मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बहसूमा थाना क्षेत्र में गैंगरेप की शिकार 14 वर्षीय नाबालिग लड़की ने पांच दिनों तक मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। Meerut Gangrape Victim Death की खबर लगते ही पूरे इलाके में कोहराम मच गया। लेकिन, मामला सिर्फ मौत तक सीमित नहीं रहा। पीड़िता की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन का जो रवैया सामने आया, उसने एक बार फिर हाथरस कांड की यादें ताजा कर दीं।READ ALSO:-सोनभद्र का खूनी खेल: रामलीला में 'राम' के तीर से हमेशा के लिए अंधे हुए 'रावण', मदद मांगने पर मिली जान से मारने की धमकी, SC/ST एक्ट में केस दर्ज
\r\n\r\n\r\n\r\n
आरोप है कि पुलिस ने रातों-रात पीड़िता का पोस्टमॉर्टम कराया और शव को गांव भेजकर तुरंत अंतिम संस्कार का दबाव बनाया। हालांकि, परिवार ने पुलिस की इस जल्दबाजी का कड़ा विरोध किया और स्पष्ट कर दिया कि जब तक मंत्री नरेंद्र कश्यप (Narendra Kashyap) मौके पर नहीं आएंगे, तब तक वे अपनी बेटी का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। करीब 20 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामा और भारी तनाव के बाद शनिवार दोपहर 1 बजे पीड़िता का अंतिम संस्कार किया जा सका।
\r\n\r\n\r\n\r\n
फिलहाल, एहतियात के तौर पर पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चार थानों की फोर्स तैनात है और बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
वह काली रात और सिस्टम की बेरुखी: पूरा घटनाक्रम
\r\n\r\nइस दिल दहला देने वाली घटना की शुरुआत 25 जनवरी की रात को हुई। Meerut Gangrape Victim Death मामले में पुलिस और परिजनों के बयानों में कुछ विरोधाभास भी सामने आए हैं, लेकिन मूल घटनाक्रम दरिंदगी की इंतहा बयां करता है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
पुलिसिया रिकॉर्ड और मिली जानकारी के मुताबिक, 25 जनवरी की रात आरोपी (जिसे पुलिस पीड़िता का बॉयफ्रेंड बता रही है) ने लड़की को किसी बहाने से अपने घर बुलाया था। आरोप है कि वहां उसे बंधक बना लिया गया। इसके बाद आरोपी अनुज ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर नाबालिग के साथ दरिंदगी (Gangrape) की। हैवानियत का यह खेल तब तक चला जब तक लड़की बेहोश नहीं हो गई। जब लड़की की हालत बिगड़ गई और वह सुध-बुध खो बैठी, तो आरोपी उसे उसी हालत में छोड़कर फरार हो गए।
\r\n\r\n 
26 जनवरी की सुबह का मंजर अगले दिन, यानी गणतंत्र दिवस की सुबह जब पूरा देश जश्न की तैयारी कर रहा था, तब इस 14 साल की बच्ची के जीवन में अंधेरा छा चुका था। सुबह करीब 3 बजे मुख्य आरोपी अनुज की मां जब कमरे में गई, तो उन्होंने लड़की को खून से लथपथ और बेसुध हालत में देखा। इसके बाद, आरोपी की मां और कुछ स्थानीय लोगों की मदद से लड़की को उसके घर के बाहर छोड़ा गया।
\r\n\r\n 
भाई का दर्द: 'मेरी बहन खून से सनी हुई थी'
\r\n\r\nपीड़िता के भाई ने उस भयानक सुबह का जिक्र करते हुए जो बताया, वह किसी का भी दिल दहला सकता है। भाई ने बताया, "26 जनवरी की सुबह जब हम सोकर उठे तो देखा कि बहन घर पर नहीं है। हम परेशान हो गए और आस-पास खोजबीन शुरू की। हम मोहल्ले में लोगों से पूछताछ कर ही रहे थे कि तभी आरोपी अनुज की मां मेरी बहन को लेकर हमारे घर पहुंची। उस वक्त मेरी बहन पूरी तरह बेसुध थी। उसके कपड़े खून से सने हुए थे। उसकी हालत देखकर हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
भाई ने आगे बताया कि करीब 2 घंटे बाद जब पीड़िता को थोड़ा होश आया, तो उसने रोते-बिलखते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि कैसे अनुज और उसके दोस्तों ने उसे नोचा। इस सदमे और शर्मिंदगी को वह बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने घर में रखी कीटनाशक दवा (Poison) पी ली।
\r\n\r\n\r\n\r\n
अस्पताल में 5 दिन का संघर्ष और दुखद अंत
