नई दिल्ली (एविएशन डेस्क): भारत का नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) सेक्टर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। इसी कड़ी में अब भारत तकनीकी छलांग लगाते हुए 'ग्रीन एविएशन' (Green Aviation) की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब वो दिन दूर नहीं जब भारतीय नदियों, झीलों और समुद्र के पानी से ऐसे हवाई जहाज उड़ान भरेंगे, जो न तो शोर करेंगे और न ही पर्यावरण को प्रदूषित करेंगे। भारत को अपना पहला पूरी तरह से 'इलेक्ट्रिक सीप्लेन' (Electric Seaplane) मिलने जा रहा है।READ ALSO:-मेरठ के होटल में हंगामा: 16 साल की नाबालिग को धोखे से लाया 23 साल का फरदीन, हिंदू संगठनों ने पकड़ा; ब्लैकमेलिंग का आरोप, FIR दर्ज
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इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने के लिए भारत की पहली डेडिकेटेड सीप्लेन ऑपरेटर स्काईहॉप एविएशन ने नॉर्वे की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी नोएमी एयरोस्पेस के साथ हाथ मिलाया है।
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क्या है यह 'नोएमी' (NOEMI) और क्या है इस समझौते का महत्व?
\r\n\r\nहवाई यात्रा अक्सर भारी कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint) के लिए जानी जाती है, लेकिन यह नई साझेदारी इस धारणा को पूरी तरह बदल देगी।
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नॉर्वे की जिस कंपनी के साथ यह डील हुई है, उसका पुराना नाम 'एल्फ़्लाई ग्रुप' (Elfly Group) था, जिसे अब नोएमी एयरोस्पेस (NOEMI Aerospace) के नाम से जाना जाता है। एविएशन की दुनिया में 'NOEMI' का अर्थ ही है— "नो एमिशन" (No Emission) यानी शून्य प्रदूषण। यह कंपनी पूरी तरह से बैटरी चालित और पर्यावरण के अनुकूल विमान बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर मशहूर है।
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स्काईहॉप और नोएमी के बीच हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण दक्षिण एशियाई (South Asian) देशों में जल-हवाई यातायात (Water-Air Transport) का एक नया और आधुनिक नेटवर्क बिछाना है। यह सीप्लेन जमीन पर बने रनवे के साथ-साथ पानी की सतह से भी आसानी से टेक-ऑफ और लैंड कर सकेंगे।
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मिशन 2030: 40 विमानों का विशाल और आधुनिक बेड़ा
\r\n\r\nस्काईहॉप एविएशन ने भारतीय बाजार को लेकर अपनी भविष्य की रणनीति बिल्कुल साफ कर दी है। कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है जो दूरदराज के इलाकों को मुख्य धारा से जोड़ सके।
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- \r\n विशाल बेड़े की तैयारी: स्काईहॉप की भविष्य की योजना के तहत साल 2030 तक कुल 40 आधुनिक सीप्लेन का एक बड़ा बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड विमानों की हिस्सेदारी: कंपनी के आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारत सरकार और डीजीसीए (DGCA) से जरूरी मंजूरियां (Regulatory Approvals) मिलने के बाद, इस पूरे बेड़े का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह से इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड सीप्लेन का होगा।\r\n \r\n
- \r\n नोएमी से खरीद: योजना के रोडमैप के अनुसार, कंपनी 2030 तक नोएमी से सीधे 10 उच्च-तकनीक वाले इलेक्ट्रिक विमान खरीदेगी या लीज पर लेगी।\r\n \r\n
- \r\n भविष्य का विकल्प: यदि भारतीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों में इन विमानों का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा उतरता है, तो भविष्य में 5 और अतिरिक्त इलेक्ट्रिक विमानों को बेड़े में शामिल करने का 'परचेज ऑप्शन' (Purchase Option) भी इस समझौते में सुरक्षित रखा गया है।\r\n \r\n
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पहले चरण का आगाज: लक्षद्वीप बनेगा भारत का 'सीप्लेन हब'
\r\n\r\nइलेक्ट्रिक और सामान्य सीप्लेन उड़ाने के इस महाप्रोजेक्ट के पहले चरण (Phase-1) की शुरुआत भारत के सबसे खूबसूरत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप समूह— लक्षद्वीप (Lakshadweep) से की जाएगी। हाल के दिनों में लक्षद्वीप पर्यटन के लिहाज से दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, और यह नई सेवा वहां गेमचेंजर साबित होगी।
