खबरीलाल डेस्क
हम सभी को अपने परिवार या दोस्तों के साथ बाहर खाना (Dine-out) बहुत पसंद होता है। शानदार माहौल, लजीज खाना और अच्छी सर्विस हमारे वीकेंड को खास बना देते हैं। लेकिन, आपकी यह खुशी तब काफूर हो जाती है, जब वेटर आपके सामने बिल लेकर आता है। मेन्यू में जो डिश 300 रुपये की दिख रही थी, वह बिल में तरह-तरह के चार्ज और टैक्स जुड़ने के बाद 400 रुपये के पार पहुंच जाती है। अब तक आपने 'सर्विस चार्ज' (Service Charge) के नाम पर लूट देखी होगी, लेकिन अब रेस्टोरेंट मालिकों ने ग्राहकों की जेब काटने का एक नया तरीका ईजाद कर लिया है— 'LPG चार्ज' या 'गैस क्राइसिस चार्ज'।READ ALSO:-महा-अलर्ट: यूपी में अगले 5 दिन 'तबाही' वाली बारिश और आंधी का कहर, जानें अपनी फसलों को कैसे बचाएं!
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लेकिन अब केंद्र सरकार और सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने इस 'खुली लूट' पर सख्त एक्शन लिया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी होटल, कैफे या रेस्टोरेंट अपने ग्राहकों से खाने की कीमत और सरकारी टैक्स (GST) के अलावा किसी भी तरह का अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूल सकता। अगर आपके बिल में गैस, फ्यूल या कोई अन्य ऑपरेशनल खर्च जोड़ा गया है, तो यह सीधा-सीधा गैरकानूनी है। आइए, इस पूरे मामले की जड़, उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत करने के अचूक तरीकों को विस्तार से समझते हैं।
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क्या है पूरा मामला? (The Rise of LPG Charge)

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पिछले कुछ समय से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इसी 'गैस संकट' (Gas Crisis) की आड़ में देश के कई नामी कैफे और रेस्टोरेंट ने गुपचुप तरीके से ग्राहकों के बिल में एक नया चार्ज जोड़ना शुरू कर दिया।
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रेस्टोरेंट मालिकों का तर्क था कि चूंकि गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, इसलिए वे इसका भार ग्राहकों पर डाल रहे हैं। लेकिन उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के अनुसार, यह पूरी तरह से 'अनुचित व्यापार व्यवहार' (Unfair Trade Practice) है। CCPA ने इसे गंभीरता से लिया और साफ शब्दों में कहा कि रेस्टोरेंट चलाने का कोई भी इनपुट कॉस्ट (Input Cost) ग्राहकों से बिल में अलग से नहीं मांगा जा सकता।
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बेंगलुरु कैफे का वह मामला जिसने खोली पोल

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इस नए नियम की जरूरत तब महसूस हुई जब बेंगलुरु के एक जाने-माने कैफे का बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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बिल का गणित कुछ इस तरह था:

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    ग्राहक ने 2 'मिंट लेमोनेड' (नींबू पानी) ऑर्डर किए।
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    मेन्यू के हिसाब से इसकी मूल कीमत 358 रुपये थी।
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    कैफे ने ग्राहक को लुभाने के लिए 5% (17.90 रुपये) का डिस्काउंट दिया।
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    इसके बाद सरकारी टैक्स (GST) जोड़ा गया।
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    और फिर आखिर में चालाकी से 5% 'गैस क्राइसिस चार्ज' (लगभग 17.01 रुपये) जोड़ दिया गया।
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    कुल मिलाकर ग्राहक का बिल 374 रुपये का बन गया।
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एक साधारण नींबू पानी, जिसे बनाने में गैस का इस्तेमाल होता ही नहीं है (या ना के बराबर होता है), उस पर गैस चार्ज लगाना सरासर मनमानी थी। इस घटना ने CCPA को तुरंत कड़े निर्देश जारी करने पर मजबूर कर दिया।
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CCPA की नई गाइडलाइंस: क्या कहता है कानून?

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सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली सर्वोच्च संस्था है। CCPA ने रेस्टोरेंट और होटलों के लिए जो नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं, उसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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1. मेन्यू प्राइस में ही शामिल हो 'इनपुट कॉस्ट'

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब कोई रेस्टोरेंट किसी डिश की कीमत मेन्यू कार्ड में छापता है, तो उस कीमत में डिश को बनाने का सारा खर्च शामिल होना चाहिए। इसमें कच्चा माल (सब्जियां, मसाले), कर्मचारियों की सैलरी, बिजली का बिल, रेस्टोरेंट का किराया और LPG गैस का खर्च भी शामिल है। यह सब रेस्टोरेंट की 'इनपुट कॉस्ट' का हिस्सा है।
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2. बिल में सिर्फ खाना और टैक्स (GST)

