मेरठ, उत्तर प्रदेश — पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख जिलों, मेरठ और बागपत के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार ने 'बिजनेस प्लान' के तहत 143 करोड़ रुपये के विशाल विद्युत कार्यों को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों के शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं को निर्बाध और बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।Read also:-मेरठ को जाम से मिलेगी मुक्ति: बागपत रोड से रेलवे रोड को जोड़ेगी नई लिंक रोड, दिवाली तक काम पूरा होने का अनुमान
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
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पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ईशा दुहन ने बताया कि इस बड़े बजट को दोनों जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में समान रूप से वितरित किया गया है। मेरठ शहर में 63.43 करोड़ रुपये के काम होंगे, जबकि मेरठ ग्रामीण और बागपत में 79.36 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराए जाएंगे।
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समस्याओं का स्थायी समाधान
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इस परियोजना के तहत होने वाले कार्यों से बिजली से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है। अब उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग, फाल्ट और लो वोल्टेज जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह कदम घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा।
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निदेशक (तकनीकी) एनके मिश्रा ने बताया कि इन कार्यों के तहत 20.77 करोड़ रुपये की लागत से शहर में तीन नई 33 केवी लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके अलावा, 20 नए 11/.04 केवी उपकेंद्रों का भी निर्माण किया जाएगा।
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नए उपकेंद्रों के बनने से बिजली वितरण व्यवस्था और मजबूत होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी बड़े फाल्ट की स्थिति में पूरे उपकेंद्र या फीडर की बिजली नहीं काटनी पड़ेगी, बल्कि सिर्फ प्रभावित हिस्से की आपूर्ति रोकी जाएगी। यह कदम उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी को काफी हद तक कम करेगा।
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मिलेंगी ये सुविधाएं
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इन कार्यों के पूरा होने के बाद घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को कई समस्याओं से छुटकारा मिलेगा:
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    फॉल्ट और ट्रिपिंग में कमी: नए उपकरणों और लाइनों के कारण बिजली ट्रिपिंग और फॉल्ट की समस्या प्रभावी ढंग से कम होगी।
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    लो वोल्टेज की समस्या का अंत: ओवरलोड की समस्या समाप्त होने से लो वोल्टेज की परेशानी भी दूर होगी।
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    बेहतर आपूर्ति: निदेशक (तकनीकी) एनके मिश्रा के अनुसार, 20.77 करोड़ रुपये की लागत से 33 केवी की तीन नई लाइनें शहर में बिछाई जाएंगी।
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    20 नए उपकेंद्र: इसके अलावा, 11/.04 केवी के 20 नए उपकेंद्र भी बनाए जाएंगे, जिससे किसी बड़े फॉल्ट की स्थिति में पूरे फीडर या उपकेंद्र की बिजली काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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इन सभी कार्यों से बिजली आपूर्ति में व्यापक सुधार होगा और उपभोक्ताओं को लगातार बिजली मिल सकेगी।
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