उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से एक बड़े आर्थिक अपराध और कर अपवंचन (Tax Evasion) का मामला सामने आया है। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) कमिश्नरेट मेरठ की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के आरोप में एक बड़े कारोबारी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कारोबारी पान मसाला और तंबाकू बनाने वाली दो निजी कंपनियों का निदेशक (Director) है।READ ALSO:-आसमान से बरस रही 'आग': मैदानों से लेकर पहाड़ों तक गर्मी ने छुड़ाए पसीने, यूपी का बांदा बना 'तंदूर', जानें कब मिलेगी राहत?
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इस बहुचर्चित मेरठ सीजीएसटी रेड के बाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) / रिमांड मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-7, मेरठ के समक्ष शनिवार (25 अप्रैल 2026) को आरोपी को पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेज दिया गया है। यह कार्रवाई उन कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। 
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क्या है पूरा मामला और कैसे हुई छापेमारी?

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प्राप्त अदालती दस्तावेजों और रिमांड आदेश (दिनांक- 25.04.2086) के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त का नाम नितिन राजेश (पुत्र राजेश्वर कुमार गर्ग) है, जो मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित 87 हिल स्ट्रीट का निवासी है। नितिन राजेश 'मैसर्स पुलकिया ऑर्गेनिक्स प्रा. लि.' और 'मैसर्स व्हाइट लाइन फ्रेग्रेन्स प्रा. लि.' नामक दो कंपनियों का निदेशक है।
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सीजीएसटी विभाग के वरिष्ठ आसूचना अधिकारी (Senior Intelligence Officer) श्री सच्चिदा यादव को गुप्त सूचना मिली थी कि ये दोनों कंपनियां बिना टैक्स जमा किए बड़े पैमाने पर पान मसाला और तंबाकू का उत्पादन कर रही हैं और उन्हें अवैध रूप से बाजार में बेच रही हैं।
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इस पुख्ता सूचना के आधार पर सीजीएसटी की टीम ने:

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    आरोपी की उपरोक्त फर्मों (फैक्ट्रियों) और उसके घर पर एक साथ छापेमारी की।
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    तलाशी के दौरान फर्मों पर भारी मात्रा में पान मसाला और तंबाकू बनाने का कच्चा माल और मशीनें बरामद हुईं।
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    जांच के दौरान टीम को अभियुक्त के एक 'अघोषित और गुप्त स्थान' (Undisclosed Location) का भी पता चला।
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    जब टीम ने उस गुप्त स्थान पर छापा मारा, तो वहां तीन अघोषित मशीनें, 'दबका' (Dabka) ब्रांड का भारी मात्रा में तैयार पान मसाला और 'पी-9' (P-9) ब्रांड का तंबाकू बरामद हुआ। 
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14 करोड़ की टैक्स चोरी: कैसे हुई गणना?

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इस मेरठ सीजीएसटी रेड में सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने का खुलासा हुआ है। अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार:
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    नए Health Security se National security cess act 2025 (जो 01.02.2026 से लागू है) के प्रावधानों और अनुसूची-2 के तहत, अवैध रूप से बनाए जा रहे पान मसाले पर लगभग 9.09 करोड़ रुपये का टैक्स बनता है।
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    इसी तरह, सेंट्रल एक्साइज एक्ट (Central Excise Act) के नोटिफिकेशन नंबर 04/2025 के आधार पर तंबाकू पर लगभग 4.98 करोड़ रुपये की ड्यूटी बनती है।
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इस प्रकार, अभियुक्त नितिन राजेश द्वारा कुल मिलाकर लगभग 14 करोड़ रुपये का कर अपवंचन (Tax Evasion) किया जा रहा था। टीम ने अदालत में साक्ष्य के रूप में परिसर से मिले कच्चे और तैयार माल के सैंपल, मशीनों के पंचनामे, संबंधित रजिस्टर, और मशीन ऑपरेटर के बयान दाखिल किए हैं।
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गिरफ्तारी की प्रक्रिया और सीजीएसटी का दावा

