बिजनौर (Bijnor News): इस्लामी कैलेंडर के मुकद्दस महीनों में शुमार और त्याग व बलिदान के सबसे बड़े प्रतीक का त्योहार 'ईद-उल-अजहा' (बकरीद) बिजनौर जिले में पूरे अकीदत और हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस वर्ष बिजनौर में ईद-उल-अजहा का पावन पर्व 28 मई को मनाया जा रहा है। त्योहार के मद्देनजर पूरे शहर में उल्लास का माहौल है और बाजारों में खासी रौनक देखने को मिल रही है।READ ALSO:-मेरठ में रूह कंपाने वाली वारदात: कलयुगी पिता ने सौतेली मां के साथ मिलकर 17 साल की बेटी को उतारा मौत के घाट, गुपचुप कर दिया अंतिम संस्कार
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प्रशासन, नगर पालिका और मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं ने आपसी समन्वय स्थापित करते हुए त्योहार को शांतिपूर्ण, स्वच्छ और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के लिए कमर कस ली है। इसी कड़ी में बिजनौर के शहर काजी (Shahar Qazi) ने नमाज के समय की आधिकारिक घोषणा करने के साथ-साथ कुर्बानी को लेकर कुछ बेहद अहम दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं, जिनका पालन करना हर नागरिक के लिए अनिवार्य बताया गया है।
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शाही ईदगाह में सुबह 7 बजे अदा की जाएगी नमाज
\r\n\r\nबिजनौर के शहर काजी माजिद अली ने मुस्लिम समुदाय को जानकारी देते हुए बताया है कि इस साल ईद-उल-अजहा की मुख्य नमाज शहर की ऐतिहासिक 'शाही ईदगाह' में सुबह ठीक 7:00 बजे अदा की जाएगी। उन्होंने सभी नमाजियों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और नमाज शुरू होने से पहले ही ईदगाह में अपनी जगह मुकर्रर कर लें।
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समय पर पहुंचने से न केवल व्यवस्था बनी रहती है, बल्कि किसी भी तरह की जल्दबाजी या अफरा-तफरी से भी बचा जा सकता है। इसके अलावा शहर की अन्य छोटी-बड़ी मस्जिदों में भी कमेटियों द्वारा नमाज का समय निर्धारित कर दिया गया है, ताकि जो लोग ईदगाह न पहुंच सकें, वे अपने मोहल्ले की मस्जिदों में नमाज अदा कर सकें।
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तैयारियां अंतिम चरण में: साफ-सफाई और माइक व्यवस्था पूरी
\r\n\r\nत्योहार को भव्य और अनुशासित तरीके से संपन्न कराने के लिए ईदगाह कमेटी और स्थानीय प्रशासन पिछले कई दिनों से युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं।
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- \r\n ईदगाह परिसर की सफाई: शाही ईदगाह के अंदर और बाहर बड़े पैमाने पर साफ-सफाई का अभियान चलाया गया है। नमाजियों के सजदे के लिए परिसर को पूरी तरह से पाक और साफ कर दिया गया है। दीवारों पर रंग-रोगन और फर्श की धुलाई का काम पूरा हो चुका है।\r\n \r\n
- \r\n साउंड सिस्टम (माइक व्यवस्था): नमाज के दौरान इमाम साहब की आवाज आखिरी सफ (कतार) तक स्पष्ट रूप से पहुंचे, इसके लिए हाई-क्वालिटी साउंड सिस्टम और माइक लगाने का काम भी मुकम्मल कर लिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n रास्तों की मरम्मत और सफाई: नमाजियों को ईदगाह तक पहुंचने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए नगर पालिका द्वारा ईदगाह की ओर जाने वाली सभी प्रमुख सड़कों और रास्तों की विशेष रूप से साफ-सफाई करवाई गई है। सड़कों पर चूने का छिड़काव किया गया है।\r\n \r\n
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सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम (Security & Traffic)
\r\n\r\nत्योहार के दौरान हजारों की संख्या में लोग एक ही समय पर घरों से बाहर निकलते हैं। ऐसे में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। इस बार बिजनौर पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है।
