बिजनौर/चांदपुर (क्राइम एंड वाइल्डलाइफ डेस्क): पश्चिमी उत्तर प्रदेश का 'चीनी का कटोरा' कहा जाने वाला बिजनौर जिला इन दिनों दो वजहों से सुर्खियों में है—एक तरफ कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) की धूम और दूसरी तरफ गन्ने के खेतों में छिपे 'साइलेंट किलर' यानी गुलदार (Leopard) का खौफ। बीती रात चांदपुर क्षेत्र में आस्था और दहशत का ऐसा ही एक मिला-जुला रूप देखने को मिला, जब हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे एक शिवभक्त का सामना साक्षात मौत से हो गया।READ ALSO:-दिल्ली की दो सगी बहनें मेरठ में दरिंदे के 'चंगुल' से आजाद: मंदिर में रोती मिली किशोरी ने खोला श्यामनगर का डरावना राज, पुलिस की रेड से हड़कंप
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चांदपुर-धनौरा मार्ग (Chandpur-Dhanaura Road), जो कांवड़ियों का प्रमुख मार्ग है, वहां बागड़पुर के पास एक गुलदार ने अपने शावक के साथ सड़क पर डेरा जमा लिया और वहां से गुजर रहे एक अकेले कांवड़िए पर हमला करने की कोशिश की। गनीमत रही कि वक्त रहते राहगीरों और ग्रामीणों ने शोर मचा दिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n@Shakeel57767846 'बम-बम भोले' के जयकारों के बीच मौत की दहाड़: बिजनौर में कांवड़िए पर गुलदार का जानलेवा हमला, शावक के साथ सड़क पर आया शिकारी; बाल-बाल बची जान pic.twitter.com/h1YB2QWxH2
\r\n— MK Vashisth (@vadhisth) February 12, 2026
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इस घटना ने न केवल वन विभाग के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या बिजनौर की सड़कों पर रात के अंधेरे में शिवभक्त सुरक्षित हैं? आइए, जानते हैं इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना की पूरी कहानी विस्तार से।
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खौफनाक मंजर: जब सड़क पर आ गया शिकारी
\r\n\r\nघटना बीती रात की है। सावन का पवित्र महीना चल रहा है और बिजनौर के रास्तों पर 'बोल बम' के जयकारे गूंज रहे हैं। अनूपशहर (Anupshahr) के रहने वाले कृष्ण कुमार, जो पेशे से एक सामान्य नागरिक हैं और भगवान शिव के भक्त हैं, हरिद्वार से कांवड़ उठाकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे।
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सुनसान सड़क और झाड़ियों में हलचल:
\r\n\r\nचांदपुर-धनौरा रोड पर बागड़पुर गांव के पास का इलाका काफी सन्नाटे भरा होता है। सड़क के दोनों ओर गन्ने के घने खेत हैं, जो गुलदारों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह (Hideout) माने जाते हैं। कृष्ण कुमार अपनी धुन में चल रहे थे, तभी अचानक झाड़ियों में सरसराहट हुई।
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हमला और बचाव:
\r\n\r\nइससे पहले कि कृष्ण कुमार कुछ समझ पाते, एक विशालकाय गुलदार (Leopard) अपने शावक (Cub) के साथ सड़क पर आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुलदार ने कृष्ण कुमार की ओर झपट्टा मारने (Attempt to attack) की कोशिश की।
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- \r\n उस क्षण कृष्ण कुमार के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था।\r\n \r\n
- \r\n तभी वहां से गुजर रहे एक चार पहिया वाहन की हेडलाइट गुलदार की आंखों पर पड़ी।\r\n \r\n
- \r\n वाहन चालक ने समझदारी दिखाते हुए जोर से हॉर्न बजाया और शोर मचाना शुरू कर दिया।\r\n \r\n
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ग्रामीणों और शिवसैनिकों का रेस्क्यू ऑपरेशन
\r\n\r\nगुलदार और उसका शावक सड़क के बीचों-बीच खड़े हो गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कांवड़ियों का जत्था डर के मारे पीछे ही रुक गया।
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सूचना तंत्र:
\r\n\r\nबागड़पुर गांव में शिव भक्तों के लिए एक विशाल भंडारा चल रहा था। वहां मौजूद वाहन चालक ने दौड़कर घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही शिवसेना (शिंदे गुट) के जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह और दर्जनों ग्रामीण लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर मौके की ओर दौड़े।
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साहस का परिचय:
\r\n\r\nचौधरी वीर सिंह और ग्रामीणों ने वहां पहुंचकर देखा कि गुलदार सड़क के किनारे मौजूद था।
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- \r\n ग्रामीणों ने एक स्वर में शोर मचाया।\r\n \r\n
- \r\n वाहनों की लाइटें जलाई गईं।\r\n \r\n
