उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से बिजली उपभोक्ताओं के लिए 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा था। डिजिटल इंडिया और बिजली चोरी रोकने की आड़ में लाई गई इस योजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर इतनी बुरी तरह से फेल हुआ कि आम जनता त्राहि-त्राहि कर उठी। रोजमर्रा की जिंदगी में पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों के घरों की बिजली अचानक कटने लगी।READ ALSO:-IIMT विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह की धूम: 4000 विद्यार्थियों के सिर सजा कामयाबी का ताज, 'भारत माता की जय' से गूंजा पूरा प्रांगण
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सबसे बड़ी विडंबना यह थी कि जिन लोगों ने ईमानदारी से अपना बिजली बिल भरा था या मीटर को एडवांस में रिचार्ज किया था, उनका भी बैलेंस अचानक 'नेगेटिव' (Negative Balance) दिखने लगा और उनके घरों में अंधेरा छा गया। जब यह समस्या एकाध घर की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की बन गई, तो लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। हर दिन बिजली दफ्तरों के बाहर लंबी कतारें लगने लगीं और उपभोक्ता अपने मीटर बदलवाने के लिए प्रदर्शन करने लगे। इस भारी जनाक्रोश और राजनीतिक दबाव को भांपते हुए आखिरकार उत्तर प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग को बैकफुट पर आना पड़ा है।
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क्यों मचा था स्मार्ट मीटर पर इतना बवाल? (विवाद की जड़)
\r\n\r\nसरकार ने यह सोचकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का फैसला किया था कि इससे बिजली चोरी रुकेगी, लाइन लॉस कम होगा और लोगों को उतना ही बिल देना पड़ेगा जितनी वे बिजली इस्तेमाल करेंगे। ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल का प्रीपेड सिम काम करता है—रिचार्ज खत्म, तो बात बंद। लेकिन बिजली विभाग और मीटर लगाने वाली कंपनियों के सॉफ्टवेयर में इतनी तकनीकी खामियां थीं कि पूरा सिस्टम ही कोलैप्स (Collapse) कर गया।
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- \r\n 5 लाख घरों की बत्ती हुई गुल: जैसे ही पूरे यूपी में अभियान चलाकर लोगों के पुराने पोस्टपेड मीटर हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए, वैसे ही सिस्टम के एरर (Error) के कारण करीब 5 लाख घरों की बिजली अचानक कट गई। भीषण गर्मी के मौसम में बिना बिजली के लोगों का हाल बेहाल हो गया।\r\n \r\n
- \r\n नेगेटिव बैलेंस का 'भूत': उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि 1000 या 2000 रुपये का रिचार्ज करने के चंद घंटों बाद ही स्मार्ट मीटर में बैलेंस शून्य (Zero) या माइनस (Negative) में दिखाने लगता था। सिस्टम बिना किसी पूर्व सूचना के सप्लाई काट देता था।\r\n \r\n
- \r\n बिल का कई गुना बढ़ जाना: जिन घरों का बिल पुराने मीटर में महीने का 1000-1200 रुपये आता था, स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका अनुमानित खर्च 3000 से 4000 रुपये महीने तक पहुंच गया। मीटर बहुत तेजी से भाग रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n प्रतिदिन 40,000 से ज्यादा शिकायतें: समस्या इतनी विकराल हो गई थी कि पूरे यूपी के अलग-अलग बिजली उपकेंद्रों पर हर रोज 40 हजार से अधिक आवेदन सिर्फ इसलिए आ रहे थे कि "हमारा स्मार्ट मीटर उखाड़ लो और पुराना मीटर लगा दो।"\r\n \r\n
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ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का बड़ा एक्शन: मीटर लगाने पर लगाई रोक
\r\n\r\nजब प्रदेश भर से विधायकों, सांसदों और आम जनता की शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने लगीं, तो शासन स्तर पर हड़कंप मच गया। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने लखनऊ स्थित 'शक्ति भवन' में बिजली विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक बेहद सख्त और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
