डिजिटल इंडिया के बढ़ते कदमों के साथ ही, साइबर अपराधियों ने अब भोले-भाले निवेशकों को निशाना बनाने के लिए 'इन्वेस्टमेंट स्कैम' (Investment Scam) को नया हथियार बना लिया है। गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) की साइबर विंग की एक हालिया रिपोर्ट ने देश में फैले इस बड़े खतरे का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 6 महीनों (जनवरी से जून 2025 तक) में 30,000 से अधिक लोग इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं, जिनसे कुल मिलाकर ₹1500 करोड़ की भारी-भरकम ठगी हुई है।
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मेट्रो सिटी हैं स्कैमर्स के निशाने पर
\r\n\r\nसाइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब ग्रामीण इलाकों के बजाय टेक हब और वित्तीय केंद्रों को निशाना बना रहे हैं।
\r\n\r\nसबसे बड़े टारगेट: कुल इन्वेस्टमेंट स्कैम मामलों में से लगभग 65% मामले अकेले तीन महानगरों—बेंगलुरु, दिल्ली-NCR और हैदराबाद—में दर्ज किए गए हैं।
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बेंगलुरु शीर्ष पर: रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा वित्तीय नुकसान बेंगलुरु में हुआ है, जहाँ कुल ठगी का 26.38% हिस्सा दर्ज किया गया। दिल्ली-एनसीआर में भी प्रति व्यक्ति नुकसान का औसत बहुत अधिक रहा है। औसतन, हर व्यक्ति को ₹51.38 लाख का बड़ा नुकसान हुआ है, जो इन घोटालों की जटिलता और बड़े पैमाने पर किए जाने की ओर इशारा करता है।
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निशाना कौन और इस्तेमाल किए गए प्लेटफॉर्म
\r\n\r\nI4C की रिपोर्ट ने यह भी खुलासा किया है कि स्कैमर्स किस उम्र के लोगों और किन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं:
\r\n\r\nउम्र समूह: धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 76% लोग 30 से 60 वर्ष की उम्र के पेशेवर (Professionals) हैं, जिनके पास अच्छा वेतन और निवेश के लिए कुछ पूंजी होती है।
\r\n\r\nसीनियर सिटीजन: 8.62% पीड़ित सीनियर सिटीजन हैं, जिन्हें अक्सर जल्दी पैसा दोगुना करने का लालच दिया जाता है।
\r\n\r\nप्लेटफॉर्म: स्कैमर्स WhatsApp और Telegram जैसे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ वे बड़े 'इन्वेस्टर ग्रुप्स' बनाते हैं और पैसा जमा होने के बाद रातोंरात गायब हो जाते हैं। लगभग 20% मामले इन्हीं एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म से जुड़े थे।
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सरकार और नियामकों की प्रतिक्रिया
\r\n\r\nगृह मंत्रालय ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि ये स्कैम मुख्य रूप से चीन-नियंत्रित संगठित नेटवर्क से जुड़े हैं, जो दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से संचालित होते हैं।
\r\n\r\nI4C का एक्शन: इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) राज्यों की साइबर इकाइयों के साथ मिलकर फंड ट्रेल को ट्रैक करने और डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने पर काम कर रहा है।
\r\n\r\nअन्य पहल: TRAI (ट्राई) और RBI जैसे नियामक भी साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए '1600' नंबर सीरीज़ जैसे नए सुरक्षा उपाय लागू कर रहे हैं।
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खुद को कैसे बचाएं?
\r\n\r\nयह रिपोर्ट भारतीय निवेशकों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि आप ऑनलाइन निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो अत्यंत सावधानी बरतें:
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वेरिफिकेशन: किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता (Authenticity) की जांच करें। केवल सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) जैसी विनियमित संस्थाओं पर भरोसा करें।
\r\n\r\nलालच से बचें: 'कम समय में पैसा दोगुना' या 'गारंटीड रिटर्न' जैसे किसी भी ऑफर पर विश्वास न करें।
\r\n\r\nशिकायत: धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।