खबरीलाल डेस्क
सहारनपुर करेंसी चेस्ट में मिले जाली नोटों की जांच तेज, RBI-PNB की 21 सदस्यीय टीम ने खंगालना शुरू किया कैश का पूरा सफर
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\r\nसहारनपुर: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने की खबर ने बैंकिंग सिस्टम से लेकर जांच एजेंसियों तक हलचल बढ़ा दी है। इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट सामने आने के बाद अब यह मामला सिर्फ नकली नोटों की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है। जांच का सबसे बड़ा केंद्र यह बन गया है कि आखिर इतनी बड़ी रकम की नकली करेंसी बैंकिंग चैनल में दाखिल कैसे हुई और उसे करेंसी चेस्ट तक पहुंचने से पहले क्यों नहीं पकड़ा जा सका।
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\r\nमामले की गंभीरता को देखते हुए RBI और PNB अधिकारियों की 21 सदस्यीय संयुक्त टीम जांच में जुटी है। मंगलवार को RBI की टीम भी करेंसी चेस्ट पहुंची और वहां मौजूद नकदी, नोटों तथा संबंधित रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की। अब जांच एजेंसियां नकदी के स्रोत से लेकर उसके करेंसी चेस्ट में जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया को जोड़ने में लगी हैं।
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\r\nसबसे बड़ा खुलासा: असली नोटों के बीच मिली जाली करेंसी
\r\nइस मामले में शुरुआती जांच से जो जानकारी सामने आई है, उसने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि नकली नोट किसी अलग स्थान पर रखे हुए नहीं मिले, बल्कि असली नोटों के बीच गड्डियों में शामिल पाए गए।
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\r\nजांच के दौरान पांच लाख रुपये के एक बंडल में कुल 10 गड्डियां मिलीं। इनमें से 8 गड्डियां जाली नोटों की बताई जा रही हैं। यदि जांच में यह स्थिति पूरी तरह पुष्ट होती है तो यह सवाल और गंभीर हो जाएगा कि इतनी बड़ी संख्या में नकली नोट असली करेंसी के साथ किस स्तर पर मिश्रित हुए।
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\r\nफिलहाल जांच एजेंसियां इस तथ्य की विस्तृत जांच कर रही हैं। किसी व्यक्ति, संस्था या नेटवर्क की भूमिका को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
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\r\nRBI की टीम ने संभाली जांच की कमान
\r\nमामले में RBI की सक्रियता को बेहद अहम माना जा रहा है। करेंसी चेस्ट बैंकिंग सिस्टम में नकदी के प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे में यहां बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद नकदी से जुड़े रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रियाओं की जांच स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो गई है।
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\r\nRBI की टीम ने करेंसी चेस्ट पहुंचकर नकदी और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की। वहीं PNB के अधिकारियों के साथ मिलकर संयुक्त टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि संबंधित कैश किस स्रोत से आया था और बैंक के भीतर किन-किन चरणों से गुजरने के बाद करेंसी चेस्ट में जमा हुआ।
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\r\n‘कैश ट्रेल’ में छिपा है 17 करोड़ का राज?
\r\nजांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब कैश ट्रेल बन गया है। यानी जांच एजेंसियां नकदी के पूरे सफर को पीछे की ओर ट्रैक करने की कोशिश कर रही हैं।
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टीम यह देख रही है कि:
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  • बैंक में संबंधित नकदी किस तारीख को पहुंची?
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  • नकदी का स्रोत क्या था?
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  • कैश रिसीव करते समय कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई गईं?
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  • नकदी की गिनती और छंटाई किस स्तर पर हुई?
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  • नोटों की जांच के लिए किन मशीनों या प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया?
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  • नकदी को करेंसी चेस्ट तक किस प्रक्रिया के तहत पहुंचाया गया?
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    जाली नोटों की पहचान आखिर किस चरण में हुई?
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  • इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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    क्या गिनती और जांच के दौरान हुई बड़ी चूक?
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  • करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक में कैश हैंडलिंग और जांच प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी स्तर पर लापरवाही हुई या जानबूझकर कोई गड़बड़ी की गई।
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\r\nसंयुक्त जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकदी की गिनती, छंटाई और सत्यापन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
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\r\nयदि जांच के दौरान किसी स्तर पर प्रक्रिया संबंधी गंभीर कमी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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\r\nजाली नोटों की ‘गुणवत्ता’ भी जांच का अहम हिस्सा
\r\nजांच एजेंसियां बरामद नकली नोटों की तकनीकी विशेषताओं पर भी ध्यान दे रही हैं। नोटों के कागज, स्याही, प्रिंटिंग और अन्य विशेषताओं का अध्ययन किया जा रहा है।
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\r\nइस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अलग-अलग गड्डियों में मिले जाली नोटों में आपस में कितनी समानता है। यदि बड़ी संख्या में नोटों की बनावट और प्रिंटिंग में एक जैसा पैटर्न सामने आता है, तो जांच एजेंसियों के लिए उनके संभावित स्रोत की पड़ताल करना आसान हो सकता है।
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\r\nहालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये नकली नोट कहां तैयार किए गए थे और किस माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंचे।
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\r\nसंगठित नेटवर्क का एंगल भी नजरअंदाज नहीं
\r\nकरीब 17 करोड़ रुपये की नकली करेंसी एक साथ सामने आने के कारण जांच में किसी संभावित संगठित नेटवर्क के एंगल को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम पुष्टि सामने नहीं आई है।
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\r\nजांच एजेंसियां रिकॉर्ड, नकदी के स्रोत, नोटों की समानता और कैश मूवमेंट जैसी जानकारियों को आपस में जोड़ रही हैं। यदि इन सभी कड़ियों के बीच कोई स्पष्ट पैटर्न मिलता है तो जांच का रुख किसी बड़े नेटवर्क की ओर भी जा सकता है।
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\r\nबैंकिंग सिस्टम के लिए क्यों है यह बड़ा मामला?
\r\nकरेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलना केवल एक बैंक तक सीमित चिंता का विषय नहीं माना जा सकता। यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि नकदी के कई स्तरों से गुजरने के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट कैसे आगे बढ़े।
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\r\nबैंकिंग व्यवस्था में नकदी की गिनती और सत्यापन के लिए विभिन्न प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में जांच के नतीजे यह समझने में मदद कर सकते हैं कि सिस्टम में कोई प्रक्रियागत कमी थी या नकदी को किसी खास तरीके से बैंकिंग चैनल में शामिल किया गया।
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\r\nअब जांच के नतीजे पर टिकी निगाहें
\r\nफिलहाल RBI और PNB की 21 सदस्यीय संयुक्त टीम मामले की तह तक पहुंचने के लिए रिकॉर्ड और नकदी का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि 17 करोड़ रुपये की कथित नकली करेंसी आखिर बैंकिंग सिस्टम में दाखिल कहां से हुई?
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\r\nनकदी किस स्रोत से आई, उसे किसने बैंक तक पहुंचाया, किस स्तर पर उसकी जांच हुई और फिर जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंच गए—इन तमाम सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।
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\r\nफिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति या नेटवर्क को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। RBI-PNB की विस्तृत जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरा मामला बैंकिंग प्रक्रिया में हुई चूक का है या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश या नेटवर्क काम कर रहा था।