मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से सावन के पवित्र महीने और कांवड़ यात्रा के बीच एक बेहद भावुक, सुखद और आस्था से भरी खबर सामने आई है। हरिद्वार स्थित भगवान नीलकंठ महादेव के दर्शन कर गंगाजल लेकर दिल्ली लौट रही एक महिला कांवड़िया ने यात्रा के दौरान जुड़वा (ट्विन्स) बेटों को जन्म दिया है। इस अनोखी घटना के बाद जहां एक ओर परिजनों और साथी कांवड़ियों में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं पुलिस-प्रशासन ने भी संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। मुजफ्फरनगर के एसएसपी (SSP) संजय वर्मा ने अस्पताल पहुंचकर मां और बच्चों का हाल जाना और परिजनों की सहमति से दोनों नवजातों का नाम ‘गणेश’ और ‘कार्तिकेय’ रखा।READ ALSO:-उपचुनाव महासंग्राम: बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने ढहाया BJP का 5 बार का अभेद्य किला! दतिया में कांग्रेस का कब्जा, मंजलपुर में खिला कमल
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यात्रा के बीच छूटा साथियों का साथ, अचानक उठी प्रसव पीड़ा

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली की रहने वाली महिला कांवड़िया नेहा भोली अपने साथियों के साथ हरिद्वार के नीलकंठ मंदिर से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल कांवड़ यात्रा पर निकली थीं। वे अपने गंतव्य दिल्ली की ओर बढ़ रही थीं कि मुजफ्फरनगर पहुंचने पर अचानक किसी कारणवश उनका अपने साथी कांवड़ियों से संपर्क टूट गया और वे कांवड़ मार्ग पर अकेली रह गईं।
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इसी दौरान नेहा को अचानक तेज प्रसव पीड़ा (Labor Pain) महसूस होने लगी। रास्ते में अकेली महिला कांवड़िया को दर्द से तड़पता देख आसपास मौजूद राहगीरों, स्थानीय शिवभक्तों और कांवड़ मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत तत्परता दिखाई। पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए एंबुलेंस की मदद से नेहा को मुजफ्फरनगर के जिला महिला चिकित्सालय (District Women's Hospital) पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया।
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अस्पताल में गूंजी जुड़वा बच्चों की किलकारी, SNCU में रखे गए नवजात

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अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही समय बाद नेहा ने दो सुंदर बेटों को जन्म दिया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला का प्रसव समय से पूर्व (Premature Delivery) हुआ है। बच्चों का जन्म लगभग 7 महीने (28 सप्ताह) की गर्भावस्था में ही हो गया।
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समय से पहले जन्म होने के कारण दोनों नवजात बच्चों का वजन सामान्य से काफी कम है। एक बच्चे का वजन लगभग 1.20 किलोग्राम है, जबकि दूसरे बच्चे का वजन करीब 900 ग्राम दर्ज किया गया है।
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अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. मुरली भास्कर ने बताया:

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"महिला को गंभीर प्रसव पीड़ा की हालत में अस्पताल लाया गया था। समय से पहले जन्म होने के कारण नवजातों को शुरुआत में सांस लेने में हल्की दिक्कत हो रही थी। इसलिए दोनों बच्चों को तुरंत विशेष देखभाल के लिए अस्पताल की एसएनसीयू (SNCU - Sick Newborn Care Unit) में भर्ती कराया गया है। फिलहाल दोनों बच्चों और उनकी मां की हालत पूरी तरह से स्थिर है। बाल रोग विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे उन पर नजर बनाए हुए है।"
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अस्पताल पहुंचे SSP और SP सिटी: बच्चों को नाम दिया 'गणेश' और 'कार्तिकेय'

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कांवड़ यात्रा के दौरान इस अनूठी घटना की जानकारी जैसे ही जिला पुलिस प्रशासन को मिली, मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) संजय वर्मा और एसपी सिटी (SP City) अमृत जैन खुद जिला महिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने वार्ड में जाकर प्रसूता नेहा भोली का हालचाल जाना, उन्हें फल और उपहार भेंट किए।
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एसएसपी संजय वर्मा ने शिवभक्त मां की आस्था का सम्मान करते हुए उनकी सहर्ष सहमति से दोनों नवजात बेटों का नामकरण किया। उन्होंने एक बच्चे का नाम 'गणेश' और दूसरे का नाम 'कार्तिकेय' रखा। भगवान शिव और माता पार्वती के दोनों पुत्रों के नाम पर नवजातों का नाम रखे जाने पर मां नेहा और उनके परिजनों की आंखें खुशी से छलक आईं।
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एसएसपी बोले: "यह भगवान भोलेनाथ का प्रत्यक्ष आशीर्वाद है"

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इस दौरान मीडिया से बात करते हुए एसएसपी संजय वर्मा काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सावन के इस पवित्र महीने में, जब लाखों शिवभक्त कांवड़ लेकर चल रहे हैं, एक महिला कांवड़िया के घर जुड़वा बच्चों का जन्म होना किसी चमत्कार और भगवान भोलेनाथ के साक्षात आशीर्वाद से कम नहीं है।
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एसएसपी ने कहा:

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"जैसे ही हमें सूचना मिली कि एक कांवड़िया बहन को प्रसव पीड़ा हुई है, हमारी पुलिस टीम ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की त्वरित प्रतिक्रिया और कड़ी मेहनत के कारण मां और दोनों बच्चों की जान सुरक्षित बच सकी। भगवान शिव की कृपा से दोनों बच्चे स्वस्थ हैं। पुलिस परिवार की ओर से हम मां और नवजातों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।"
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प्रशासन और डॉक्टरों की संवेदनशीलता की हो रही तारीफ

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इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुजफ्फरनगर पुलिस और जिला महिला अस्पताल के डॉक्टरों के मानवीय और संवेदनशील रवैये की पूरे क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है। कांवड़ मार्ग पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा समय पर महिला को अस्पताल पहुंचाना और फिर जिले के शीर्ष पुलिस अधिकारियों द्वारा अस्पताल पहुंचकर बच्चों का नामकरण करना—इस घटना ने कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और जनता के बीच के मानवीय संबंध की एक बेहद सुंदर तस्वीर पेश की है। फिलहाल, अस्पताल में मां और दोनों 'शिव अवतार' बच्चों की देखभाल पूरी तन्मयता से की जा रही है।
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