खबरीलाल डेस्क | नई दिल्ली
\r\n\r\nभारत तेजी से ग्रीन एनर्जी और टिकाऊ ईंधन (Sustainable Fuel) की ओर बढ़ रहा है। महंगे आयातित कच्चे तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) गैस की निर्भरता को कम करने के लिए मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
\r\n\r\nजिस तरह आज हम अपनी गाड़ियों में जो पेट्रोल डलवा रहे हैं उसमें 20% तक गन्ने और मक्के से बना एथेनॉल (Ethanol) मिला होता है, ठीक उसी तर्ज पर अब आपके घरों के चूल्हों में जलने वाली पीएनजी (PNG - Piped Natural Gas) और गाड़ियों में डलने वाली सीएनजी (CNG - Compressed Natural Gas) में 'बायोगैस' (Biogas / CBG) मिलाई जाएगी। इसके लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'गोबरधन' (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना को मंजूरी दे दी है।
\r\n\r\nसूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कैबिनेट के इस अहम फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना से देश के ऊर्जा क्षेत्र, किसानों की आय और पर्यावरण को जबरदस्त फायदा होगा।
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\r\n\r\n23,731 करोड़ रुपये की 'गोबरधन योजना' क्या है?
\r\n\r\n'गोबरधन योजना' मुख्य रूप से देश में बायोगैस (Biogas) और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG - Compressed Biogas) के उत्पादन को भारी पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।
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- \r\n योजना का बजट: इस महात्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये का विशाल बजट आवंटित किया है।\r\n \r\n
- \r\n समय सीमा (Timeline): इस योजना को अगले 10 वर्षों (2036 तक) में पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n क्या है बायोगैस का कच्चा माल? इस योजना के तहत कृषि अपशिष्ट (पराली, फसल के अवशेष), पशुओं का गोबर (Cow Dung), नगर निगम का जैविक कचरा (Organic Municipal Waste) और अन्य बायोमास को सड़ाकर उससे स्वच्छ ईंधन (बायोगैस) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (Organic Manure) बनाई जाएगी।\r\n \r\n
\r\n\r\nCNG-PNG में बायोगैस ब्लेंडिंग का मास्टर प्लान
\r\n\r\nजैसे पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल सस्ता और कम प्रदूषणकारी होता है, वैसे ही अब गैस कंपनियां भी सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस (CBG) मिलाएंगी। सरकार ने इसके लिए एक 'कदम-दर-कदम' (Phase-wise) रोडमैप तैयार किया है:
\r\n\r\n| \r\n वित्तीय वर्ष (Financial Year) \r\n | \r\n \r\n CNG-PNG में बायोगैस ब्लेंडिंग का लक्ष्य \r\n | \r\n
|---|---|
| \r\n 2026-27 \r\n | \r\n \r\n 3 प्रतिशत (3%) \r\n | \r\n
| \r\n 2027-28 \r\n | \r\n \r\n 4 प्रतिशत (4%) \r\n | \r\n
| \r\n 2028-29 से आगे \r\n | \r\n \r\n 5 प्रतिशत (5%) \r\n | \r\n
सीएनजी सप्लाई करने वाली कंपनियों (जैसे IGL, MGL, GAIL आदि) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बायोगैस उत्पादकों से यह गैस खरीदें और उसे अपने पाइपलाइन नेटवर्क में मिलाएं।
\r\n\r\nदेश में लगेंगे 700 नए बायोगैस प्लांट
\r\n\r\nगोबरधन योजना का मुख्य उद्देश्य देश में वर्तमान बायोगैस उत्पादन क्षमता को 10 गुना तक बढ़ाना है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत किया जा सके।
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- \r\n SATAT योजना का अनुभव: केंद्र सरकार ने 8 साल पहले SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना शुरू की थी। इसका लक्ष्य देशभर में 5,000 CBG प्लांट लगाना था, लेकिन भारी निवेश और कम रिटर्न के कारण अभी तक केवल 219 प्लांट ही चालू हो पाए हैं।\r\n \r\n
- \r\n नई योजना में क्या है खास? पुरानी गलतियों से सीखते हुए, गोबरधन स्कीम के तहत काम करने वाली कंपनियों और नए निवेशकों को ज्यादा सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Incentives) देने का प्रस्ताव है।\r\n \r\n
- \r\n लक्ष्य: अगर निवेशकों को अच्छा रिटर्न (ROI) मिलेगा, तो वे तेजी से प्लांट लगाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के लागू होने के बाद हर साल 600 से 700 नए बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n आधिकारिक ऐलान: उम्मीद है कि केंद्र सरकार आगामी 10 अगस्त को 'वर्ल्ड बायोफ्यूल डे' (World Biofuel Day) के खास मौके पर इस योजना की विस्तृत गाइडलाइंस और सब्सिडी स्ट्रक्चर का आधिकारिक ऐलान कर सकती है।\r\n \r\n
आम जनता, किसान और देश को क्या होंगे फायदे?
\r\n\r\nगोबरधन योजना के धरातल पर उतरने से कई मोर्चों पर सीधा लाभ होगा:
\r\n\r\n1. आम आदमी को सस्ती गैस
\r\n\r\nजब बायोगैस स्थानीय स्तर पर बनेगी और उसे PNG/CNG में मिलाया जाएगा, तो विदेशों से महंगी प्राकृतिक गैस (Natural Gas) मंगाने का खर्च कम होगा। इससे भविष्य में कुकिंग गैस और गाड़ियों का ईंधन सस्ता होने की पूरी संभावना है।
\r\n\r\n2. खुद गैस बनाने का विकल्प (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए)
\r\n\r\nभविष्य में, छोटे बायोगैस प्लांट लगाकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग या हाउसिंग सोसायटियां खुद ही अपने इस्तेमाल लायक गैस बना सकेंगी। फिर उन्हें बार-बार महंगे LPG गैस सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनके मासिक खर्च में भारी कटौती होगी।
\r\n\r\n3. किसानों की 'कचरे से कमाई'
\r\n\r\nकिसानों को अब अपनी फसल के अवशेष (जैसे पराली) को जलाना नहीं पड़ेगा, बल्कि बायोगैस प्लांट वाले इसे खरीदेंगे। इसके अलावा, डेयरी किसानों को गोबर बेचने से भी अतिरिक्त आमदनी होगी।
\r\n\r\n4. खेती के लिए मुफ्त जैविक खाद
\r\n\r\nबायोगैस प्लांट में जब कचरे से गैस निकाल ली जाती है, तो पीछे जो अवशेष बचता है, वह दुनिया की सबसे बेहतरीन जैविक खाद (Organic Slurry) होती है। इससे खेतों की मिट्टी उपजाऊ बनेगी और यूरिया (Urea) जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
\r\n\r\n5. पर्यावरण को संजीवनी
\r\n\r\nकचरे और गोबर से बायोगैस बनने के कारण मीथेन (Methane) जैसी ग्रीनहाउस गैसों का सीधा उत्सर्जन रुकेगा। साथ ही, पराली जलने से होने वाले धुएं (Smog) से दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे उत्तर भारत को निजात मिलेगी।
\r\n\r\n\r\nगोबरधन योजना' कचरे को कंचन बनाने (Waste to Wealth) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को जो सफलता मिली है, अगर वही सफलता बायोगैस ब्लेंडिंग में मिल गई, तो भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बहुत लंबी छलांग लगाएगा।\r\n