मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने की अपनी दशकों पुरानी मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने आज (बुधवार, 26 नवंबर 2025) एक बार फिर जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट बेंच की मांग को मुखर करने के लिए पश्चिम के सभी 22 जनपदों में वकीलों ने काम बंद रखा और जिला मुख्यालयों के साथ-साथ तहसील बार में सांसदों के आवासों का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया।READ ALSO:-दिल्ली BREAKING: कमला पसंद और राजश्री पान मसाला ग्रुप के मालिक की बहू ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में किया रिश्ते में भरोसे की कमी का ज़िक्र
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आंदोलन की इस कड़ी में, पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने एक बड़े विरोध कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसके तहत 17 दिसंबर को पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है।
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मेरठ में सांसदों के आवास पर प्रदर्शन

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मेरठ में, अधिवक्ताओं ने बारी-बारी से शहर में रहने वाले तीनों सांसदों के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगें रखीं।
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    राजकुमार सांगवान (बागपत सांसद): सबसे पहले पश्चिमी कचहरी मार्ग स्थित बागपत सांसद राजकुमार सांगवान के आवास पर धरना और घेराव किया गया, जिन्होंने वकीलों की इस मांग का खुलकर समर्थन किया।
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    लक्ष्मीकांत बाजपेई (राज्यसभा सांसद): मोहनपुरी स्थित राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने भी वकीलों को पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वह इस हाईकोर्ट बेंच की मांग को काफी समय से उठाते रहे हैं और संसद में भी इसका समर्थन करते रहेंगे।
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    अरुण गोविल (मेरठ सांसद): मवाना रोड स्थित डिफेंस कॉलोनी में मेरठ सांसद अरुण गोविल के निवास पर भी प्रदर्शन हुआ। हालांकि, वह अपने आवास पर नहीं मिले, लेकिन उन्होंने फोन पर बात करके अधिवक्ताओं की मांग को अपना समर्थन दिया।
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समिति का बड़ा निर्णय: 17 दिसंबर को पूर्ण बंद

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने इस आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। समिति के चेयरमैन और मेरठ बार के अध्यक्ष संजय शर्मा तथा संघर्ष समिति के संयोजक और मेरठ बार के महामंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने जानकारी दी कि बुधवार को पश्चिम के सभी 22 जनपदों में यह धरना प्रदर्शन हुआ।
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उन्होंने यह भी बताया कि अधिवक्ताओं ने दोपहर दो बजे तक कचहरी में चैंबर और दुकानें बंद रखीं, और बार के प्रस्ताव का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ
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अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 

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वकीलों की इस मांग का मुख्य आधार यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट पश्चिमी यूपी के जिलों से बहुत दूर है, जिससे वादकारियों और वकीलों को भारी परेशानी होती है। पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग न्याय को आम जनता तक सुलभ बनाने के लिए आवश्यक है।
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बैठक और आगे की रणनीति

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सांसद का आवास घेरने से पहले मेरठ बार और जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मेरठ बार कार्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव कुमार त्यागी और महामंत्री अमित राणा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे, जिन्होंने सर्वसम्मति से आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। 
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अब समिति का अगला कदम 17 दिसंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्ण बंद का आह्वान है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर सके।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 22 जनपदों में सांसदों के आवासों का घेराव किया गया, जहां अधिकांश सांसदों ने वकीलों को समर्थन दिया है। इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब संघर्ष समिति ने 17 दिसंबर को पश्चिम यूपी में पूर्ण बंद का आह्वान किया है, जो क्षेत्रीय न्याय व्यवस्था को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा दबाव बनाने वाला कदम साबित हो सकता है।
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