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ग्राहक को दिए जाने वाले फाइनल बिल में केवल दो चीजें होनी चाहिए:
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    मेन्यू में छपी हुई खाने की कीमत।
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    सरकार द्वारा निर्धारित वस्तु एवं सेवा कर (GST), जो कि रेस्टोरेंट की श्रेणी के अनुसार 5% या 18% हो सकता है।
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3. नए-नए नामों से वसूली पर रोक

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CCPA ने पाया कि होटल मालिक 'सर्विस चार्ज' पर लगी रोक से बचने के लिए शब्दों का खेल खेल रहे हैं। वे अब:
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    फ्यूल चार्ज (Fuel Charge)
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    गैस क्राइसिस चार्ज (Gas Crisis Charge)
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    ऑपरेशनल फी (Operational Fee)
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    स्टाफ वेलफेयर चार्ज (Staff Welfare Charge)
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जैसे नामों से ग्राहकों से पैसा वसूल रहे हैं। अथॉरिटी ने इन सभी को अवैध घोषित कर दिया है।
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'सर्विस चार्ज' बैन को बाईपास करने की चालाकी

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इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। कुछ साल पहले तक हर रेस्टोरेंट बिल में 10% से 15% तक 'सर्विस चार्ज' (टिप) जबरन जोड़ देता था।
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जब ग्राहकों ने इसका विरोध किया, तो CCPA ने गाइडलाइंस जारी कीं कि 'सर्विस चार्ज' पूरी तरह से स्वैच्छिक (Optional) है। कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहकों को इसे देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता और इसे डिफॉल्ट रूप से बिल में नहीं जोड़ा जा सकता।
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रेस्टोरेंट एसोसिएशन (NRAI) इस फैसले के खिलाफ कोर्ट भी गया, लेकिन सरकार का रुख कड़ा रहा। जब रेस्टोरेंट मालिकों ने देखा कि अब वे सीधे 'सर्विस चार्ज' नहीं ले सकते, तो उन्होंने अपनी कमाई का मार्जिन बनाए रखने के लिए बिल में पीछे के दरवाजे (Backdoor) से 'LPG चार्ज' जैसे नए शुल्क जोड़ने शुरू कर दिए। सरकार की यह नई कार्रवाई उसी चोरी को पकड़ने और रोकने के लिए है।
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रेस्टोरेंट में बिल चुकाते समय ग्राहक क्या सावधानियां बरतें?

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एक जागरूक उपभोक्ता (Smart Consumer) होने के नाते, यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने अधिकारों को जानें। अगली बार जब आप बाहर खाना खाने जाएं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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    मेन्यू कार्ड को ध्यान से पढ़ें: कुछ रेस्टोरेंट मेन्यू के सबसे नीचे बहुत छोटे अक्षरों (Fine Print) में लिख देते हैं कि "Prices are exclusive of extra charges" (कीमतों में अतिरिक्त शुल्क शामिल नहीं है)। ऐसा लिखना भी अब नियमों के खिलाफ है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    बिल का ब्रेकअप चेक करें: जब बिल आए, तो अपना कार्ड या कैश देने से पहले उसे ध्यान से पढ़ें। देखें कि Sub-total के नीचे कौन-कौन से चार्ज जुड़े हैं।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    CGST और SGST की जांच करें: सिर्फ टैक्स देना आपकी जिम्मेदारी है। यह भी सुनिश्चित करें कि जिस रेस्टोरेंट में आप खा रहे हैं, क्या उसके पास GST नंबर है? (बिल पर GSTIN छपा होना चाहिए)।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    टिप (Tip) के लिए दबाव: सर्विस चार्ज या टिप देना आपकी मर्जी है। अगर आपको वेटर की सर्विस अच्छी लगी है, तो आप अपनी खुशी से टिप दे सकते हैं, लेकिन बिल में इसे जबरन नहीं जोड़ा जा सकता।
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बिल में LPG या एक्स्ट्रा चार्ज दिखे तो क्या करें? (Step-by-Step Guide)

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अगर आप किसी रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां आपको थमाए गए बिल में 'LPG चार्ज', 'फ्यूल चार्ज' या जबरन 'सर्विस चार्ज' लगा हुआ दिखता है, तो आपको चुपचाप पैसे नहीं देने हैं। आपको ये 4 अचूक कदम उठाने हैं:
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पहला कदम: रेस्टोरेंट मैनेजमेंट से शांतिपूर्वक बात करें

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    वेटर या मैनेजर को बुलाएं और उन्हें CCPA की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए बिल से उस अतिरिक्त चार्ज को हटाने के लिए कहें।
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  • \r\n
    ज्यादातर प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट विवाद से बचने के लिए तुरंत इस चार्ज को बिल से हटा (Waive off) देते हैं।
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    अगर वे तर्क दें कि "यह तो हमारे सॉफ्टवेयर में फीड है", तो उन्हें नया बिल जनरेट करने को कहें।
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दूसरा कदम: 'नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन' (NCH) 1915 पर कॉल करें