- \r\n काफी मशक्कत और शोर-शराबे के बाद गुलदार अपने शावक के साथ वापस गन्ने के खेतों में लौट गया।\r\n \r\n
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चौधरी वीर सिंह ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला और डरे-सहमे कांवड़ियों को अपनी सुरक्षा में उस खतरनाक इलाके से पार कराया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि जब तक वन विभाग या पुलिस नहीं आती, कोई भी कांवड़िया अकेला उस रास्ते से न गुजरे।
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पुलिस की मुस्तैदी बनाम वन विभाग की लापरवाही
\r\n\r\nइस घटना ने प्रशासन के दो विभागों—पुलिस और वन विभाग—की कार्यशैली में जमीन-आसमान का अंतर दिखा दिया।
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पुलिस का एक्शन (Singham Avatar):
\r\n\r\nसूचना मिलते ही चांदपुर थाना प्रभारी अमित कुमार बिना वक्त गंवाए पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तुरंत भीड़ को नियंत्रित किया और कांवड़ियों को सुरक्षा घेरे में लिया। पुलिस की गाड़ी ने सायरन बजाकर आसपास के खेतों में छिपे जानवरों को दूर रखने की कोशिश की।
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वन विभाग की सुस्ती (Lethargic Response):
\r\n\r\nवहीं दूसरी ओर, वन विभाग (Forest Department), जिसका मुख्य काम ही वन्यजीवों को नियंत्रित करना है, उसकी टीम घटना की सूचना मिलने के एक घंटे बाद मौके पर पहुंची।
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- \r\n वन विभाग की इस देरी पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।\r\n \r\n
- \r\n शिवसेना जिला प्रमुख चौधरी वीर सिंह ने अधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई।\r\n \r\n
- \r\n उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांवड़ यात्रा के मद्देनजर यह क्षेत्र 'हाई रिस्क ज़ोन' में है, तो वन विभाग की गश्त टीम (Patrolling Team) नदारद क्यों थी? अगर उस एक घंटे के दौरान गुलदार दोबारा हमला कर देता, तो उसका जिम्मेदार कौन होता?\r\n \r\n
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अधिकारियों के बयान: हमला या हादसा?
\r\n\r\nइस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के बयानों में थोड़ा विरोधाभास (Contradiction) भी देखने को मिल रहा है।
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शिवसेना प्रमुख का दावा:
\r\n\r\nचौधरी वीर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट कहा कि यह "सीधा हमला" था।
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\r\n\r\n\r\n"गुलदार ने अनूपशहर निवासी कांवड़िए को अपना शिकार बनाने की कोशिश की थी। वह तो भगवान शिव की कृपा और ग्रामीणों की सतर्कता थी कि उनकी जान बच गई। वन विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"\r\n
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रेंजर की सफाई:
\r\n\r\nचांदपुर रेंजर दुष्यंत सिंह ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया लेकिन 'हमले' की थ्योरी को थोड़ा हल्का किया।
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\r\n\r\n\r\n"गुलदार और उसका शावक सड़क क्रॉस कर रहे थे, जिसे हमला समझ लिया गया। हमारी टीम ने मौके का मुआयना किया है। पगमार्क (पंजों के निशान) मिले हैं। सुरक्षा की दृष्टि से आज ही उस स्थान पर पिंजरा (Cage) लगाया जाएगा ताकि गुलदार को आबादी वाले क्षेत्र से दूर किया जा सके।"\r\n
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बिजनौर: गुलदारों का गढ़ और कांवड़ यात्रा की चुनौती
\r\n\r\nबिजनौर में गुलदार का दिखना अब कोई नई बात नहीं रह गई है, लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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क्यों है खतरा?
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- \r\n गन्ने के खेत: सावन के महीने में गन्ने की फसल काफी ऊंची हो जाती है। यह गुलदारों के छिपने और प्रजनन के लिए आदर्श जगह होती है। बिजनौर में हजारों एकड़ में गन्ना खड़ा है।\r\n \r\n
- \r\n कांवड़ियों की वेशभूषा और समय: कांवड़िए अक्सर रात के ठंडे समय में यात्रा करते हैं। वे नंगे पैर होते हैं और कई बार अकेले या छोटे समूहों में चलते हैं, जिससे वे आसान शिकार (Soft Target) बन जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n ध्वनि प्रदूषण: कांवड़ यात्रा में बजने वाले डीजे और शोर से कई बार जंगली जानवर आक्रामक (Aggressive) हो जाते हैं और सड़क पर आ जाते हैं।\r\n \r\n
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आंकड़े क्या कहते हैं?
