भारत के विभिन्न हिस्सों में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के प्रकोप ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है, जिससे झुलसाने वाली लू (Heatwave) का खतरा बढ़ गया है। इस खतरनाक मौसम का सबसे ज्यादा खामियाजा उन श्रमिकों और मजदूरों को भुगतना पड़ता है, जो खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में काम करते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने देश भर के कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'श्रमिकों के लिए हीटवेव एडवाइजरी' (Heatwave Advisory) जारी की है।READ ALSO:-मध्य पूर्व युद्ध का भीषण असर: कंडोम और रबर दस्तानों की कीमतों में 30% तक का उछाल; दुनिया के दिग्गज निर्माताओं ने दी कड़ी चेतावनी
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इस एडवाइजरी के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे चिलचिलाती धूप में काम करने वाले मजदूरों, विशेषकर निर्माण क्षेत्र (Construction Sector) और बाहरी गतिविधियों में लगे लोगों को लू के जानलेवा खतरों से बचाने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाएं।
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काम के घंटों में बदलाव और लचीलापन (Rescheduling of Work Hours)
\r\n\r\nमंत्रालय द्वारा जारी की गई इस नई एडवाइजरी में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव काम के घंटों (Working Hours) को लेकर किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तेज धूप में लगातार काम करने से मजदूरों की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए, राज्यों से कहा गया है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों, कारखानों और निर्माण कंपनियों को काम के घंटों को 'री-शेड्यूल' (Reschedule) करने का सख्त निर्देश दें।
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इस नए नियम के तहत, दिन के उस समय जब गर्मी अपने चरम पर होती है—यानी दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे के बीच—किसी भी प्रकार के भारी शारीरिक श्रम या बाहरी काम को रोकने या कम करने की सलाह दी गई है। नियोक्ताओं (Employers) से कहा गया है कि वे मजदूरों की शिफ्ट को सुबह जल्दी या देर शाम के समय में बदलें। इसके अलावा, फैक्ट्रियों और खदानों में काम करने वालों के लिए भी प्रबंधन को एक लचीला (Flexible) रुख अपनाने को कहा गया है, ताकि अत्यधिक गर्मी के दौरान काम की गति को धीमा किया जा सके और मजदूरों को बीच-बीच में आराम करने का पर्याप्त समय मिल सके।
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कार्यस्थलों पर पेयजल और शीतलन की अनिवार्य व्यवस्था
\r\n\r\nगर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन (Dehydration) और हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बनकर उभरती हैं। इसे रोकने के लिए 'श्रमिकों के लिए हीटवेव एडवाइजरी' में कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य कर दिया गया है।
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एडवाइजरी के अनुसार, सभी नियोक्ताओं और ठेकेदारों की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होगी कि वे कार्यस्थलों पर पर्याप्त मात्रा में साफ और ठंडे पीने के पानी की व्यवस्था करें। इसके साथ ही:
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- \r\n छायादार विश्राम स्थल: खुले में काम कर रहे मजदूरों के लिए टेंट या शेड लगाकर छायादार विश्राम स्थल बनाए जाएं, ताकि वे ब्रेक के दौरान सीधे धूप से बच सकें।\r\n \r\n
- \r\n उचित वेंटिलेशन: बंद कारखानों, गोदामों और बेसमेंट में काम करने वाले मजदूरों के लिए उचित वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही) और एग्जॉस्ट फैन सुनिश्चित किए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n आपातकालीन चिकित्सा किट: निर्माण स्थलों और खदानों पर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आइस पैक (Ice Packs), ओआरएस (ORS) के पैकेट और हीट-इल्नेस (गर्मी से होने वाली बीमारी) से बचाव की सभी आवश्यक चिकित्सा सामग्री हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए।\r\n \r\n
