खबरीलाल डेस्क
खबरीलाल बिजनेस डेस्क | नई दिल्ली
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​आजकल हम सभी अपनी सेहत को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। जब भी हम सुपरमार्केट या ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर से सामान खरीदते हैं, तो हमारी नज़र सबसे पहले उन पैकेट्स पर जाती है जिन पर "100% Pure" (100% शुद्ध), "100% Natural" (100% प्राकृतिक) या "100% Organic" (100% जैविक) लिखा होता है। एक आम ग्राहक इन दावों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेता है और अपने परिवार की सेहत के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को भी तैयार रहता है।
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​लेकिन, क्या पैकेज पर लिखा यह '100% शुद्धता' का दावा वाकई सच होता है? खाद्य सुरक्षा नियामक यानी FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने इस भ्रम को तोड़ते हुए देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक और FMCG कंपनियों में से एक, डाबर इंडिया (Dabur India) के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने डाबर के कई मशहूर प्रोडक्ट्स पर 100% वाले दावे करने और उन्हें बेचने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
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​FSSAI की जांच में क्या-क्या गड़बड़ी पाई गई?

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​FSSAI पिछले कुछ समय से ऑनलाइन मार्केटिंग और पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में किए जा रहे विज्ञापनों की कड़ी निगरानी कर रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को FSSAI ने डाबर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ एक प्रोहिबिशन ऑर्डर (Prohibition Order) यानी प्रतिबंध आदेश जारी किया है।
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​FSSAI की ऑडिट और जांच में डाबर की आधिकारिक वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स में कई गंभीर विसंगतियां पाई गईं। जांच में यह सामने आया कि डाबर अपनी मार्केटिंग रणनीति के तहत ग्राहकों को लुभाने के लिए ऐसे दावों का इस्तेमाल कर रहा था, जिन्हें वैज्ञानिक या तकनीकी रूप से साबित करना लगभग असंभव है।
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इन दावों को माना गया भ्रामक (Misleading):

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​रेगुलेटर के अनुसार पैकेजिंग और डिजिटल मार्केटिंग में निम्नलिखित शब्दों का इस्तेमाल ग्राहकों को गुमराह करने वाला है:
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    100% Natural (100 प्रतिशत प्राकृतिक)
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    100% Pure (100 प्रतिशत शुद्ध)
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    100% Purity Guaranteed (100% शुद्धता की गारंटी)
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    100% Organic (100% जैविक)
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किन-किन मशहूर प्रोडक्ट्स पर गिरी है FSSAI की गाज?

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​डाबर के जिन उत्पादों की लेबलिंग और विज्ञापनों पर आपत्ति जताई गई है, वे हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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    डाबर हनी (Dabur Honey)
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    डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar)
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    वर्जिन कोकोनट ऑयल (Virgin Coconut Oil)
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    कोल्ड प्रेस्ड तिल का तेल (Sesame Oil)
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    डाबर 100% प्योर देसी गाय का घी (Desi Cow Ghee)
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    नारियल पानी (Coconut Water)
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    डाबर होममेड कोकोनट मिल्क (Dabur Homemade Coconut Milk)
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नियमों की अनदेखी: 'जैविक भारत' लोगो का बिना अनुमति इस्तेमाल
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात 'जैविक भारत' (Jaivik Bharat Logo) के इस्तेमाल से जुड़ी है। भारत में किसी भी उत्पाद को 'ऑर्गेनिक' (जैविक) के रूप में बेचने के लिए FSSAI से एक विशेष और कड़ी प्रमाणन (Certification) प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
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    ऑर्गेनिक प्रोडक्ट पर नियम: FSSAI की जांच के मुताबिक, डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर बिना किसी वैध 'FSSAI ऑर्गेनिक अप्रूवल' के ही 'जैविक भारत' का लोगो धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। यह सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है।
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    कंपाउंड फूड पर दावा: इसके अलावा, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क पर '100% Purity' का दावा किया गया था। Advertising & Claims Regulations, 2018 के कड़े प्रावधानों के तहत किसी भी कंपाउंड या मिश्रित खाद्य पदार्थ (जिसमें एक से अधिक सामग्रियां शामिल हों) पर '100% शुद्ध' होने का दावा करने की सख्त मनाही है।
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FSSAI का कड़ा रुख और 15 दिनों का अल्टीमेटम