\r\n\r\nजहर खाने के बाद लड़की की हालत और बिगड़ गई। परिजन उसे आनन-फानन में मवाना के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद ने बताया, "26 जनवरी की सुबह मरीज को अत्यंत गंभीर हालत में यहां लाया गया था। जहर के असर और शारीरिक चोटों के कारण उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। बीच में एक समय ऐसा लगा कि उसकी हालत में थोड़ा सुधार हो रहा है, लेकिन गुरुवार (29 जनवरी) की सुबह से उसके अंग फेल होने लगे और स्थिति बिगड़ती चली गई। तमाम कोशिशों के बावजूद शुक्रवार देर रात उसने दम तोड़ दिया।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की भूमिका पर सवाल: क्या हाथरस पार्ट-2 की थी तैयारी?
\r\n\r\nMeerut Gangrape Victim Death मामले में सबसे बड़ा बवाल पीड़िता की मौत के बाद शुरू हुआ। शुक्रवार रात को जैसे ही लड़की की मौत हुई, पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n देर रात पोस्टमॉर्टम: सामान्यतः सूर्यास्त के बाद पोस्टमॉर्टम विशेष परिस्थितियों में ही होता है। लेकिन पुलिस ने रात में ही कागजी कार्रवाई पूरी कर पोस्टमॉर्टम करवाया।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम संस्कार का दबाव: परिजनों का आरोप है कि पुलिस पोस्टमॉर्टम के तुरंत बाद डेडबॉडी को लेकर गांव पहुंच गई और रात के अंधेरे में ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाने लगी।\r\n \r\n
- \r\n एफआईआर में खेल: पीड़िता के भाई ने एसएसपी (SSP) को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की, बल्कि अपने हिसाब से कहानी गढ़ी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें ही डरा-धमका रही है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
पीड़ित परिवार ने साफ कह दिया कि वे पुलिस की जल्दबाजी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और अपनी मांग पर अड़ गए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मंत्री को बुलाने की जिद और 20 घंटे का तनाव
\r\n\r\nशनिवार की सुबह होते-होते गांव में तनाव चरम पर था। पीड़ित परिवार ने शव को घर के बाहर रखकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। उनकी मांग थी कि प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप (Minister Narendra Kashyap) खुद वहां आएं, उनकी बात सुनें और न्याय का भरोसा दें।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भाई ने मीडिया से कहा, "पुलिस हम पर दबाव बना रही है, लेकिन हम डरेंगे नहीं। मेरी बहन के साथ दरिंदगी हुई है, उसे न्याय चाहिए। जब तक मंत्री जी नहीं आएंगे, हम बॉडी नहीं उठाएंगे।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। बहसूमा गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगा दी गई ताकि कोई भी राजनीतिक दल का नेता या बाहरी व्यक्ति गांव में घुसकर माहौल न खराब कर सके। सपा और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने गांव में जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बाहर ही रोक दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आखिरकार, प्रशासन के आला अधिकारियों ने परिवार को काफी समझाया-बुझाया। उन्हें कार्रवाई और मुआवजे का आश्वासन दिया गया। करीब 20 घंटे की जद्दोजहद के बाद शनिवार दोपहर 1 बजे भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस की थ्योरी: 'प्रेम प्रसंग' का एंगल
\r\n\r\nइस पूरे मामले में पुलिस की थ्योरी परिवार के आरोपों से थोड़ी अलग है। पुलिस इसे प्रेम-प्रसंग (Love Affair) से जुड़ा मामला बता रही है। पुलिस का कहना है कि लड़की अपनी मर्जी से लड़के के घर गई थी। हालांकि, पुलिस यह भूल रही है कि पीड़िता की उम्र मात्र 14 वर्ष थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कानूनी पहलू (Legal Angle): भारतीय कानून (POCSO Act) के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की की सहमति (Consent) कानूनन मान्य नहीं होती। यदि लड़की अपनी मर्जी से भी गई थी, तो भी शारीरिक संबंध बनाना रेप (Rape) की श्रेणी में ही आएगा। ऐसे में पुलिस का 'अफेयर' वाला तर्क कानूनी रूप से आरोपियों को कोई राहत नहीं देता, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एफआईआर और गिरफ्तारी
