उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में न्याय प्रणाली और पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बड़ा जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। वंश कुशवाहा हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार और शोषित क्रांति दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को मेरठ के ऐतिहासिक कमिश्नरी पार्क में न्याय की मांग को लेकर एक बड़ा और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की लंबी मान-मनौव्वल और मोहर्रम के जुलूसों का हवाला दिए जाने के बाद, यह धरना सोमवार तक के लिए अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है। लेकिन, प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर पुलिस सोमवार तक हत्या की एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं करती है, तो पूरा शहर एक बड़े और उग्र आंदोलन का गवाह बनेगा। आइए इस पूरे घटनाक्रम और पीड़ित परिवार के दर्द को विस्तार से समझते हैं।READ ALSO:-यूपी में शिक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला: 1 जुलाई से बनेगी विद्यालय प्रबंध समिति, 75% पेरेंट्स संभालेंगे स्कूल की जिम्मेदारी
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कमिश्नरी पार्क में गूंजी न्याय की आवाज: क्यों धरने पर बैठा शोषित क्रांति दल?

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शुक्रवार की सुबह मेरठ का कमिश्नरी पार्क एक बड़े विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गया। सुबह ठीक 10 बजे शोषित क्रांति दल के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ता और वंश कुशवाहा का पीड़ित परिवार धरने पर बैठ गया।
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इस धरने का मुख्य नेतृत्व शोषित क्रांति दल के महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक वंश कुशवाहा हत्याकांड में शामिल आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि स्थानीय पुलिस किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव में आकर असली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है, जो कि पूरी तरह से अनुचित और खेदजनक है।
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28 मई का वो काला दिन: दोस्तों ने ही रची थी वंश की मौत की खौफनाक साजिश?

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इस पूरे विवाद और धरने के पीछे की असली कहानी 28 मई 2026 की एक खौफनाक घटना से जुड़ी है। मलियाना टीपी नगर (TP Nagar) क्षेत्र के रहने वाले अमर सिंह का युवा बेटा वंश कुशवाहा उस दिन अपने दो दोस्तों और उनके दो अन्य अज्ञात साथियों के साथ घर से घूमने के लिए निकला था।
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परिजनों का सीधा आरोप है कि ये सभी लोग योजनाबद्ध तरीके से वंश को मेरठ की प्रसिद्ध 'भोले की झाल' (Bhole Ki Jhal) पर लेकर गए। पीड़ित परिवार का दावा है कि वहां पानी में डूबने से वंश की मौत कोई प्राकृतिक हादसा नहीं था, बल्कि उन चारों ने मिलकर वंश को पानी में डुबोकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। यह एक सुनियोजित हत्या थी, जिसे हादसे का रूप देने का प्रयास किया गया। एक हंसते-खेलते युवा की इस तरह हुई मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
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पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल: न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार

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घटना को हफ्तों बीत चुके हैं, लेकिन मेरठ पुलिस का रवैया इस मामले में बेहद उदासीन रहा है। शोषित क्रांति दल का आरोप है कि मेरठ पुलिस ने आज तक इस जघन्य हत्याकांड की रिपोर्ट दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई है।
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    अधिकारियों के चक्कर: पीड़ित परिवार अपने बेटे के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए एक बार जिलाधिकारी (DM) से मिल चुका है।
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    एसएसपी से मुलाकात: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) महोदय से भी परिवार दो बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी व्यथा सुना चुका है।
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    सीओ ऑफिस के चक्कर: इसके अलावा, कई बार क्षेत्राधिकारी (CO) सरधना के कार्यालय में भी गुहार लगाई गई।
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इतने आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटाने के बावजूद एफआईआर दर्ज न होना, पुलिस की जवाबदेही पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
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धरना स्थल पर पहुंचा भारी पुलिस बल: मोहर्रम का हवाला देकर मांगा समय

