खबरीलाल डेस्क
भारतीय रसोई में दाल को तड़का लगाना हो या सब्जी में स्वाद और सुगंध बढ़ानी हो, हींग (Asafoetida) का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। बाजार में हींग के नाम पर कई बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड्स मौजूद हैं, जिन पर उपभोक्ता आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। लेकिन, देश के शीर्ष खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। FSSAI ने गुणवत्ता मानकों का घोर उल्लंघन पाए जाने के बाद देश के दो सबसे बड़े और पुराने मसाला ब्रांड्स— एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (Everest Food Products) और लालजी गोधू एंड कंपनी (Laljee Godhoo & Co. - LG Hing) के हींग पाउडर की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।READ ALSO:-EMI बाउंस होने पर अब नहीं सताएगा रिकवरी एजेंट का खौफ! RBI ने बदले लोन वसूली के नियम, मोबाइल लॉक करने और पर्सनल डेटा चुराने पर लगी सख्त रोक
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FSSAI द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई ने पूरे एफएमसीजी (FMCG) और मसाला उद्योग में हड़कंप मचा दिया है। प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला (Primary Food Laboratory) की जांच में इन दोनों नामी कंपनियों के हींग के सैंपल न केवल घटिया (Sub-standard) पाए गए, बल्कि उन्हें गलत तरीके से ब्रांड (Misbranded) भी किया गया था।
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FSSAI की जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

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    बिक्री पर तत्काल रोक: एफएसएसएआई ने एवरेस्ट और लालजी गोधू के सभी प्रकार के हींग पाउडर की बिक्री को बाजार में तुरंत रोक दिया है।
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    एवरेस्ट की हींग में बड़ी खामी: एवरेस्ट हींग में 'अल्कोहल में घुलनशील अर्क' (Alcohol-soluble extract) का स्तर शून्य (0%) पाया गया, जबकि मानक कम से कम 5% होना चाहिए।
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    लालजी गोधू में मिलावट: लालजी गोधू (LG) की मिश्रित हींग (पाउडर और टुकड़े) में अत्यधिक मात्रा में स्टार्च (Starch) की मिलावट पाई गई।
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    मानकों का उल्लंघन: दोनों कंपनियों के उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम (Food Safety and Standards Regulations), 2011 के कड़े प्रावधानों को पार करने में पूरी तरह विफल रहे।
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    आगे की चेतावनी: नियामक ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि खामियों को तुरंत दूर नहीं किया गया और एक स्पष्ट एक्शन प्लान नहीं सौंपा गया, तो कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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एवरेस्ट हींग: शून्य प्रतिशत अर्क ने खोली गुणवत्ता की पोल

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एवरेस्ट भारत का एक बहुत बड़ा मसाला ब्रांड है, जिसके उत्पाद देश के कोने-कोने में बिकते हैं। लेकिन, FSSAI की लेबोरेटरी टेस्टिंग में एवरेस्ट की हींग के जो परिणाम सामने आए हैं, वे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और विश्वास के साथ बड़े खिलवाड़ की ओर इशारा करते हैं।
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प्राथमिक खाद्य प्रयोगशाला के खाद्य विश्लेषक (Food Analyst) ने एवरेस्ट के हींग पाउडर (मिश्रित हींग) के नमूनों की गहराई से जांच की। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार, असली और शुद्ध हींग (कंपाउंडेड हींग) में अल्कोहल में घुलनशील अर्क की मात्रा कम से कम 5 प्रतिशत (5%) होनी चाहिए। यह अर्क हींग की शुद्धता और उसमें मौजूद आवश्यक तेलों व रेजिन का मुख्य पैमाना होता है।
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लेकिन, एवरेस्ट के मुख्य हींग पाउडर के नमूनों में यह अर्क शून्य प्रतिशत (0%) पाया गया। इसका सीधा अर्थ है कि उत्पाद में हींग के मूल और शुद्ध तत्व नदारद थे।
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एवरेस्ट के विभिन्न सैंपल्स की स्थिति (FSSAI रिपोर्ट के अनुसार):

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हींग का प्रकार (Type of Hing)
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FSSAI का निर्धारित मानक (न्यूनतम)
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एवरेस्ट के सैंपल में पाई गई मात्रा
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परिणाम (Result)
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सामान्य हींग पाउडर (मिश्रित)
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5.0%
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0.0% (शून्य)
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फेल (सब-स्टैंडर्ड)
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पीली हींग पाउडर (Yellow Hing)
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5.0%
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3.29%
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फेल (सब-स्टैंडर्ड)
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काली हींग पाउडर (Black Hing)
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5.0%
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4.40%
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फेल (सब-स्टैंडर्ड)
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इस भारी गड़बड़ी के सामने आने के बाद, एफएसएसएआई ने एवरेस्ट के मामले में हींग पाउडर की सभी किस्मों की बिक्री तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दी है। इसके अलावा, पैकेट पर दी गई जानकारी और अंदर के उत्पाद में भारी अंतर होने के कारण इसे 'गलत ब्रांडिंग' (Misbranding) की श्रेणी में भी रखा गया है।
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लालजी गोधू (LG Hing): 130 साल पुराने ब्रांड में मिला अत्यधिक स्टार्च