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- \r\n बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन: यातायात को सुचारु रूप से चलाने और भीड़भाड़ से बचने के लिए यातायात पुलिस (Traffic Police) ने ईदगाह की तरफ जाने वाले मार्गों पर जगह-जगह बैरिकेड्स लगा दिए हैं। भारी वाहनों का प्रवेश उस क्षेत्र में पूर्ण रूप से वर्जित रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस अधिकारियों का निरीक्षण: पुलिस के आला अधिकारियों और कर्मचारियों ने खुद शाही ईदगाह का मौके पर जाकर मुआयना किया है। चप्पे-चप्पे पर सिविल पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों की तैनाती की जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n शांति समिति की बैठकें: त्योहार से पहले पुलिस महकमे ने शहर के संभ्रांत नागरिकों और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर सभी से कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है।\r\n \r\n
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शहर काजी माजिद अली की सख्त गाइडलाइंस (कुर्बानी के नियम)
\r\n\r\nईद-उल-अजहा का मुख्य आकर्षण हजरत इब्राहिम की सुन्नत को अदा करते हुए जानवरों की कुर्बानी देना होता है। लेकिन इस दौरान साफ-सफाई और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना भी इस्लाम का एक अहम हिस्सा है। इसे ध्यान में रखते हुए शहर काजी मोहम्मद माजिद अली ने बिजनौर के सभी नागरिकों से एक विशेष और सख्त अपील की है:
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\r\n\r\n\r\n"कुर्बानी किसी भी खुली जगह पर हरगिज न की जाए। इसके लिए चारदीवारी या पर्दे का माकूल इंतजाम करना बेहद जरूरी है, ताकि राहगीरों या अन्य समुदाय के लोगों को कोई परेशानी न हो।"\r\n
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साफ-सफाई को लेकर विशेष निर्देश:
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- \r\n रक्त का निस्तारण: काजी साहब ने स्पष्ट किया है कि कुर्बानी का खून खुले में या सार्वजनिक नालियों में नहीं बहाया जाना चाहिए। इसके लिए कच्चा गड्ढा खोदकर उसे वहीं दफन करने की व्यवस्था की जाए, ताकि बीमारियां न फैलें और दुर्गंध न आए।\r\n \r\n
- \r\n अवशेषों का सही निपटान: कुर्बानी के बाद बचे हुए अवशेष (वेस्ट मटेरियल) को सड़कों पर या कूड़ेदान के बाहर न फेंकें। यह सुनिश्चित करें कि ये अवशेष केवल नगर पालिका द्वारा चलाई जा रही विशेष कूड़ा गाड़ियों में ही डाले जाएं।\r\n \r\n
- \r\n गोश्त ले जाने का तरीका: जब भी कुर्बानी का गोश्त (मांस) एक जगह से दूसरी जगह या रिश्तेदारों के यहां भेजा जाए, तो उसे पूरी तरह से ढककर (पैक करके) ही ले जाया जाए। खुले में मांस ले जाना सख्त मना है।\r\n \r\n
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"सोशल मीडिया पर न डालें तस्वीरें": प्रशासन और धर्मगुरुओं की चेतावनी
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में लोग हर छोटी-बड़ी चीज का फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। लेकिन शहर काजी ने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए सख्त हिदायत दी है कि कुर्बानी करते हुए या कुर्बानी के गोश्त/जानवर का कोई भी फोटो या वीडियो फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम या एक्स (ट्विटर) पर किसी भी हाल में शेयर न किया जाए।
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प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह की तस्वीरें अक्सर दूसरे समुदायों की भावनाओं को आहत कर सकती हैं और शहर के शांतिपूर्ण माहौल (Communal Harmony) को बिगाड़ सकती हैं। पुलिस का साइबर सेल (Cyber Cell) सोशल मीडिया पर 24 घंटे पैनी नजर रखेगा। माहौल खराब करने वाली पोस्ट डालने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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भाईचारे और शांति का पैगाम (Conclusion)
\r\n\r\nअपनी बात को समाप्त करते हुए शहर काजी माजिद अली ने बिजनौर की अवाम से अपील की है कि ईद का यह त्योहार केवल नए कपड़े पहनने या अच्छे पकवान खाने का नाम नहीं है, बल्कि यह आपसी गिले-शिकवे भुलाकर गले मिलने का दिन है।
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उन्होंने सभी मुस्लिम भाइयों से गुजारिश की है कि वे समय से नमाज में शिरकत करें, मुल्क की तरक्की और अमन-चैन के लिए दुआएं मांगें। साथ ही, अपने पड़ोसियों, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों, उनका पूरा ख्याल रखें। यह त्योहार हमें त्याग, भाईचारे और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का संदेश देता है, और बिजनौर वासियों को इसी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम करते हुए इस बार की ईद-उल-अजहा मनानी चाहिए।