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जैसे ही कमिश्नरी पार्क में शोषित क्रांति दल के अनिश्चितकालीन धरने की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिली, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सीओ एलआईयू (CO LIU) प्रदीप पालीवाल भारी संख्या में सिविल लाइन पुलिस बल के साथ तुरंत धरना स्थल पर पहुंच गए।
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अधिकारियों के पहुंचते ही धरना स्थल का माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। इसके कुछ ही देर बाद, थाना जानी से एसएसआई (SSI) समेत कई अन्य पुलिसकर्मी भी दल-बल के साथ वहां आ गए। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत धरने पर बैठे पीड़ित परिवार और कार्यकर्ताओं की मान-मनौव्वल शुरू कर दी।
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एफआईआर के लिए सोमवार तक की मोहलत

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पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से अपील करते हुए कहा कि वर्तमान में शहर में मोहर्रम का त्योहार और जुलूस निकाले जा रहे हैं। पूरी पुलिस फोर्स कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने में अत्यधिक व्यस्त है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए उन्हें सोमवार तक का समय दिया जाए।
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काफी लंबी बहस और पुलिस के इस कड़े आश्वासन के बाद, शोषित क्रांति दल के नेता और पीड़ित परिवार सोमवार तक धरने को स्थगित करने पर सहमत हुए।
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डिप्टी एसपी को सौंपा 10 सूत्रीय ज्ञापन: पुलिस से पूछे गए तीखे सवाल

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शाम करीब 4 बजे, धरना स्थगित करने से पहले कार्यकर्ताओं ने डिप्टी एसपी (Deputy SP) संग्राम सिंह के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को संबोधित करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में पुलिस प्रशासन से लिखित रूप में 10 सीधे और तीखे सवाल पूछे गए हैं।
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ज्ञापन की मुख्य मांगें:

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    तत्काल एफआईआर: पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर बिना किसी देरी के हत्या की नामजद रिपोर्ट दर्ज की जाए।
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  3. \r\n
    कड़ी पूछताछ: वंश के साथ 'भोले की झाल' गए सभी अभियुक्तों को तुरंत हिरासत में लिया जाए और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जाए।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    समयबद्ध विवेचना (Time-bound Investigation): ज्ञापन के सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए इस हत्याकांड की निष्पक्ष, पारदर्शी और एक तय समय सीमा के भीतर गहन जांच (विवेचना) पूरी की जाए।
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पुलिस को खुली चेतावनी: सोमवार को एफआईआर नहीं तो बजेगा क्रांति का बिगुल

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ज्ञापन सौंपते हुए शोषित क्रांति दल के पदाधिकारियों ने पुलिस को एक बहुत ही स्पष्ट और कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मोहर्रम के नाम पर जो मोहलत मांगी है, वह सोमवार को खत्म हो जाएगी।
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यदि सोमवार शाम तक वंश कुशवाहा हत्याकांड की एफआईआर की सत्यापित प्रति (Copy) पीड़ित परिवार के हाथ में नहीं सौंपी गई, तो कमिश्नरी पार्क में फिर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि अगला आंदोलन केवल एक धरना नहीं होगा, बल्कि सड़कों पर उतरकर एक उग्र प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी मेरठ जिला प्रशासन और पुलिस की होगी।
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धरने में इन प्रमुख लोगों ने उठाई न्याय की आवाज

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इस न्याय यात्रा में समाज के कई वर्गों ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। धरने के दौरान मुख्य रूप से उमेश प्रजापति, हेमंत जाटव, अशोक टकसालिया और रोहित बालाजी ने अपने विचार रखे और पुलिस की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की।
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इनके साथ ही अक्षित शर्मा, रोहित यादव, दिनेश कुमार, राहुल कुमार, केपी सिंह, आदेश गगोल, नीरज पावती, और वीपी सिंह सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और आम जनता मौजूद रही। सभी ने एक सुर में अमर सिंह के परिवार के लिए इंसाफ की मांग की।
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अंततः, वंश कुशवाहा हत्याकांड मेरठ पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एक बेबस पिता का अपने युवा बेटे की मौत के लिए इंसाफ मांगना और बदले में केवल आश्वासन मिलना व्यवस्था की एक दुखद तस्वीर पेश करता है। अब सभी की निगाहें सोमवार पर टिकी हैं। क्या पुलिस दबाव में आकर निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करेगी, या फिर शोषित क्रांति दल को अपने अल्टीमेटम के अनुसार एक बार फिर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
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