शकील अहमद
बिजनौर (खबरीलाल न्यूज़ डेस्क)। पहाड़ी राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मैदानी इलाकों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ना शुरू हो गया है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में लगातार जारी भारी वर्षा के बाद हरिद्वार बैराज से गंगा नदी में 1.26 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज कर दिया गया है। इस भारी जलप्रवाह के कारण जनपद बिजनौर में गंगा और खोह नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।READ ALSOसरधना में वहशियत की हदें पार: गन्ने के खेत में मिली युवती की रक्तरंजित लाश, पहचान मिटाने के लिए ईंट से कुचला चेहरा; दहशत में ग्रामीण
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गंगा नदी का जलस्तर 225 से 230 क्यूसेक के संवेदनशील दायरे के करीब पहुंचने से चांदपुर और बिजनौर तहसील क्षेत्र के लगभग 11 गांवों की कृषि भूमि में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर और उप जिलाधिकारी (SDM) चांदपुर प्रशांत वर्मा ने स्वयं बाढ़ प्रभावित संवेदनशील इलाकों का स्थलीय मुआयना कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमान संभाल ली है।
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आबादी क्षेत्र सुरक्षित, लेकिन खेतों में घुसा पानी: डीएम ने दिए 24 घंटे निगरानी के निर्देश

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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि वर्तमान में आबादी वाले क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं और आम जनजीवन सामान्य बना हुआ है। पानी मुख्य रूप से निचले खेतों और संपर्क मार्गों पर फैला हुआ है।
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डीएम के प्रमुख निर्देश:

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    बाढ़ चौकियों की सक्रियता: जिले में बनाई गई सभी बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।
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    डोर-टू-डोर स्वास्थ्य जांच: स्वास्थ्य विभाग की टीमों को प्रभावित गांवों में घर-घर भेजकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य का परीक्षण करने और आवश्यक दवाइयां वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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    राहत सामग्री का वितरण: प्रभावित परिवारों तक बिना किसी देरी के सूखा राशन और अन्य राहत सामग्रियां पहुंचाने की हिदायत दी गई है।
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बढ़ापुर में खोह नदी से कटान की आशंका: वन व सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम तैनात

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पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश का असर केवल गंगा तक सीमित नहीं है, बल्कि नगीना तहसील के बढ़ापुर क्षेत्र स्थित गांवों में खोह नदी भी उफान पर है। खोह नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास की जमीन पर कटान का खतरा उत्पन्न हो गया था।
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खतरे को भांपते हुए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने सिंचाई विभाग, वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम के साथ मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:
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    नदी किनारे बसी आबादी की एक सटीक और अद्यतन (Updated) सूची तुरंत तैयार की जाए।
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    कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग तुरंत तकनीकी और रोधन प्रबंध करे।
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    यदि जलस्तर और बढ़ता है, तो संवेदनशील इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित बाढ़ आश्रय स्थलों (Flood Shelters) में शिफ्ट कराया जाए।
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डीएम ने बताया कि फिलहाल खोह नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम (Recede) हो रहा है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सभी अधिकारियों को ग्राउंड ज़ीरो पर तैनात रहने और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर पैनी नज़र रखने को कहा गया है।
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चांदपुर के संवेदनशील गांवों में जलभराव, आवागमन के लिए 2 आधुनिक नावें तैनात

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चांदपुर तहसील के जलीलपुर ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत आने वाले दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी के मुख्य संपर्क मार्गों पर 1 से 1.5 फीट तक पानी आ गया है। इसके बावजूद, गांवों का मुख्य संपर्क टूटा नहीं है और ग्रामीण सुरक्षित रूप से ट्रैक्टरों और ऊंचे वाहनों के जरिए आवागमन कर रहे हैं।
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एहतियात के तौर पर एसडीएम प्रशांत वर्मा की देखरेख में क्षेत्र में 10 सीटर और 25 सीटर क्षमता वाली दो आधुनिक नावें तैनात कर दी गई हैं। इसके अलावा, प्राथमिक विद्यालयों में 4 अत्याधुनिक बाढ़ राहत चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों पर लेखपालों, ग्राम विकास अधिकारियों और राजस्व कर्मियों की चौबीसों घंटे रोस्टरवार ड्यूटी लगाई गई है।
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राहत व बचाव कार्य: 300 राशन किट वितरित, PAC और NDRF-SDRF का पहरा

