अगर आपके घर में अभी भी लाल रंग का भारी-भरकम एलपीजी (LPG) सिलेंडर आता है और आपकी कॉलोनी या मोहल्ले में गैस पाइपलाइन (PNG) की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। केंद्र सरकार देश के घरेलू रसोई गैस सिस्टम को डिजिटल और स्मार्ट बनाने के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव करने जा रही है।READ ALSO:-बिजनौर में कांवड़ यात्रा की धूम: छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर 24 अगस्त को सभी स्कूल रहेंगे बंद, DM का सख्त आदेश जारी
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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के तहत, जिन क्षेत्रों में पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्क मौजूद है, वहां अब एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइप वाली गैस के इस्तेमाल को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य शहरी इलाकों को पूरी तरह से सिलेंडरों के झंझट से मुक्त करना है।
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क्या हैं नए नियम? (LPG vs PNG New Policy)
\r\n\r\nनए गैस वितरण और एलपीजी नियंत्रण आदेशों के तहत सरकार ने दोहरे कनेक्शन की नीति पर पूर्ण विराम लगा दिया है। अब उपभोक्ता एक साथ दोनों तरह के गैस कनेक्शनों का लाभ नहीं उठा सकेंगे।
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- \r\n एक साथ नहीं चलेंगे दोनों कनेक्शन: जिन इलाकों में पीएनजी नेटवर्क एक्टिव है, वहां उपभोक्ता एक ही घर या पते पर एलपीजी सिलेंडर और पीएनजी कनेक्शन एक साथ नहीं रख पाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n नोटिस और समय सीमा: गैस वितरण कंपनियों द्वारा उस क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन में शिफ्ट होने के लिए आधिकारिक नोटिस दिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n सिलेंडर सप्लाई पर रोक: यदि नोटिस मिलने के तय समय के भीतर उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसके घर एलपीजी (LPG) सिलेंडर की सप्लाई को रोक दिया जाएगा।\r\n \r\n
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\r\n\r\n\r\nध्यान दें: सरकार ने साफ किया है कि यह नियम केवल उन्हीं रिहायशी क्षेत्रों में लागू किया जाएगा जहां पीएनजी की पाइपलाइन पूरी तरह बिछ चुकी है और गैस सप्लाई चालू स्थिति में है।\r\n
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एक नज़र में: LPG और PNG का तुलनात्मक विश्लेषण
\r\n\r\n| \r\n फीचर्स / मानक \r\n | \r\n \r\n LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) \r\n | \r\n \r\n PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) \r\n | \r\n
| \r\n आपूर्ति का माध्यम \r\n | \r\n \r\n सिलेंडर (ट्रक/डिलीवरी वैन द्वारा) \r\n | \r\n \r\n घर तक बिछी भूमिगत पाइपलाइन द्वारा \r\n | \r\n
| \r\n सुरक्षा का स्तर \r\n | \r\n \r\n हाई प्रेशर; लीकेज पर ब्लास्ट का खतरा \r\n | \r\n \r\n हवा से हल्की; लीक होने पर उड़ जाती है, अधिक सुरक्षित \r\n | \r\n
| \r\n उपयोग एवं उपलब्धता \r\n | \r\n \r\n खत्म होने पर बुकिंग और इंतजार की मजबूरी \r\n | \r\n \r\n 24 घंटे और 365 दिन निर्बाध (Uninterrupted) सप्लाई \r\n | \r\n
| \r\n भुगतान प्रक्रिया \r\n | \r\n \r\n एडवांस में पूरा पैसा देकर बुकिंग \r\n | \r\n \r\n इस्तेमाल के बाद (Postpaid) मीटर रीडिंग पर बिल \r\n | \r\n
| \r\n जगह की खपत \r\n | \r\n \r\n रसोई में सिलेंडर रखने के लिए अलग जगह चाहिए \r\n | \r\n \r\n शून्य स्थान खपत; दीवार पर केवल एक छोटा मीटर \r\n | \r\n
आखिर सरकार ने क्यों लिया यह बड़ा फैसला?
\r\n\r\nपेट्रोलियम मंत्रालय के इस सख्त कदम के पीछे केवल उपभोक्ताओं की सुविधा ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक और रणनीतिक कारण भी शामिल हैं:
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1. अंतरराष्ट्रीय संकटों और आयात बिल से बचाव
\r\n\r\nभारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा एलपीजी विदेशों से आयात (Import) करता है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, तनाव या समुद्री मार्गों में रुकावट पैदा होती है, तो एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। इसके विपरीत, घरेलू पीएनजी (PNG) की आपूर्ति भारत में ही उत्पादित प्राकृतिक गैस से प्राथमिकता के आधार पर की जाती है, जिससे वैश्विक उथल-पुथल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।
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2. लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन खर्च में कटौती
\r\n\r\nलाखों सिलेंडरों को बॉटलिंग प्लांट से निकालकर ट्रकों के जरिए शहरों और गलियों तक पहुंचाने में भारी लॉजिस्टिक्स खर्च आता है। इससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और कार्बन उत्सर्जन (Pollution) दोनों बढ़ते हैं। पाइपलाइन के इस्तेमाल से यह पूरा खर्च बचेगा।
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3. उपभोक्ता सुरक्षा और सहूलियत
\r\n\r\nपीएनजी गैस प्राकृतिक रूप से हवा से हल्की होती है। यदि कभी दुर्भाग्यवश लीकेज हो भी जाए, तो यह हवा में तेजी से फैलकर गायब हो जाती है, जिससे आग लगने या विस्फोट का खतरा न के बराबर होता है। इसके अलावा, बार-बार सिलेंडर रीफिल कराने की झंझट भी पूरी तरह खत्म हो जाती है।
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जिला स्तर पर बनेगी 'PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी' (PCC)
\r\n\r\nइस पूरी व्यवस्था को सुचारू और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं:
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- \r\n नोडल अधिकारियों की तैनाती: पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिला स्तर पर नोडल अधिकारी (Nodal Officer) नियुक्त करने का निर्देश दिया है।\r\n \r\n
- \r\n पीएनजी समन्वय समिति (PCC): हर जिले में 'PNG Coordination Committee' बनाई जाएगी। यह समिति स्थानीय प्रशासन, हाउसिंग सोसायटियों, तेल कंपनियों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के बीच तालमेल बिठाएगी।\r\n \r\n
- \r\n जागरूकता अभियान: यह कमेटी उन मोहल्लों और सोसायटियों को चिन्हित करेगी जहां नेटवर्क होने के बावजूद लोग पीएनजी नहीं ले रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को पीएनजी के आर्थिक व व्यावहारिक फायदों के बारे में जागरूक किया जाएगा।\r\n \r\n
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आम जनता के लिए सलाह
\r\n\r\n정ब सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है कि गैस इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा इस्तेमाल हो और सिलेंडरों की ढुलाई पर होने वाले फिजूलखर्च को रोका जाए। यदि आपके इलाके में पीएनजी पाइपलाइन आ चुकी है, तो नोटिस का इंतजार करने के बजाय स्वयं आगे आकर पीएनजी कनेक्शन के लिए अप्लाई कर दें। इससे आप अचानक सिलेंडर सप्लाई रुकने की परेशानी से बच सकेंगे और सुरक्षित, सस्ती व 24x7 मिलने वाली रसोई गैस का लाभ उठा सकेंगे।
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