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अगर रेस्टोरेंट का स्टाफ बदतमीजी करता है या चार्ज हटाने से साफ इनकार कर देता है, तो वहीं बैठे-बैठे अपने मोबाइल से टोल-फ्री नंबर 1915 डायल करें।
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    यह उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की आधिकारिक हेल्पलाइन है।
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    आप कॉल पर अपनी समस्या बताकर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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तीसरा कदम: NCH ऐप या ई-जागृति (e-Jagriti) पोर्टल का उपयोग करें

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डिजिटल युग में शिकायत करना और भी आसान हो गया है:

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    NCH Mobile App: अपने स्मार्टफोन (Android या iOS) में NCH ऐप डाउनलोड करें। इसमें रेस्टोरेंट के बिल की फोटो खींचकर अपलोड करें और अपनी शिकायत विस्तार से लिखें।
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  • \r\n
    e-Jagriti (ई-जागृति) पोर्टल: आप भारत सरकार के ई-जागृति पोर्टल (ejagriti.nic.in) पर जाकर भी ऑनलाइन कंप्लेंट फाइल कर सकते हैं। यह पोर्टल सीधे उपभोक्ता आयोग (Consumer Commissions) से जुड़ा है।
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चौथा कदम: जिला कलेक्टर या CCPA को सीधे शिकायत

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अगर मामला बड़े स्तर का है या रेस्टोरेंट किसी बड़ी चेन का हिस्सा है जो लगातार नियमों का उल्लंघन कर रही है, तो आप:
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    अपने जिले के कलेक्टर (District Magistrate) या नोडल अधिकारी को लिखित शिकायत दे सकते हैं।
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    आप अपनी शिकायत सीधे CCPA को ईमेल (com-ccpa@nic.in) के माध्यम से भी भेज सकते हैं, ताकि उस रेस्टोरेंट का लाइसेंस रद्द करने या भारी जुर्माना लगाने जैसी कड़ी कार्रवाई हो सके।
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रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का क्या कहना है?

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हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। रेस्टोरेंट मालिकों के संगठन, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) का तर्क है कि पिछले कुछ सालों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, सब्जियों और तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके अलावा, कोरोना महामारी के बाद से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री अभी तक पूरी तरह उबर नहीं पाई है।
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हालांकि, अर्थशास्त्रियों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि रेस्टोरेंट को अपना मुनाफा बनाए रखना है, तो उन्हें अपने डिश की मूल कीमत (Menu Price) बढ़ा देनी चाहिए। ग्राहकों को अंधेरे में रखकर पिछले दरवाजे से नए-नए चार्ज लगाना व्यापारिक नैतिकता के खिलाफ है। पारदर्शी कीमत (Transparent Pricing) ही व्यापार का सही तरीका है।
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वैश्विक स्तर पर क्या हैं नियम? (Global Perspective)

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अगर हम दुनिया के अन्य देशों की बात करें, तो:
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    अमेरिका (USA): वहां टिपिंग (Tipping) कल्चर बहुत मजबूत है, लेकिन वहां भी 'गैस चार्ज' जैसी कोई चीज ग्राहकों से नहीं वसूली जाती।
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    यूरोप (Europe): फ्रांस और इटली जैसे देशों में 'सर्विस चार्ज' कानूनन मेन्यू की कीमत में ही शामिल होता है। अलग से कोई सरचार्ज लेना अपराध माना जाता है।
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    ऑस्ट्रेलिया (Australia): वहां के कंज्यूमर लॉ बहुत सख्त हैं। जो कीमत मेन्यू में छपी है, ग्राहक को उससे एक सेंट भी ज्यादा नहीं देना होता। वीकेंड या पब्लिक हॉलिडे पर कुछ रेस्टोरेंट 'सरचार्ज' लेते हैं, लेकिन वह भी मेन्यू में बहुत बड़े अक्षरों में पहले से लिखा होना जरूरी है।
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भारत का CCPA भी अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ता कानूनों को लागू कर रहा है, जो कि भारतीय ग्राहकों के लिए एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है।
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"ग्राहक ही राजा है" (Customer is King) यह कहावत व्यापार की दुनिया में सदियों पुरानी है। केंद्र सरकार और CCPA द्वारा 'LPG चार्ज' और अन्य छिपे हुए शुल्कों पर लगाई गई यह रोक इस बात को साबित करती है। एक जागरूक नागरिक के रूप में, यह आपका पैसा है और इसे कैसे खर्च करना है, यह तय करने का अधिकार सिर्फ आपका है। अगली बार जब आप बाहर खाना खाएं, तो बिल को सिर्फ एक रसीद समझकर अपनी जेब में न रखें, बल्कि उसे ध्यान से पढ़ें। आपका एक छोटा सा कदम और विरोध, हजारों अन्य ग्राहकों को ठगे जाने से बचा सकता है। जागो ग्राहक जागो!