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जनपद में बाढ़ से निपटने के लिए बहु-विभागीय रणनीति के तहत काम किया जा रहा है:
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    राहत सामग्री का वितरण: प्रभावित 11 गांवों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में अब तक लगभग 300 राशन किटों का वितरण कराया जा चुका है। आपात स्थिति के लिए राहत सामग्री का अतिरिक्त बफर स्टॉक भी तैयार रखा गया है।
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    सुरक्षा बल तैनात: जिले में सुरक्षा और त्वरित राहत कार्य के लिए 'फ्लड पीएसी' (Flood PAC) को तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों के साथ सीधा कंट्रोल रूम से समन्वय स्थापित किया गया है।
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    पशुपालन एवं स्वास्थ्य सेवाएं: पशुपालन विभाग की टीमें लगातार गांवों में शिविर लगाकर पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण (Vaccination) कर रही हैं। साथ ही संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं और चूने का छिड़काव किया जा रहा है।
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किसानों को बड़ी राहत: पानी उतरते ही होगा सर्वे, 33% से अधिक फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा

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गंगा और खोह नदी के तटीय इलाकों में बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से गन्ने और चारा फसलों को पहुंचे आंशिक नुकसान पर जिला प्रशासन ने अत्यंत संवेदनशील रुख अपनाया है।
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जिला आपदा विशेषज्ञ (आपदा प्रबंधक) प्रशांत सक्सेना ने बताया कि पिछले वर्ष जिले के करीब 44 गांवों की कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई थी। इस वर्ष भी जैसे ही खेतों से पानी उतरेगा, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम तुरंत हर खेत का स्थलीय निरीक्षण और डिजिटल सर्वे करेगी। यदि सर्वे में किसानों की फसलों में 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान पाया जाता है, तो शासन की निर्धारित दैवीय आपदा नियमावली के तहत बिना किसी विलंब के किसानों के बैंक खातों में आर्थिक मुआवजा हस्तांतरित किया जाएगा।
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बिजनौर में बाढ़ प्रबंधन का पूरा खाका: एक नज़र में

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व्यवस्था का नाम
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आंकड़े / विवरण
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सक्रिय बाढ़ चौकियां
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32 चौकियां
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बाढ़ आश्रय स्थल (Shelters)
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35 स्थल
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संवेदनशील इलाके
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24 क्षेत्र
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अति संवेदनशील इलाके
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05 क्षेत्र
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प्रभावित गांव (वर्तमान)
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11 गांव (चांदपुर व बिजनौर तहसील)
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राशन किट वितरण
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300+ किट (बफर स्टॉक उपलब्ध)
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निगरानी चक्र
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हर 2 घंटे में कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग
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मुआवजा मानदंड
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33% से अधिक फसल क्षति पर
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सचेत ऐप और 2 घंटे की मॉनिटरिंग से हाई-टेक हुआ कंट्रोल रूम

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आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस बार बाढ़ से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) का सहारा लिया जा रहा है:
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    हर 2 घंटे में मॉनिटरिंग: जिला कंट्रोल रूम 24 घंटे एक्टिव है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से अलर्ट मिलते ही हर 2 घंटे में सभी एसडीएम, तहसीलदार, बीडीओ, ईओ, ग्राम प्रधानों और आपदा मित्रों को टेलीफोनिक अलर्ट और वेदर अपडेट भेजा जा रहा है।
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  3. \r\n
    'सचेत ऐप' से पूर्व सूचना: 'सचेत ऐप' (Sachet App) के माध्यम से किसी भी संभावित खतरे या जलस्तर में बढ़ोतरी की जानकारी 2 से 3 घंटे पहले ही नोटिफिकेशन और अलार्म के रूप में मिल रही है।
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    ग्राम चौपाल से जागरूकता: ग्राम स्तर पर 'ग्राम चौपाल' का आयोजन कर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी किनारे न जाने और बच्चों को पानी से दूर रखने की सख्त हिदायत दी जा रही है।
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    सेफ्टी इक्विपमेंट्स और गोताखोर: सभी तहसीलों में लाइफ जैकेट, बोट्स, सेफ्टी रिंग्स जैसे बाढ़ सुरक्षा उपकरण पहले ही बांटे जा चुके हैं। स्थानीय नाविकों और गोताखोरों को चिह्नित कर उनकी सूची कंट्रोल रूम से अटैच की गई है।
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प्रशासन की जनता से अपील

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बिजनौर जिला प्रशासन ने आम नागरिकों और विशेषकर गंगा व खोह नदी के तटीय क्षेत्रों के बाशिंदों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन पूरी सतर्कता बरतें। किसी भी आपात स्थिति या जलस्तर अचानक बढ़ने पर तुरंत स्थानीय बाढ़ चौकी, ग्राम प्रधान या जिला आपदा कंट्रोल रूम को सूचित करें।
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