सर दर्द हो या बदन दर्द, भारतीय घरों में पेनकिलर (Painkiller) का इस्तेमाल बेहद आम है। मेडिकल स्टोर से बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खरीदकर खाना लोगों की आदत बन चुकी है। लेकिन अगर आप भी दर्द से राहत पाने के लिए 'निमोस्लाइड' (Nimesulide) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।READ ALSO:-नए साल का सबसे बड़ा धमाका: योगी सरकार ने खोला नौकरियों का पिटारा; यूपी पुलिस में 32,679 पदों पर भर्ती शुरू, वर्दी पहनने का सपना होगा साकार
\r\n\r\n\r\n\r\n
केंद्र सरकार ने जनहित में एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए 100 मिलीग्राम (mg) से अधिक खुराक वाली निमोस्लाइड की ओरल दवाओं (गोली/सिरप) के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह दवा फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है और इसके सेवन से लिवर फेलियर (Liver Failure) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत लिया गया है। 29 दिसंबर को जारी नोटिफिकेशन के बाद अब देश भर में इस दवा की हाई-डोज फॉर्मूलेशन उपलब्ध नहीं होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आइये, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा, यह दवा शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है और अब मरीजों के पास दर्द निवारण के लिए क्या सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. स्वास्थ्य मंत्रालय का नोटिफिकेशन: क्या है आदेश?
\r\n\r\nकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 दिसंबर को एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर इस प्रतिबंध की घोषणा की। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने यह कदम ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की सलाह के बाद उठाया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आदेश की मुख्य बातें:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n प्रतिबंध का दायरा: 100 एमजी से अधिक मात्रा वाली निमोस्लाइड फॉर्मूलेशन (Orally Disintegrating Tablets या कैप्सूल) अब भारत में नहीं बनाई जा सकेंगी और न ही बेची जा सकेंगी।\r\n \r\n
- \r\n तत्काल प्रभाव: यह नियम पूरे देश में तुरंत लागू हो गया है। यानी मेडिकल स्टोर्स को अब अपना स्टॉक हटाना होगा।\r\n \r\n
- \r\n कारण: सरकार ने माना है कि इस दवा का मनुष्यों के लिए कोई चिकित्सीय औचित्य (Therapeutic Justification) नहीं रह गया है, क्योंकि इससे होने वाले जोखिम, इसके फायदों से कहीं ज्यादा हैं। बाजार में दर्द और सूजन कम करने के लिए कई अन्य सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
2. क्यों खतरनाक है निमोस्लाइड? (The Health Risk)
\r\n\r\nनिमोस्लाइड एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तेज दर्द, बुखार और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। लेकिन इसका 'साइड इफेक्ट' प्रोफाइल बेहद चिंताजनक रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लिवर पर सीधा हमला (Hepatotoxicity): मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, निमोस्लाइड का सबसे बुरा असर लिवर पर पड़ता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n लिवर टॉक्सिसिटी: 100mg से ज्यादा डोज लेने पर लिवर के एंजाइम्स बढ़ सकते हैं, जिससे पीलिया (Jaundice) और गंभीर मामलों में लिवर डैमेज हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n किडनी और पेट की समस्याएं: लंबे समय तक इसके प्रयोग से किडनी फेलियर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (पेट में खून बहना) का खतरा रहता है।\r\n \r\n
- \r\n त्वचा पर रिएक्शन: मार्च 2023 में भारतीय फार्माकोपिया कमीशन (IPC) ने भी चेतावनी जारी की थी कि यह दवा 'फिक्स्ड ड्रग एरप्शन' (Fixed Drug Eruption) पैदा कर सकती है, जिसमें त्वचा पर बार-बार एक ही जगह लाल चकत्ते या रैश हो जाते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लोग अक्सर सेल्फ-मेडिकेशन (Self-medication) करते हैं और हाई डोज पेनकिलर खा लेते हैं, जिससे यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
3. भारत में प्रतिबंध का इतिहास: 2011 से चल रही थी जद्दोजहद
\r\n\r\nयह पहली बार नहीं है जब निमोस्लाइड सवालों के घेरे में आई है। भारत में इसके इतिहास पर नजर डालें तो यह दवा लंबे समय से विवादों में रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n 2011 में बच्चों पर बैन: साल 2011 में ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए निमोस्लाइड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। उस समय पाया गया था कि बच्चों में इसके साइड इफेक्ट्स बहुत घातक हो सकते हैं। हालांकि, वयस्कों (Adults) के लिए इसकी बिक्री जारी थी।\r\n \r\n
- \r\n पशुओं के लिए पहले से बैन: क्या आप जानते हैं कि यह दवा जानवरों के लिए भी बैन है? सरकार ने पशुओं के इलाज में निमोस्लाइड के उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया था। इसका कारण पर्यावरण संरक्षण था। अध्ययनों में पाया गया था कि अगर किसी पशु को यह दवा दी गई हो और उसकी मृत्यु के बाद गिद्ध (Vultures) उसका मांस खा लें, तो 24 घंटे के अंदर गिद्धों की किडनी फेल हो जाती है और उनकी मौत हो जाती है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
अब 2024 के अंत में सरकार ने वयस्कों के लिए भी इसकी हाई डोज को प्रतिबंधित कर दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
4. दुनिया भर में 'नो एंट्री': भारत को फैसला लेने में हुई देर?
