मेरठ: स्मार्ट सिटी और विकास के पथ पर अग्रसर मेरठ शहर में इन दिनों नगर निगम (Nagar Nigam Meerut) की एक जानलेवा और घोर लापरवाही आम जनता की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। शहर के बीचों-बीच और बाहरी इलाकों में बहने वाले 'खुले नाले' अब शाब्दिक रूप से 'मौत के कुएं' में तब्दील हो चुके हैं। इस प्रशासनिक अनदेखी का सबसे ताजा और दर्दनाक शिकार सरधना का एक गरीब पेंटर हुआ है।READ ALSO:-Mausam 24 June: मौसम का महा-बदलाव! 19 राज्यों में भारी बारिश और 90 KMPH की आंधी का अलर्ट; IMD की सख्त चेतावनी
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मंगलवार की सुबह कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के नंगलाताशी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां के एक गहरे और खुले नाले में एक 50 वर्षीय व्यक्ति का शव तैरता हुआ पाया गया। यह कोई छिटपुट घटना नहीं है; मेरठ शहर में पिछले मात्र 10 दिनों के भीतर खुले नाले में लाश मिलने की यह चौथी खौफनाक घटना है। लगातार हो रही इन मौतों के बावजूद नगर निगम प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है और इन खुले मौत के जालों को ढकने का कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश (Public Anger) व्याप्त है।
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कैसे सामने आई घटना? नंगलाताशी में मंगलवार सुबह की सनसनी
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह जब नंगलाताशी गांव के स्थानीय लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले, तो उनकी नजर सड़क किनारे बह रहे एक बड़े खुले नाले पर पड़ी। नाले के काले और बदबूदार पानी में एक मानव शव औंधे मुंह पड़ा हुआ था। मृतक ने हरे रंग की शर्ट और लोअर पहना हुआ था।
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शव दिखने की खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई और मौके पर सैकड़ों लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। तत्काल स्थानीय कंकरखेड़ा पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय गोताखोरों और सफाई कर्मचारियों की मदद से शव को नाले से बाहर निकाला। प्रारंभिक जांच में मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार के चोट या संघर्ष के निशान नहीं पाए गए।
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सोशल मीडिया बनी मददगार: ऐसे हुई मृतक की शिनाख्त
\r\n\r\nशुरुआती घंटों में मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए मोर्चरी भेज दिया। इसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने मृतक के चेहरे के फोटो और घटना के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया (WhatsApp और Facebook) के विभिन्न स्थानीय ग्रुप्स में शेयर करने शुरू किए ताकि उसकी पहचान हो सके।
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डिजिटल मीडिया की यह पहल रंग लाई। शाम के समय सरधना (Sardhana) के भाटवाड़ा मोहल्ले के सभासद (Ward Member) मुकेश कुमार ने व्हाट्सएप ग्रुप पर वह तस्वीर देखी। उन्होंने तुरंत मृतक की पहचान अपने मोहल्ले के निवासी संजय (उम्र 50 वर्ष) के रूप में की और तत्काल उनके परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की सूचना दी। रोते-बिलखते परिजन शाम को मोर्चरी पहुंचे और शव की आधिकारिक शिनाख्त की।
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परिवार का छिन गया सहारा: 2-3 दिन से कंकरखेड़ा में ही कर रहे थे काम
\r\n\r\nपरिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, संजय पेशे से पुताई (Painter) का काम करते थे और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते थे। उनके परिवार में तीन बेटे और एक बेटी है, जिनमें से दो बेटों और बेटी की शादी हो चुकी है।
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परिजनों ने बताया कि संजय पुताई के एक ठेके के सिलसिले में पिछले दो-तीन दिनों से कंकरखेड़ा क्षेत्र में ही काम कर रहे थे। काम की अधिकता और थकान के कारण वे रात में घर (सरधना) लौटने के बजाय कंकरखेड़ा में ही रुक जाते थे। सोमवार रात भी वे वहीं रुके थे, लेकिन किसे पता था कि वे अब कभी जीवित वापस नहीं लौटेंगे।
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नगर निगम की जानलेवा लापरवाही: सफाई के बाद खुला छोड़ा नाला
\r\n\r\nइस दर्दनाक मौत के पीछे सीधे तौर पर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सोमवार को ही निगम के ठेकेदारों और कर्मचारियों द्वारा इस नाले की 'सफाई' की गई थी। लेकिन सफाई करने के बाद नाले के स्लैब वापस नहीं रखे गए और उसे पूरी तरह से खुला (Open Drain) छोड़ दिया गया।
