खबरीलाल (Khabreelal) विशेष राजनीतिक रिपोर्ट:
\r\n\r\nदेश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों के आंदोलन ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र की सत्तासीन मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
\r\n\r\nकांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष और यूपीए की पूर्व चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने सीधे तौर पर मोदी सरकार की कार्यशैली, शिक्षा नीतियों और पुलिस की बर्बरता पर सवाल खड़े किए हैं। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि मौजूदा केंद्र सरकार ने अपने 'अहंकार, कायरता और क्रूरता' की सभी हदें पार कर दी हैं। आइए, खबरीलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में सरकार को किन-किन मुद्दों पर घेरा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n“The Narendra Modi government has responded to the students’ courage with cowardice and wanton cruelty, treating them not as inheritors of the future but as enemies of the nation.
\r\n— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 24, 2026
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\r\nThe Modi government has not just degraded India’s education landscape but has also made a habit of… pic.twitter.com/dE42K1f90b
'लोकतांत्रिक सरकार को ऐसी हिंसा शोभा नहीं देती'
\r\n\r\nसोनिया गांधी ने अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ (The Hindu) में प्रकाशित अपने एक विस्तृत लेख के माध्यम से देश के युवाओं और छात्रों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि एक लोकतांत्रिक देश की चुनी हुई सरकार को अपने ही देश के युवाओं के साथ ऐसा हिंसक व्यवहार बिल्कुल शोभा नहीं देता।
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सोनिया गांधी ने कहा, "छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना, उनकी चिंताओं को सुनना और उनके सवालों का जवाब देना किसी भी सरकार की सबसे बड़ी नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। छात्र देश भर में फैले पेपर लीक (Paper Leak) माफियाओं पर सरकार से सीधा जवाब मांग रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय उनके दमन पर उतर आई है।"
\r\n\r\nउन्होंने आगे कहा कि छात्रों के साथ केंद्र सरकार इस तरह का व्यवहार कर रही है, जैसे वे देश का भविष्य नहीं, बल्कि कोई 'राष्ट्रीय शत्रु' (National Enemy) हों।
\r\n\r\n20 जुलाई का दिन बना लोकतंत्र पर कलंक: पुलिस बर्बरता का आरोप
\r\n\r\nसोनिया गांधी ने अपने लेख में 20 जुलाई 2026 की उस घटना का विशेष रूप से जिक्र किया, जब हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से 'संसद मार्च' निकाल रहे थे।
\r\n\r\nउन्होंने इस दिन को लोकतंत्र पर एक 'कलंक' करार देते हुए कहा, "पूरे देश ने टीवी और सोशल मीडिया पर वह भयानक मंजर देखा। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। इस क्रूर दमन-हिंसा ने हमारी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।"
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\r\n\r\nअमित शाह पर सीधा निशाना:
\r\n\r\nसोनिया गांधी ने पुलिस की इस कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह से पुलिस ने घर लौट रहे छात्रों को भी नहीं बख्शा, उन पर लाठियां बरसाईं और पैलेट गन (छर्रों) का इस्तेमाल किया, उससे प्रतीत होता है कि "शायद पुलिस को उस बर्बर कार्रवाई की परमिशन खुद गृह मंत्री अमित शाह ने दी होगी।" युवाओं के शरीर छर्रों से छलनी हो गए, जो सरकार की कायरता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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\r\n\r\nअसहमति को राष्ट्रविरोधी करार देना सरकार का पुराना तरीका'
\r\n\r\nकांग्रेस नेता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह पुराना तरीका रहा है कि जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाता है या उनकी नीतियों से असहमति (Dissent) जताता है, उसे तुरंत 'राष्ट्रविरोधी' (Anti-National) या किसी साजिश का हिस्सा करार दे दिया जाता है।
\r\n\r\nउन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर झूठे आरोप लगाने, उन्हें बदनाम करने और इसे एक राजनीतिक साजिश बताने के लिए अपने सभी सरकारी हथकंडों और मशीनरी का भरपूर इस्तेमाल किया है। जबकि सच्चाई यह है कि सरकार खुद अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।"
\r\n\r\nशिक्षा बजट में कटौती: सरकार को आत्मनिरीक्षण की सलाह
\r\n\r\nसोनिया गांधी ने केवल पुलिस कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने मोदी सरकार की शिक्षा नीतियों (Education Policies) का भी कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने सरकार को 'आत्मनिरीक्षण' (Introspection) करने की सख्त सलाह दी।
\r\n\r\nउन्होंने कहा कि सरकार को यह सोचना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि देश के भविष्य को अपनी किताबें छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा और लाठियां खानी पड़ीं। सोनिया गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर सार्वजनिक शिक्षा (Public Education) प्रणाली को बर्बाद करने का आरोप लगाया:
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- \r\n स्कूली शिक्षा बजट में कटौती: गांधी ने दावा किया कि सरकार ने स्कूली शिक्षा पर खर्च होने वाले बजट में भारी 50% की कटौती की है, जिससे सरकारी स्कूलों का ढांचा चरमरा गया है।\r\n \r\n
- \r\n उच्च शिक्षा की अनदेखी: उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा (Higher Education) पर खर्च होने वाले बजट को भी 33% तक घटा दिया गया है, जिससे विश्वविद्यालयों में रिसर्च और विकास का काम ठप पड़ गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n"छात्रों ने धोखे का पर्दाफाश किया"
\r\n\r\nअपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि आज का युवा जागरूक है। छात्रों ने सड़कों पर उतरकर मोदी सरकार के उस 'धोखे' का पर्दाफाश कर दिया है, जिसमें वे विश्वगुरु बनने और शिक्षा के विकास के बड़े-बड़े दावे करते थे। कांग्रेस पार्टी इस संघर्ष में पूरी तरह से छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
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\r\n\r\nसोनिया गांधी का यह लेख ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष पहले से ही NEET, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। 'द हिंदू' में प्रकाशित यह लेख स्पष्ट करता है कि कांग्रेस इस छात्र आंदोलन को एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित करना चाहती है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और सत्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष के इन गंभीर और तीखे आरोपों का क्या पलटवार किया जाता है।
\r\n\r\nदेश की राजनीति, छात्र आंदोलनों और यूपी (मेरठ-बिजनौर) की हर ग्राउंड रिपोर्ट के सबसे तेज अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें खबरीलाल (Khabreelal)।