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इस बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार ने तुरंत प्रभाव से निम्नलिखित बड़े फैसले लिए:
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- \r\n पुराने मीटरों को बदलने पर तत्काल रोक: अब किसी भी उपभोक्ता के घर से उसका पुराना (सामान्य या पोस्टपेड) मीटर जबरन या उसकी इच्छा के बिना उखाड़कर स्मार्ट प्रीपेड मीटर नहीं लगाया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n तकनीकी समिति का गठन: स्मार्ट मीटरों में आ रही तकनीकी गड़बड़ियों की जांच के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर 'चार सदस्यीय तकनीकी समिति' का गठन किया गया है। जब तक यह समिति अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट नहीं सौंप देती और सॉफ्टवेयर की खामियां दूर नहीं हो जातीं, तब तक कोई नया बदलाव नहीं किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n मीटर कंपनियों का भुगतान रोका गया: जो प्राइवेट कंपनियां टेंडर के जरिए यूपी में स्मार्ट मीटर लगा रही थीं, उनके काम में भारी लापरवाही पाई गई है। सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इन कंपनियों के करोड़ों रुपये के भुगतान (Payment) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।\r\n \r\n
- \r\n केवल नए कनेक्शनों पर लगेंगे मीटर: ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि जो लोग अब बिजली का 'नया कनेक्शन' लेंगे, केवल उनके यहां ही सीधे स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे।\r\n \r\n
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जिन 75 लाख घरों में लग चुका है स्मार्ट मीटर, उनके लिए क्या हैं राहत?
\r\n\r\nसरकार के रोक लगाने के आदेश से उन लोगों ने तो राहत की सांस ली है जिनके घर अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे थे। लेकिन सवाल उन 75 लाख उपभोक्ताओं का था, जिनके घरों में पहले ही ये विवादित स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपे जा चुके हैं। क्या उन्हें अब भी नेगेटिव बैलेंस और अचानक बिजली कटने के खौफ में जीना पड़ेगा?
\r\n\r\nइसका जवाब देते हुए बिजली विभाग ने इन 75 लाख उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ा 'राहत पैकेज' (Relief Package) घोषित किया है:
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1. 45 दिनों तक नहीं कटेगी बिजली (No Disconnection for 45 Days): बिजली विभाग ने सॉफ्टवेयर में बदलाव करते हुए आदेश जारी किया है कि अब किसी भी उपभोक्ता की बिजली तुरंत नहीं काटी जाएगी। स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता को मीटर को समझने और सिस्टम में डेटा अपडेट होने के लिए 15 दिन का 'कन्वर्जन पीरियड' (Conversion Period) दिया जाएगा। इसके बाद 30 दिनों का अतिरिक्त ग्रेस पीरियड (Grace Period) मिलेगा। यानी कुल मिलाकर 45 दिनों तक अगर आपका बैलेंस जीरो भी हो जाता है, तो भी आपके घर की बिजली नहीं काटी जाएगी।
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2. जीरो बैलेंस पर भी 3 दिन की 'इमरजेंसी सप्लाई': अगर कोई उपभोक्ता आर्थिक तंगी के कारण तुरंत रिचार्ज नहीं कर पाता है और उसका बैलेंस जीरो या नेगेटिव हो जाता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने तय किया है कि 2 किलोवाट (2 KW) लोड तक के घरेलू उपभोक्ताओं को जीरो बैलेंस होने पर भी कम से कम 3 दिनों तक या 200 रुपये मूल्य तक की बिजली की निर्बाध सप्लाई (Emergency Credit) जारी रहेगी, ताकि वे इस बीच पैसों का इंतजाम कर सकें।
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कंज्यूमर फोरम और विद्युत अधिनियम 2003: क्या है आपका अधिकार?
