बिजनौर (उत्तर प्रदेश)। अक्सर कहा जाता है कि इंसान बाहरी दुनिया की कितनी भी बड़ी जंग क्यों न जीत ले, लेकिन जब वह अपने घर और परिवार के भीतर चल रहे क्लेश से हारता है, तो परिणाम बेहद खौफनाक होते हैं। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से एक ऐसी ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर कोतवाली क्षेत्र की पॉश इंद्रलोक कॉलोनी में रहने वाले और चांदपुर तहसील में नायब नाजिर के पद पर तैनात 50 वर्षीय संजीव चौधरी उर्फ महावीर ने घरेलू कलह से तंग आकर मौत को गले लगा लिया।READ ALSO:-
\r\n\r\n\r\n\r\n
सोमवार की दोपहर अपने ही घर में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारने वाले संजीव चौधरी पिछले तीन दिनों से अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। लेकिन बुधवार को उन्होंने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे और स्थानीय इलाके में शोक और सन्नाटे की लहर दौड़ा दी है। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर उस दिन क्या हुआ था, पुलिस को घटनास्थल से क्या-क्या मिला है, और कैसे एक पारिवारिक विवाद ने एक होनहार सरकारी कर्मचारी की जान ले ली।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सोमवार की वह खौफनाक दोपहर: जब गूंजी गोली की आवाज
\r\n\r\nयह दिल दहला देने वाली घटना इस सप्ताह के शुरुआत यानी सोमवार की है। बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शांत और सुरक्षित मानी जाने वाली इंद्रलोक कॉलोनी में सोमवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब अचानक एक घर से गोली चलने की जोरदार आवाज आई। यह घर चांदपुर तहसील में तैनात नायब नाजिर संजीव चौधरी का था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
गोली की आवाज सुनकर जब तक परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी कमरे की तरफ दौड़कर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। संजीव चौधरी खून से लथपथ हालत में जमीन पर पड़े थे। उन्होंने अपनी ही लाइसेंसी 32 बोर की पिस्टल से खुद को गोली मार ली थी। गोली लगने के बाद परिजनों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में घटना की सूचना शहर कोतवाली पुलिस को दी गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सूचना पाते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और संजीव चौधरी की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बिना समय गंवाए नजदीकी बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने की जद्दोजहद शुरू कर दी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जिंदगी की जंग हार गए संजीव: बुधवार को तोड़ा दम
\r\n\r\nगोली संजीव चौधरी के शरीर के बेहद नाजुक हिस्से में लगी थी, जिसके कारण उनका काफी खून बह चुका था। अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही उनकी हालत बेहद नाजुक (Critical) बनी हुई थी। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उन्हें बचाने का लगातार प्रयास कर रही थी, और परिजन किसी चमत्कार की उम्मीद में आईसीयू के बाहर प्रार्थना कर रहे थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन, अत्यधिक खून बह जाने और आंतरिक अंगों को पहुंचे भारी नुकसान के कारण बुधवार को उनकी सांसों की डोर टूट गई। इलाज के दौरान संजीव चौधरी ने अंतिम सांस ली। मौत की खबर जैसे ही परिजनों और उनके साथ काम करने वाले प्रशासनिक कर्मचारियों तक पहुंची, वहां मातम छा गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कौन थे संजीव चौधरी? एक नजर उनके सफर पर
\r\n\r\nसंजीव चौधरी उर्फ महावीर (50 वर्ष) बिजनौर के प्रशासनिक महकमे में एक जाना-माना और परिचित चेहरा थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n वर्तमान तैनाती: वर्तमान में वह बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील में 'नायब नाजिर' (Naib Nazir) के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n पूर्व का अनुभव: इससे पहले वे बिजनौर जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में 'पेशकार' के पद पर भी लंबे समय तक काम कर चुके थे। सहकर्मियों के बीच उनकी पहचान एक शांत और अपने काम से काम रखने वाले व्यक्ति के रूप में थी। लेकिन बाहर से शांत दिखने वाले संजीव चौधरी के अंदर पारिवारिक उलझनों का कितना बड़ा तूफान चल रहा था, इसका अंदाजा उनके साथ काम करने वालों को भी नहीं था।\r\n \r\n
\r\n\r\n
सुसाइड नोट और हथियारों का जखीरा: पुलिस को मौके से क्या मिला?
