खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: भारत के इतिहास में सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत कवायद की शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 (Census 2027) की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। कोरोना महामारी के कारण एक दशक से अधिक समय से लटकी इस प्रक्रिया का रोडमैप अब पूरी तरह साफ हो गया है। गुरुवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नोटिफिकेशन ने देश की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने वाली इस मेगा-एक्सरसाइज की नींव रख दी है।READ ALSO:-यूपी में वोटरों पर 'कागज' का संकट: 2003 की लिस्ट में नाम नहीं तो 'निवास प्रमाण पत्र' भी बेकार; आयोग ने कहा- 'सिर्फ ये 11 सबूत चलेंगे'
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इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। यह न केवल आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना (Caste Census) होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना (Digital Census) भी होगी। सरकार ने पहले चरण (House Listing) के लिए 33 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की है, जो यह तय करेगी कि भारत के लोग कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं और किन सुविधाओं का उपयोग करते हैं।
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इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको जनगणना 2027 के हर पहलू, 33 सवालों की डिटेल, डिजिटल प्रक्रिया, जियो-टैगिंग के 5 बड़े फायदे और इसके राजनीतिक व सामाजिक असर के बारे में विस्तार से बताएंगे।
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दो चरणों में होगी महा-गिनती: जानें पूरा शेड्यूल

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सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जनगणना की यह प्रक्रिया दो चरणों (Two Phases) में पूरी की जाएगी। चूंकि भारत एक विशाल जनसंख्या वाला देश है, इसलिए डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
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पहला चरण (Phase-1): मकानों की लिस्टिंग (House Listing)

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    अवधि: 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक।
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    प्रक्रिया: इस चरण में नागरिकों की गिनती नहीं होगी, बल्कि मकानों, इमारतों और उनमें उपलब्ध सुविधाओं का डेटा जुटाया जाएगा।
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    समय सीमा: प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने अधिकार क्षेत्र में यह काम 30 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
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    उद्देश्य: यह चरण यह निर्धारित करेगा कि देश में कितने मकान हैं, उनकी स्थिति क्या है और उनमें रहने वाले परिवारों का जीवन स्तर कैसा है।
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दूसरा चरण (Phase-2): जनसंख्या की गिनती (Population Enumeration)

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    शुरुआत: फरवरी 2027 से।
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    प्रक्रिया: यह मुख्य चरण है जहां देश के हर नागरिक की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे- नाम, उम्र, लिंग, धर्म, शिक्षा और (पहली बार) जाति का ब्योरा दर्ज किया जाएगा।
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    संशोधन: 1 से 5 मार्च 2027 के बीच एक 'रिविजन राउंड' होगा जिसमें उन लोगों को शामिल किया जाएगा जो फरवरी में छूट गए थे या जिनका जन्म इस दौरान हुआ हो।
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33 सवाल जो आपकी लाइफस्टाइल की पोल खोलेंगे

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पहले चरण यानी मकान सूचीकरण (House Listing) और मकान गणना (Housing Census) के लिए सरकार ने 33 सवालों की एक सूची तैयार की है। यह प्रश्नावली न केवल आपके सिर पर छत की जानकारी लेगी, बल्कि आपकी आर्थिक स्थिति का भी पूरा स्कैन करेगी। परिवार के मुखिया को इन सवालों के जवाब देने होंगे।
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प्रमुख सवाल और उनका महत्व:

