खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली/फूड एंड हेल्थ डेस्क:
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भारत में शराब और अल्कोहलिक बेवरेजेज (Alcoholic Beverages) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कई शराब कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए अपने उत्पादों में नए-नए प्रयोग कर रही हैं। इन प्रयोगों में सबसे आम है— शराब में तरह-तरह के फ्लेवर्स (Flavors) मिलाना और विज्ञापनों में ऐसे दावे करना जिससे यह प्रतीत हो कि उनका उत्पाद स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। लेकिन अब इन शराब कंपनियों की इस मनमानी पर सीधा ब्रेक लगने जा रहा है।
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​भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), जो देश में खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है, ने शराब बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ एक बेहद सख्त नोटिस जारी किया है। इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को गुमराह होने से बचाना और उत्पादों की गुणवत्ता में पारदर्शिता (Transparency) लाना है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि एफएसएसएआई (FSSAI) के नए दिशा-निर्देश क्या कहते हैं।
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​बिना अनुमति के फ्लेवर के इस्तेमाल पर 'रेड सिग्नल'

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​आजकल बाजार में एप्पल वोदका, ऑरेंज जिन, चॉकलेट रम और कॉफी व्हिस्की जैसे कई फ्लेवर्ड अल्कोहलिक ड्रिंक्स की भरमार है। युवा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां लगातार नए फ्लेवर लॉन्च कर रही हैं। लेकिन FSSAI ने इस ट्रेंड पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
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​प्राधिकरण द्वारा जारी नोटिस में शराब कंपनियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे बिना उचित अनुमति के और निर्धारित मानकों से ज्यादा फ्लेवर का इस्तेमाल न करें।
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    अल्कोहलिक बेवरेज विनियम 2018 (Alcoholic Beverages Regulations 2018): इस अधिनियम के तहत, रम (Rum), ब्रांडी (Brandy), जिन (Gin), व्हिस्की (Whiskey), वाइन (Wine) और बीयर (Beer) जैसे मादक उत्पादों में केवल तय सीमा के भीतर ही नेचुरल (प्राकृतिक) स्वाद और फ्लेवर मिलाने की अनुमति है।
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    प्राकृतिक बनाम कृत्रिम स्वाद: कई कंपनियां लागत कम करने और तेज स्वाद देने के लिए सिंथेटिक या कृत्रिम फ्लेवर्स का भारी मात्रा में उपयोग कर रही थीं, जो ग्राहकों की सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। FSSAI ने साफ किया है कि उत्पादों के निर्माण में इस तरह के भ्रामक और रसायनिक तरीकों का इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा नियमों (Food Safety Rules) के सख्त खिलाफ है।
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भ्रामक दावे: 'शराब स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है' - इस झूठ पर कड़ा प्रहार

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​FSSAI के इस नोटिस का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विज्ञापन और मार्केटिंग से जुड़ा है। हाल के दिनों में यह देखा गया था कि कुछ शराब कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार (Promotion), लेबलिंग (Labeling) और डिजिटल मार्केटिंग में ऐसे शब्दों का चतुराई से इस्तेमाल कर रही थीं, जिनसे ग्राहकों (विशेषकर युवाओं) को यह संदेश मिल सकता है कि शराब का सेवन स्वास्थ्य या पोषण (Nutrition) के लिए लाभकारी है।
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    पोषण का झूठा दावा: कुछ ब्रांड्स अपनी बीयर या वाइन में 'लो-कैलोरी', 'विटामिन से भरपूर', 'एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त' या 'हर्बल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे।
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    एफएसएसएआई का स्पष्ट रुख: प्राधिकरण ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शराब कभी भी स्वास्थ्यवर्धक पेय (Health Drink) की श्रेणी में नहीं आ सकती। इसलिए, शराब की बोतलों पर या उसके किसी भी विज्ञापन में स्वास्थ्य (Health) या पोषण (Nutrition) से जुड़े किसी भी प्रकार के दावों को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है। ऐसे दावे पूरी तरह से भ्रामक (Misleading) हैं और उपभोक्ताओं को गुमराह करते हैं।
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नियमों में बदलाव: अब क्या-क्या बदल जाएगा?

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​FSSAI की इस सख्ती के बाद शराब उद्योग की पैकेजिंग और मार्केटिंग रणनीतियों में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू होंगे:
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    पैकेजिंग और लेबलिंग (Packaging & Labeling): अब शराब की बोतलों के लेबल पर किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य लाभ, विटामिन्स या मिनरल्स से जुड़े दावे छापने पर पूरी तरह रोक होगी।
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    विज्ञापन पर सख्ती (Strict Advertising Rules): टीवी, प्रिंट या सोशल मीडिया पर चलने वाले प्रमोशनल कैंपेन में कंपनियां कोई ऐसा दृश्य या शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी जो शराब को एक 'हेल्दी लाइफस्टाइल' का हिस्सा बताता हो।
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    फ्लेवर की जानकारी: यदि कंपनी ने अपनी रम, जिन या वाइन में किसी फ्लेवर का इस्तेमाल किया है, तो उसे पारदर्शी रूप से लेबल पर यह बताना होगा कि वह फ्लेवर प्राकृतिक (Natural) है या कृत्रिम (Artificial), और उसकी मात्रा FSSAI के मानकों के भीतर है या नहीं।
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    सख्त ऑडिट (Strict Audits): जो कंपनियां इन भ्रामक विज्ञापनों को फैलाएंगी या विनियम 2018 का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने से लेकर भारी जुर्माना लगाने तक की कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
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क्या उपभोक्ताओं और बिक्री पर कोई असर पड़ेगा?

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​जब भी इस तरह के सख्त नोटिस आते हैं, तो आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या बाजार में उनकी पसंदीदा ड्रिंक मिलना बंद हो जाएगी? इसका स्पष्ट जवाब है— नहीं।
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    बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं: FSSAI के इस नोटिस का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बाजार में बीयर, रम, व्हिस्की या ब्रांडी की बिक्री पर कोई रोक या प्रतिबंध लगाया गया है।
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    गुणवत्ता में सुधार: यह कार्रवाई मुख्य रूप से कंपनियों के मार्केटिंग के तरीके, लेबलिंग और उत्पाद की शुद्धता पर केंद्रित है। उपभोक्ताओं के लिए यह एक सकारात्मक कदम है, क्योंकि अब उन्हें यह स्पष्ट रूप से पता होगा कि वे जो ड्रिंक खरीद रहे हैं, उसमें क्या मिलाया गया है और वह बिना किसी झूठे 'हेल्थ क्लेम' के बेची जा रही है। इससे ग्राहकों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी उत्पाद मिलेंगे।
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इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य क्या है?

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​भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के इस कड़े कदम का एकमात्र और सबसे बड़ा उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।
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​FSSAI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बाजार में बिकने वाले किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ को लेकर तब तक कोई वैज्ञानिक या स्वास्थ्य संबंधी दावा न किया जाए, जब तक कि वह पूरी तरह से प्रमाणित (Certified) न हो। चूंकि अल्कोहलिक बेवरेज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं, इसलिए इनके साथ 'सेहत' शब्द को जोड़ना नैतिक और कानूनी दोनों ही पैमानों पर गलत है। एफएसएसएआई चाहता है कि सभी शराब कंपनियां इन निर्धारित नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करें और सच के आधार पर ही अपने व्यापारिक फैसले लें, ताकि आम भारतीय उपभोक्ता किसी भी तरह के भ्रम या धोखे का शिकार न हो।