\r\n\r\nघटना के तुरंत बाद पुलिस और फोरेंसिक (Forensic) विभाग की टीम ने संजीव चौधरी के आवास को सील कर दिया था और वहां से सुबूत जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी थी। क्राइम सीन की जांच के दौरान पुलिस को कुछ बेहद अहम चीजें बरामद हुई हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सुसाइड नोट (Suicide Note): पुलिस को घटनास्थल वाले कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि इस सुसाइड नोट में संजीव चौधरी ने अपने इस खौफनाक और आत्मघाती कदम के पीछे का कारण अपनी पत्नी के साथ चल रहे लगातार 'घरेलू विवाद' और क्लेश को बताया है। यह पत्र अब पुलिस की जांच का मुख्य आधार बन गया है।\r\n \r\n
- \r\n 32 बोर की पिस्टल: जिस हथियार से संजीव ने खुद को गोली मारी, वह उनकी अपनी लाइसेंसी 32 बोर की पिस्टल थी। पुलिस ने इसे अपने कब्जे में ले लिया है।\r\n \r\n
- \r\n 12 बोर की डबल बैरल बंदूक: इसके अलावा पुलिस को मौके से एक 12 बोर की डबल बैरल बंदूक (लाइसेंसी) भी बरामद हुई है, जिसे पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से जब्त कर लिया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
5-6 साल पहले भी उठाया था ऐसा ही खौफनाक कदम: तनाव का पुराना इतिहास
\r\n\r\nइस घटना की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है। संजीव चौधरी के लिए तनाव और डिप्रेशन से लड़ना कोई नई बात नहीं थी। जानकारी के अनुसार, आज से करीब पांच-छह वर्ष पूर्व भी घरेलू तनाव और मानसिक दबाव के चलते संजीव चौधरी ने अपनी जान लेने की कोशिश की थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
उस समय उन्होंने गुस्से और अवसाद (Depression) में आकर अपने ही पैर में गोली मार ली थी। उस घटना के बाद उन्हें बचा लिया गया था और कुछ समय तक सब ठीक चलने लगा था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि वह पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव पूरी तरह से कभी खत्म नहीं हुआ था। पुरानी समस्या एक बार फिर विकराल रूप लेकर वापस आई और इस बार संजीव ने एक ऐसा आत्मघाती कदम उठाया, जिससे वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
घरेलू कलह और मानसिक स्वास्थ्य: समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी
\r\n\r\nसंजीव चौधरी की मौत सिर्फ एक आपराधिक या पुलिस फाइल का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के लिए एक बेहद गंभीर चेतावनी भी है। आज के दौर में काम के भारी दबाव (Work Pressure) और उसके साथ घर-परिवार के अनसुलझे विवाद व्यक्ति को भीतर ही भीतर कितना खोखला कर देते हैं, यह घटना इसका जीता-जागता उदाहरण है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
विशेषज्ञों का मानना है कि जब व्यक्ति कार्यस्थल और घर, दोनों जगह शांति नहीं पाता है, तो वह डिप्रेशन (Mental Health Issues) का शिकार हो जाता है। ऐसे में समय रहते काउंसलिंग (Counseling), परिवार के सदस्यों के बीच खुला संवाद (Open Communication), और आपसी समझ ही इस तरह के घातक परिणामों को रोक सकती है। संजीव चौधरी के मामले में, उनके पास लाइसेंसी हथियारों की मौजूदगी ने भी इस 'आवेगी फैसले' (Impulsive Decision) को अंजाम तक पहुंचाने में एक उत्प्रेरक का काम किया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आगे क्या? पुलिस की तफ्तीश जारी
\r\n\r\nबुधवार को संजीव चौधरी के निधन के बाद, पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में भिजवा दिया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की आगे की कार्रवाई इन बिंदुओं पर केंद्रित होगी:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n सुसाइड नोट की जांच: पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स के जरिए यह पुष्टि करेगी कि बरामद सुसाइड नोट संजीव ने ही लिखा था।\r\n \r\n
- \r\n परिजनों से पूछताछ: सुसाइड नोट में पत्नी से विवाद का जिक्र होने के कारण, पुलिस अब उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों से भी पूछताछ करेगी ताकि विवाद की असल जड़ का पता लगाया जा सके।\r\n \r\n
- \r\n लाइसेंस निरस्तीकरण: चूंकि लाइसेंसी हथियारों का दुरुपयोग आत्महत्या में हुआ है, इसलिए पुलिस नियमानुसार हथियारों के लाइसेंस निरस्त करने की रिपोर्ट भी संबंधित विभाग को भेजेगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अहंकार और कलह किसी भी हंसते-खेलते परिवार को किस कदर तबाह कर सकते हैं। बिजनौर पुलिस मामले की हर एंगल से गहनता से जांच कर रही है, और जल्द ही इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।