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- \r\n शुरुआती योजना: स्काईहॉप अपने ऑपरेशंस के पहले चरण में लक्षद्वीप के बिखरे हुए छोटे-छोटे द्वीपों को आपस में जोड़ेगी। इसके साथ ही इन द्वीपों को भारतीय मुख्य भूमि (Mainland India) से जोड़ने के लिए भी हवाई मार्ग तैयार किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n 'ट्विन-ऑटर' विमानों से शुरुआत: चूंकि इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा, इसलिए शुरुआती दौर में इस सेवा को सुचारू रूप से चलाने के लिए 19 सीटों वाले पारंपरिक 'ट्विन-ऑटर' (Twin-Otter) सीप्लेन का इस्तेमाल किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n इलेक्ट्रिक ट्रांजिशन: जैसे ही पानी के किनारों पर चार्जिंग स्टेशन और जरूरी बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार हो जाएगा, इन रूट्स पर नए और अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक विमानों को सेवा में उतार दिया जाएगा।\r\n \r\n
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लक्षद्वीप के अलावा कंपनी भारत के उन अन्य हिस्सों (जैसे पूर्वोत्तर भारत, अंडमान और तटीय राज्य) की भी पहचान कर रही है, जहाँ लंबी तटरेखा, नदियों या झीलों की प्रचुरता है, लेकिन वहां सामान्य हवाईअड्डे (Airports) बनाना या तो तकनीकी रूप से बहुत मुश्किल है या फिर बेहद खर्चीला काम है।
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'मेक इन इंडिया' को मिलेगी नई उड़ान: भारत में ही बनेंगे विमान!
\r\n\r\nइस अंतरराष्ट्रीय समझौते की सबसे खास और भारत के लिहाज से सबसे बड़ी बात यह है कि यह डील सिर्फ विदेशों से विमान खरीदने या पट्टे पर लेने तक सीमित नहीं है। इसका विजन बहुत व्यापक है।
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दोनों कंपनियां (स्काईहॉप और नोएमी) इस बात पर सहमत हुई हैं कि वे भविष्य में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल के तहत काम करेंगी। इसके तहत इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड सीप्लेन की असेंबलिंग और अंततः उनके निर्माण (Manufacturing) को भारत के अंदर ही स्थापित करने की संभावनाओं पर जोर दिया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो भारत एविएशन मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी एक ग्लोबल पावर बनकर उभरेगा।
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लीडरशिप का विजन: क्या कहते हैं कंपनियों के सीईओ?
\r\n\r\nइस ऐतिहासिक साझेदारी पर दोनों ही कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व ने भारी उत्साह जताया है।
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स्काईहॉप एविएशन की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अवनी सिंह ने इस पहल के दूरगामी परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"भारत की विशाल तटरेखा, चौड़ी नदियों और द्वीपों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, सीप्लेन हमारे सफर करने के तरीके और लॉजिस्टिक्स को पूरी तरह से बदल सकते हैं। हमारा लक्ष्य सिर्फ पानी पर सीप्लेन उड़ाना नहीं है, बल्कि एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार कर भारत को इस उद्योग का एक बड़ा और अहम 'ग्लोबल हब' बनाना है।"\r\n
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वहीं, नोएमी एयरोस्पेस के सीईओ एरिक लिथुन (Eric Lithun) ने भारतीय बाजार की संभावनाओं और सरकारी नीतियों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा:
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\r\n\r\n\r\n"भारत सरकार जिस तरह से देश में नए सीप्लेन रूट्स (Seaplane Routes) को विकसित करने और जल-परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम चला रही है, वह हमारे प्रदूषण-मुक्त विमानों की क्षमताओं और विजन के बिल्कुल अनुकूल है। भारत हमारे लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण बाजार है।"\r\n
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भारत का इको-फ्रेंडली भविष्य
\r\n\r\nनदियों और समुद्र के रास्तों का हवाई यातायात के लिए इस्तेमाल करना भारत के एविएशन और टूरिज्म सेक्टर के लिए एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। एयरपोर्ट निर्माण में लगने वाले भारी-भरकम खर्च और जमीन अधिग्रहण की समस्याओं से बचते हुए, स्काईहॉप और नोएमी का यह 'इलेक्ट्रिक सीप्लेन' प्रोजेक्ट न सिर्फ दूरस्थ इलाकों को आपस में जोड़ेगा, बल्कि शून्य प्रदूषण के वादे के साथ प्रकृति को भी संरक्षित रखेगा। लक्षद्वीप से उड़ने वाली यह पहली इलेक्ट्रिक उड़ान निश्चित तौर पर भविष्य के 'आत्मनिर्भर और उन्नत भारत' की तस्वीर पेश करेगी।