मेरठ (Meerut). भारतीय रक्षा क्षेत्र (Indian Defense Sector) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर मेरठ अब देश की आधुनिक रक्षा तकनीक का केंद्र बनने के लिए तैयार है। 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) की अभूतपूर्व सफलता और आधुनिक युद्धनीति में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।READ ALSO:-Delhi Old Vehicle Ban: दिल्लीवालों हो जाओ सावधान! 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियां अब सीधे होंगी स्क्रैप, परिवहन विभाग ने जारी किया सख्त फरमान
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ में देश का पहला समर्पित 'ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट रनवे' (Dedicated Drone Runway) विकसित किया जाएगा। इसके लिए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने औपचारिक रूप से 406 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। यह प्रोजेक्ट न केवल सीमाओं की निगरानी को अभेद्य बनाएगा, बल्कि भारत की 'स्ट्राइक कैपेबिलिटी' (Strike Capability) को भी कई गुना बढ़ा देगा।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

प्रोजेक्ट का खाका: 900 एकड़ में बनेगा आधुनिक एयरबेस

\r\n\r\n
रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) के अधीन कार्य करने वाले सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इस महत्वकांक्षी परियोजना की कमान संभाली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेरठ के किला रोड (Quila Road) स्थित आर्मी लैंड पर लगभग 900 एकड़ भूमि को इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित किया गया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस समर्पित एविएशन बेस (Aviation Base) के केंद्र में एक विशाल रनवे होगा। इस रनवे की लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। इसे अत्याधुनिक ICAO CAT-II मानकों के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें विशेष लाइटिंग और नेविगेशन सिस्टम शामिल होंगे। यह तकनीक घने कोहरे और कम दृश्यता (Low Visibility) में भी ड्रोन और विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मुख्य विशेषताएं एक नजर में:

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    प्रोजेक्ट लागत: ₹406 करोड़ (अनुमानित)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कुल क्षेत्रफल: 900 एकड़ (लगभग)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    रनवे का आकार: 2110 मीटर लंबा, 45 मीटर चौड़ा
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    निर्माण एजेंसी: सीमा सड़क संगठन (BRO)
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    समय सीमा: कुल प्रोजेक्ट समयसीमा 85 महीने (जिसमें निर्माण, प्लानिंग और मेंटेनेंस शामिल है)।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली सीख और नई रणनीति

\r\n\r\n
इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान लेने वाले आतंकियों का सफाया किया गया था।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने सर्विलांस और सटीक हमलों (Precision Strikes) के लिए ड्रोन्स का व्यापक इस्तेमाल किया था। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भविष्य के युद्धों में सैनिकों के जोखिम को कम करने और दुश्मन के इलाके में गहराई तक मार करने के लिए 'अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स' (Unmanned Aerial Systems) ही सबसे बड़ा हथियार होंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सैन्य रणनीतिकारों ने महसूस किया कि सामान्य हवाई पट्टियों पर नागरिक और पारंपरिक सैन्य उड़ानों के दबाव के कारण ड्रोन ऑपरेशन्स के लिए 'समर्पित इन्फ्रास्ट्रक्चर' (Dedicated Infrastructure) की सख्त जरूरत है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए मेरठ के इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

भारी विमानों की लैंडिंग क्षमता: C-295 और C-130

\r\n\r\n
हालांकि, इसे 'ड्रोन रनवे' कहा जा रहा है, लेकिन इसकी क्षमताएं केवल छोटे ड्रोन्स तक सीमित नहीं होंगी। बीआरओ द्वारा जारी टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक, इस रनवे को 'हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस' (HALE) श्रेणी के ड्रोन्स के अलावा भारी मालवाहक विमानों के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह रनवे C-295 (C-295 Transport Aircraft) और C-130J सुपर हरक्यूलिस (C-130J Super Hercules) जैसे सामरिक परिवहन विमानों को भी संभालने में सक्षम होगा। इसका मतलब है कि आपात स्थिति में मेरठ का यह बेस सैनिकों, हथियारों और रसद को देश के किसी भी कोने में भेजने के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में काम करेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बेस पर 60x50 मीटर के दो विशाल हैंगर (Hangars) भी बनाए जाएंगे, जहां विमानों और ड्रोन्स की मरम्मत और रखरखाव का काम किया जा सकेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

मेरठ ही क्यों? सामरिक महत्व और रणनीतिक बढ़त

\r\n\r\n
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) से इसकी निकटता और पहले से मौजूद मजबूत सैन्य छावनी (Cantonment) इसे इस प्रोजेक्ट के लिए आदर्श बनाती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    सर्विलांस का केंद्र (Hawk Eye): मेरठ में बेस होने से पश्चिमी सीमाओं (विशेषकर पाकिस्तान सीमा) और हिमालयी क्षेत्रों पर 24/7 निगरानी रखना आसान होगा। यहाँ से उड़ान भरने वाले HALE ड्रोन्स घंटों तक हवा में रहकर दुश्मन की हर हरकत पर नजर रख सकेंगे।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल (RRTS) के कारण यहाँ कनेक्टिविटी बेहतरीन है, जिससे उपकरणों और कलपुर्जों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के हो सकेगी।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    भीड़भाड़ से मुक्ति: हिंडन एयरबेस (Ghaziabad) और पालम एयरपोर्ट (Delhi) पर पहले से ही हवाई यातायात का भारी दबाव है। मेरठ का यह समर्पित रनवे इस दबाव को कम करेगा और ड्रोन ऑपरेशन्स को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की आजादी देगा।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

