने आगे कहा कि छात्रों के साथ केंद्र सरकार इस तरह का व्यवहार कर रही है, जैसे वे देश का भविष्य नहीं, बल्कि कोई 'राष्ट्रीय शत्रु' (National Enemy) हों।
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20 जुलाई का दिन बना लोकतंत्र पर कलंक: पुलिस बर्बरता का आरोप

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​सोनिया गांधी ने अपने लेख में 20 जुलाई 2026 की उस घटना का विशेष रूप से जिक्र किया, जब हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से 'संसद मार्च' निकाल रहे थे।
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​उन्होंने इस दिन को लोकतंत्र पर एक 'कलंक' करार देते हुए कहा, "पूरे देश ने टीवी और सोशल मीडिया पर वह भयानक मंजर देखा। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। इस क्रूर दमन-हिंसा ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।"
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अमित शाह पर सीधा निशाना:

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सोनिया गांधी ने पुलिस की इस कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह से पुलिस ने घर लौट रहे छात्रों को भी नहीं बख्शा, उन पर लाठियां बरसाईं और पैलेट गन (छर्रों) का इस्तेमाल किया, उससे प्रतीत होता है कि "शायद पुलिस को उस बर्बर कार्रवाई की परमिशन खुद गृह मंत्री अमित शाह ने दी होगी।" युवाओं के शरीर छर्रों से छलनी हो गए, जो सरकार की कायरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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असहमति को राष्ट्रविरोधी करार देना सरकार का पुराना तरीका'

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​कांग्रेस नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह पुराना तरीका रहा है कि जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाता है या उनकी नीतियों से असहमति (Dissent) जताता है, उसे तुरंत 'राष्ट्रविरोधी' (Anti-National) या किसी साजिश का हिस्सा करार दे दिया जाता है।
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​उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर झूठे आरोप लगाने, उन्हें बदनाम करने और इसे एक राजनीतिक साजिश बताने के लिए अपने सभी सरकारी हथकंडों और मशीनरी का भरपूर इस्तेमाल किया है। जबकि सच्चाई यह है कि सरकार खुद अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।"
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शिक्षा बजट में कटौती: सरकार को आत्मनिरीक्षण की सलाह

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​सोनिया गांधी ने केवल पुलिस कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों (Education Policies) का भी कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने सरकार को 'आत्मनिरीक्षण' (Introspection) करने की सख्त सलाह दी।
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​उन्होंने कहा कि सरकार को यह सोचना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि देश के भविष्य को अपनी किताबें छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा और लाठियां खानी पड़ीं। सोनिया गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर सार्वजनिक शिक्षा (Public Education) प्रणाली को बर्बाद करने का आरोप लगाया:
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    स्कूली शिक्षा बजट में कटौती: गांधी ने दावा किया कि सरकार ने स्कूली शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट में भारी 50% की कटौती की है, जिससे सरकारी स्कूलों का ढांचा चरमरा गया है।
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    उच्च शिक्षा की अनदेखी: उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा (Higher Education) पर खर्च होने वाले बजट को भी 33% तक घटा दिया गया है, जिससे विश्वविद्यालयों में रिसर्च और विकास का काम ठप पड़ गया है।
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"छात्रों ने धोखे का पर्दाफाश किया"

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अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि आज का युवा जागरूक है। छात्रों ने सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार के उस 'धोखे' का पर्दाफाश कर दिया है, जिसमें वे विश्वगुरु बनने और शिक्षा के विकास के बड़े-बड़े दावे करते थे। कांग्रेस पार्टी इस संघर्ष में पूरी तरह से छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
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​सोनिया गांधी का यह लेख ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष पहले से ही NEET, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। 'द हिंदू' में प्रकाशित यह लेख स्पष्ट करता है कि कांग्रेस इस छात्र आंदोलन को एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित करना चाहती है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और सत्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष के इन गंभीर और तीखे आरोपों का क्या पलटवार किया जाता है।
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