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​FSSAI ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। नियामक ने बताया कि उसने इससे पहले भी डाबर इंडिया को इन भ्रामक दावों को हटाने के लिए बाकायदा कारण बताओ नोटिस भेजा था। लेकिन कंपनी के प्रबंधन की ओर से कोई ठोस या संतोषजनक कदम नहीं उठाया गया और उत्पादों की बिक्री उसी रूप में जारी रही।
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​अब, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए, FSSAI ने डाबर को सख्त निर्देश दिए हैं:
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    बिक्री पर तत्काल रोक: नोटिस में शामिल सभी प्रोडक्ट्स और ऐसे भ्रामक दावों वाले सामान की बिक्री (ऑनलाइन और ऑफलाइन) को तुरंत प्रभाव से रोका जाए।
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    जवाबदेही तय: कंपनी को आदेश प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अपनी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report - ATR) जमा करनी होगी।
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इस बड़ी कार्रवाई पर डाबर इंडिया (Dabur India) का क्या है जवाब?

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​FSSAI जैसी शीर्ष संस्था से प्रोहिबिशन ऑर्डर मिलने के बाद डाबर इंडिया ने भी अपना रुख साफ करने की कोशिश की है। मीडिया में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए डाबर के प्रवक्ता ने कहा, "हमें FSSAI का नोटिस मिल गया है। हम वर्तमान में अपनी वेबसाइट, ई-कॉमर्स पोर्टल्स और पैकेजिंग पर मौजूद उस सभी कंटेंट और दावों की गहन कानूनी और तकनीकी समीक्षा कर रहे हैं, जिसका जिक्र नियामक के नोटिस में किया गया है। हम देश के सभी कानूनों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
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​हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से त्योहारी सीजन से ठीक पहले कंपनी की ब्रांड इमेज और इन खास उत्पादों की बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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​आम उपभोक्ता के लिए इस खबर के क्या हैं मायने? (Consumer Awareness)
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यह खबर सिर्फ एक कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई भर नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक 'वेक-अप कॉल' (Wake-up Call) है।
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    लेबलिंग के जाल को समझें: '100% शुद्ध', 'केमिकल फ्री' या 'पूरी तरह प्राकृतिक' जैसे शब्द अक्सर सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा होते हैं, विज्ञान का नहीं।
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    ई-कॉमर्स पर पैनी नजर: FSSAI इन दिनों ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले हेल्थ और वेलनेस प्रोडक्ट्स की सख्त मॉनिटरिंग कर रहा है। इससे पहले भी बोर्नविटा (Bournvita) जैसे उत्पादों को 'हेल्थ ड्रिंक' की कैटेगरी से हटाने और कई बेवरेज कंपनियों पर चीनी की मात्रा छिपाने को लेकर बड़ी कार्रवाइयां हो चुकी हैं।
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    पारदर्शिता की शुरुआत: FSSAI की इस सख्ती से FMCG कंपनियों में डर का माहौल बनेगा और उन्हें अपनी मार्केटिंग और पैकेजिंग में ज्यादा ईमानदारी और पारदर्शिता लानी होगी।
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    सामग्री (Ingredients) पढ़ें: ग्राहकों को यह आदत डालनी चाहिए कि वे उत्पाद के आगे लिखे बड़े-बड़े दावों को पढ़ने के बजाय, पैकेट के पीछे बारीक अक्षरों में लिखी गई 'Ingredients List' (सामग्री सूची) को पढ़ें।
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खबरीलाल का सुझाव: जब भी आप बाजार से कोई 'हेल्थ या ऑर्गेनिक प्रोडक्ट' खरीदें, तो यह सुनिश्चित करें कि उस पर FSSAI का लाइसेंस नंबर और वैध ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन मौजूद हो। कंपनियों के बड़े-बड़े विज्ञापनों से ज्यादा अपने विवेक पर भरोसा करें।