खबरीलाल डेस्क
इस स्वतंत्रता दिवस पर देश जहां एक ओर आजादी का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी ओर ओटररी (Otteri) द्वारा संचालित रिफाइबर (Refiber) ने समाज को एक नई और पर्यावरण-संवेदनशील सोच से जोड़ने का प्रयास किया है। कंपनी ने ‘अनयूज्ड कपड़ों से आज़ादी’ नाम से एक राष्ट्रीय जागरूकता और कलेक्शन अभियान शुरू किया है।READ ALSO:-NCD बाजार में इंडेल मनी का बड़ा धमाका: ₹500 करोड़ जुटाने के लिए ला रही पब्लिक इश्यू; निवेशकों को मिलेगा 12.25% तक धमाकेदार रिटर्न!
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हम सभी के घरों की अलमारियों में ऐसे ढेरों कपड़े पड़े रहते हैं जिन्हें हम लंबे समय से पहनना छोड़ चुके होते हैं। ये कपड़े या तो जगह घेरते हैं या फिर अंततः कचरे के ढेर (Landfills) में जाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। रिफाइबर का यह अभियान नागरिकों को एक ऐसा सुलभ माध्यम प्रदान करता है जिससे वे इन बेकार कपड़ों को कचरा बनने से रोक सकें और उन्हें एक उपयोगी संसाधन (Resource) में बदलने में योगदान दे सकें।
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रिफाइबर ऐप (Refiber App): कैसे काम करता है होम पिकअप?

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इस अभियान को तकनीकी रूप से बेहद आसान और आम जनता के अनुकूल बनाया गया है। नागरिक अपने मोबाइल फोन में रिफाइबर ऐप डाउनलोड करके महज कुछ स्टेप्स में पिकअप बुक कर सकते हैं:
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    कपड़ों की छंटाई (Decluttering): अपने घर से ऐसे कपड़ों को अलग करें जो फटे नहीं हैं लेकिन अब उपयोग में नहीं आते या रिसाइक्लिंग योग्य हैं।
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    ऐप पर बुकिंग (Order Placement): रिफाइबर ऐप खोलकर अपनी सुविधा के अनुसार पिकअप की तारीख और समय चुनें।
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    डोरस्टेप पिकअप (Doorstep Pickup): रिफाइबर का लॉजिस्टिक पार्टनर आपके घर पहुँचकर कपड़ों का सुरक्षित संग्रह (Collection) करेगा।
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    प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग: एकत्र किए गए कपड़ों को उनकी गुणवत्ता के अनुसार तीन श्रेणियों में भेजा जाता है—
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      पुनः उपयोग (Reuse): अच्छी स्थिति वाले कपड़ों को जरूरतमंदों तक पहुँचाया जाता है।
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      अपसाइक्लिंग (Upcycling): कपड़ों से नए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
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      रिसाइक्लिंग (Recycling): धागों और फैब्रिक को रिसायकल करके नया कपड़ा या औद्योगिक फाइबर बनाया जाता है।
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मुंबई डेमॉन्स्ट्रेशन प्रोजेक्ट: सफलता के आंकड़े (At a Glance Table)

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रिफाइबर ने इस अभियान को व्यापक स्तर पर शुरू करने से पहले मुंबई में 'टेक्सटाइल सर्कुलर इकोनॉमी डेमॉन्स्ट्रेशन प्रोजेक्ट' चलाया था, जिसके परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं:
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मानक (Parameters)
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आंकड़े (Data / Metrics)
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कुल एकत्र कपड़ा (Total Collection)
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2.7 टन (2,700 किलोग्राम)
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भागीदार नागरिक (Participating Citizens)
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257 नागरिक
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कुल कलेक्शन ऑर्डर (Collection Orders)
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275 ऑर्डर
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लॉन्ड्री पार्टनर्स (Laundry Partners)
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15 पार्टनर्स
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सर्विस नेटवर्क शाखाएं (Network Branches)
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28 शाखाएं
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मुख्य तकनीक व प्लेटफॉर्म
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रिफाइबर ऐप (Refiber App) & ओटररी लॉजिस्टिक्स
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नेतृत्व के विचार: टेक्नोलॉजी और नेटवर्क से ही संभव है टेक्सटाइल सर्कुलैरिटी

