उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में जमीनों की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भू-माफिया और ठग अब नए-नए तरीके अपनाकर सीधे-सादे लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। सबसे ज्यादा दुखद स्थिति तब होती है, जब ठगी करने वाला कोई अनजान नहीं, बल्कि अपना ही खून या करीबी रिश्तेदार निकलता है। ऐसा ही एक बेहद चौंकाने वाला और रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला बिजनौर जिले के नूरपुर थाना क्षेत्र से प्रकाश में आया है। यहां एक महिला, जो अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए एक आशियाना बनाना चाहती थी, उसे उसके ही एक भरोसेमंद रिश्तेदार ने एक सुनियोजित साजिश के तहत लाखों रुपये का चूना लगा दिया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संपत्ति के मामलों में आंख मूंदकर किसी पर भी भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।READ ALSO:-भट्टी की तरह उबल रहा उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में पारा 44.6°C के पार, 26 जिलों में लू का खौफनाक अलर्ट जारी
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क्या है पूरा मामला? हल्दौर की महिला के साथ नूरपुर में रची गई साजिश
\r\n\r\nइस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक आम इंसान की उस चाहत से होती है, जिसमें वह अपने लिए एक जमीन का टुकड़ा खरीदना चाहता है। प्राप्त जानकारी और पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बिजनौर जिले के हल्दौर कस्बे के मोहल्ला खेड़ा की रहने वाली गुरविंदर कौर (पत्नी सरवन सिंह) काफी समय से एक आवासीय प्लॉट की तलाश में थीं। इसी सिलसिले में उन्होंने अपने एक करीबी रिश्तेदार अमरीक राजन सिंह (पुत्र राजू सिंह) से संपर्क किया। अमरीक राजन नूरपुर कस्बे के मोहल्ला गोविन्दनगर का निवासी है।
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चूंकि अमरीक राजन रिश्तेदार था, इसलिए गुरविंदर कौर ने उस पर पूरा भरोसा किया। अमरीक ने महिला को विश्वास दिलाया कि वह नूरपुर के एक अच्छे इलाके में उसे एक बेहतरीन प्लॉट बेहद वाजिब दाम में दिला देगा। इसी साजिश को आगे बढ़ाते हुए अमरीक राजन ने गुरविंदर कौर की मुलाकात अपने एक परिचित इमरान (पुत्र अलाउद्दीन) से कराई, जो नूरपुर के ही मोहल्ला इस्लामनगर का रहने वाला है। अमरीक ने इमरान को एक प्रॉपर्टी डीलर और जमीन का असली मालिक बताकर पेश किया। दोनों ने मिलकर महिला को नूरपुर के पॉश माने जाने वाले मोहल्ला रामनगर में एक शानदार आवासीय प्लॉट दिखाया। प्लॉट की लोकेशन और अपने रिश्तेदार की गारंटी देखकर महिला उनके जाल में पूरी तरह से फंस गई और जमीन खरीदने के लिए तैयार हो गई।
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ठगी का खेल: बैंक खाते और नकद के जरिए 4.60 लाख की वसूली
\r\n\r\nएक बार जब महिला प्लॉट खरीदने के लिए राजी हो गई, तो आरोपियों ने पैसों की उगाही का खेल शुरू कर दिया। पीड़िता गुरविंदर कौर के अनुसार, प्लॉट का सौदा तय होने के बाद इमरान और अमरीक ने बयाना (Advance Money) के तौर पर रुपयों की मांग की।
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बीते 6 दिसम्बर 2024 से लेकर कई किश्तों में महिला से पैसे ऐंठे गए। आरोपियों ने बहुत ही शातिर तरीके से रकम ली ताकि भविष्य में उन पर सीधा शक न जाए। गुरविंदर कौर ने बताया कि उन्होंने इमरान के बैंक खाते में कई बार में कुल 3 लाख 30 हजार रुपये (3.30 लाख) ऑनलाइन/बैंक ट्रांसफर के माध्यम से भेजे। इसके अलावा, 1 लाख 30 हजार रुपये (1.30 लाख) की मोटी रकम इमरान को नकद (Cash) के रूप में दी गई। इस प्रकार, पीड़िता ने अपनी गाढ़ी कमाई के कुल 4 लाख 60 हजार रुपये (4.60 लाख) इन जालसाजों के हवाले कर दिए।
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इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी और असली जामा पहनाने के लिए आरोपियों ने एक स्टाम्प पेपर पर बयाने का एग्रीमेंट भी तैयार किया। महिला का कहना है कि यह एग्रीमेंट परवेज राजन और गुरप्रीत नामक गवाहों की मौजूदगी में किया गया था, ताकि महिला को यह लगे कि सब कुछ पूरी तरह से कानूनी और पारदर्शी तरीके से हो रहा है।
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पर्दाफाश: जब खुली ठगों की पोल और शुरू हुआ पंचायत का दौर
\r\n\r\nपैसे देने और एग्रीमेंट होने के बाद जब काफी समय बीत गया और गुरविंदर कौर ने प्लॉट की रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाना शुरू किया, तो इमरान और अमरीक राजन टालमटोल करने लगे। कभी कागजों की कमी तो कभी तहसील में छुट्टी का बहाना बनाकर वे दिन काटते रहे।
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जब महिला का शक गहराया, तो उसने अपने स्तर पर मोहल्ला रामनगर स्थित उस प्लॉट की गोपनीय जांच-पड़ताल की। जांच में जो सच सामने आया, उसने महिला के पैरों तले जमीन खिसका दी। पता चला कि जिस प्लॉट का सौदा कर उनसे 4.60 लाख रुपये लिए गए हैं, वह प्लॉट इमरान का है ही नहीं। इमरान और अमरीक राजन ने मिलकर एक फर्जी और हमसाज योजना के तहत इस पूरी धोखाधड़ी को अंजाम दिया था।
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जब पीड़िता ने इस धोखे का कड़ा विरोध किया और अपने पैसे वापस मांगे, तो मामला नूरपुर थाने तक पहुंच गया। थाने में पुलिस की मौजूदगी के बजाय, एक अनौपचारिक पंचायत बुलाई गई। दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस के बाद एक लिखित समझौता हुआ। इस फैसले के तहत इमरान ने अपनी गलती मानी और वादे के अनुसार 3 फ़रवरी 2025 तक महिला का पूरा पैसा वापस करने की बात स्वीकार की। इसके एवज में उसने महिला को अपनी बैंक की चेकबुक से एक चेक भी काटकर दिया।
