खबरीलाल डेस्क
आज 1 अप्रैल है, और इसके साथ ही देश में नए वित्तीय वर्ष (Financial Year 2026-27) की शुरुआत हो चुकी है। नया वित्त वर्ष हमेशा अपने साथ कई सारे आर्थिक और प्रशासनिक बदलाव लेकर आता है, जिसका सीधा असर आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी, उसकी जेब और बचत पर पड़ता है। इस बार भी 1 अप्रैल से देश भर में कुल 15 बड़े बदलाव लागू हो गए हैं।READ ALSO:-मध्य पूर्व के महायुद्ध की आंच भारत तक: प्लास्टिक की टूटी रीढ़, LPG संकट से 20 हजार कारखानों पर ताला; AC-फ्रिज से लेकर नमक तक सबकुछ होगा महंगा
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दिन की शुरुआत आम आदमी के लिए एक झटके के साथ हुई, जब सरकारी तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी। इसके अलावा रेलवे के टिकट कैंसिलेशन और रिफंड नियमों में सख्ती की गई है। नौकरीपेशा लोगों के लिए नए लेबर कोड लागू होने से उनकी 'इन-हैंड सैलरी' (In-hand Salary) घट सकती है, वहीं इनकम टैक्स (Income Tax), फास्टैग (FASTag) और पैन कार्ड (PAN Card) से जुड़े कई अहम नियमों में भी फेरबदल हुआ है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हमने इन 15 बदलावों को तीन मुख्य कैटेगरी (रसोई व सफर; टैक्स, बैंकिंग व बाजार; और अन्य बड़े बदलाव) में बांटा है, ताकि आप आसानी से समझ सकें कि आज से आपकी जिंदगी में क्या-क्या बदलने वाला है।
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कैटेगरी 1: रसोई और सफर (Utility & Travel)

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1. कॉमर्शियल सिलेंडर ₹218 महंगा: रेस्टोरेंट का खाना होगा महंगा

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    बदलाव: 1 अप्रैल की सुबह सबसे बड़ी खबर गैस सिलेंडर की कीमतों से आई। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹218 तक की भारी वृद्धि कर दी है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है, जबकि चेन्नई में यह सबसे महंगा ₹2246.50 में बिक रहा है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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    असर: कॉमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से रेस्टोरेंट, होटल, हलवाई और ढाबों पर होता है। गैस महंगी होने से रेस्टोरेंट मालिकों की लागत (Input Cost) बढ़ जाएगी। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि वे आने वाले दिनों में चाय, समोसा, नाश्ते और थाली की कीमतें बढ़ा दें। शादियों के सीजन में कैटरिंग (Catering) का खर्च भी महंगा हो जाएगा।
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2. रेलवे टिकट रिफंड के नियम हुए सख्त: अब 8 घंटे पहले करना होगा कैंसिल

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    बदलाव: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने टिकट रिफंड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि आप अपना कंफर्म टिकट कैंसिल करते हैं, तो पूरा रिफंड (कैंसिलेशन चार्ज काटकर) तभी मिलेगा जब आप ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट रद्द करेंगे। पहले यह समय सीमा 4 घंटे की थी। हालांकि, एक राहत यह दी गई है कि यात्री अब चार्ट बनने के बाद भी, ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन (Boarding Station) ऑनलाइन बदल सकेंगे।
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    असर: इस नियम से उन यात्रियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है जो ऐन मौके पर अपना सफर रद्द करते हैं। रेलवे का तर्क है कि समय सीमा बढ़ाने से वेटिंग लिस्ट (Waiting List) वाले यात्रियों को कंफर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी और खाली सीटों की बर्बादी रुकेगी।
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3. फास्टैग (FASTag) एनुअल पास हुआ महंगा

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    बदलाव: अगर आप नेशनल हाईवे पर रोज सफर करते हैं और आपने फास्टैग का मासिक या सालाना पास (Annual Pass) ले रखा है, तो आज से इसे रिन्यू कराने पर आपको ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एनुअल पास की दरों में 2.5% की बढ़ोतरी कर दी है।
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    असर: जो सालाना पास पहले ₹3,000 का बनता था, उसके लिए अब कार चालकों को ₹3,075 चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 से अधिक चिन्हित टोल प्लाजा पर बिना रुके और बिना अतिरिक्त शुल्क दिए सफर करने की सुविधा देता है।
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4. टोल प्लाजा पर 100% नो-कैश: सिर्फ डिजिटल पेमेंट

