नई दिल्ली: भारत इस समय भयंकर और जानलेवा गर्मी (Heatwave) की चपेट में है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश तक गर्मी ने अपने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मौसम विभाग के हीट मैप (Heat Map) पर नजर डालें तो भारत का आधे से ज्यादा हिस्सा इस वक्त 'लाल' (खतरे के निशान) दिखाई दे रहा है।READ ALSO:-बिजनौर में 'बकराईद' को लेकर प्रशासन का सख्त पहरा: खुले में कुर्बानी और सोशल मीडिया पर फोटो डालने पर पूर्ण प्रतिबंध, नई परंपराओं पर लगी रोक
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स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में इस समय सभी शहर भारत के हैं। इनमें से भी अकेले 40 शहर उत्तर प्रदेश से आते हैं। लोगों के लिए दिन के समय घरों से बाहर निकलना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है और चिंता की बात यह है कि अगले कुछ दिनों तक इस झुलसाने वाली गर्मी से कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
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रेड और ऑरेंज अलर्ट: बांदा में 48°C के पार पहुंचा तापमान मौसम विभाग ने हरियाणा, पंजाब से लेकर दिल्ली-NCR तक अगले 7 दिनों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हीटवेव का 'रेड अलर्ट' लागू है, जहां दिन का तापमान 45°C से ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग की चेतावनी है कि सिर्फ दिन में ही नहीं, बल्कि रात में भी गर्म हवाओं (वार्म नाइट) का सितम जारी रहेगा।
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र का बांदा जिला इस समय देश का सबसे गर्म स्थान बना हुआ है। बांदा में तापमान 48°C के पार पहुंच जाना एक बहुत बड़ी चेतावनी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बांदा और आसपास के जिलों (चित्रकूट, झांसी, ललितपुर) में इस भयंकर गर्मी का सबसे बड़ा कारण हरियाली का खात्मा है। एक हालिया शोध के मुताबिक, बांदा में ग्रीन कवर (पेड़-पौधे और जंगल) मात्र 3 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर हो रहा खनन (Mining) भी एक बड़ा कारण है। सूखी नदियों और खनन वाले पथरीले क्षेत्रों से सूर्य की किरणों का रिफ्लेक्शन (परावर्तन) बहुत तेजी से हो रहा है, जिससे बैक रेडिएशन बढ़ गया है और पूरा इलाका भट्टी की तरह तप रहा है।
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पहाड़ों पर भी हाहाकार: छिन गई ठंडी वादियां, AC की बढ़ी डिमांड कुदरत का सबसे चिंताजनक अलार्म मैदानी इलाकों के साथ-साथ उन पहाड़ों पर भी बज रहा है, जहां लोग आमतौर पर गर्मी से राहत पाने और छुट्टियां मनाने जाते हैं। अगर आपका भी इस बार पहाड़ों पर जाने का प्लान है, तो जान लीजिए कि वहां भी गर्मी आपका पीछा नहीं छोड़ने वाली है।
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पहाड़ इस समय गर्मी की आग में तप रहे हैं। हीट वेव मीटर के अनुसार, जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर का तापमान 30°C को पार कर गया है, जिसके बाद वहां के स्थानीय बाजारों में अचानक एसी (AC) और कूलरों की मांग तेजी से बढ़ गई है।
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विभिन्न शहरों में गर्मी का हाल (एक नज़र में)
\r\n\r\n| \r\n शहर का नाम \r\n | \r\n \r\n क्षेत्र \r\n | \r\n \r\n दर्ज किया गया तापमान (लगभग) \r\n | \r\n
|---|---|---|
| \r\n बांदा \r\n | \r\n \r\n उत्तर प्रदेश (मैदानी) \r\n | \r\n \r\n 48°C के पार \r\n | \r\n
| \r\n ऊना \r\n | \r\n \r\n हिमाचल प्रदेश (पहाड़ी/तराई) \r\n | \r\n \r\n 41°C \r\n | \r\n
| \r\n शिमला \r\n | \r\n \r\n हिमाचल प्रदेश (पहाड़ी) \r\n | \r\n \r\n 33°C \r\n | \r\n
| \r\n मसूरी/नैनीताल \r\n | \r\n \r\n उत्तराखंड (पहाड़ी) \r\n | \r\n \r\n 30°C के पार \r\n | \r\n
| \r\n श्रीनगर \r\n | \r\n \r\n जम्मू कश्मीर (पहाड़ी) \r\n | \r\n \r\n 30°C के पार \r\n | \r\n
आखिर इस बार क्यों ढा रहे हैं सूर्यदेव इतना सितम? जानें 4 बड़े कारण हर किसी के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस साल गर्मी इतनी प्रचंड क्यों है? मौसम वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई भौगोलिक और मानवीय कारण बताए हैं:
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- \r\n अल नीनो (El Nino) का प्रभाव: यह पृथ्वी की सबसे बड़ी और प्रभावशाली जलवायु लहरों में से एक है। अल नीनो की स्थिति तब बनती है जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। सामान्य दिनों में हवा पूर्व से पश्चिम की ओर चलती है, लेकिन अल-नीनो के आते ही हवा उल्टी दिशा में चलने लगती है। इससे पूरी दुनिया की हवा और बारिश का पैटर्न बिगड़ जाता है। भारत में पड़ रही इस सूखी और भयंकर गर्मी के पीछे अल नीनो का बहुत बड़ा हाथ है।\r\n \r\n