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    मकान की स्थिति: क्या मकान पक्का है या कच्चा? फर्श, दीवार और छत किस सामग्री (कंक्रीट, टाइल्स, घास-फूस) से बनी है? यह देश में गरीबी और आवास योजनाओं की सफलता को मापने में मदद करेगा।
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    कमरों की संख्या: घर में कितने कमरे हैं और कितने शादीशुदा जोड़े वहां रहते हैं? इससे प्रति व्यक्ति स्थान और भीड़भाड़ (Overcrowding) का पता चलेगा।
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    पानी का स्रोत: पीने का पानी कहां से आता है? (नल, हैंडपंप, कुआं या टैंकर)। क्या पानी का स्रोत घर के अंदर है या दूर?
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  7. \r\n
    शौचालय की सुविधा: क्या घर में शौचालय है? यह 'स्वच्छ भारत अभियान' की वास्तविकता को परखेगा।
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    रसोई और ईंधन: खाना पकाने के लिए किस ईंधन का उपयोग होता है? (LPG, लकड़ी, गोबर के उपले या बिजली)। क्या रसोई घर अलग है?
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    वाहनों की जानकारी: क्या आपके पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार या जीप है? यह मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) का सूचक होगा।
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    डिजिटल गैजेट्स: क्या परिवार के पास स्मार्टफ़ोन, लैपटॉप या इंटरनेट कनेक्शन है? यह 'डिजिटल इंडिया' की पहुंच को मापेगा।
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    मुख्य अनाज: परिवार में मुख्य रूप से कौन सा अनाज (चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा) खाया जाता है? इससे खाद्य सुरक्षा योजनाओं (Food Security) को क्षेत्रवार लागू करने में मदद मिलेगी।
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इसके अलावा बिजली कनेक्शन, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और घर के मालिकाना हक (किराए का या अपना) से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
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पूछे जाने वाले सवाल
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  • मकान के स्वामित्व की स्थिति
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  • परिवार के पास कमरों की संख्या
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  • परिवार में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या
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  • पेयजल का मुख्य स्रोत
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  • पेयजल स्रोत की उपलब्धता
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  • लाइट का मुख्य स्रोत
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  • शौचालय की सुलभता
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  • शौचालय का प्रकार
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  • गंदे पानी की निकासी
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  • बाथरूम की उपलब्धता
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  • रसोईघर और एलपीजी /पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता
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  • खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन
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  • रेडियो/ट्रांजिस्टर
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  • टेलीविजन
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  • इंटरनेट सुविधा
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  • लैपटॉप/कंप्यूटर
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  • टेलीफोन/मोवाइल फोन/स्मार्ट फोन
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  • साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
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  • कार/जीप/वैन
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  • परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाले मुख्य अनाज
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  • मोबाइल नंबर
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डिजिटल क्रांति: मोबाइल ऐप और 'डिजी-डॉट'

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जनगणना 2027 तकनीकी रूप से अब तक का सबसे उन्नत सर्वे होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागज-कलम (Paper-Pen) के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए, इस बार सब कुछ डिजिटल होगा।
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ऐप के जरिए डेटा कलेक्शन:

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    करीब 30 लाख कर्मचारी (Enumerators) अपने स्मार्टफोन पर विशेष रूप से तैयार किए गए मोबाइल ऐप के जरिए घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे।
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    यह ऐप Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।
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    ऐप में डेटा फीड करते ही यह रियल-टाइम में केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगा, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय (जो पहले 2-3 साल होता था) घटकर कुछ महीनों में रह जाएगा।
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सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प: सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए 'सेल्फ एन्यूमरेशन' का विकल्प भी दिया है। इसका मतलब है कि अगर आप चाहें तो प्रगणक (Enumerator) के आने का इंतजार किए बिना, खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार की जानकारी भर सकते हैं।
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    यह सुविधा मकानों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले खोली जाएगी।
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    खुद जानकारी भरने के बाद आपको एक कोड मिलेगा, जिसे प्रगणक के आने पर सिर्फ वेरीफाई करवाना होगा।
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आजादी के बाद पहली बार: जातिगत जनगणना

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जनगणना 2027 का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक पहलू जाति की गिनती (Caste Census) है। आजादी के बाद (1951 से 2011 तक) भारत में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की गिनती होती थी, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य जातियों (General) की अलग से गिनती नहीं की जाती थी।
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क्यों है यह ऐतिहासिक?

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    आखिरी बार जाति आधारित जनगणना 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी।
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    इसके बाद से सरकारों ने इसे "विभाजनकारी" मानकर टाल दिया था।
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    विपक्ष और कई क्षेत्रीय दलों की लंबी मांग के बाद, पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में इसे मंजूरी दी थी।
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    इस डेटा का उपयोग आरक्षण नीतियों (Reservation Policies), कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्गठन और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा।
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जियो-टैगिंग का जादू: हर घर बनेगा 'डिजी-डॉट'