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चेक बाउंस और न्याय की लंबी लड़ाई: एसपी ने उठाया सख्त कदम
\r\n\r\n3 फ़रवरी 2025 की तय तारीख आने पर गुरविंदर कौर ने उम्मीद के साथ वह चेक अपने बैंक खाते में क्लियरेंस के लिए लगाया। लेकिन ठगों की नीयत में खोट था। कुछ ही दिनों बाद बैंक से एक मेमो (Memo) वापस आया, जिसमें स्पष्ट लिखा था कि खाते में पर्याप्त धनराशि (Insufficient Funds) नहीं है और चेक बाउंस (Cheque Bounce) हो गया है। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत यह एक गंभीर अपराध है।
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चेक बाउंस होने के बाद जब महिला ने दोबारा इमरान और अमरीक से संपर्क किया, तो उन्होंने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया और कथित तौर पर धमकियां भी दीं। स्थानीय पुलिस स्टेशन से तुरंत मदद न मिलने पर, हार मानकर पीड़िता ने सीधे जिले के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी, पुलिस अधीक्षक (SP) अभिषेक झा के कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।
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पीड़िता ने एसपी को अपनी पूरी व्यथा सुनाई और प्रार्थना पत्र सौंपते हुए बताया कि ये लोग आदतन अपराधी हैं। अपनी शिकायत में महिला ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इमरान और अमरीक राजन ने इसी तरह की धोखाधड़ी पूर्व में भी की है। उन्होंने ग्राम रोशनपुर जागीर (थाना नूरपुर) की रहने वाली एक अन्य महिला, जगदीश कौर (पत्नी हरचरन सिंह), को भी आवासीय प्लॉट दिलाने का झांसा देकर उनके साथ साढ़े चार लाख (4.50 लाख) रुपये की भारी ठगी की है।
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पुलिस का एक्शन: नूरपुर थाने में गंभीर धाराओं में FIR दर्ज
\r\n\r\nएक ही तरीके से दो अलग-अलग महिलाओं को शिकार बनाने और चेक बाउंस के स्पष्ट सुबूतों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा ने मामले की गंभीरता को तुरंत भांप लिया। उन्होंने नूरपुर थाना पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल प्रभाव से आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के सख्त आदेश जारी किए।
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एसपी के आदेश मिलते ही नूरपुर थाना पुलिस हरकत में आ गई। नूरपुर के थानाध्यक्ष (SHO) प्रवेज कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि एसपी महोदय के निर्देशों के अनुपालन में आरोपी इमरान (निवासी इस्लामनगर) और अमरीक राजन सिंह (निवासी गोविन्दनगर) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी और अमानत में खयानत (धारा 420 आदि) जैसी गंभीर धाराओं के तहत नामजद मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मामले की विवेचना (Investigation) शुरू कर दी है और दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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रियल एस्टेट धोखाधड़ी: आम जनता के लिए बड़े सबक
\r\n\r\nबिजनौर का यह मामला केवल एक समाचार नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक बहुत बड़ा सबक है जो जमीन या घर खरीदने की योजना बना रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की बाढ़ सी आई हुई है। ऐसे में कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है:
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- \r\n रिश्तों पर अंधा भरोसा न करें: प्रॉपर्टी के मामले में सगे-संबंधियों पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि कागजों की सत्यता परखकर ही कोई सौदा करें।\r\n \r\n
- \r\n मालिकाना हक (Title Deed) की जांच: किसी भी प्लॉट का बयाना देने से पहले स्थानीय तहसील, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस या राजस्व विभाग से उस जमीन का खसरा-खतौनी और 12 साला रिकॉर्ड (Encumbrance Certificate) जरूर चेक कराएं।\r\n \r\n
- \r\n कैश (नकद) लेनदेन से बचें: प्रॉपर्टी के सौदे में कभी भी बड़ी रकम नकद में न दें। सारा लेनदेन बैंक खाते (RTGS/NEFT/Cheque/Demand Draft) के माध्यम से करें और एग्रीमेंट में उस ट्रांजैक्शन आईडी का स्पष्ट जिक्र करें। इस मामले में 3.30 लाख रुपये का ऑनलाइन ट्रांसफर ही पुलिस केस में सबसे बड़ा सबूत बना है।\r\n \r\n
- \r\n रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन चेक करें: यदि किसी बिल्डर या प्रॉपर्टी डीलर से जमीन ले रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह प्रोजेक्ट यूपी रेरा (UP RERA) में पंजीकृत है या नहीं।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी विशेषज्ञ की सलाह: एग्रीमेंट टू सेल (Agreement to Sell) बनवाते समय किसी अनुभवी वकील की सेवाएं जरूर लें, जो दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच कर सके।\r\n \r\n
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फिलहाल, गुरविंदर कौर और उनके परिवार को अब बिजनौर पुलिस और न्यायपालिका से ही आस है कि उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलेगी और जालसाजों को उनके किए की कड़ी सजा मिलेगी। पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में गिरफ्तारी होने की पूरी संभावना है।