नई दिल्ली / खबरीलाल बिजनेस डेस्क:
\r\n\r\n10 मिनट में घर के दरवाजे पर राशन और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने वाली क्विक-कॉमर्स कंपनियों की होड़ में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्च और घाटे को कम करने के लिए प्रमुख क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Zepto (जेप्टो) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए फ्री डिलीवरी (Free Delivery) की शर्तों में बड़ा फेरबदल कर दिया है।
\r\n\r\nकंपनी ने फ्री डिलीवरी के लिए तय न्यूनतम ऑर्डर सीमा (Minimum Order Value) में बढ़ोतरी कर दी है। यदि आप अब कम कीमत का सामान ऑर्डर करते हैं, तो आपको मुफ्त डिलीवरी नहीं मिलेगी और अपनी कार्ट में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ेगा या फिर अलग से डिलीवरी चार्ज देना होगा।
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\r\n\r\nक्या बदला जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति में? (New Delivery Rules)
\r\n\r\nअब तक जेप्टो अपने प्लेटफॉर्म पर ₹149 के न्यूनतम ऑर्डर पर ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी की सुविधा दे रहा था। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद:
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- \r\n सामान्य समय में न्यूनतम सीमा: अब फ्री डिलीवरी पाने के लिए आपका कार्ट वैल्यू कम से कम ₹199 होना अनिवार्य है।\r\n \r\n
- \r\n पिक आवर्स (Peak Hours) का नियम: जब ज्यादा डिमांड वाले घंटे या त्योहारों/बारिश का समय होता है, तब फ्री डिलीवरी के लिए मिनिमम ऑर्डर की सीमा ₹299 तक पहुँच जाती है।\r\n \r\n
- \r\n छोटे ऑर्डर्स पर सीधा असर: यदि आप सिर्फ दूध का पैकेट, ब्रेड या एक-दो छोटी चीजें मंगाते थे (जो ₹199 से कम की होती थीं), तो अब आपको या तो डिलीवरी फीस देनी होगी या फिर जबरन कार्ट में कुछ और सामान जोड़ना पड़ेगा।\r\n \r\n
\r\n\r\nइस बढ़ोतरी के साथ ही जेप्टो की मिनिमम ऑर्डर वैल्यू अब इसके प्रतिद्वंद्वी प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit और Swiggy Instamart के बिल्कुल बराबर आ गई है।
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\r\n\r\nदेश में क्विक-कॉमर्स का दबदबा: रोजाना 90 लाख से ज्यादा ऑर्डर्स
\r\n\r\nभारत में 10 से 15 मिनट की डिलीवरी सर्विस यानी 'क्विक-कॉमर्स' का क्रेज किस कदर बढ़ चुका है, इसका अंदाजा बाजार के ताजा आंकड़ों से लगाया जा सकता है।
\r\n\r\nमार्केट रिसर्च फर्म Datum Intelligence के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 6 बड़े क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स मिलकर हर दिन 90 लाख से 95 लाख ऑर्डर्स की डिलीवरी कर रहे हैं।
\r\n\r\nकौन सा प्लेटफॉर्म कितना आगे? (Market Share & Daily Orders)
\r\n\r\nभारत के क्विक-कॉमर्स मार्केट में कौन सी कंपनी किस पायदान पर है, इसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
\r\n\r\n| \r\n क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म \r\n | \r\n \r\n रोजाना मिलने वाले ऑर्डर्स \r\n | \r\n \r\n बाजार में स्थिति / टिप्पणी \r\n | \r\n
|---|---|---|
| \r\n Blinkit (ब्लिंकिट) \r\n | \r\n \r\n 34 लाख से 36 लाख \r\n | \r\n \r\n मार्केट लीडर (सबसे आगे) \r\n | \r\n
| \r\n Zepto (जेप्टो) \r\n | \r\n \r\n 24 लाख से 26 लाख \r\n | \r\n \r\n दूसरे स्थान पर \r\n | \r\n
| \r\n Swiggy Instamart \r\n | \r\n \r\n 13 लाख से 14.5 लाख \r\n | \r\n \r\n तीसरे स्थान पर \r\n | \r\n
| \r\n Flipkart Minutes \r\n | \r\n \r\n 10 लाख से ज्यादा \r\n | \r\n \r\n तेजी से उभरता हुआ प्लेयर \r\n | \r\n
| \r\n Amazon Now \r\n | \r\n \r\n 6 लाख से 7 लाख \r\n | \r\n \r\n टेक दिग्गज का क्विक सर्विस विंग \r\n | \r\n
| \r\n BigBasket (BB Now) \r\n | \r\n \r\n 5 लाख से 6 लाख \r\n | \r\n \r\n टाटा समूह का प्लेटफॉर्म \r\n | \r\n
कैश बर्न से मुनाफे की ओर: क्यों महंगे हो रहे हैं क्विक-कॉमर्स ऑर्डर्स?