भविष्य की युद्धनीति: डेटा सेंट्रिक वॉरफेयर

\r\n\r\n
विशेषज्ञों का मानना है कि मेरठ का यह बेस भारत को 'डेटा सेंट्रिक वॉरफेयर' (Data-Centric Warfare) के युग में ले जाएगा। यहाँ तैनात होने वाले HALE RPAs (जैसे कि प्रीडेटर या हेरॉन) रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनेसेंस (ISR) प्रदान करेंगे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह बेस "आत्मनिर्भर भारत" की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल विदेशी ड्रोन्स का संचालन करेगा, बल्कि भारत में विकसित हो रहे स्वदेशी ड्रोन्स (जैसे तपस, रुस्तम) के परीक्षण और तैनाती के लिए भी एक प्रमुख केंद्र बनेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
अनुमान है कि यह बेस सालाना लगभग 1,500 आरपीए (RPA) सॉर्टीज को हैंडल करेगा, यानी औसतन हर दिन यहां से 4 बड़े ड्रोन मिशन लॉन्च किए जाएंगे। यह संख्या भविष्य में बढ़ भी सकती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नागरिक सेवाओं और आपदा प्रबंधन में भूमिका

\r\n\r\n
यह रनवे केवल युद्ध के लिए ही नहीं, बल्कि शांति काल में भी देश की सेवा करेगा।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    आपदा राहत: बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जब सड़कें टूट जाती हैं, तब यहाँ से बड़े कार्गो ड्रोन्स और C-130 विमान राहत सामग्री पहुंचाने के लिए उड़ान भर सकेंगे।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    मेडिकल सप्लाई: दूरदराज के इलाकों में जीवन रक्षक दवाइयां और वैक्सीन पहुंचाने के लिए भी इस बेस का इस्तेमाल किया जा सकता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ट्रेनिंग हब: यह बेस देश के ड्रोन पायलट्स के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र (Training Hub) के रूप में भी उभरेगा, जहाँ उन्हें अत्याधुनिक सिमुलेटर्स और वास्तविक उड़ान का अनुभव मिलेगा।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

निर्माण की समय सीमा: 85 महीने का रोडमैप

\r\n\r\n
प्रोजेक्ट की समय सीमा को लेकर बीआरओ ने विस्तृत योजना तैयार की है। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, कुल परियोजना चक्र 85 महीने का है, जिसे विभिन्न चरणों में बांटा गया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    योजना और डीपीआर (7 महीने): टेंडर अवार्ड होने के बाद पहले 7 महीने विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और प्लानिंग में लगेंगे।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    निर्माण कार्य (18 महीने): रनवे और बुनियादी ढांचे का वास्तविक निर्माण कार्य 18 महीनों में पूरा किया जाएगा।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (24 महीने): निर्माण के बाद अगले 2 साल तक किसी भी तकनीकी खामी की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    रखरखाव (36 महीने): इसके बाद 3 साल तक रखरखाव की निगरानी की जाएगी।
    \r\n
  8. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यानी, सेना को यह रनवे ऑपरेशनल हालत में अगले 2 से 2.5 साल के भीतर (निर्माण चरण पूरा होने पर) मिल सकता है, जबकि पूर्ण कांट्रेक्ट साइकिल लंबी चलेगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

भारत की रक्षा शक्ति में ऐतिहासिक उछाल

\r\n\r\n
मेरठ में देश के पहले समर्पित ड्रोन रनवे का निर्माण भारत की रक्षा तैयारियों में एक 'पैराडाइम शिफ्ट' (Paradigm Shift) है। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने जो रास्ता दिखाया था, अब उस पर चलकर भारत अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने जा रहा है। 406 करोड़ रुपये का यह निवेश न केवल एक रनवे का निर्माण है, बल्कि यह भविष्य के सुरक्षित भारत की नींव है। जब यह बेस बनकर तैयार होगा, तो दुश्मनों के लिए भारतीय सीमा में घुसपैठ करना लगभग असंभव हो जाएगा, क्योंकि आसमान से 'बाज की नजर' 24 घंटे उन पर टिकी होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ (Meerut) में भारत का पहला समर्पित ड्रोन और यूएवी रनवे (Dedicated Drone Runway) बनने जा रहा है। 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता के बाद, बीआरओ (BRO) ने इस प्रोजेक्ट के लिए 406 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। 900 एकड़ में फैले इस बेस में 2110 मीटर लंबा रनवे होगा, जो HALE ड्रोन्स और C-295 जैसे भारी विमानों को संभालने में सक्षम होगा। यह बेस सीमाओं की निगरानी और आपदा प्रबंधन में गेम-चेंजर साबित होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन