शकील अहमद
(बिजनौर से रिपोर्टर शकील अहमद की विशेष रिपोर्ट)
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​त्योहारों और मेलों का मौसम हमेशा ग्रामीण इलाकों में खुशियों और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने मेले की खुशियों को पल भर में चीख-पुकार और खौफ में बदल दिया। जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र में स्थित जूड़ मंदिर के मेले से अपने घर लौट रहे दो बेगुनाह युवकों पर 15 से 20 अज्ञात दबंगों ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले से इलाके में हड़कंप मच गया और दहशत का माहौल पैदा हो गया है।
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​पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों घायल युवकों का मेडिकल कराया है और अज्ञात हमलावरों की धरपकड़ के लिए इलाके में सघन चेकिंग और जांच अभियान शुरू कर दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या था और पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है।
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​मेले की खुशियां पल भर में बदलीं चीख-पुकार में

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​यह पूरी घटना चांदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बसंतपुर गांव के पास की है। मिली जानकारी के अनुसार, इन दिनों बसंतपुर गांव में प्रसिद्ध 'जूड़ मंदिर का मेला' (Jood Mandir Mela) बड़े ही धूमधाम से चल रहा है। इस मेले में आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और युवा घूमने और दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।
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​रविवार की देर शाम, गांव ठेठ के रहने वाले दो युवक— प्रमोद कुमार और कल्लू कुमार भी इसी मेले का आनंद लेकर वापस अपने गांव की ओर लौट रहे थे। दिनभर मेले की भीड़-भाड़ और रौनक का लुत्फ उठाने के बाद दोनों युवक हंसी-मजाक करते हुए अपने घर के रास्ते पर थे। लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि बसंतपुर गांव की सीमा पार करते ही कुछ ही दूरी पर मौत उनका इंतजार कर रही है।
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​रास्ते में अचानक एक सुनसान जगह पर 15 से 20 अज्ञात और नकाबपोश युवकों के एक गुट ने प्रमोद और कल्लू की बाइक को रोक लिया। इससे पहले कि प्रमोद या कल्लू कुछ समझ पाते या उन बदमाशों से कुछ पूछ पाते, दबंगों ने उन्हें गंदी-गंदी गालियां देनी शुरू कर दीं और उन पर लाठी-डंडों, बेल्टों और घूंसों से अंधाधुंध वार करना शुरू कर दिया।
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​'हमलावरों को नहीं जानते, शायद गलतफहमी में पीटा गया'
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​हमला इतना अचानक और क्रूर था कि दोनों युवकों को संभलने या वहां से भागने का जरा भी मौका नहीं मिला। दबंगों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि प्रमोद और कल्लू उनके सामने पूरी तरह से बेबस नजर आए। मारपीट की इस घटना में दोनों युवकों को गंभीर चोटें आई हैं।
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​घटना के बाद लहूलुहान अवस्था में पुलिस को दिए गए अपने बयान में घायल प्रमोद कुमार ने एक बेहद चौंकाने वाली बात कही। प्रमोद का कहना है कि:
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"हम शांति से मेले से अपने घर लौट रहे थे। अचानक 15-20 लड़के आए और हमें मारना शुरू कर दिया। हम उनमें से किसी भी हमलावर को शक्ल या नाम से नहीं जानते हैं। हमारी गांव या आसपास में किसी से कोई पुरानी रंजिश या दुश्मनी भी नहीं है।"
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​प्रमोद ने पुलिस के सामने आशंका जताते हुए कहा कि हो सकता है कि उन हमलावर युवकों का मेले में किसी और गुट या व्यक्ति के साथ कोई विवाद या झगड़ा हुआ हो, और अंधेरे में 'गलतफहमी' (Mistaken Identity) का शिकार होकर उन्होंने हमारे ऊपर हमला कर दिया। उन्होंने हमें किसी और गांव का समझकर अपना गुस्सा हम पर उतार दिया।
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​पुलिस का एक्शन: अस्पताल में कराया भर्ती, जांच तेज