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    बदलाव: आज 1 अप्रैल से देश के सभी नेशनल हाईवे टोल प्लाजा (Toll Plaza) पर नकद (Cash) लेनदेन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। टोल टैक्स का भुगतान अब केवल फास्टैग (FASTag) या यूपीआई (UPI) जैसे डिजिटल माध्यमों से ही स्वीकार किया जाएगा।
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    असर: अगर आपकी गाड़ी पर फास्टैग नहीं लगा है, या आपके फास्टैग वॉलेट में बैलेंस नहीं है, तो आपको कैश देने का विकल्प नहीं मिलेगा। आपको वहीं खड़े होकर यूपीआई से पेमेंट करना होगा। इससे उन लोगों को भारी परेशानी हो सकती है जो डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
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5. गाड़ियों की कीमतों में 2-3% का इजाफा

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    बदलाव: 31 मार्च तक ऑटोमोबाइल कंपनियां पुराने स्टॉक को क्लियर करने के लिए डिस्काउंट और पुरानी कीमतों पर गाड़ियां बेच रही थीं। लेकिन आज 1 अप्रैल से मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा सहित कई कंपनियों ने अपनी कॉमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों (Cars and SUVs) के दाम 2% से 3% तक बढ़ा दिए हैं।
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    असर: यदि आपने पिछले महीने कार बुक की थी, लेकिन आपका इनवॉइस (Bill) 31 मार्च तक नहीं कटा था, तो अब आपको डिलीवरी लेते समय बढ़ी हुई नई कीमत चुकानी होगी। शोरूम प्राइस (Ex-showroom) बढ़ने के साथ-साथ आरटीओ (RTO) रजिस्ट्रेशन चार्ज और इंश्योरेंस का खर्च भी बढ़ जाएगा।
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कैटेगरी 2: टैक्स, बैंकिंग और बाजार (Tax, Banking & Market)

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6. 'असेसमेंट ईयर' खत्म, अब सिर्फ 'टैक्स ईयर' का होगा इस्तेमाल

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    बदलाव: भारत के कर ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आज से 'इनकम टैक्स एक्ट 2025' (Income Tax Act 2025) लागू कर दिया गया है। इस नए एक्ट के तहत अब 'फाइनेंशियल ईयर' (FY) और 'असेसमेंट ईयर' (AY) के दोहरे सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। अब इसके बजाय सिर्फ एक शब्द 'टैक्स ईयर' (Tax Year) का इस्तेमाल किया जाएगा।
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    असर: इससे आम टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। पहले, अगर आप 2024-25 में पैसा कमाते थे, तो जुलाई 2025 में उसका टैक्स भरते समय उसे AY 2025-26 कहा जाता था। एक ही कमाई के लिए दो अलग-अलग सालों के नाम से कंफ्यूजन होता था, जो अब 'टैक्स ईयर 2025' कहने से दूर हो जाएगा।
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7. रिवाइज्ड टैक्स रिजीम (Revised Tax Regime) के तहत फाइलिंग शुरू

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    बदलाव: सरकार ने साल 2025 के बजट में नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के स्लैब में बड़े बदलाव किए थे, जो आज 1 अप्रैल 2025 से पूरी तरह लागू हो गए हैं। इस साल जब आप रिटर्न (ITR) फाइल करेंगे, तो आप इन नए बदलावों का फायदा उठा पाएंगे।
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    असर: इस रिवाइज्ड रिजीम के तहत, स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर एक वेतनभोगी (Salaried Person) के लिए सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपये तक की इनकम पूरी तरह से टैक्स फ्री (Tax Free) कर दी गई है। वहीं, गैर-वेतनभोगी (Non-salaried) लोग 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट पा सकते हैं। इससे मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलेगी।
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8. फॉर्म 16 और 16A की जगह अब नए फॉर्म 130 और 131

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    बदलाव: दशकों से नौकरीपेशा लोगों के लिए टीडीएस (TDS) कटौती के सबूत के तौर पर इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 16' (Form 16) और अन्य आय के लिए दिए जाने वाले 'फॉर्म 16A' को अब इतिहास बना दिया गया है। आयकर विभाग ने इन फॉर्म्स का फॉर्मेट और नाम बदलकर क्रमशः फॉर्म 130 और फॉर्म 131 कर दिया है।
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    असर: जब आप इस साल जून-जुलाई में अपना रिटर्न भरेंगे, तो आपकी कंपनी आपको फॉर्म 130 देगी। इन नए फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन (Tax Calculation) और छूट का ब्यौरा पहले से कहीं ज्यादा डिटेल और पारदर्शी तरीके से दिया होगा, जिससे ITR फाइल करते समय गलतियों की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
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9. HRA टैक्स छूट लेने के नियम हुए सख्त: मकान मालिक का पैन अनिवार्य

