बिजनौर (Bijnor) और उसके आस-पास के इलाकों में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। गन्ने के खेतों और जंगलों से घिरे इस क्षेत्र में एक बार फिर आदमखोर गुलदार की धमक से लोगों की रातों की नींद उड़ गई है। थाना नजीबाबाद क्षेत्र के खुशहालपुर मड़के गांव में हुई इस हृदयविदारक घटना ने प्रशासन और वन विभाग (Forest Department) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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​आइए, इस पूरी खौफनाक घटना, गांव के हालात और वन विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
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​घात लगाकर बैठा था 'काल': कैसे हुआ मासूम पर हमला?
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​प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना नजीबाबाद के खुशहालपुर मड़के गांव में रोजमर्रा की तरह बच्चे अपने घरों के आस-पास खेल रहे थे। गांव की सीमा सीधे जंगल और गन्ने के खेतों से सटी हुई है। इसी दौरान, घनी झाड़ियों या गन्ने के खेत में पहले से घात लगाए बैठे एक विशालकाय गुलदार ने अचानक 7 साल के एक मासूम बच्चे पर झपट्टा मार दिया।
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​हमला इतना तेज और अचानक था कि बच्चे को संभलने या शोर मचाने तक का मौका नहीं मिला। गुलदार ने बच्चे को अपनी मजबूत पकड़ में लिया और पलक झपकते ही उसे घने जंगल की ओर खींच ले गया। आस-पास मौजूद अन्य बच्चों और लोगों ने जब यह खौफनाक मंजर देखा, तो उनके होश उड़ गए। तुरंत गांव वालों को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद लोग हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर जंगल की ओर दौड़े।
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​जंगल में मिले अवशेष, परिवार में मचा कोहराम

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​गांव वालों ने हिम्मत जुटाकर जंगल और गन्ने के खेतों में भारी संख्या में घुसकर बच्चे की तलाश शुरू की। लोग लगातार शोर मचा रहे थे ताकि गुलदार डर कर बच्चे को छोड़ दे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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​घंटों की कड़ी मशक्कत और खोजबीन के बाद, जंगल के भीतर एक स्थान पर बच्चे के अवशेष (Remains) बरामद हुए। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। आदमखोर गुलदार मासूम को अपना निवाला बना चुका था।
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जैसे ही यह मनहूस खबर गांव में पहुंची, मृतक बच्चे के परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है; उनकी आंखों के आंसू और चीखें हर किसी का कलेजा चीर रही हैं। पूरे खुशहालपुर मड़के गांव में इस वक्त चूल्हा तक नहीं जला है और हर तरफ मातम के साथ-साथ गहरी दहशत का माहौल पसरा हुआ है।
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​वन विभाग की टीम ने डाला डेरा, लगाया गया पिंजरा

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​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस (Najibabad Police) और वन विभाग (Forest Department) में हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल के साथ वन विभाग के अधिकारी, रेंजर और रेस्क्यू टीम तुरंत जंगल की ओर रवाना हुई।
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    ​पिंजरे की तैनाती: अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आदमखोर गुलदार को जिंदा पकड़ने के लिए तत्काल उस इलाके में पिंजरा (Cage) लगा दिया है। पिंजरे के अंदर शिकार (Bait) रखा गया है ताकि गुलदार लालच में आकर उसमें फंस सके।
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    ​ट्रैप कैमरे (Trap Cameras): गुलदार की हरकतों और उसकी लोकेशन को ट्रैक करने के लिए जंगल के आस-पास के रास्तों पर नाइट-विज़न ट्रैप कैमरे भी इंस्टॉल किए जा रहे हैं।
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    ​गश्त में बढ़ोतरी: वन रक्षकों (Forest Guards) की कई टीमें बनाकर इलाके में 24 घंटे की गश्त (Patrolling) शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अकेले जंगल या खेतों की तरफ बिल्कुल न जाएं।
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बिजनौर में क्यों बढ़ रहे हैं गुलदार के हमले? (Background & Context)

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​बिजनौर जिला भौगोलिक दृष्टि से अमानगढ़ टाइगर रिज़र्व (Amangarh Tiger Reserve) और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett) से सटा हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ इंसानों पर गुलदार के हमलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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    ​गन्ने के खेत (Safe Haven for Leopards): पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर बिजनौर में गन्ने की बंपर खेती होती है। गन्ने के ऊंचे और घने खेत गुलदारों के लिए एक सुरक्षित "मिनी जंगल" का काम करते हैं। यहाँ वे आसानी से छिप सकते हैं और प्रजनन (Breeding) भी कर सकते हैं।
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    ​प्राकृतिक आवास में कमी: जंगलों की लगातार कटाई और मानवीय अतिक्रमण के कारण जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) सिकुड़ता जा रहा है।
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    ​आसान शिकार की तलाश: जब जंगलों में हिरण या अन्य छोटे जानवर कम पड़ने लगते हैं, तो गुलदार आसान शिकार (जैसे- आवारा कुत्ते, बकरियां, मुर्गियां और छोटे बच्चे) की तलाश में गांवों का रुख करते हैं।
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बचाव के लिए ग्रामीणों को वन विभाग की सलाह (Safety Guidelines)

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​इस दहशत भरे माहौल के बीच, वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए कुछ आवश्यक सुरक्षा दिशा-निर्देश (Advisory) जारी किए हैं:
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    ​बच्चों को अकेला न छोड़ें: सुबह-शाम और रात के समय बच्चों को किसी भी कीमत पर घर से बाहर अकेला न खेलने दें।
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    ​समूह में जाएं: खेतों में काम करने या शौच के लिए जाते समय हमेशा 4-5 लोगों के समूह में जाएं।
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    ​शोर मचाएं: खेतों में घुसते समय जोर-जोर से बात करें, मोबाइल पर गाने चलाएं या डंडा जमीन पर पीटते हुए चलें। गुलदार इंसानी शोर से घबराकर अक्सर दूर भाग जाते हैं।
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    ​रोशनी का प्रबंध: घरों के आस-पास, बाड़ों और खेतों की पगडंडियों पर पर्याप्त रोशनी (Lights) रखें। रात में बिना टॉर्च के बाहर न निकलें।
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    ​झाड़ियों की सफाई: अपने घरों के आस-पास उगी अनावश्यक झाड़ियों और लंबी घास को तुरंत साफ कर दें, क्योंकि गुलदार इन्हीं में घात लगाकर बैठते हैं।
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​बिजनौर के थाना नजीबाबाद इलाके की यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष अब एक गंभीर आपदा का रूप ले चुका है। 7 साल के मासूम की दर्दनाक मौत से पूरा प्रशासन कटघरे में है। अब देखना यह है कि वन विभाग का लगाया गया पिंजरा कितनी जल्दी इस आदमखोर गुलदार को कैद कर पाता है। तब तक के लिए, ग्रामीणों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। प्रशासन को भी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक समाधान (Long-term solutions) खोजने होंगे, ताकि किसी और मां की गोद इस तरह सूनी न हो।
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