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​जैसे ही इस खूनी संघर्ष और मारपीट की सूचना आसपास के लोगों और राहगीरों ने स्थानीय पुलिस को दी, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल के साथ पांडव नगर चौकी प्रभारी अजय यादव अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े।
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​पुलिस के सायरन की आवाज सुनते ही हमलावर युवक मौके का फायदा उठाकर अंधेरे में खेतों और पगडंडियों के रास्ते फरार होने में कामयाब हो गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खून से लथपथ प्रमोद और कल्लू को तुरंत अपनी जीप में बैठाया और उन्हें इलाज के लिए चांदपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC - Syau) में भर्ती कराया।
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​सीएचसी स्याऊ के डॉक्टरों ने दोनों युवकों का प्राथमिक उपचार किया और उनकी चोटों पर मरहम-पट्टी की। गनीमत यह रही कि किसी भी युवक को कोई गहरी अंदरूनी चोट नहीं आई थी, जिसके चलते प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाइयां देने के बाद डॉक्टरों ने दोनों को अस्पताल से छुट्टी देकर उनके घर भेज दिया है।
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​पुलिस जांच के मुख्य बिंदु (Police Investigation Highlights):

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​चौकी प्रभारी अजय यादव ने मीडिया और रिपोर्टर शकील अहमद को घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि:
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    मेडिकल रिपोर्ट दर्ज: दोनों पीड़ित युवकों की शिकायत दर्ज कर ली गई है और सरकारी अस्पताल में उनका मेडिकल भी करा लिया गया है।
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    CCTV खंगाल रही पुलिस: पुलिस अब बसंतपुर गांव के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) की फुटेज खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 15-20 लड़कों का यह झुंड किस तरफ से आया था और वारदात को अंजाम देने के बाद किस दिशा में भागा।
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    मुखबिर तंत्र सक्रिय: अज्ञात हमलावरों की पहचान करने के लिए पुलिस ने अपने लोकल इंटेलिजेंस और मुखबिरों को भी सक्रिय कर दिया है।
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    मेले में पुलिस की गश्त बढ़ी: इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर जूड़ मंदिर मेले के आसपास पुलिस की गश्त (Police Patrolling) बढ़ा दी गई है, ताकि दोबारा कोई ऐसी अप्रिय घटना न घटे।
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ग्रामीण इलाकों में मेलों की सुरक्षा पर उठते सवाल

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​बिजनौर के चांदपुर में हुई यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों में लगने वाले मेलों और आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। अक्सर देखा गया है कि मेलों में युवा लड़कों के गुटों के बीच वर्चस्व, किसी लड़की को लेकर छींटाकशी, या बाइक टच हो जाने जैसी छोटी-छोटी बातों पर बड़े खूनी संघर्ष हो जाते हैं।
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​इस तरह की घटनाओं से न सिर्फ बेगुनाह लोग (जैसे प्रमोद और कल्लू) शिकार होते हैं, बल्कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के मन में भी मेलों में जाने को लेकर खौफ पैदा हो जाता है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजनौर पुलिस कप्तान से मांग की है कि ऐसे मेलों में पुलिस पिकेट (Police Picket) की स्थाई व्यवस्था की जाए और माहौल खराब करने वाले असामाजिक तत्वों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी दबंग कानून को अपने हाथ में लेने की जुर्रत न कर सके।
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​अब देखना यह होगा कि चांदपुर पुलिस कितनी जल्दी इन अज्ञात हमलावरों की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाती है और पीड़ितों को इंसाफ दिलाती है।
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Disclaimer (अस्वीकरण): यह समाचार बिजनौर से हमारे संवाददाता/रिपोर्टर शकील अहमद द्वारा दी गई प्राथमिक जानकारी और स्थानीय पुलिस (पांडव नगर चौकी) के बयानों पर आधारित है। पुलिस फिलहाल अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी और पुलिस की फाइनल चार्जशीट के बाद ही घटना के असली कारणों और दोषियों की सटीक पहचान हो सकेगी। यह खबर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों (Informational Purposes) के लिए प्रकाशित की गई है।