खबरीलाल डेस्क
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नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स में शुमार 'जोमैटो' (Zomato) ने ग्राहकों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक बेहद सख्त और कड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड सभी रेस्टोरेंट्स, क्लाउड किचन्स और फूड पार्टनर्स के लिए 'जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी' (Zero-Tolerance Policy) लागू कर दी है। इसके तहत जोमैटो ने खाने-पीने की चीजों में 'एनालॉग डेयरी' (Analog Dairy) या कृत्रिम डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल करने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए उनके संबंधित व्यंजनों को तुरंत प्रभाव से अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है।READ ALSO:-यूपी रोडवेज में बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर शुरू! लोकमाता अहिल्याबाई योजना का लाभ उठाने के लिए पास होना चाहिए यह जरूरी दस्तावेज, वरना देना होगा पूरा किराया
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा देश भर के कई रेस्टोरेंट्स और फूड ब्रांड्स पर की जा रही ताबड़तोड़ और सख्त कार्रवाई के बाद जोमैटो ने यह कदम उठाया है। कंपनी ने अपने सभी पार्टनर्स को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि ग्राहकों के स्वास्थ्य, भरोसे और फूड क्वालिटी के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी रेस्टोरेंट को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसा करने वालों को प्लेटफॉर्म से पूरी तरह बैन कर दिया जाएगा।
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क्या है जोमैटो की नई नीति और निर्देश? जोमैटो ने अपने सभी रेस्टोरेंट पार्टनर्स को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना हर फूड बिजनेस के लिए अनिवार्य कर दिया गया है:
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    असली डेयरी उत्पादों का उपयोग: रेस्टोरेंट्स को नकली या सिंथेटिक डेयरी की जगह तुरंत शुद्ध और प्राकृतिक दूध से बने डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल शुरू करना होगा।
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    मेन्यू से नाम हटाना: यदि कोई रेस्टोरेंट तुरंत असली डेयरी उत्पादों पर स्विच करने में असमर्थ है, तो उन्हें ऐसे सभी व्यंजनों को जोमैटो के ऑनलाइन मेन्यू से तुरंत हटाना होगा, जिसमें कृत्रिम सामग्री का उपयोग होता है।
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    सामग्री और लेबल की गहन जांच: रेस्टोरेंट्स को अपने वेंडर्स और सप्लायर्स द्वारा दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट के लेबल और उनकी सामग्री (Ingredients) की बारीकी से जांच करनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जोमैटो पर सूचीबद्ध व्यंजनों की शुद्धता में कोई कमी न आए।
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इस नीति पर बात करते हुए जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हमारा मुख्य और सबसे बड़ा मिशन देश के हर कोने में लोगों तक बेहतर, स्वच्छ और सुरक्षित खाना पहुंचाना है। यह नई नीति हमारे ग्राहकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और पारदर्शिता के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"
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क्यों पड़ी इस सख्त कदम की जरूरत? खाद्य पदार्थों में मिलावट का यह पूरा मामला देश में चल रही एक व्यापक और देशव्यापी मुहिम के बीच सामने आया है। हाल ही में देश के सर्वोच्च खाद्य नियामक FSSAI ने कई बड़ी फूड कंपनियों और सप्लायर्स के लाइसेंस निलंबित किए हैं और घटिया क्वालिटी के घी, बटर व मिलावटी डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है।
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हाल ही में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा राज्यभर में की गई ताबड़तोड़ जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। जांच के दौरान राज्य में मिलने वाले पनीर के 35 प्रतिशत से अधिक सैंपल पूरी तरह फेल पाए गए थे। इन सैंपल्स में असली दूध के फैट की जगह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सस्ते वनस्पति तेल, पाम ऑयल और स्टार्च की भारी मिलावट पाई गई थी।
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आम जनता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में देख महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए कृत्रिम या 'एनालॉग' पनीर के उत्पादन, भंडारण और उसकी खुली बिक्री पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद अब राज्य का कोई भी होटल, ढाबा, क्लाउड किचन या कैटरर इस तरह के सिंथेटिक और मिलावटी उत्पादों का उपयोग नहीं कर सकता है। जोमैटो का यह नया कदम इसी दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक और सराहनीय प्रयास है, जिससे ऑनलाइन ऑर्डर करने वाले करोड़ों ग्राहकों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिलने की गारंटी सुनिश्चित हो सकेगी।
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