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एवरेस्ट के साथ-साथ जिस दूसरे ब्रांड पर गाज गिरी है, वह है लालजी गोधू एंड कंपनी (Laljee Godhoo - LG Hing)। LG हींग की स्थापना 1894 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने और भरोसेमंद हींग ब्रांड्स में से एक माना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित ब्रांड का गुणवत्ता परीक्षण में फेल होना उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका है।
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एफएसएसएआई ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि लालजी गोधू को भी हींग पाउडर बेचने से रोक दिया गया है। नियामक ने कहा, "मिश्रित हींग (पाउडर और टुकड़े) के नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। ये नमूने गलत ब्रांडिंग वाले और घटिया गुणवत्ता (Poor Quality) के भी पाए गए।"
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क्या थी लालजी गोधू की हींग में खराबी?

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हींग सीधे तौर पर पौधों (Ferula species) की जड़ों से निकलने वाला एक प्राकृतिक रेजिन (गोंद) है। चूंकि शुद्ध हींग बहुत तीव्र और चिपचिपी होती है, इसलिए इसे खाने योग्य बनाने के लिए इसमें खाद्य स्टार्च (Edible Starch), गेहूं का आटा या अरारोट मिलाकर 'मिश्रित हींग' (Compounded Asafoetida) तैयार की जाती है।
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हालांकि, FSSAI की जांच में सामने आया कि लालजी गोधू द्वारा मिश्रित हींग बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली कच्ची हींग की किस्मों में अत्यधिक मात्रा में स्टार्च (Starch) मिलाया गया था। यह स्टार्च की मात्रा FSS एक्ट द्वारा निर्धारित वैधानिक सीमाओं से कहीं अधिक थी, जो उत्पाद को सस्ता बनाने और वजन बढ़ाने की मंशा को दर्शाती है।
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FSSAI का सख्त अल्टीमेटम और आगे की कार्रवाई

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फूड रेगुलेटर ने दोनों कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। FSSAI ने कंपनियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे अपनी उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) में सुधार नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ अग्रिम दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल हो सकता है।
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लालजी गोधू के मामले में, FSSAI ने कंपनी प्रबंधन से कहा है कि वे इस गड़बड़ी को ठीक करने के लिए तुरंत एक विस्तृत एक्शन प्लान (Action Plan) जमा करें। नियामक ने निर्देश दिए हैं कि कंपनी ऐसे सुधारात्मक उपाय लागू करे जिनसे यह पूरी तरह पक्का हो सके कि भविष्य में FSS एक्ट, 2011 के प्रावधानों के अनुसार सिर्फ स्टैंडर्ड क्वालिटी (Standard Quality) के उत्पाद ही बनाए और बाजार में बेचे जाएं।
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उपभोक्ता जागरूकता: आखिर क्या है मिश्रित हींग और कैसे होती है मिलावट?

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आम तौर पर बाजार में मिलने वाली हींग 100% शुद्ध हींग नहीं होती, बल्कि वह 'कंपाउंडेड हींग' (मिश्रित हींग) होती है। शुद्ध हींग (जिसकी कीमत हजारों रुपये प्रति किलो होती है) का स्वाद और महक इतनी तेज होती है कि उसे सीधे खाने में इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए, कंपनियां रेजिन में गेहूं का आटा, चावल का आटा या खाद्य गोंद (Gum Arabic) मिलाती हैं।
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मिलावट का खेल:

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कंपनियां मुनाफा कमाने के चक्कर में कई बार शुद्ध रेजिन की मात्रा बेहद कम कर देती हैं और मैदा, चॉक पाउडर, मिट्टी, सोपस्टोन या अत्यधिक स्टार्च भर देती हैं। यही कारण है कि FSSAI ने 'अल्कोहल में घुलनशील अर्क' का 5% का मानक तय किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैकेट में वास्तव में हींग का मूल तत्व मौजूद है, न कि सिर्फ आटा या स्टार्च।
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एवरेस्ट और एलजी जैसे मार्केट लीडर्स द्वारा इन मूलभूत मानकों का पालन न करना भारत में खाद्य सुरक्षा और पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि जब तक FSSAI इन ब्रांड्स को क्लीन चिट नहीं दे देता, तब तक वे बाजार में उपलब्ध अन्य प्रमाणित और गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले विकल्पों का ही चुनाव करें।