उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से धोखाधड़ी और लालच का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो रिश्तों की मर्यादा और बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र में एक बेटे ने पैसों के लालच में अपनी मृत मां को सात साल तक कागजों में 'जीवित' रखा और उनके खाते से 44 लाख रुपये से अधिक की पेंशन हड़प ली। इस बड़े पेंशन घोटाले का खुलासा तब हुआ जब प्रशासन ने मामले की जांच की। पुलिस द्वारा शुरुआत में कार्रवाई न किए जाने पर बैंक प्रबंधन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद अब कोर्ट के सख्त आदेश पर मुख्य आरोपी बेटे और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े की नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।READ ALSO:-मौसम ने ली करवट: 26 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ दिखाएगा असर, दिल्ली-UP से दक्षिण भारत तक तूफानी बारिश का अलर्ट!
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खबरिलाल की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर यह पूरा 44 लाख रुपये का पेंशन घोटाला कैसे हुआ, आरोपी बेटे ने बैंक के सिस्टम को कैसे चकमा दिया, और कैसे इस सात साल लंबे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।
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क्या है पूरा मामला? (The Background of the Scam)
\r\n\r\nयह पूरा मामला मेरठ जिले के दौराला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शाहपुर जदीद गांव का है। इसी गांव की निवासी शांति देवी एक पेंशनभोगी (Pensioner) थीं। उनका पेंशन खाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सकौती टांडा शाखा में संचालित होता था, जिसमें हर महीने नियमित रूप से उनकी पेंशन की राशि आती थी।
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प्राप्त जानकारी और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, शांति देवी का निधन 9 दिसंबर 2018 को हो चुका था। नियमानुसार, किसी भी पेंशनभोगी की मृत्यु होने पर परिजनों को तुरंत बैंक को सूचित करना होता है ताकि पेंशन रोकी जा सके। लेकिन शांति देवी के पुत्र, प्रेम सिंह के मन में लालच आ गया। उसने अपनी मां की मौत की खबर बैंक अधिकारियों से छिपा ली और उनके नाम पर आने वाली पेंशन को अवैध रूप से निकालने की खौफनाक साजिश रच डाली।
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7 साल तक कैसे चलता रहा फर्जीवाड़े का यह खेल?
\r\n\r\nबैंकों में पेंशन जारी रखने के लिए हर साल नवंबर महीने में पेंशनभोगी को अपना 'जीवित प्रमाण पत्र' (Life Certificate) जमा करना होता है, जिसे 'जीवन प्रमाण' भी कहा जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह था कि जब शांति देवी की मृत्यु 2018 में ही हो गई थी, तो 2025 तक उनकी पेंशन कैसे चालू रही?
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मास्टरमाइंड की चालाकी (Modus Operandi): आरोपी पुत्र प्रेम सिंह ने अपने कुछ अज्ञात साथियों के साथ मिलकर एक पूरा सिंडिकेट बनाया।
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- \r\n फर्जी जीवन प्रमाण पत्र: उसने हर साल फर्जी मुहरों और हस्ताक्षरों का उपयोग करके 'कूटरचित दस्तावेज' (Forged Documents) तैयार किए और अपनी मृत मां को बैंक के रिकॉर्ड में जीवित दर्शाया।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल निकासी: बैंक अधिकारियों को गुमराह कर पेंशन चालू रखने के बाद, आरोपी ने बैंक शाखा जाकर नकद निकासी करने से परहेज किया ताकि वह पकड़ा न जाए। इसके बजाय, उसने अपनी मृत मां के एटीएम कार्ड (ATM Card) और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके चुपचाप पैसे निकालने शुरू कर दिए।\r\n \r\n
- \r\n 44 लाख की भारी रकम: इस तरह हर महीने पेंशन की रकम खाते में आती रही और आरोपी उसे एटीएम से निकालता रहा। पिछले सात वर्षों (2018 से 2025) में आरोपी ने कुल मिलाकर 44 लाख 38 हजार 96 रुपये की भारी-भरकम धनराशि गबन कर ली।\r\n \r\n
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कैसे हुआ इस महाघोटाले का पर्दाफाश?
