मेरठ (Meerut Latest News): कभी अपनी चकाचौंध, रौनक और ग्राहकों की भारी भीड़ के लिए पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मशहूर मेरठ का 'सेंट्रल मार्केट' (Central Market, Meerut) आज सन्नाटे और दहशत के साए में है। बाजार की जिन सड़कों पर कभी पैर रखने की जगह नहीं होती थी, आज वहां खौफ का अंधेरा पसरा है। यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के उस कड़े रुख के बाद पैदा हुई है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों (Residential Areas) में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।READ ALSO:-UPPCL का महा-आदेश: यूपी में अब कोई 'प्रीपेड' स्मार्ट मीटर नहीं! सिक्योरिटी मनी और बिलिंग के बदल गए नियम, पढ़ें एमडी नितीश कुमार का पूरा सर्कुलर
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इस अदालती आदेश के अनुपालन में प्रशासन और आवास विकास परिषद द्वारा लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं और सीलिंग की कार्रवाई की तलवार लोगों के सिर पर लटक रही है। इसी के विरोध में शुक्रवार को सेंट्रल मार्केट और शास्त्री नगर इलाके की सैकड़ों महिलाओं ने सड़क पर उतरकर अपना भारी आक्रोश व्यक्त किया और उत्तर प्रदेश सरकार में ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के सिविल लाइन स्थित आवास का घेराव कर लिया।
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 Meerut Women Protest State Minister Home Gherao | Vidhayak Ji Bahar Aao  Slogans

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क्यों भड़का महिलाओं का गुस्सा? जानें पूरा विवाद

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सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का यह संघर्ष एक दिन का नहीं है। पिछले लगभग एक महीने से इलाके की महिलाएं और व्यापारी अपना काम-धंधा छोड़कर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। लेकिन जब आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने उनके घरों की दीवारों पर 'सेटबैक नोटिस' (Setback Notice) और सीलिंग के फरमान चस्पा करने शुरू किए, तो महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा।
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 सेंट्रल मार्केट:महिलाओं ने घेरा सोमेंद्र तोमर का आवास, बोलीं- वोट मांगने  आओगे तो बताएंगे, खुद का घर नाले पर - Central Market: Women Surrounded  Somendra Tomar's ...

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क्या होता है सेटबैक का नियम? सेटबैक (Setback) भवन निर्माण का वह नियम है, जिसके तहत मकान या इमारत बनाते समय सड़क और बाउंड्री वॉल के बीच एक निश्चित खाली जगह छोड़नी होती है। आवास विकास का दावा है कि इन मकानों में इस नियम का उल्लंघन कर व्यावसायिक निर्माण कर लिया गया है।
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महिलाओं के वाजिब सवाल: "जब मकान बने, तब कहां था प्रशासन?"

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मंत्री आवास पर प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं की आंखों में आंसू और जुबान पर तीखे सवाल थे। अपने हाथों में तख्तियां लिए इन महिलाओं ने अपना दर्द और तर्क प्रशासन के सामने रखा:
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    परिषद की ही गलती: महिलाओं का कहना है कि ये मकान आज से दशकों पहले खुद आवास विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) ने ही बनाकर आवंटित किए थे। अगर तब सेटबैक के नियमों का पालन नहीं हुआ था, तो आवंटन के समय अधिकारी क्या कर रहे थे?
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    मकान गिरने का खतरा: प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उनके मकान बहुत छोटे और पुराने हैं। अगर प्रशासन सेटबैक के नाम पर अब इन छोटे मकानों में तोड़फोड़ (Demolition) करता है, तो दीवारों की बुनियाद हिल जाएगी और पूरा आशियाना ही जमींदोज होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
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    रोजगार और छत छिनने का डर: इस मार्केट में ज्यादातर निचले और मध्यम वर्ग के व्यापारी हैं, जिन्होंने अपने घरों के अगले हिस्से में छोटी-छोटी दुकानें खोल रखी हैं। सीलिंग से न केवल उनके सिर से छत छिन जाएगी, बल्कि उनके बच्चों के मुंह का निवाला और रोजगार भी पूरी तरह चौपट हो जाएगा।
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ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने खुद संभाला मोर्चा, दिया यह बड़ा आश्वासन