\r\n\r\nसुरुआती दौर में ग्राहकों को जोड़ने के लिए क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने भारी डिस्काउंट, मुफ्त डिलीवरी और कम से कम ऑर्डर लिमिट जैसी सुविधाएं दीं। लेकिन अब ये कंपनियां सिर्फ डिलीवरी स्पीड पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अपनी कमाई (Unit Economics) और लॉजिस्टिक्स खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं।
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- \r\n डार्क स्टोर्स का खर्च: शहरों में 2-3 किलोमीटर के दायरे में डार्क स्टोर्स (Dark Stores) चलाने, डिलीवरी पार्टनर्स को भुगतान करने और पेट्रोल के खर्च के कारण प्रति ऑर्डर लागत बढ़ रही है।\r\n \r\n
- \r\n मुनाफे की ओर कदम: कंपनियां अब समझ चुकी हैं कि ₹100-₹150 का ऑर्डर मुफ्त में डिलीवर करने से उन्हें घाटा हो रहा है। यही वजह है कि एवरेज ऑर्डर वैल्यू (AOV) को बढ़ाने के लिए फ्री डिलीवरी की सीमा ₹199 की गई है।\r\n \r\n
\r\n\r\nZepto IPO पर क्या बोल रहे हैं बाजार एक्सपर्ट्स?
\r\n\r\nएक तरफ जहां जेप्टो अपनी प्रति ऑर्डर कमाई और मुनाफा बढ़ाने की रणनीति अपना रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके शेयर बाजार में उतरने यानी आईपीओ (IPO) को लेकर बड़ी चर्चाएं चल रही हैं।
\r\n\r\nबाजार के जानकारों और आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, जेप्टो का आईपीओ लाने का प्लान अभी जल्दबाजी साबित हो सकता है:
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- \r\n वैल्यूएशन में भारी कटौती: वैल्यूएशन की चिंताओं के कारण कंपनी ने फिलहाल अपनी लिस्टिंग की योजना को टाल दिया है। जेप्टो पहले 7 अरब डॉलर ($7 Billion) के बड़े वैल्यूएशन पर आईपीओ लाने की तैयारी में थी।\r\n \r\n
- \r\n नया संशोधित प्लान: अब कंपनी अपने वैल्यूएशन के लक्ष्य को घटाकर 2.5 से 3 अरब डॉलर ($2.5 to $3 Billion) के स्तर पर लाने का विचार कर रही है।\r\n \r\n
- \r\n विशेषज्ञों की राय: एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है कि क्विक-कॉमर्स कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट होने से पहले खुद को पूरी तरह से मुनाफे (Profitability) में लाकर दिखाना चाहिए। घाटे में चल रही कंपनियों के आईपीओ को बाजार में ठंडा रिस्पॉन्स मिल सकता है।\r\n \r\n
\r\n\r\nग्राहकों के लिए सलाह
\r\n\r\nजेप्टो का यह फैसला भले ही आम ग्राहकों की जेब पर थोड़ा भारी पड़े, लेकिन कंपनी के लिए प्रति ऑर्डर लाभप्रदता बढ़ाने की दिशा में यह एक अहम कदम है।
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\r\n\r\nडिलीवरी चार्ज से कैसे बचें?
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- \r\n बल्क बुकिंग करें: रोज छोटी-छोटी चीजें मंगाने के बजाय सप्ताह भर या 3-4 दिन के राशन की एक साथ लिस्ट बनाकर ऑर्डर करें ताकि आपकी कार्ट वैल्यू आसानी से ₹199 पार कर जाए।\r\n \r\n
- \r\n सब्सक्रिप्शन प्लान्स: अगर आप बहुत ज्यादा क्विक-कॉमर्स ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो प्लेटफॉर्म्स के मंथली पास या पास मेंबरशिप पर विचार कर सकते हैं।\r\n \r\n
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