\r\n\r\nकोई भी अपराध हमेशा के लिए नहीं छिपता। इस मामले में भी आरोपी प्रेम सिंह की किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया।
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इस बड़े घोटाले की भनक तब लगी जब किसी शिकायत या नियमित ऑडिट के दौरान उपजिलाधिकारी (SDM), सरधना के संज्ञान में यह मामला आया। एसडीएम सरधना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक आधिकारिक पत्र जारी कर बैंक और संबंधित विभागों को अलर्ट किया कि शांति देवी की मृत्यु वर्षों पहले हो चुकी है और उनके खाते में जा रही पेंशन पूरी तरह से अवैध है।
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एसडीएम के इस पत्र के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सकौती टांडा शाखा के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जब उन्होंने शांति देवी के खाते और उनके द्वारा जमा किए गए जीवन प्रमाण पत्रों की आंतरिक जांच की, तो पूरा फर्जीवाड़ा शीशे की तरह साफ हो गया।
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पुलिस की लापरवाही और कोर्ट का सख्त आदेश
\r\n\r\nपूरा सच सामने आने के बाद, बैंक प्रबंधन ने कार्रवाई के लिए पुलिस का रुख किया।
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- \r\n 27 नवंबर 2025 को दी गई शिकायत: एसबीआई शाखा प्रबंधन ने 27 नवंबर 2025 को दौराला थाने में आरोपी पुत्र प्रेम सिंह के खिलाफ लिखित शिकायत (Complaint) दी थी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस की टालमटोल: आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर आर्थिक अपराध के मामले में शुरुआत में कोई ठोस कदम नहीं उठाया और मुकदमा दर्ज करने में हीलाहवाली की।\r\n \r\n
- \r\n न्यायालय की शरण: जब पुलिस ने बैंक की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, तो बैंक प्रबंधन ने न्याय के लिए स्थानीय अदालत (Court) का सहारा लिया और दंड प्रक्रिया संहिता (अब BNSS) के प्रावधानों के तहत एक याचिका दायर की।\r\n \r\n
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अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दौराला पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के सख्त आदेश दिए।
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दर्ज हुई FIR, पुलिस ने शुरू की धरपकड़
\r\n\r\nकोर्ट के आदेश मिलने के बाद दौराला पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस ने बैंक की तहरीर के आधार पर मुख्य आरोपी प्रेम सिंह और उसके उन अज्ञात साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी (Fraud), कूटरचना (Forgery), और सरकारी धन के गबन सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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क्षेत्राधिकारी (CO) का बयान: इस पूरे प्रकरण पर संबंधित क्षेत्राधिकारी (Circle Officer) ने कहा है कि, "मामला बेहद गंभीर है और इसमें सरकारी धन (पेंशन) का गबन किया गया है। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की एक टीम फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले अज्ञात आरोपियों की भी तलाश कर रही है। पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
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मेरठ के दौराला क्षेत्र का यह 44 लाख का पेंशन घोटाला न केवल एक पारिवारिक लालच की पराकाष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह सिस्टम में मौजूद उन खामियों को भी उजागर करता है जिनका फायदा उठाकर जालसाज फर्जी 'जीवन प्रमाण पत्र' जमा कर देते हैं। एक मृत व्यक्ति के नाम पर सात साल तक लगातार सरकारी खजाने से पैसा निकलता रहा और बैंक के सत्यापन तंत्र (Verification System) को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह जांच का विषय है। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि इस मामले में न केवल आरोपी पुत्र बल्कि उन लोगों का भी पर्दाफाश होगा जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में उसकी मदद की थी।
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सारांश (Summary): मेरठ के थाना दौराला क्षेत्र के शाहपुर जदीद गांव में मृत महिला शांति देवी के नाम पर 44.38 लाख रुपये की पेंशन हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शांति देवी की मृत्यु 9 दिसंबर 2018 को हो गई थी, लेकिन उनके बेटे प्रेम सिंह ने अज्ञात साथियों की मदद से फर्जी जीवन प्रमाण पत्र बनाकर बैंक को गुमराह किया और सात साल तक एटीएम के जरिए पेंशन की रकम निकालता रहा। एसडीएम सरधना के पत्र से इसका खुलासा हुआ। 27 नवंबर 2025 को बैंक ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अब न्यायालय के आदेश पर दौराला पुलिस ने आरोपी बेटे और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी व गबन का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.