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    बदलाव: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट का दावा करने वाले कर्मचारियों के लिए नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब HRA क्लेम करने के लिए वैध रेंट एग्रीमेंट और रेंट रसीद जमा करनी होगी। अगर आपका सालाना किराया 1 लाख रुपये (यानी 8,333 रुपये प्रति माह) से ज्यादा है, तो रसीद के साथ मकान मालिक का पैन (PAN) नंबर देना अनिवार्य कर दिया गया है।
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    असर: टैक्स विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कर्मचारी द्वारा दी गई रेंट रसीद और मकान मालिक के टैक्स रिकॉर्ड (AIS/TIS) का सीधा मिलान करेगा। यदि कोई फर्जी रसीद लगाकर टैक्स बचाता पकड़ा गया, तो उस पर भारी जुर्माना (Penalty) लग सकता है।
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    राहत की खबर: HRA नियमों में एक बड़ा फायदा यह हुआ है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई (Metro Cities) के अलावा अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी '50% टैक्स छूट' वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। इन 8 शहरों में रहने वाले लोग अब अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से पर टैक्स छूट ले सकेंगे, जिससे उनकी इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी।
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10. PNB ATM कैश विड्रॉल लिमिट तय

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    बदलाव: देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने एटीएम (ATM) से नकद निकासी के नियमों में बदलाव किया है। आज से पीएनबी के क्लासिक (Classic) डेबिट कार्ड धारक एक दिन में अधिकतम ₹25,000 ही निकाल सकेंगे। वहीं, प्लैटिनम (Platinum) कार्ड धारकों के लिए यह दैनिक लिमिट ₹50,000 तय की गई है।
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    असर: यदि आपको किसी आपात स्थिति में इससे ज्यादा नकदी की आवश्यकता है, तो आपको बैंक शाखा जाना होगा और चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म का सहारा लेना होगा। बैंक ने यह फैसला एटीएम क्लोनिंग और वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Frauds) को रोकने के उद्देश्य से लिया है।
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11. शेयर बाजार: F&O ट्रेडिंग पर बढ़ा STT (Securities Transaction Tax)

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    बदलाव: सरकार ने शेयर बाजार में वायदा और विकल्प (Futures & Options - F&O) ट्रेडिंग में बढ़ती सट्टेबाजी को कम करने के लिए बजट में टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया था, जो आज से लागू हो गया है। फ्यूचर्स की बिक्री पर अब STT 0.02% की जगह 0.05% लगेगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर यह टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।
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    असर: इंट्राडे (Intraday) और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए यह एक बड़ा झटका है। अब उनके लिए हर ट्रेड की लागत (Cost per trade) काफी बढ़ जाएगी। ज्यादा टैक्स देने के कारण उनकी नेट कमाई (Net Profit) कम हो जाएगी और ट्रेड में 'ब्रेक ईवन' (Break-even) पर आने में भी अधिक समय लगेगा।
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12. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर नया टैक्स नियम: बाजार से खरीदने पर देना होगा टैक्स

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    बदलाव: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना के तहत टैक्स नियमों में एक अहम बदलाव किया गया है। अब गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) से छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने 'प्राइमरी मार्केट' (सीधे RBI या बैंक से) में बॉन्ड खरीदा था।
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    असर: अगर आपने शेयर बाजार (Secondary Market) से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड सस्ते में खरीदे हैं, तो अब आपको मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाले प्रॉफिट को 'शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन' माना जाएगा, जिस पर आपके स्लैब के अनुसार टैक्स कटेगा।
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कैटेगरी 3: अन्य बड़े बदलाव (Other Major Changes)

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13. नए लेबर कोड: बेसिक पे अब कुल CTC का 50% होना अनिवार्य
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    बदलाव: लंबे समय से टल रहे 'न्यू वेज कोड' (New Wage Code) के अहम प्रावधान आज 1 अप्रैल से कंपनियों पर लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत, अब किसी भी कर्मचारी की 'बेसिक सैलरी' (Basic Salary) उसके कुल पैकेज यानी कॉस्ट टू कंपनी (CTC) का कम से कम 50% होनी ही चाहिए। कंपनियां अब भत्तों (Allowances) को 50% से ज्यादा नहीं रख सकेंगी।
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    असर: इस नियम का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों की 'इन-हैंड सैलरी' (Take-home salary) में कमी के रूप में दिखेगा। चूंकि पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) की गणना बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए बेसिक बढ़ने से पीएफ में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा। इससे हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा। हालांकि, इसका बड़ा फायदा यह है कि आपका रिटायरमेंट फंड (Retirement Corpus) और ग्रेच्युटी की रकम पहले से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ेगी।
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14. नौकरी छोड़ने पर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (F&F) अब 2 दिन में