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नाले से महज 200 मीटर की दूरी पर एक शराब का ठेका (Liquor Shop) भी स्थित है। एसपी सिटी और पुलिस की प्रारंभिक आशंका है कि काम के बाद संजय शराब के ठेके की तरफ गए होंगे और रात के अंधेरे या नशे की हालत में उनका संतुलन बिगड़ गया होगा, जिससे वे इस गहरे और खुले नाले में जा गिरे। चूंकि रात का समय था, इसलिए किसी ने उन्हें गिरते हुए नहीं देखा और पानी में डूबने तथा दम घुटने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
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मेरठ का खौफनाक रिकॉर्ड: 10 दिन में 4 लाशें उगल चुके हैं नाले
\r\n\r\nसंजय की मौत ने मेरठ में 'खुले नालों' के एक डरावने पैटर्न को उजागर किया है। ऐसा लगता है जैसे ये नाले अब शहरवासियों की कब्रगाह बन गए हैं। पिछले 10 दिनों की घटनाओं का टाइमलाइन (Timeline) रोंगटे खड़े करने वाला है:
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- \r\n 14 जून (ब्रह्मपुरी क्षेत्र): ओडियन नाले (Odeon Nala) से एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस अब तक मृतक की शिनाख्त भी नहीं कर पाई है।\r\n \r\n
- \r\n 16 जून (दिल्ली रोड): ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ही दिल्ली रोड पर माधवपुरम गेट के पास खुले नाले में आरकेपुरम निवासी रवि (25 वर्ष) का शव मिला। रवि पेशे से एक बाइक मैकेनिक था और वह भी इसी तरह नगर निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ गया।\r\n \r\n
- \r\n 18 जून (जाकिर कॉलोनी): लिसाड़ी गेट/जाकिर कॉलोनी निवासी अब्दुल समद (15 वर्षीय किशोर) का शव नाले से बरामद हुआ। हालांकि इस मामले में जांच में सामने आया कि उसकी हत्या कर सबूत मिटाने के लिए शव को नाले में फेंका गया था।\r\n \r\n
- \r\n 25 जून (कंकरखेड़ा): अब नंगलाताशी में 50 वर्षीय संजय का शव।\r\n \r\n
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इन चारों घटनाओं का केंद्र 'खुले नाले' ही हैं, लेकिन नगर निगम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। मॉनसून (Monsoon) अब बस कुछ ही दिन दूर है, बारिश के दिनों में जब ये नाले उफान पर होंगे और सड़कें पानी से भर जाएंगी, तब खुले नालों और सड़कों के बीच फर्क करना नामुमकिन हो जाएगा। ऐसे में हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
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पुलिस प्रशासन का रुख: "नगर निगम को लिखेंगे कड़ा पत्र"
\r\n\r\nइस गंभीर मामले पर मेरठ के एसपी सिटी (SP City) श्री विनायक गोपाल भोंसले ने अपना बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि, "प्रथम दृष्टया (Primary Investigation) यह दुर्घटना का मामला प्रतीत होता है। ऐसा अंदेशा है कि संजय नशे की हालत में या अंधेरे के कारण खुले नाले में गिर गए और उनकी मौत हो गई। शरीर पर कोई जाहिरा चोट नहीं है। सच्चाई जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का असल कारण स्पष्ट हो सकेगा।"
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नगर निगम की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए एसपी सिटी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा, "शहर में खुले नालों के कारण लगातार हो रहे इन हादसों का पुलिस ने कड़ा संज्ञान लिया है। हम पुलिस प्रशासन की ओर से नगर निगम (Municipal Corporation) को एक सख्त पत्र (Letter) लिखने जा रहे हैं, जिसमें शहर के सभी खुले और जानलेवा नालों को तुरंत ढकने और बंद करने की मांग की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी दुखद मौतों को रोका जा सके।"
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जनता की मांग— 'अब बहुत हुआ, तुरंत कार्रवाई हो'
\r\n\r\nसंजय की मौत केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की विफलता और नागरिक प्रशासन (Civic Administration) की असंवेदनशीलता का एक क्रूर उदाहरण है। जब कोई सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो उसकी कीमत हमेशा किसी गरीब या आम नागरिक को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
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स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन (DM Meerut) से मांग की है कि खुले नालों की तुरंत जियो-टैगिंग (Geo-tagging) कर उन्हें ढकने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाए। साथ ही, जिन ठेकेदारों ने सफाई के बाद नाले को खुला छोड़ा था, उनके खिलाफ 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide) का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि एसपी सिटी के पत्र और चौथी मौत के बाद क्या नगर निगम अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है, या फिर मेरठ को किसी 5वीं मौत का इंतजार करना पड़ेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.