खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: दीपावली से कुछ ही दिन पहले, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में पटाखों पर लगे प्रतिबंध को लेकर एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध की नीति को 'अव्यावहारिक और असंभव सा' करार दिया। हालांकि, चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।READ ALSO:-फेसबुक पर दोस्ती, फिर ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन का जाल... मुरादाबाद में 5 बच्चों की माँ 'लव जिहाद' का शिकार!
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कोर्ट के इस रुख से दिल्ली-एनसीआर के लाखों निवासियों और पटाखा निर्माताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
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पूर्ण बैन पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और उल्लंघन का मुद्दा
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दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध का सिलसिला पिछले सात सालों से चल रहा है। इस दौरान, कोर्ट ने कई बार पूर्ण प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन प्रदूषण स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
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    न्यायिक राय: बेंच ने साफ कहा कि पटाखों पर पूरी तरह बैन लगाना 'व्यावहारिक और आदर्श नहीं' है, क्योंकि ऐसे प्रतिबंधों का अक्सर उल्लंघन होता रहा है।
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    प्रदूषण के असर पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि 2018 से चल रहे पूर्ण प्रतिबंध से प्रदूषण के स्तर पर कोई ठोस असर पड़ा है या हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
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    सॉलिसिटर जनरल का जवाब: केंद्र और दिल्ली-एनसीआर के राज्यों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्वीकार किया कि प्रदूषण का स्तर लगभग वही रहा है, और केवल कोविड लॉकडाउन के दौरान ही प्रदूषण में कमी आई थी।
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    केंद्र की मांग: मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि बच्चों को त्योहार मनाने दें और ग्रीन पटाखों को बिना किसी कठोर समय सीमा और रोक-टोक के फोड़ने की अनुमति दी जाए।
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ग्रीन पटाखों की बिक्री पर कोर्ट जल्द सुनाएगा फैसला
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फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों (जो नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट - NEERI द्वारा प्रमाणित हैं) के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसका मतलब है कि दिवाली से पहले इस संबंध में कोई निर्णायक आदेश आ सकता है।
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पिछली सुनवाई का संदर्भ
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इससे पहले 26 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मैन्युफैक्चरर्स को सर्टिफाइड ग्रीन पटाखे बनाने की मंजूरी दी थी, लेकिन यह शर्त रखी थी कि अगले आदेश तक NCR में उनकी बिक्री नहीं की जाएगी। NCR में दिल्ली और उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के 16 जिले शामिल हैं।
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कोर्ट ने पूर्व में यह भी कहा था कि पटाखों पर पूर्ण बैन न तो संभव है, न ही यह सही है, और केंद्र से सभी हितधारकों से बातचीत करके एक 'व्यावहारिक समाधान' लाने का आग्रह किया था।
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दिल्ली-NCR राज्यों की ओर से कोर्ट को 8 सुझाव
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सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट के सामने ग्रीन पटाखों के उपयोग और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए 8 सुझाव पेश किए, जो कानूनी समाधान और व्यावहारिक अनुपालन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं:
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अवसर
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अनुमति का प्रकार
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समय सीमा
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दिवाली
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केवल ग्रीन पटाखे
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रात 8 बजे से 10 बजे तक।
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क्रिसमस व नया साल
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केवल ग्रीन पटाखे
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रात 11:55 बजे से 12:30 बजे तक।
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गुरु परब
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केवल ग्रीन पटाखे
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सुबह 4 बजे से 5 बजे और रात 9 बजे से 10 बजे तक।
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अन्य अवसर (शादी आदि)
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केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री व उपयोग की परमिशन दी जाए।
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बिक्री और नियमन: सुझावों में केवल लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों द्वारा ही ग्रीन पटाखे बेचना, ऑनलाइन बिक्री (फ्लिपकार्ट, अमेजन) पर रोक लगाना और जॉइंट पटाखों या लड़ी के निर्माण व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल है।
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दिल्ली में प्रदूषण का हाल और GRAP-I लागू
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पटाखों पर प्रतिबंध की बहस के बीच, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति पहले से ही चिंता का विषय बनी हुई है।
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    AQI स्तर: दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार होने के बाद 14 अक्टूबर को GRAP-I (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान- फेज 1) लागू कर दिया गया है।
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    GRAP-I प्रतिबंध: इसके तहत, होटलों और रेस्तरां में कोयला और जलाऊ लकड़ी के उपयोग पर बैन है, और पुराने BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों के संचालन पर सख्ती से निगरानी की जा रही है।
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    खतरे की घंटी: राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में AQI 300 के ऊपर जा चुका है, जो 'बहुत खराब' श्रेणी को दर्शाता है। यह बढ़ता AQI स्वास्थ्य और बीमारियों के खतरे का स्पष्ट संकेत है।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि क्या इस दिवाली पर प्रदूषण नियंत्रण और त्योहार मनाने के अधिकार के बीच कोई व्यावहारिक रास्ता निकल पाएगा।