खबरीलाल डेस्क
काठमांडू/नई दिल्ली (International News Desk): प्रकृति के कहर के सामने जब इंसान बेबस हो जाता है, तब पड़ोसी ही सबसे पहले काम आता है। इस पुरानी कहावत को भारत ने एक बार फिर सच कर दिखाया है। 26 अगस्त 2026 को नेपाल (Nepal Floods) में आई सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। नदियों के उफान और पहाड़ों के दरकने से अब तक 500 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
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​इस भीषण जलप्रलय में जब नेपाल त्राहि-त्राहि कर रहा था और दुनिया के बाकी देश मदद की योजना ही बना रहे थे, तब भारत ने बिना एक पल गंवाए अपना 'ऑपरेशन संकटमोचक' शुरू कर दिया। दुनिया भर के देशों के लिए भारत की यह त्वरित कार्रवाई (Quick Response) एक मिसाल बन गई है कि कूटनीति से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा कैसे की जाती है।
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​12 घंटे का चमत्कार: जब रात के अंधेरे में देवदूत बनकर पहुंचा C-130J

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​आपदा प्रबंधन में 'गोल्डन आवर्स' (शुरुआती कुछ घंटे) का सबसे ज्यादा महत्व होता है। भारत को जैसे ही नेपाल सरकार से इस त्रासदी की भयावहता का अंदेशा हुआ, नई दिल्ली में तुरंत उच्च स्तरीय बैठकें शुरू हो गईं। आपदा के महज 12 घंटे बाद ही भारत ने अपनी राहत सामग्री की पहली खेप रवाना कर दी।
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​बुधवार रात को जब काठमांडू अंधेरे और खौफ में डूबा था, ठीक 8:35 बजे हिंडन एयरबेस से भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का बाहुबली परिवहन विमान 'C-130J सुपर हरक्यूलिस' 10 टन भारी-भरकम राहत सामग्री लेकर आसमान में उड़ चला। उसी रात यह विमान काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। इसमें जीवन रक्षक दवाइयां, तिरपाल, टेंट, रेडी-टू-ईट (Ready to eat) भोजन और पीने का साफ पानी शामिल था। इतनी त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी लागू होती है।
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​पीएम मोदी ने संभाला मोर्चा: नेपाली पीएम बालेन शाह से की बात

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​भारत की इस ऐतिहासिक मदद के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सीधा निर्देशन रहा। बुधवार शाम को ही पीएम मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (Balendra Shah) को फोन मिलाया। इस संवेदनशील बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने नेपाल में जान गंवाने वाले मासूम नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
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प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट संदेश:

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पीएम मोदी ने नेपाली समकक्ष को भरोसा दिलाते हुए कहा, "इस दुख की घड़ी में 140 करोड़ भारतीय अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। आपको जिस भी चीज की, जितनी भी जरूरत होगी, भारत सबसे पहले उसे उपलब्ध कराएगा।"
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इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि भारत की NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीमें और वायुसेना नेपाल के स्थानीय प्रशासन के साथ सीधे समन्वय (Coordination) कर रही हैं, ताकि राहत बचाव कार्य में कोई तकनीकी बाधा न आए।
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​10 टन से 62 टन तक का सफर: जारी है मदद का सिलसिला

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​भारत का अभियान सिर्फ एक विमान भेजकर नहीं रुका, बल्कि यह तो केवल शुरुआत थी। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी देते हुए कहा कि "भारत, नेपाल और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। 10 टन मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) पहुंच चुकी है और आगे भी यह क्रम जारी रहेगा।"
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राहत सामग्री का टाइमलाइन:

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    बुधवार रात: 10 टन राहत सामग्री (दवाइयां और टेंट) काठमांडू पहुंची।
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    गुरुवार: वायुसेना के और विमानों ने उड़ान भरी। दूसरी और तीसरी खेप मिलाकर कुल मात्रा 47.5 टन तक पहुंच गई। इसमें भारी मात्रा में सूखा राशन, बेबी फूड, और वाटर प्यूरीफायर (जल शोधन उपकरण) शामिल थे।
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    शुक्रवार दोपहर तक: भारत ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए कुल 62 टन राहत सामग्री नेपाल के सुपुर्द कर दी। इसके अलावा मेडिकल टीमों को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत काठमांडू जाकर अस्थायी अस्पताल स्थापित कर सकती हैं।
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रोटी-बेटी' का रिश्ता और भारत की विदेश नीति

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​नेपाल के साथ भारत का रिश्ता केवल कूटनीतिक या व्यापारिक नहीं है। दोनों देशों के बीच खुली सीमाएं हैं और सदियों पुराना 'रोटी और बेटी' का सांस्कृतिक नाता है। जब भी नेपाल पर कोई संकट आया है, भारत ने एक बड़े भाई की तरह उसे संभाला है। साल 2015 में जब नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था, तब भी भारत ने 'ऑपरेशन मैत्री' (Operation Maitri) चलाकर सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया था। मौजूदा बाढ़ राहत अभियान उसी अटूट रिश्ते की एक और मजबूत कड़ी है।
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​दुनिया के लिए 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (First Responder) बना नया भारत

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​यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकटमोचक की भूमिका निभाई है। पिछले एक दशक में भारत की छवि वैश्विक पटल पर एक ऐसे शक्तिशाली और संवेदनशील देश के रूप में उभरी है, जो आपदा के समय किसी भी देश की सीमा में सबसे पहले मदद लेकर पहुंचता है (Humanitarian Assistance and Disaster Relief - HADR)।
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भारत के हालिया बड़े राहत अभियान:

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    कोविड-19 महामारी (2020-21): भारत ने 'वैक्सीन मैत्री' के तहत दुनिया के 100 से अधिक गरीब और विकासशील देशों को मुफ्त में कोरोना के टीके और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवाइयां उपलब्ध कराईं।
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    तुर्किये-सीरिया भूकंप (2023): विनाशकारी भूकंप के कुछ ही घंटों के भीतर भारत ने 'ऑपरेशन दोस्त' (Operation Dost) लॉन्च किया और NDRF की टीमें मलबे से जिंदगी बचाने तुर्किये पहुंच गईं।
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    म्यांमार में आपदा (2024): चक्रवात और बाढ़ से मची तबाही के बाद भारत ने म्यांमार को नौसेना के जहाजों के जरिए भारी मात्रा में रसद और मेडिकल सपोर्ट भेजा।
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    श्रीलंका चक्रवात (2025): आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में चक्रवात के दौरान भारत ने जीवन रक्षक दवाइयां और खाद्य सामग्री की आपूर्ति की।
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    वेनेजुएला भूकंप (2026): लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए भयानक भूकंप के दौरान भौगोलिक दूरी की परवाह किए बिना भारत ने सबसे पहले हवाई मार्ग से मदद भेजी।
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नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने भले ही भारी तबाही मचाई हो, लेकिन इसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि संकट की घड़ी में भारत दुनिया के किसी भी कोने में सबसे भरोसेमंद साथी है। 12 घंटे के भीतर 62 टन मदद पहुंचाना कोई सामान्य कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उस नए और सशक्त भारत की पहचान है, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के मंत्र को केवल बोलता नहीं, बल्कि उस पर पूरी ईमानदारी से अमल भी करता है।
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