\r\n\r\nराज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले में उपभोक्ताओं की तरफ से मोर्चा संभाला है। उन्होंने इस बात को प्रमुखता से उठाया कि बिजली विभाग बिना उपभोक्ता की लिखित सहमति के जबरन उसके घर का मीटर कैसे बदल सकता है?
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अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) (Section 47(5) of the Electricity Act 2003) का हवाला दिया। इस कानून के तहत देश के हर बिजली उपभोक्ता को यह कानूनी अधिकार प्राप्त है कि वह अपनी सुविधा के अनुसार 'प्रीपेड' (Prepaid - पहले पैसे दो फिर बिजली इस्तेमाल करो) या 'पोस्टपेड' (Postpaid - पहले बिजली इस्तेमाल करो, महीने के अंत में बिल भरो) मोड का चुनाव कर सकता है। विभाग किसी भी मोड को तानाशाही तरीके से थोप नहीं सकता।
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उपभोक्ताओं की मदद के लिए उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC - Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission) में एक विशेष याचिका भी दायर कर दी है। उन्होंने आम जनता को भरोसा दिलाया है कि इस कानूनी लड़ाई और मीटर बदलवाने की पूरी प्रक्रिया में परिषद हर कदम पर उपभोक्ताओं की सहायता करेगी।
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स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: कैसे बदलवाएं अपना स्मार्ट प्रीपेड मीटर वापस 'पोस्टपेड' में?
\r\n\r\nअगर आपके घर में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुका है और आप रोज-रोज के रिचार्ज के झंझट, नेगेटिव बैलेंस और अचानक बिजली कटने की समस्या से बुरी तरह परेशान हैं, तो अब आपके पास कानूनी रूप से इसे वापस 'पोस्टपेड मोड' (Postpaid Mode) में बदलवाने का पूरा अधिकार है। सरकार और विद्युत नियामक आयोग के नियमों के तहत, आप निम्नलिखित आसान प्रक्रिया का पालन करके अपने स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड में कन्वर्ट करा सकते हैं:
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चरण 1: एक लिखित आवेदन (Application) तैयार करें सबसे पहले एक सादे कागज पर एक स्पष्ट और विस्तृत प्रार्थना पत्र (एप्लीकेशन) लिखें। यह एप्लीकेशन आपके क्षेत्र के उप-खंड अधिकारी (SDO - Sub Divisional Officer) या अधिशासी अभियंता (XEN - Executive Engineer) के नाम संबोधित होनी चाहिए।
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चरण 2: आवेदन में ये जरूरी जानकारियां जरूर लिखें:
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- \r\n उपभोक्ता का पूरा नाम (जिसके नाम पर बिजली का बिल आता है)\r\n \r\n
- \r\n उपभोक्ता संख्या (Consumer Number / Account Number)\r\n \r\n
- \r\n घर का पूरा पता (Address)\r\n \r\n
- \r\n आपका चालू मोबाइल नंबर (Mobile Number)\r\n \r\n
- \r\n मीटर नंबर (Meter Number - जो नए स्मार्ट मीटर पर लिखा हो)\r\n \r\n
- \r\n विषय (Subject): "स्मार्ट प्रीपेड मीटर को वापस पोस्टपेड मोड में बदलने के संबंध में।"\r\n \r\n
- \r\n कारण: आवेदन में स्पष्ट लिखें कि आप प्रीपेड मीटर में बार-बार रिचार्ज करने में असमर्थ हैं, आपको तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, और विद्युत अधिनियम के तहत आप अपना अधिकार इस्तेमाल करते हुए इसे पोस्टपेड में कन्वर्ट कराना चाहते हैं।\r\n \r\n
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चरण 3: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की अधिसूचना का हवाला दें अपने आवेदन को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए उसमें केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority - CEA) की 1 अप्रैल 2026 की अधिसूचना का स्पष्ट रूप से हवाला दें। हो सके तो इंटरनेट से इस अधिसूचना की एक फोटोकॉपी निकालकर अपनी एप्लीकेशन के साथ संलग्न (Attach) कर दें। यह नियम आपको मोड चुनने का अधिकार देता है।
