बिजनौर (हेल्थ/क्राइम डेस्क): समाज में डॉक्टर को 'धरती का भगवान' माना जाता है, लेकिन जब वही रक्षक चंद रुपयों के लालच में मरीजों का शोषण करने लगे, तो पूरी व्यवस्था शर्मसार हो जाती है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से स्वास्थ्य विभाग को दागदार करने वाला एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), नगीना में तैनात एक महिला आयुष चिकित्सक को मरीज से 200 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।READ ALSO:-बिजनौर में 'अंधविश्वास' का काला व्यापार: तंत्र-मंत्र और बर्बादी का खौफ दिखाकर ऐंठे 5.20 लाख रुपये, ढोंगी तांत्रिक असलम गिरफ्तार
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इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजनौर के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) ने आरोपी महिला डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से चिकित्सकीय कार्यों से निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय टीम का गठन कर दिया है।
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क्या है पूरा मामला? फोटोकॉपी ने खोला भ्रष्टाचार का राज
\r\n\r\nकार्यालय मुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2026 को जारी कार्यालय आदेश (पत्रांक- 409) के अनुसार, यह घटना 24 अप्रैल 2026 की है। आरोपी चिकित्सक का नाम डॉ. मीनाक्षी रस्तोगी है, जो CHC नगीना में महिला चिकित्सक (आयुष - संविदा) के पद पर तैनात थीं।
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शिकायतकर्ता ने डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक बेहद स्मार्ट तरीका अपनाया था।
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- \r\n इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान खुलासा: CHC नगीना के चिकित्सा अधीक्षक द्वारा CMO को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 24 अप्रैल को जब वह इमरजेंसी सेवा दे रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें फोन कर OPD कक्ष में बुलाया।\r\n \r\n
- \r\n पर्स से निकला वही नोट: जब चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी रस्तोगी के कक्ष में पहुंचे, तो उस व्यक्ति ने महिला डॉक्टर पर 200 रुपये की रिश्वत लेने का सीधा आरोप लगाया। पुख्ता सुबूत के तौर पर उस व्यक्ति के पास उसी 200 रुपये के नोट की छाया प्रति (Photocopy) पहले से मौजूद थी, जो उसने डॉक्टर को दिया था।\r\n \r\n
- \r\n रंगे हाथों पहचान: शिकायतकर्ता ने दावा किया कि वह नोट महिला डॉक्टर के पर्स में है। जब डॉ. मीनाक्षी रस्तोगी से कड़ाई से पूछा गया, तो उन्होंने अपने पर्स से वही 200 रुपये का नोट निकालकर दे दिया, जो शिकायतकर्ता के पास मौजूद फोटोकॉपी के सीरियल नंबर से हूबहू मेल खा गया (समरूप पाया गया)।\r\n \r\n
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\r\n\r\n\r\n"महोदय, बार-बार इन घटनाओं से मेरी और विभाग की छवि धूमिल हो रही है। कृपया संज्ञान लेते हुए उचित कार्यवाही करना चाहें।" - चिकित्सा अधीक्षक, CHC नगीना (CMO को लिखे पत्र का अंश)\r\n
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ घूसखोरी का वीडियो
\r\n\r\nइस रंगे हाथों पकड़ने की पूरी घटना का किसी ने वीडियो बना लिया जो अब फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है। CMO कार्यालय द्वारा जारी आदेश में भी आधिकारिक तौर पर इस वायरल वीडियो (फेसबुक लिंक सहित) का संज्ञान लिया गया है, जो इस भ्रष्टाचार की घटना का सीधा समर्थन करता है।
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CMO का कड़ा एक्शन: निलंबन और जांच के आदेश
\r\n\r\nमुख्य चिकित्साधिकारी, बिजनौर ने इसे उत्तर प्रदेश कर्मचारी आचरण नियमावली के घोर विरुद्ध और एक बेहद आपत्तिजनक कृत्य माना है। शासन की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत CMO ने तत्काल प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया है:
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- \r\n निलंबन (Suspension): डॉ. मीनाक्षी रस्तोगी को एतद द्वारा सभी प्रकार के चिकित्सकीय (Clinical) कार्यों से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n कार्यालय से संबद्ध: जांच पूरी होने तक आरोपी महिला चिकित्सक को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय, जनपद बिजनौर से संबद्ध (Attach) कर दिया गया है।\r\n \r\n
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मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित
\r\n\r\nइस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए CMO ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है।
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| \r\n क्रम संख्या \r\n | \r\n \r\n जाँच अधिकारी का नाम \r\n | \r\n \r\n पद नाम / भूमिका \r\n | \r\n
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| \r\n 1. \r\n | \r\n \r\n डॉ. अनिल कुमार सिंह \r\n | \r\n \r\n नोडल अधिकारी, एन०एच०एम० (NHM) \r\n | \r\n
| \r\n 2. \r\n | \r\n \r\n श्री फारूख अजीज \r\n | \r\n \r\n जिला कार्यक्रम प्रबन्धक, एन०एच०एम० (NHM) \r\n | \r\n
| \r\n 3. \r\n | \r\n \r\n श्रीमती डॉ. नरेन्द्र कौर \r\n | \r\n \r\n उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी \r\n | \r\n
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7 दिन का अल्टीमेटम: CMO ने इस जांच कमेटी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चिकित्सा अधीक्षक द्वारा प्रेषित पत्र और वायरल वीडियो के साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन करें। टीम को बिना किसी त्रुटि के 7 कार्य दिवस (7 Working Days) के भीतर अपनी विस्तृत जांच आख्या (Report) CMO कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी डॉक्टर के खिलाफ संविदा समाप्ति और विभागीय स्तर पर अग्रिम कठोर कार्रवाई की जा सकती है।