- \r\n कमजोर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance): आमतौर पर मार्च से मई के बीच भूमध्य सागर से उठने वाली नम हवाएं (पश्चिमी विक्षोभ) उत्तर भारत में आती हैं, जिससे हल्की बारिश होती है और गर्मी पर ब्रेक लगता है। लेकिन इस बार यह डिस्टर्बेंस बहुत कमजोर रहा है, जिसके कारण बारिश नहीं हुई और सूरज की तपिश बेरोकटोक धरती पर पड़ रही है।\r\n \r\n
- \r\n अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island Effect): शहरों में कंक्रीट की बिल्डिंग, डामर की सड़कें, शीशे और स्टील के बेतहाशा इस्तेमाल ने शहरों को 'हीट आइलैंड' (गर्म द्वीप) बना दिया है। लाखों वाहनों का धुआं और इमारतों में लगे लाखों AC से निकलने वाली गर्म हवा शहर के तापमान को और बढ़ा देती है। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरों का पारा 5 से 7 डिग्री तक ज्यादा दर्ज किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n घटती हरियाली और कटते पहाड़: जंगलों का काटा जाना और पहाड़ों पर अंधाधुंध निर्माण के कारण गर्म हवाएं अब बिना किसी रुकावट के सीधे मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं। जलाशयों (तालाबों/झीलों) का सूखना भी वातावरण में नमी को खत्म कर रहा है।\r\n \r\n
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कमजोर मानसून की चेतावनी: लंबा खिंच सकता है गर्मी का सीजन भारत में इस भीषण गर्मी से असली राहत दक्षिणी-पश्चिमी मानसून ही दिलाता है। मानसून ने दक्षिण अरब सागर और केरल के तटीय इलाकों में प्रवेश कर लिया है। हालांकि, मौसम एजेंसी 'स्काईमेट' (Skymet) ने एक चिंताजनक जानकारी दी है कि देश में इस बार मानसून का प्रभाव काफी कमजोर रह सकता है। अगर बारिश कम हुई, तो गर्मी और उमस का यह सीजन सामान्य से ज्यादा लंबा चल सकता है।
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भारत से उलट चीन की तैयारी: बसा रहा है 'शियोनगान' (Xiongan) ग्रीन सिटी एक तरफ जहां भारत में हरियाली कम होने से गर्मी जानलेवा स्तर पर पहुंच गई है, वहीं हमारा पड़ोसी देश चीन भविष्य के खतरों को भांपते हुए एक पूरी तरह से नया और इको-फ्रेंडली शहर बसा रहा है। इस शहर का नाम 'शियोनगान' (Xiongan) है। बीजिंग के बढ़ते बोझ और प्रदूषण को कम करने के लिए इसे 'भविष्य के शहर' (Future City) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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शियोनगान शहर की हैरान करने वाली खासियतें:
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- \r\n 70% हरियाली, 30% निर्माण: इस शहर का सबसे बड़ा नियम यही है कि इसके 70% हिस्से में सिर्फ जंगल, पेड़ और पानी होगा, जबकि केवल 30% हिस्से में कंक्रीट का निर्माण किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n AI तकनीक से पेड़ों की निगरानी: पूरे शहर के चारों तरफ पाइन, विलो और ओक जैसे करोड़ों पेड़ लगाए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां लगाए गए हर एक पेड़ की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से ट्रैकिंग की जा रही है, ताकि उनकी सेहत और पानी की जरूरत का सटीक आकलन किया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n तापमान नियंत्रण: शहर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने के लिए कृत्रिम झीलों और नहरों का एक विशाल नेटवर्क बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n गार्बेज-फ्री सिस्टम: इस शहर में कचरा उठाने के लिए ट्रक नहीं आते। यहां 'अंडरग्राउंड वैक्यूम वेस्ट सिस्टम' लगाया गया है, जो कचरे को पाइपों के जरिए सीधे अंडरग्राउंड प्रोसेसिंग सेंटर तक पहुंचा देता है, जिससे प्रदूषण शून्य रहता है।\r\n \r\n
- \r\n इको-कॉरिडोर: जंगली जानवरों के लिए विशेष सुरक्षित रास्ते (इको-कॉरिडोर) और नागरिकों के लिए हर 300 मीटर पर सिटी पार्क बनाए गए हैं।\r\n \r\n
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निष्कर्ष आज भारत जिस भीषण गर्मी का सामना कर रहा है, वह प्रकृति के साथ की गई छेड़छाड़ का सीधा नतीजा है। बांदा का 48°C तापमान सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। चीन का 'शियोनगान' मॉडल हमें यह सिखाता है कि अगर विकास के साथ-साथ प्रकृति को भी तरजीह दी जाए, तो हम भविष्य के क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ सकते हैं। यदि भारत ने समय रहते 'अर्बन हीट आइलैंड' को खत्म करने और हरियाली बढ़ाने पर जोर नहीं दिया, तो आने वाले वर्षों में गर्मी के यह आंकड़े और भी भयावह हो सकते हैं।