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मेरठ, 19 अप्रैल 2026 (रविवार): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का हृदय स्थल माना जाने वाला 'सेंट्रल मार्केट' इन दिनों एक बड़े जन-आंदोलन का अखाड़ा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद से इस इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। अपनी आजीविका और आशियाने को बचाने की जद्दोजहद में स्थानीय व्यापारी और महिलाएं पिछले 10 दिनों से सड़क पर बैठकर लगातार धरना प्रदर्शन कर रही हैं। रविवार को भी यह प्रदर्शन बदस्तूर जारी रहा। एक ओर जहाँ चिलचिलाती धूप में महिलाएं अपने अधिकारों के लिए सड़क पर डटी हैं, वहीं दूसरी ओर जिला और पुलिस प्रशासन ने इस आंदोलन को कुचलने या सीमित करने के लिए अपनी सख्ती चरम पर पहुंचा दी है। प्रशासन की सबसे बड़ी रणनीति यह है कि इस धरने को स्थानीय लोगों तक ही सीमित रखा जाए और किसी भी बाहरी व्यक्ति या नेता को इसमें शामिल न होने दिया जाए।READ ALSO:-भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर गूंजे वैदिक मंत्र, 31 कुंडीय महायज्ञ में उमड़ा आस्था का सैलाब; ब्राह्मण समाज ने भरी हुंकार— "छुट्टी रद्द और अनदेखी बर्दाश्त नहीं!"
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क्या है सेंट्रल मार्केट का पूरा विवाद? (सुप्रीम कोर्ट का आदेश)
\r\n\r\nइस पूरे बवाल और धरने की जड़ में सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश है, जो 9 अप्रैल 2026 को जारी किया गया था। न्यायालय के आदेशानुसार, मेरठ के इस इलाके में स्थित 859 आवासीय प्लॉटों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों (दुकानों) को तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाना है।
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विवाद केवल दुकानों को बंद करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा पेंच 'सेटबैक' (Setback) के नियम को लेकर फंसा है। कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि आवासीय भवनों में भी भवन निर्माण के नियमों के तहत सेटबैक (भवन के चारों ओर छोड़ी जाने वाली खाली जगह) के अनुसार जगह छोड़नी होगी।
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स्थानीय निवासियों का दर्द: यहीं से स्थानीय लोगों का असली दर्द शुरू होता है। प्रदर्शन कर रहे लोगों और महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। वे अपनी रोजी-रोटी का जरिया यानी दुकानें तो बंद कर सकते हैं, लेकिन उनके मकान बेहद छोटे-छोटे हैं। अगर उन छोटे मकानों में सेटबैक के नियम को लागू करते हुए तोड़फोड़ की गई, तो उनके पास रहने के लिए छत ही नहीं बचेगी। वे पूरी तरह से बेघर हो जाएंगे। "दुकानें बंद होने से हमारी रोजी-रोटी छिन रही है, और सेटबैक के नाम पर हमारे आशियाने तोड़े जा रहे हैं, हम आखिर अपने बच्चों को लेकर कहां जाएं?" यह सवाल धरने पर बैठी हर महिला की आंखों में तैर रहा है।
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प्रशासन की सख्ती: बाहरी लोगों की 'नो-एंट्री' और अवमानना के नोटिस
\r\n\r\nइस संवेदनशील मुद्दे को देखते हुए प्रशासन किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देना चाहता। एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले और एडीएम सिटी ने पहले ही स्थानीय व्यापारियों और निवासियों से अपील की थी कि वे इस प्रदर्शन में बाहर के लोगों या राजनीतिक दलों को शामिल न करें और शांतिपूर्ण तरीके से धरना समाप्त कर दें।
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जब प्रशासन की अपीलों का कोई खास असर नहीं हुआ, तो पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया। अब जो भी व्यक्ति, नेता या संगठन का प्रतिनिधि व्यापारियों के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंच रहा है, पुलिस उसे सीधे 'न्यायालय की अवमानना' (Contempt of Court) का नोटिस थमा रही है। प्रशासन का तर्क है कि चूंकि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा है, इसलिए इसके खिलाफ प्रदर्शन करना या उसे भड़काना सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
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किसान मजदूर संगठन के विजय राघव को नोटिस और उनका तीखा पलटवार