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अदालत में विशेष अभियोजन अधिकारी (Special Public Prosecutor) श्री लक्ष्य कुमार सिंह और उनकी सहयोगी अधिवक्ता श्रीमती वंदना सिंह ने सीजीएसटी का पक्ष रखते हुए बताया कि विभाग ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है।
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    अभियुक्त को 24 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे कार्यालय बुलाया गया था और रात 19:10 तक उसके बयान दर्ज करने के बाद उसे घर जाने दिया गया।
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    अगले दिन, 25 अप्रैल को उसे फिर से बयान के लिए बुलाया गया।
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    पांच करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी (जो एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है) के पुख्ता सबूत मिलने के बाद, 25 अप्रैल को शाम करीब 4:00 बजे सीजीएसटी कार्यालय, मंगलपांडे नगर, मेरठ से उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
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    गिरफ्तारी के तुरंत बाद, शाम 4:10 बजे अभियुक्त और उसके जीजा को गिरफ्तारी मीमो (Arrest Memo) और कारणों सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियां सौंप दी गईं। 
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बचाव पक्ष की दलील: 'मुझे गलत फंसाया गया'

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इस मेरठ सीजीएसटी रेड मामले में अभियुक्त नितिन गर्ग के वकील ने अदालत में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि:
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    अभियुक्त को इस मामले में पूरी तरह से गलत फंसाया गया है और उसके यहां से कोई भी अवैध बरामदगी नहीं हुई है।
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    अभियुक्त के पास पान मसाला और तंबाकू बनाने का वैध लाइसेंस मौजूद है।
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    सीजीएसटी विभाग ने उसे जानबूझकर परेशान करने की नीयत से गिरफ्तार किया है।
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    इसके अलावा, वकील ने अदालत को बताया कि अभियुक्त गंभीर बीमारियों (जैसे बीपी, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर) से ग्रस्त है, जिसके चिकित्सकीय दस्तावेज भी अदालत में पेश किए गए। उन्होंने मांग की कि रिमांड आवेदन को खारिज किया जाए।
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न्यायालय का आदेश: 14 दिन की रिमांड मंजूर

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद प्रपत्रों (दस्तावेजों) का गहराई से अवलोकन करने के बाद, रिमांड मजिस्ट्रेट / ए.सी.जे.एम.-7 (सावन कुमार विकास) ने अपना आदेश सुनाया।
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न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त पर 14 करोड़ रुपये के गंभीर आर्थिक अपराध (Economic Offence) का आरोप है। सीजीएसटी विभाग द्वारा गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन किया गया है। चूंकि मामले की विवेचना अभी जारी है और पूछताछ में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं, इसलिए इस स्तर पर विभाग द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त की रिमांड मंजूर करना न्यायोचित प्रतीत होता है। 
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अंततः, न्यायालय ने सीजीएसटी कमिश्नरेट मेरठ के वाद संख्या 1490/2026 में धारा 18(1)(a), 18(1)(c), और 19(1)a के तहत अभियुक्त नितिन राजेश की 14 दिन की न्यायिक रिमांड स्वीकार कर ली है। अब अभियुक्त को 08 मई 2026 को पुनः न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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मेरठ सीजीएसटी रेड की यह बड़ी कार्रवाई यह दर्शाती है कि टैक्स चोरी करने वालों पर केंद्रीय एजेंसियां कितनी सख्ती से नजर रख रही हैं। 14 करोड़ रुपये की कर चोरी न केवल एक व्यापारिक धोखाधड़ी है, बल्कि यह देश के विकास में भी बाधा है। नया 'हेल्थ सिक्योरिटी से नेशनल सिक्योरिटी सेस एक्ट' तंबाकू और पान मसाला उद्योग पर टैक्स की गणना को और अधिक सख्त बना रहा है। अब देखना यह है कि 14 दिनों की पूछताछ और रिमांड अवधि के दौरान इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य किन लोगों के नाम सामने आते हैं।
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मेरठ के सीजीएसटी (CGST) विभाग ने पान मसाला और तंबाकू का अवैध उत्पादन कर 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के आरोप में कंपनी निदेशक नितिन गर्ग को गिरफ्तार किया है। गुप्त स्थान पर चल रही इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में 'दबका' और 'पी-9' ब्रांड का माल बरामद हुआ। बचाव पक्ष ने इसे फंसाने की साजिश बताया और बीमारी का हवाला दिया, लेकिन गंभीर आर्थिक अपराध और पुख्ता सबूतों को देखते हुए मेरठ सीजेएम कोर्ट (न्यायालय संख्या-7) ने आरोपी की 14 दिन की रिमांड मंजूर कर उसे जेल भेज दिया है।
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अस्वीकरण: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्रेस विज्ञप्तियों, विशेष अभियोजन अधिकारी और आरोपी के वकील द्वारा प्रस्तुत तर्कों, तथा वैध न्यायालय आदेशों पर आधारित है।
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