\r\n\r\nदबाव बढ़ने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी, उसके भाई और मां समेत कुल 4 लोगों के खिलाफ बहसूमा थाने में एफआईआर दर्ज की है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n धाराएं: आईपीसी/बीएनएस की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n गिरफ्तारी: पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
हालांकि, परिवार का आरोप है कि गैंगरेप में आरोपी के दोस्त भी शामिल थे, लेकिन पुलिस ने शुरुआत में मामले को हल्का करने की कोशिश की।
\r\n\r\n\r\n\r\n
राजनीतिक हलचल और विपक्ष का हमला
\r\n\r\nइस घटना ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर हमला बोला है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, पुलिस अपराधियों को बचाने और पीड़ितों को दबाने में लगी है।"\r\n \r\n
- \r\n कांग्रेस ने भी पुलिस द्वारा रात में अंतिम संस्कार के प्रयास की निंदा की है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
विपक्ष का कहना है कि पुलिस प्रशासन का रवैया पूरी तरह से अमानवीय था। एक तरफ परिवार अपनी बेटी को खोने के गम में था, दूसरी तरफ पुलिस उन्हें डरा रही थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
महिला सुरक्षा पर उठते सवाल
\r\n\r\nमेरठ की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि महिला सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद जमीनी हकीकत भयावह है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n नाबालिगों की सुरक्षा: 14 साल की बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, न घर में और न बाहर।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस का रवैया: अपराध होने के बाद पुलिस का पहला काम पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए, न कि मामले को रफा-दफा करना। एफआईआर में हेरफेर और अंतिम संस्कार का दबाव पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।\r\n \r\n
- \r\n न्याय में देरी: अगर पुलिस ने 26 जनवरी को ही सख्त कार्रवाई की होती और परिवार की बात सुनी होती, तो शायद लड़की को आत्महत्या की कोशिश न करनी पड़ती।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मेरठ के बहसूमा में हुई Meerut Gangrape Victim Death की घटना ने समाज और सिस्टम, दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। 14 साल की मासूम बच्ची, जिसे अभी दुनिया देखनी थी, वह दरिंदगी और सिस्टम की बेरुखी का शिकार होकर चली गई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भले ही अब अंतिम संस्कार हो चुका है और पुलिस ने गांव को छावनी बना रखा है, लेकिन सवाल अभी भी जिंदा हैं। क्या मुख्य आरोपी के अलावा बाकी दोषियों को सजा मिलेगी? क्या पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने एफआईआर बदलने और जबरन अंतिम संस्कार का प्रयास किया? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब तक देश की बेटियां इस तरह की दरिंदगी का शिकार होती रहेंगी?
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस मामले में इंसाफ की लड़ाई अभी लंबी है। परिवार डरा हुआ है लेकिन न्याय की आस में है। प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मिले और दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाए, ताकि फिर किसी बेटी के साथ ऐसा न हो।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सारांश: मेरठ के बहसूमा में गैंगरेप और जहर खाने से 14 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई। पुलिस पर आरोप है कि उसने रात में ही जबरन अंतिम संस्कार का प्रयास किया, जिसका परिवार ने विरोध किया। मंत्री नरेंद्र कश्यप को बुलाने की मांग को लेकर परिवार 20 घंटे तक अड़ा रहा। भारी तनाव के बीच शनिवार दोपहर अंतिम संस्कार हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गांव में भारी पुलिस बल तैनात है।
Sabse pehle comment karne wale banein.