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    बदलाव: नए लेबर कोड का एक और बड़ा और कर्मचारी हितैषी नियम आज से लागू हो गया है। अब तक किसी कंपनी से इस्तीफा देने (Resign) या निकाले जाने पर फुल एंड फाइनल (Full and Final) सेटलमेंट का पैसा मिलने में 45 से 90 दिन तक का लंबा समय लगता था। लेकिन अब नए नियम के अनुसार, कंपनी को कर्मचारी के 'आखिरी वर्किंग डे' (Last Working Day) के मात्र 2 वर्किंग डेज (48 घंटे) के भीतर उसका सारा बकाया (वेतन, पीएफ, लीव इनकैशमेंट) चुकाना होगा।
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    असर: नौकरी बदलने वालों या ले-ऑफ (Lay-off) का शिकार हुए कर्मचारियों को अब पैसों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना होगा। यदि कोई कंपनी 2 दिन के भीतर पेमेंट नहीं करती है, तो कर्मचारी सीधे लेबर विभाग (Labour Department) में शिकायत कर सकता है और कंपनी को जुर्माने के साथ ब्याज (Interest) भी देना पड़ेगा।
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15. पैन कार्ड (PAN Card) अपडेट: जन्मतिथि के लिए अब आधार मान्य नहीं

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    बदलाव: आयकर विभाग ने पैन कार्ड बनवाने या उसमें सुधार करने के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। पैन कार्ड के लिए अब 'आधार कार्ड' (Aadhaar Card) को जन्मतिथि (Date of Birth) के 'वैध दस्तावेज' (Valid Proof) की लिस्ट से हटा दिया गया है।
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    असर: अब आधार कार्ड को पैन बनवाने के लिए केवल 'एड्रेस प्रूफ' (Address Proof) और 'पहचान पत्र' (ID Proof) के तौर पर ही स्वीकार किया जाएगा। यदि आप नया पैन कार्ड बनवाना चाहते हैं या पुराने कार्ड में अपनी जन्मतिथि बदलवाना चाहते हैं, तो अब आपको आधार के साथ-साथ जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate), 10वीं की मार्कशीट (10th Marksheet), या वोटर आईडी कार्ड जैसे अन्य पुख्ता दस्तावेज अनिवार्य रूप से देने होंगे।
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1 अप्रैल के बदलावों के साथ कैसे करें तालमेल?

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1 अप्रैल से लागू हुए ये 15 बड़े बदलाव हमारी आर्थिक जिंदगी के लगभग हर पहलू—रसोई से लेकर यात्रा, और सैलरी से लेकर टैक्स तक—को छूते हैं। एक तरफ जहां कॉमर्शियल गैस और टोल महंगे होने से आम आदमी पर महंगाई (Inflation) का दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के 2 दिन में होने और HRA में 4 नए शहरों को जोड़ने जैसे कदम नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं।
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सबसे अहम बदलाव नए 'टैक्स ईयर' और 'फॉर्म 130' का है, जो भारत की कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन-हैंड सैलरी का कम होना वर्तमान में भले ही अखरे, लेकिन भविष्य की वित्तीय सुरक्षा (Financial Security) के लिहाज से यह एक बेहतरीन कदम है। इन सभी बदलावों को ध्यान में रखते हुए, यह सही समय है कि आप अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या वित्तीय सलाहकार से मिलें और नए 'टैक्स ईयर 2025' के लिए अपनी निवेश और बचत की रणनीतियों को री-अलाइन (Re-align) करें।
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संक्षिप्त सारांश (Short Summary): 1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही देश में 15 बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़ा दिए हैं, जिससे बाहर का खाना महंगा हो सकता है। रेलवे के नियम सख्त हुए हैं, अब रिफंड के लिए 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। टोल प्लाजा पर कैश पूरी तरह बंद कर दिया गया है। टैक्स प्रणाली में सुधार करते हुए 'असेसमेंट ईयर' की जगह 'टैक्स ईयर' शब्द लागू किया गया है और फॉर्म 16 को फॉर्म 130 में बदल दिया गया है। नौकरीपेशा लोगों के लिए बेसिक सैलरी अब CTC का 50% होना अनिवार्य है, जिससे इन-हैंड सैलरी घटेगी लेकिन PF फंड तेजी से बढ़ेगा। इसके अलावा, नौकरी छोड़ने पर 2 दिन में 'फुल एंड फाइनल' सेटलमेंट करने का नियम भी आज से लागू हो गया है।