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चरण 4: सिक्योरिटी डिपॉजिट (Security Deposit) जमा करें पोस्टपेड कनेक्शन के लिए विभाग हमेशा एक सुरक्षा निधि (Security Deposit) अपने पास रखता है। जब आप प्रीपेड से पोस्टपेड में वापस जाएंगे, तो आपको अपने स्वीकृत लोड के अनुसार एक तय सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी। आमतौर पर 1 या 2 किलोवाट के घरेलू कनेक्शन के लिए यह राशि लगभग 2,000 रुपये के आसपास होती है। यह राशि आपको बिजली विभाग के काउंटर पर नकद या ड्राफ्ट के रूप में जमा करनी होगी।
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चरण 5: कार्यालय में जमा करें और 'रसीद' (Receiving) जरूर लें अपना आवेदन पत्र, पुराने बिल की कॉपी, आधार कार्ड की फोटोकॉपी और सिक्योरिटी डिपॉजिट की रसीद लेकर अपने नजदीकी बिजली उपकेंद्र (Sub-station) या एक्सईएन (XEN) कार्यालय में जाएं। वहां बाबू को अपना फॉर्म जमा करें। सबसे महत्वपूर्ण बात: फॉर्म जमा करने के बाद उस पर कार्यालय की मुहर (Stamp) और हस्ताक्षर करवाकर उसकी एक 'रिसीविंग' (Receiving) या पावती अपने पास सुरक्षित जरूर रख लें। यह रिसीविंग भविष्य में आपके काम आएगी।
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अगर बिजली विभाग आपकी बात न सुने तो क्या करें?
\r\n\r\nयह आम बात है कि कई बार सरकारी दफ्तरों में आम आदमी की सुनवाई आसानी से नहीं होती। अगर आपने ऊपर दिए गए सभी नियमों का पालन करते हुए आवेदन जमा कर दिया है, लेकिन फिर भी SDO या XEN आपके मीटर को पोस्टपेड में बदलने में आनाकानी कर रहे हैं या टालमटोल कर रहे हैं, तो आपके पास निम्नलिखित विकल्प हैं:
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- \r\n UPERC में शिकायत: आप अपनी रिसीविंग की कॉपी के साथ 'उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग' (UPERC) की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं या लखनऊ स्थित उनके कार्यालय में पत्र भेज सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n कंज्यूमर फोरम (Consumer Forum): उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत, आप सेवा में कमी (Deficiency in Service) का आरोप लगाते हुए अपने जिले के उपभोक्ता फोरम (District Consumer Dispute Redressal Commission) में भी मुकदमा दायर कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n हेल्पलाइन 1912: आप यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उन्हें बता सकते हैं कि आपका स्थानीय कार्यालय नियम का पालन नहीं कर रहा है।\r\n \r\n
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यूपी सरकार द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की अंधाधुंध स्थापना पर लगाई गई यह रोक आम जनता की एक बहुत बड़ी जीत है। यह साबित करता है कि कोई भी तकनीक, चाहे वह कितनी भी उन्नत क्यों न हो, जब तक वह आम आदमी (End-user) के अनुकूल (User-friendly) नहीं है और सिस्टम पूरी तरह से टेस्टेड नहीं है, तब तक उसे जनता पर थोपा नहीं जा सकता। फिलहाल, 75 लाख उपभोक्ताओं के सिर से तुरंत बिजली कटने की तलवार हट गई है। अब गेंद तकनीकी समिति के पाले में है कि वह कैसे इन मीटरों की खामियों को दूर करती है, ताकि भविष्य में 'डिजिटल इंडिया' का सपना लोगों के लिए दुःस्वप्न न बने। तब तक, उपभोक्ता अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पोस्टपेड का विकल्प बेझिझक चुन सकते हैं।