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इस जनगणना में इसरो (ISRO) और तकनीकी एजेंसियों की मदद से हर घर की जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की जाएगी। इसका मतलब है कि भारत के नक्शे पर आपका घर एक डिजिटल बिंदु (Digital Dot) के रूप में दिखाई देगा। सरकार ने इसके 5 बड़े फायदे बताए हैं जो आपदा प्रबंधन से लेकर विकास तक सब कुछ बदल देंगे।
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1. आपदा में सटीक राहत (Disaster Relief): जियो-टैगिंग से बना डिजिटल मैप आपदाओं के समय जीवन रक्षक साबित होगा। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड या हिमाचल के किसी गांव में बादल फटने पर प्रशासन को तुरंत पता चल जाएगा कि उस विशिष्ट स्थान (डिजी-डॉट) पर कितने घर हैं और वहां कितने लोग रहते हैं। इससे बचाव दल को यह अनुमान लगाने में मदद मिलेगी कि कितने हेलिकॉप्टर, नावें या फूड पैकेट भेजने की जरूरत है।
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2. परिसीमन में मदद (Delimitation): भविष्य में होने वाले संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के लिए यह डेटा रीढ़ की हड्डी साबित होगा। घरों के सटीक लोकेशन से यह तय करना आसान होगा कि किसी चुनाव क्षेत्र की सीमा कहां खत्म होनी चाहिए ताकि जनसंख्या का संतुलन बना रहे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक ही मोहल्ले के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में न बंटें।
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3. शहरी प्लानिंग (Urban Planning): शहरों का विकास अब अंधाधुंध नहीं, बल्कि डेटा-आधारित होगा। अगर डिजिटल मैप दिखाता है कि किसी इलाके में बच्चों की संख्या ज्यादा है, तो वहां पार्क और स्कूल बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसी तरह, अगर किसी बस्ती में बुजुर्ग ज्यादा हैं, तो वहां अस्पताल या सामुदायिक केंद्र बनाए जाएंगे। कच्ची बस्तियों की पहचान कर वहां मोबाइल मेडिकल वैन और पक्के मकानों की योजना बनाई जा सकेगी।
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4. पलायन और शहरीकरण का डेटा (Migration Tracking): भारत में गांव से शहर की ओर पलायन (Migration) एक बड़ी चुनौती है। 2027 के डिजिटल मैप की तुलना जब 2037 के मैप से होगी, तो यह साफ दिखेगा कि कौन से गांव खाली हो रहे हैं और किन शहरों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे सरकार को स्मार्ट सिटी और रूरल डेवलपमेंट की नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
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5. फर्जी वोटर कार्ड पर लगाम (Voter List Cleanup): अक्सर देखा जाता है कि एक व्यक्ति का नाम गांव और शहर दोनों जगह की वोटर लिस्ट में होता है। जियो-टैगिंग और आधार लिंकिंग से यह समस्या खत्म हो जाएगी। जब एक वोटर किसी एक भौगोलिक स्थान (Geo-location) से डिजिटली जुड़ जाएगा, तो सिस्टम अपने आप दूसरे स्थान से उसका नाम हटाने का सुझाव देगा। इससे भारत की चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी बनेगी।
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चुनौतियां और तैयारी

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हालांकि, यह राह आसान नहीं है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी, जो अब 140 करोड़ के पार होने का अनुमान है। इतने बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा इकट्ठा करना, सर्वर की सुरक्षा (Cyber Security), और डेटा की गोपनीयता (Privacy) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
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इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता की कमी भी 'सेल्फ एन्यूमरेशन' के रास्ते में रोड़ा बन सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई है।
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जनगणना 2027 केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत का ब्लूप्रिंट है। 33 सवालों के जवाब और डिजिटल डॉट्स मिलकर यह तय करेंगे कि अगले दशक में सरकारी योजनाएं कैसे बनेंगी, आरक्षण किसे मिलेगा और आपदाओं से हम कैसे लड़ेंगे। 2021 में जो प्रक्रिया महामारी के कारण रुक गई थी, वह अब 2027 में एक नई तकनीक और नई सोच के साथ पूरी होने जा रही है। नागरिकों के लिए यह एक अवसर है कि वे सही जानकारी देकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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केन्द्र सरकार ने जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी कर दी है। पहला चरण (मकानों की लिस्टिंग) 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसके लिए 33 सवाल तय किए गए हैं। दूसरा चरण (जनसंख्या गिनती) फरवरी 2027 में होगा। यह पहली बार होगा जब जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और इसमें जाति की गिनती भी शामिल की जाएगी।