काठमांडू, नेपाल: नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ 'जेन-जी' युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। राजधानी काठमांडू समेत देश के कई शहरों में हजारों युवाओं ने उग्र प्रदर्शन किया, जिसके बाद हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई में 9 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। हालात को देखते हुए काठमांडू के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।READ ALSO:-देश में मानसून का आखिरी प्रहार: उत्तराखंड से हिमाचल तक तबाही, हरिद्वार-ऋषिकेश रेल रूट पर लैंडस्लाइड, राजस्थान-पंजाब में बाढ़ का प्रकोप जारी
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संसद पर हमला, पुलिस की गोलीबारी
\r\n\r\nप्रदर्शनकारी युवाओं ने नेपाल की संसद में घुसने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। जब प्रदर्शनकारी नहीं रुके, तो पुलिस को मजबूरन फायरिंग करनी पड़ी, जिसमें 9 युवाओं को गोली लगी।
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हिंसा को देखते हुए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आवासों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आर्मी तैनात की गई है। शहर में अभी भी 10 से 15 हजार प्रदर्शनकारी मौजूद हैं, जिससे तनाव बना हुआ है। मुख्य जिला अधिकारी ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए रबर की गोलियां चलाने की भी अनुमति दी है।
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बैन सिर्फ बहाना, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार भी असली वजह
\r\n\r\nनेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और एक्स (ट्विटर) समेत 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। युवाओं का कहना है कि इस बैन से उनकी पढ़ाई और कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई लोग सोशल मीडिया के जरिए अपना व्यवसाय चलाते थे, जो अब ठप हो गया है। इसके अलावा, विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है।
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सोशल मीडिया पर लगी इस रोक के अलावा, प्रदर्शनकारी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और देश की आर्थिक मंदी के लिए भी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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सरकार पर बढ़ा दबाव, बुलाई गई आपात बैठक
\r\n\r\nहिंसा के बाद सरकार पर बैन का फैसला वापस लेने का दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री ओली ने युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है और आज शाम 6 बजे कैबिनेट की इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है, जिसमें कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सरकार के खेल मंत्री संतोष पांडे ने भी कहा है कि सरकार युवाओं की मांगों पर विचार करेगी।
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टिकटॉक पर बैन न होने के कारण युवाओं ने इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर आंदोलन को हवा दी, जहां #RestoreOurInternet जैसे हैशटैग वायरल हुए। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्कूल यूनिफॉर्म पहने युवा शामिल थे, जिससे यह संदेश गया कि यह आंदोलन युवाओं द्वारा चलाया जा रहा है।
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