\r\n\r\nपिछले कुछ वर्षों में बिजनौर में गुलदार के हमलों में कई दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। इसे देखते हुए प्रशासन ने पहले ही कई क्षेत्रों को 'डेंजर जोन' घोषित किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर गश्त की कमी साफ दिखाई देती है।
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प्रशासन के लिए सवाल और सुझाव (Expert Advisory)
\r\n\r\nबागड़पुर की इस घटना ने प्रशासन के लिए एक अलार्म बजा दिया है। अभी कांवड़ यात्रा का पीक समय आना बाकी है।
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क्या कदम उठाने होंगे?
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- \r\n 24x7 पेट्रोलिंग: वन विभाग को संवेदनशील मार्गों पर रात भर गश्त करनी होगी। सिर्फ दिन में खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा।\r\n \r\n
- \r\n लाइटिंग: चांदपुर-धनौरा मार्ग और ऐसे अन्य रास्तों पर जहां अंधेरा है, वहां अस्थायी लाइटों की व्यवस्था होनी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n जागरूकता: कांवड़ शिविरों में अनाउंसमेंट किया जाना चाहिए कि कोई भी कांवड़िया रात में अकेला न चले। हमेशा जत्थे (Group) में चलें और अपने पास लाठी या टॉर्च रखें।\r\n \r\n
- \r\n त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT): वन विभाग की एक टीम को पुलिस के साथ हर प्रमुख चेकपोस्ट पर तैनात रहना चाहिए ताकि रिस्पॉन्स टाइम को 1 घंटे से घटाकर 10 मिनट किया जा सके।\r\n \r\n
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कांवड़ियों के लिए जरूरी सलाह
\r\n\r\nअगर आप भी कांवड़ यात्रा पर हैं और बिजनौर या पश्चिमी यूपी के रास्तों से गुजर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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- \r\n समूह में चलें: जंगल या खेतों के बीच से गुजरते समय कभी भी अकेले न हों।\r\n \r\n
- \r\n संगीत बजाएं: पैदल चलते समय घंटियां या संगीत बजाते रहें। जंगली जानवर शोर से दूर भागते हैं।\r\n \r\n
- \r\n सड़क के बीच में रहें: सड़क के किनारे (पटरी) पर चलने से बचें क्योंकि गुलदार अक्सर झाड़ियों से अचानक हमला करते हैं।\r\n \r\n
- \r\n रात का सफर: कोशिश करें कि घने जंगल वाले इलाकों को दिन में ही पार कर लें।\r\n \r\n
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अब पिंजरे से उम्मीद
\r\n\r\nफिलहाल, वन विभाग ने बागड़पुर के उस स्थान पर पिंजरा लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांवड़िया कृष्ण कुमार सुरक्षित हैं और अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। लेकिन यह घटना एक चेतावनी है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि आस्था के इस पर्व में किसी शिवभक्त का रक्त न बहे।
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गुलदार की मौजूदगी और शावक का साथ होना यह बताता है कि मादा गुलदार अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर आक्रामक हो सकती है। ऐसे में अगले कुछ दिन इस मार्ग पर बेहद सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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घटनाक्रम: एक नज़र में (Quick Timeline)
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| \r\n देर रात \r\n | \r\n \r\n कृष्ण कुमार (कांवड़िया) बागड़पुर पहुंचे। \r\n | \r\n \r\n सामान्य \r\n | \r\n
| \r\n घटना \r\n | \r\n \r\n गुलदार और शावक का सड़क पर आना। \r\n | \r\n \r\n अफरा-तफरी \r\n | \r\n
| \r\n बचाव \r\n | \r\n \r\n वाहन चालक और ग्रामीणों ने शोर मचाया। \r\n | \r\n \r\n गुलदार भागा \r\n | \r\n
| \r\n प्रतिक्रिया \r\n | \r\n \r\n शिवसैनिक और पुलिस मौके पर पहुंचे। \r\n | \r\n \r\n सुरक्षा घेरा \r\n | \r\n
| \r\n लापरवाही \r\n | \r\n \r\n वन विभाग की टीम 1 घंटे बाद पहुंची। \r\n | \r\n \r\n विरोध प्रदर्शन \r\n | \r\n
| \r\n एक्शन \r\n | \r\n \r\n रेंजर ने पिंजरा लगाने का आदेश दिया। \r\n | \r\n \r\n सतर्कता जारी \r\n | \r\n