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विशेष समूहों और जोखिम वाले क्षेत्रों पर सरकार का फोकस
\r\n\r\nकुछ खास तरह के कामों में गर्मी का जोखिम सामान्य से कई गुना अधिक होता है। इसलिए, सरकार ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया है कि निर्माण श्रमिकों, ईंट-भट्ठा (Brick Kiln) मजदूरों और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ईंट-भट्ठों में आग की भट्टी के पास काम करने वाले मजदूर दोहरी गर्मी का शिकार होते हैं, इसलिए वहां काम की शिफ्ट को छोटा करने और ठंडे पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
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खदानों और कारखानों के लिए 'बडी सिस्टम' (Buddy System)
\r\n\r\nभूमिगत खदानों और भारी मशीनरी वाले कारखानों के प्रबंधन को एक विशेष सलाह दी गई है। जहां निरंतर कार्य अनिवार्य है और मशीनों को रोका नहीं जा सकता, वहां मजदूरों को अकेले काम करने से रोका जाए। इसके बजाय, कम से कम दो व्यक्तियों की टीम (Buddy System) लगाई जाए। इसका फायदा यह होगा कि यदि किसी एक मजदूर को गर्मी के कारण चक्कर आता है, घबराहट होती है या हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं, तो दूसरा साथी तुरंत उसकी सेहत पर नजर रख सकेगा और समय रहते चिकित्सा सहायता बुला सकेगा।
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लेबर चौकों पर निगरानी और जागरूकता अभियान
\r\n\r\nकेवल नियम बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उन नियमों के प्रति जागरूकता फैलाना भी उतना ही आवश्यक है। भारत में आज भी लाखों दैनिक वेतन भोगी मजदूर (Daily Wagers) हर सुबह 'लेबर चौकों' (Labour Chowks) पर काम की तलाश में इकट्ठा होते हैं। श्रम मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासनों को सुझाव दिया है कि वे इन लेबर चौकों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर सघन जागरूकता अभियान चलाएं।
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इन अभियानों के तहत स्थानीय भाषाओं में पोस्टर और बैनर लगाए जाएंगे, जिनमें लू से बचने के उपाय और 'क्या करें, क्या न करें' (Do's and Don'ts) की जानकारी होगी। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए जाएंगे, जिनका उपयोग मजदूर किसी भी स्वास्थ्य संकट या ठेकेदार द्वारा सुविधाओं के अभाव की शिकायत करने के लिए कर सकेंगे।
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जवाबदेही और नियमित रिपोर्टिंग की व्यवस्था
\r\n\r\nनियमों का सख्ती से पालन हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्यों की जवाबदेही भी तय कर दी है। श्रम मंत्रालय ने सभी संबंधित विभागों, श्रम आयुक्तों (Labour Commissioners) और औद्योगिक संगठनों को यह निर्देश दिया है कि वे एडवाइजरी के पालन को लेकर की गई अपनी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट हर 15 दिन में मंत्रालय को सौंपें। इस निरंतर निगरानी से यह सुनिश्चित होगा कि यह 'श्रमिकों के लिए हीटवेव एडवाइजरी' केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी इसका कड़ाई से पालन हो और मजदूरों की जान बचाई जा सके।
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बढ़ते वैश्विक तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में लू का प्रकोप हर साल लंबा और अधिक जानलेवा होता जा रहा है। ऐसे में 'श्रमिकों के लिए हीटवेव एडवाइजरी' का जारी होना केंद्र सरकार का एक बेहद सकारात्मक और जीवनरक्षक कदम है। चिलचिलाती धूप में देश के बुनियादी ढांचे का निर्माण करने वाले इन मजदूरों की सेहत और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। काम के घंटों में बदलाव, पर्याप्त पेयजल, छायादार विश्राम स्थल और 'बडी सिस्टम' जैसी पहल निश्चित रूप से हीट स्ट्रोक और गर्मी से होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने में मददगार साबित होगी। अब यह राज्य सरकारों, नियोक्ताओं और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे इन दिशा-निर्देशों को पूरी ईमानदारी और सख्ती के साथ लागू करें, ताकि हमारे देश का श्रमिक वर्ग सुरक्षित और स्वस्थ माहौल में अपना काम कर सके।