खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली (Business & E-commerce Desk): भारत में ई-कॉमर्स का दायरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। घर बैठे एक क्लिक पर सामान मंगाना आज हमारी लाइफस्टाइल का मुख्य हिस्सा बन चुका है। खासकर जब त्योहारी सीजन (Festive Season) आता है, तो अमेज़न, फ्लिपकार्ट से लेकर विभिन्न ब्रांड्स की वेबसाइट्स पर बंपर सेल शुरू हो जाती है। लोग भारी-भरकम डिस्काउंट और कैशबैक की उम्मीद में जमकर खरीदारी करते हैं।
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​लेकिन इस बार त्योहारी जश्न शुरू होने से ठीक पहले ऑनलाइन खरीदारों को एक बड़ा झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन कंपनियों में शुमार दिल्लीवरी (Delhivery) ने अपने डिलीवरी और शिपिंग चार्ज में बढ़ोतरी कर दी है। 1 सितंबर से लागू हुए इन नए नियमों के बाद अब ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर करते समय चेकआउट पेज पर अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बदलाव के पीछे क्या वजह है और इसका आपकी जेब पर क्या असर होगा।
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​1 सितंबर से कितना बढ़ा डिलीवरी चार्ज? (New Shipping Rates Breakdown)

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​लॉजिस्टिक्स कंपनियों के संचालन खर्च (Operational Costs) में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। दिल्लीवरी द्वारा संशोधित दरों के अनुसार, शिपमेंट के प्रकार और वजन के आधार पर अतिरिक्त शुल्क जोड़े गए हैं:
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    एक्सप्रेस शिपमेंट (Express Shipment): अगर आप किसी सामान की तुरंत या फास्ट डिलीवरी चाहते हैं, तो अब एक्सप्रेस शिपमेंट के लिए प्रति पार्सल ₹4 तक का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।
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    सरफेस शिपमेंट (Surface Shipment): सड़क मार्ग या ट्रेन के जरिए भेजे जाने वाले सामान्य या भारी सामानों के लिए प्रति पार्सल ₹2 तक का अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है।
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    वजन आधारित बढ़ोतरी (Weight-based Surcharge): यदि आपके पार्सल का वजन 500 ग्राम से अधिक है, तो उसकी डिलीवरी लागत में लगभग 5% से 10% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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(विशेष नोट: यह नया शुल्क मौजूदा डिलीवरी फीस के ऊपर अलग से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में डिलीवरी का कुल खर्च पार्सल के वजन, पैकेज के आकार और दो शहरों के बीच की दूरी के आधार पर तय होता है।)
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​D2C ब्रांड्स और ग्राहकों की जेब पर इसका क्या असर होगा?

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​इस बदलाव का सबसे गहरा असर उन कंपनियों और ग्राहकों पर पड़ेगा जो D2C (Direct-to-Consumer) मॉडल पर काम करते हैं। D2C वे ब्रांड्स होते हैं जो किसी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की ऑफिशियल वेबसाइट (Standalone Websites) के जरिए सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेचते हैं।
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किन पॉपुलर ब्रांड्स पर पड़ेगा असर?

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भारत में आज के युवाओं के बीच कई D2C ब्रांड्स बेहद लोकप्रिय हैं:
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    ब्यूटी और स्किन केयर: Mamaearth, Nykaa, Sugar Cosmetics
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    ऑडियो और टेक गैजेट्स: boAt, Noise, Boult Audio
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    होम और स्लीप सॉल्यूशंस: Wakefit, The Sleep Company
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    फैशन और क्लोदिंग: Bewakoof, Snitch, XYXX
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ग्राहकों को कैसे चुकानी होगी कीमत?