\r\n\r\nरविवार को इसी कड़ी में एक नया विवाद तब जुड़ गया जब किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव व्यापारियों और महिलाओं का समर्थन करने धरना स्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही वहां मुस्तैद पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया और तुरंत न्यायालय की अवमानना का नोटिस उनके हाथ में थमा दिया।
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संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला: नोटिस मिलने के बाद विजय राघव ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा, "मेरठ में न तो राष्ट्रपति शासन लागू है और न ही देश में कोई आपातकालीन स्थिति (Emergency) लगी हुई है। इसके बावजूद हमें संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत मिले मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि अपनी बात को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना या अपनी जायज मांगों के लिए धरना देना हर नागरिक का स्वतंत्र अधिकार है। प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है। यह नोटिस केवल डराने और मामले को रफा-दफा करने का एक हथकंडा है।
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सियासी पारा हाई: अजय राय हिरासत में, नवीन गुप्ता हाउस अरेस्ट
\r\n\r\nयह मामला अब केवल स्थानीय निवासियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बड़े राजनीतिक तूफान का रूप ले लिया है। पुलिस प्रशासन लगातार विपक्षी नेताओं और व्यापारी नेताओं पर नकेल कस रहा है:
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- \r\n व्यापार संघ का 'हल्ला बोल': बीती 17 अप्रैल को 'संयुक्त व्यापार संघ' द्वारा इस मुद्दे को लेकर 'हल्ला बोल' कार्यक्रम का आह्वान किया गया था। उनका उद्देश्य आवास विकास कार्यालय का घेराव करना था। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता को हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया। इसके साथ ही प्रदर्शन की कोशिश कर रहे 20 से अधिक लोगों पर पुलिस ने तस्करा (FIR/मामला) दर्ज कर लिया।\r\n \r\n
- \r\n कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हिरासत में: व्यापारियों के इस भारी विरोध को समर्थन देने के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी मेरठ के लिए निकले थे। लेकिन पुलिस-प्रशासन ने उन्हें मेरठ की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही नोएडा में रोककर हिरासत में ले लिया। प्रशासन किसी भी बड़े नेता को धरना स्थल पर पहुंचकर भीड़ को संबोधित करने का मौका नहीं देना चाहता।\r\n \r\n
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धरने पर बैठी महिलाओं का दर्द: "हमें धमकाया जा रहा है"
\r\n\r\nसड़क पर बैठी महिलाओं का गुस्सा केवल न्यायालय के आदेश से नहीं है, बल्कि स्थानीय प्रशासन के रवैये से भी है। धरने पर बैठी महिलाओं ने मीडिया को बताया कि प्रशासन लगातार उन पर धरना खत्म करने का मनोवैज्ञानिक और कानूनी दबाव बना रहा है।
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महिलाओं का आरोप है, "कल भी एडीएम सिटी और पुलिस के आला अधिकारी हमारे पास आए थे। उन्होंने धरना खत्म करने का दबाव बनाया। हमें खुली धमकियां दी जा रही हैं कि अगर हमारे बीच कोई बाहरी नेता आएगा या हम खुद यह धरना खत्म नहीं करेंगे, तो हम सभी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए जाएंगे।"
\r\n\r\nआगे क्या?
\r\n\r\n10 दिन बीत जाने के बाद भी मेरठ के सेंट्रल मार्केट का यह गतिरोध टूटता हुआ नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है, जिसका पालन कराना प्रशासन की वैधानिक मजबूरी है। दूसरी तरफ वे हजारों परिवार हैं, जिनके सामने रोजगार और छत छिनने का अभूतपूर्व संकट खड़ा है।
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प्रशासन 'अवमानना नोटिस' के जरिए आंदोलन की धार कुंद करने में लगा है, लेकिन स्थानीय लोगों की मजबूरी उन्हें पीछे हटने नहीं दे रही। अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकाल पाती है या फिर सेटबैक के नियम के तहत आने वाले दिनों में बुलडोजर की कार्रवाई देखने को मिलेगी। फिलहाल, मेरठ का सेंट्रल मार्केट पुलिस छावनी में तब्दील है और हवा में तनाव साफ महसूस किया जा सकता है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.