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श्रीकांत भांगड़िया (चेयरमैन, रिफाइबर इनिशिएटिव):

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‘‘मुंबई में हमारे पायलट प्रोजेक्ट के अनुभव ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही टेक्नोलॉजी और मौजूदा सर्विस नेटवर्क (जैसे लॉन्ड्री नेटवर्क) का उपयोग किया जाए, तो कपड़ों के कचरे का व्यवस्थित संग्रह बड़े पैमाने पर संभव है। मुंबईवासियों ने जिस तरह से इस पहल को अपनाया है, उससे हमारा हौसला बढ़ा है। अब हमारा मुख्य लक्ष्य इस सफल मॉडल को देश के अन्य सभी छोटे-बड़े शहरों तक पहुँचाना है ताकि भारत को टेक्सटाइल वेस्ट से मुक्त बनाया जा सके।’’
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मनोज वनवारी (सीओओ, ओटररी और रिफाइबर):

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‘‘टेक्सटाइल सर्कुलैरिटी (Textile Circularity) केवल एक कंपनी का काम नहीं है। इसके लिए नागरिकों, कपड़ा उद्योग (Textile Industry), सरकार और सस्टेनेबिलिटी पर काम करने वाले वैश्विक संगठनों की सामूहिक भागीदारी बेहद जरूरी है। जब हर हितधारक साथ आएगा, तभी हम कपड़ों के कचरे की समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे।’’
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वैश्विक व राष्ट्रीय संगठनों का मजबूत साथ

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रिफाइबर की इस पहल की सबसे बड़ी ताकत इसका मजबूत पार्टनरशिप नेटवर्क है। मुंबई से मिली सीख और मॉडल को पूरे देश में लागू करने के लिए रिफाइबर को कई प्रतिष्ठित संगठनों का सहयोग मिल रहा है:
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    TISSER (टिसर): सामाजिक और ग्रामीण कारीगरों को जोड़ने में सहायक।
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    CMAI (क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया): भारतीय परिधान उद्योग का सबसे बड़ा संघ।
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    UNIDO (संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन): औद्योगिक स्वच्छता और टिकाऊ विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय मार्गदर्शन।
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    Lions International (लायंस इंटरनेशनल): सामाजिक स्तर पर जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने में अग्रणी।
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कपड़ों का कचरा (Textile Waste) पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा क्यों है?

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फैशन इंडस्ट्री और रोजाना इस्तेमाल होने वाले कपड़े पर्यावरण पर भारी दबाव डालते हैं। आंकड़ों के मुताबिक:
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    पानी की भारी खपत: एक कॉटन टी-शर्ट बनाने में औसतन 2,700 लीटर पानी खर्च होता है।
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    लैंडफिल की समस्या: हर साल लाखों टन कपड़े कचरे के ढेरों में फेंक दिए जाते हैं, जिन्हें गलने में दशकों का समय लगता है।
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    कार्बन एमिशन: सिंथेटिक कपड़े (जैसे पॉलिस्टर) गलते समय हानिकारक गैसें और माइक्रोप्लास्टिक छोड़ते हैं।
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रिफाइबर का यह 'अनयूज्ड कपड़ों से आज़ादी' अभियान इस वेस्ट को रिसायकल करके पर्यावरण पर पड़ने वाले इस नकारात्मक प्रभाव को कम करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
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आप भी बनें इस हरित क्रांति का हिस्सा!

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15 अगस्त का दिन केवल इतिहास को याद करने का नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने का भी दिन है। अपने घरों को बेकार पड़े कपड़ों से मुक्त करके और उन्हें रिफाइबर ऐप के जरिए रीसायकल के लिए देकर हर नागरिक देश के पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने में अपना योगदान दे सकता है।
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यदि आपके घर में भी ऐसे कपड़े हैं जिनका उपयोग नहीं हो रहा है, तो आज ही Refiber App डाउनलोड करें और स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की ओर अपना पहला कदम बढ़ाएं!