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अपने आवास के बाहर सैकड़ों महिलाओं की भारी भीड़ और उनके आंसुओं को देखकर ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर तुरंत घर से बाहर आए। उन्होंने जमीन पर बैठकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बीच जाकर उनकी सभी समस्याओं को बेहद ध्यान और संवेदनशीलता से सुना।
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 Meerut Women Protest State Minister Home Gherao | Vidhayak Ji Bahar Aao  Slogans

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मंत्री सोमेंद्र तोमर ने सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए महिलाओं को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा, "यह सरकार जनता की चुनी हुई सरकार है और हम पूरी तरह से आपके साथ खड़े हैं। हमारा लगातार यह प्रयास है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की गाइडलाइंस का सम्मान करते हुए, जनहित (Public Interest) को भी सुरक्षित रखा जाए। किसी भी गरीब या व्यापारी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।"
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उन्होंने प्रदर्शनकारियों को जानकारी दी कि:

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    सरकार इस जटिल मुद्दे का कोई बीच का और उचित रास्ता निकालने के लिए उच्च स्तर (High Level) पर गहन मंथन कर रही है।
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    व्यापारियों और निवासियों के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए माननीय न्यायालय के समक्ष एक अपील भी दायर की गई है।
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    उन्होंने महिलाओं से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि प्रशासन जल्द ही एक सकारात्मक समाधान (Positive Solution) की ओर बढ़ेगा, जिससे किसी का घर न उजड़े।
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पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी: एसपी सिटी ने समझा-बुझाकर शांत कराया हंगामा

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मंत्री के आवास पर महिलाओं के इस बड़े घेराव की सूचना जैसे ही पुलिस कंट्रोल रूम को मिली, पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति को नियंत्रण में लेने और वीआईपी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसपी सिटी (SP City) विनायक गोपाल भोंसले दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए।
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उनके साथ सिविल लाइन थाना प्रभारी सुचिता सिंह और भारी संख्या में महिला पुलिस बल (Women Police Force) भी तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने बेहद सूझबूझ का परिचय देते हुए आक्रोशित भीड़ को भड़कने से रोका।
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एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले और थाना प्रभारी सुचिता सिंह ने आंदोलित महिलाओं को समझाया कि कानून हाथ में लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने महिलाओं को आश्वासन दिया कि प्रशासन उनके ज्ञापन को सही फोरम तक पहुंचाएगा और कानून व्यवस्था (Law and Order) बनाए रखने में सहयोग की अपील की। पुलिस और मंत्री के लंबे मान-मनौव्वल और पुख्ता आश्वासन के बाद आखिरकार महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ और वे अपने-अपने घरों की ओर वापस लौट गईं।
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आगे क्या? अंधकार में डूबा है भविष्य

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भले ही शुक्रवार को मंत्री के आवास पर हुआ यह हंगामा शांत हो गया हो, लेकिन सेंट्रल मार्केट के निवासियों के दिलों में धड़क रहा खौफ अभी खत्म नहीं हुआ है। दशकों से जिस मार्केट ने मेरठ की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया और हजारों लोगों को रोजगार दिया, वह आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सख्ती और दूसरी तरफ हजारों लोगों के उजड़ते आशियाने—इन दोनों के बीच फंसा यह मामला अब एक बड़ी सामाजिक और राजनीतिक चुनौती बन चुका है। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों की नजरें अब पूरी तरह से उत्तर प्रदेश सरकार की पैरवी और माननीय न्यायालय के अगले कदम (Next Hearing/Order) पर टिकी हुई हैं। देखना यह है कि क्या कोई ऐसा कानूनी रास्ता निकलता है जो इन हजारों परिवारों के घरों और उनकी रोजी-रोटी को बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई से बचा सके। फिलहाल, मेरठ का यह 'दिल' भारी दहशत के बीच अपनी धड़कनें वापस लौटने का इंतजार कर रहा है।
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