\r\n\r\nनिमोस्लाइड को पहली बार 1985 में इटली में लॉन्च किया गया था। शुरुआत में इसे एक चमत्कारी पेनकिलर माना गया, लेकिन जल्द ही इसके खतरे सामने आने लगे। दुनिया के विकसित देशों ने बहुत पहले ही इस दवा को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
किन देशों में बैन है निमोस्लाइड?
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n अमेरिका (USA): यहाँ इसे कभी मंजूरी ही नहीं मिली।\r\n \r\n
- \r\n यूनाइटेड किंगडम (UK), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया: इन देशों ने लिवर डैमेज के खतरों को देखते हुए इसे प्रतिबंधित रखा है।\r\n \r\n
- \r\n जापान और न्यूजीलैंड: यहाँ भी यह दवा ब्लैकलिस्टेड है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी (EMA) ने भी इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हुए हैं। ऐसे में भारत में इसके प्रतिबंध की मांग लंबे समय से स्वास्थ्य कार्यकर्ता कर रहे थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
5. फार्मा इंडस्ट्री पर असर और डॉक्टर की राय
\r\n\r\nइस प्रतिबंध का सीधा असर भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों पर पड़ेगा जो निमोस्लाइड के हाई-डोज वेरिएंट्स का निर्माण करती थीं। भारत में दर्द निवारक दवाओं का बाजार बहुत बड़ा है और निमोस्लाइड (जैसे कि Nise, Nimulid आदि ब्रांड्स के कुछ वेरिएंट्स) काफी लोकप्रिय रही हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
डॉक्टर क्या कहते हैं? एम्स (AIIMS) और आईएमए (IMA) से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n डॉ. आर. के. शर्मा (जनरल फिजिशियन) का कहना है, "पेनकिलर का ओवरडोज भारत में लिवर ट्रांसप्लांट के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण है। निमोस्लाइड की 100mg डोज पर्याप्त होती है, लेकिन बाजार में इससे ज्यादा पावर की दवाएं बिक रही थीं, जो गैर-जरूरी और खतरनाक थीं। मरीजों को पैरासिटामोल (Paracetamol) या आइबूप्रोफेन (Ibuprofen) जैसे सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए, वो भी डॉक्टर की सलाह पर।"\r\n \r\n
\r\n\r\n
6. आम जनता के लिए गाइडलाइन: अब क्या करें?
\r\n\r\nसरकार के इस फैसले के बाद आम जनता के मन में कुछ सवाल उठना लाजमी हैं। यहाँ आपके लिए कुछ जरूरी सलाह दी गई है:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n घर की दवाइयां चेक करें: अगर आपके फर्स्ट-एड बॉक्स में कोई ऐसी पेनकिलर है जिसके रैपर पर 'Nimesulide' लिखा है और उसकी मात्रा 100mg से ज्यादा है, तो उसे तुरंत डिस्पोज कर दें।\r\n \r\n
- \r\n डॉक्टर से पूछें: अगर आपको कोई पुराना दर्द या गठिया (Arthritis) है और आप यह दवा ले रहे थे, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें और दवा बदलवाएं।\r\n \r\n
- \r\n सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: केमिस्ट से पूछकर कोई भी तेज दर्द निवारक दवा न खाएं। बुखार के लिए पैरासिटामोल सबसे सुरक्षित मानी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n जागरूक बनें: दवा के पत्ते के पीछे लिखे 'Composition' को पढ़ने की आदत डालें।\r\n \r\n
\r\n\r\n
स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम
\r\n\r\nकेन्द्र सरकार का यह फैसला 'स्वस्थ भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भले ही निमोस्लाइड दर्द से तुरंत राहत देती हो, लेकिन अगर उसकी कीमत लिवर या किडनी खराब होकर चुकानी पड़े, तो यह सौदा बहुत महंगा है। सुरक्षित विकल्पों की मौजूदगी में जोखिम भरी दवाओं को बाजार से हटाना ही सही निर्णय है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अब जिम्मेदारी नागरिकों की भी है कि वे प्रतिबंध का सम्मान करें और अवैध रूप से बिकने वाली दवाओं से दूर रहें। याद रखें, दर्द सहना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अंग खराब होने का दर्द उससे कहीं ज्यादा होता है।