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कई D2C स्टार्टअप्स और कंपनियां बहुत कम प्रॉफिट मार्जिन पर अपने उत्पाद बेचती हैं। जब लॉजिस्टिक्स कंपनियां (जैसे दिल्लीवरी) अपनी शिपिंग फीस बढ़ाती हैं, तो इन ब्रांड्स के पास अपने खर्च को मैनेज करने के लिए दो ही विकल्प बचते हैं:
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    फ्री डिलीवरी की सीमा (Threshold) बढ़ाना: जो कंपनियां पहले ₹499 या ₹599 की खरीदारी पर फ्री डिलीवरी देती थीं, वे अब इसे बढ़ाकर ₹799 या ₹999 कर सकती हैं।
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    प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा: कंपनियां अपने सामान की एमआरपी (MRP) या बेस प्राइस में ही 10 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं, ताकि बढ़े हुए लॉजिस्टिक्स खर्च की भरपाई हो सके।
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त्योहारों से ठीक पहले क्यों बढ़ाए गए डिलीवरी चार्ज? (3 मुख्य वजहें)

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​सामान्य तौर पर, लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स कंपनियां अक्टूबर के महीने में यानी दिवाली की पीक सेल के दौरान अपने रेट्स में बदलाव करती हैं। लेकिन इस बार सितंबर की शुरुआत से ही दरों का बढ़ना कई लोगों को हैरान कर रहा है। इसके पीछे इंडस्ट्री के जानकारों ने 3 मुख्य कारण बताए हैं:
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    हवाई ईंधन (Aviation Turbine Fuel - ATF) की कीमतें: एक्सप्रेस डिलीवरी और एयर कार्गो के जरिए सामान भेजने में हवाई जहाजों का इस्तेमाल होता है। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एयर शिपिंग के खर्च को काफी बढ़ा दिया है।
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    ग्राउंड स्टाफ और वेयरहाउस का खर्च: त्योहारी सीजन को देखते हुए लॉजिस्टिक्स कंपनियों को बड़े पैमाने पर अस्थायी कर्मचारियों, डिलीवरी एजेंट्स और वेयरहाउस स्टाफ की नियुक्ति करनी पड़ती है। इनकी सैलरी और ऑपरेशनल कॉस्ट में भारी इजाफा हुआ है।
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    सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स इन्फ्लेशन: देश भर में फैले डिलीवरी नेटवर्क्स, ट्रकों के डीजल खर्च और टोल टैक्स में लगातार महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिसका असर अंततः शिपिंग दरों पर पड़ा है।
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स्मार्ट शॉपिंग टिप्स: बढ़े हुए डिलीवरी चार्ज से कैसे बचाएं अपने पैसे?

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​भले ही लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने रेट बढ़ा दिए हों, लेकिन थोड़ी सी सूझबूझ अपनाकर आप फेस्टिव सीजन में अपनी ऑनलाइन शॉपिंग को बजट-फ्रेंडली बना सकते हैं:
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    एक साथ कार्ट में जोड़ें सामान (Club Your Orders): छोटे-छोटे अलग-अलग ऑर्डर्स बुक करने के बजाय घर की जरूरत का सारा सामान एक ही बार में कार्ट में डालकर चेकआउट करें। इससे आप आसानी से 'फ्री डिलीवरी' के न्यूनतम मूल्य (Minimum Cart Value) के दायरे में आ जाएंगे।
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    कूपन और बैंक ऑफर्स का इस्तेमाल करें: चेकआउट पेज पर जाने से पहले ब्रांड्स द्वारा दिए जाने वाले प्रोमो कोड्स और क्रेडिट/डेबिट कार्ड के इंस्टेंट डिस्काउंट ऑफर्स को जरूर अप्लाई करें। इससे डिलीवरी चार्ज में लगने वाला अतिरिक्त पैसा डिस्काउंट से एडजस्ट हो जाएगा।
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    प्राइस कंपैरिजन जरूर करें: कोई भी उत्पाद खरीदने से पहले उसे D2C ब्रांड की ऑफिशियल वेबसाइट और अन्य बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (Amazon/Flipkart) दोनों पर चेक कर लें कि कहां बेहतर डील या मुफ्त शिपिंग मिल रही है।
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1 सितंबर से लागू हुए नए ऑनलाइन शॉपिंग और लॉजिस्टिक्स नियमों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले त्योहारी सीजन में ग्राहकों को अपनी पॉकेट थोड़ी और ढीली करनी पड़ सकती है। हालांकि लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बढ़ती लागत को देखते हुए यह संशोधन जरूरी माना जा रहा है, लेकिन अंततः यह कंज्यूमर के शॉपिंग बजट को प्रभावित करेगा। इसलिए, खरीदारी करते समय अपने कार्ट वैल्यू और शिपिंग फीस पर खास नजर रखें।
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