राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने एक महत्वपूर्ण पर्यावरण-हितैषी कदम उठाते हुए गाजियाबाद जिला स्थित दुहाई के नमो भारत डिपो में 'सोलर ऑन ट्रैक' प्रणाली लागू की है। यह पहल भारत में किसी भी आरआरटीएस (RRTS) या मेट्रो नेटवर्क में दूसरी बार लागू की गई है, जो हरित ऊर्जा और स्थायी बुनियादी ढांचे के प्रति NCRTC की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे पहले, वाराणसी स्थित बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) ने रेल की पटरियों के बीच में देश का पहला रिमूवेबल सोलर पैनल सिस्टम लगाया था।READ ALSO:-गाजियाबाद में दिल दहला देने वाला हादसा: मेरठ एक्सप्रेस-वे पर 100 की स्पीड में ट्रक में घुसी बाइक, 3 नाबालिगों की दर्दनाक मौत
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ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन में कमी का लक्ष्य
\r\n\r\nNCRTC का यह कदम ऊर्जा दक्षता को बढ़ाने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
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- \r\n पटरियों का उपयोग: यह प्रणाली पटरियों के बीच की खाली जगह का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करती है, जिससे स्थान का अधिकतम उपयोग होता है।\r\n \r\n
- \r\n कार्बन उत्सर्जन: इस पहल का मुख्य लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाना है।\r\n \r\n
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17500 किलोवाट बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद
\r\n\r\nNCRTC ने दुहाई डिपो में इस Solar on Track प्रणाली के तहत उच्च क्षमता वाले सौर पैनल लगाए हैं।
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- \r\n पैनल की क्षमता: इस योजना के तहत पिट व्हील ट्रैक के 70 मीटर हिस्से पर 28 सौर पैनल लगाए गए हैं। इनमें से प्रत्येक की क्षमता 550 वाट प्रति घंटा है।\r\n \r\n
- \r\n कुल क्षमता: इन पैनलों से कुल संयंत्र क्षमता 15.4 किलोवाट प्रति घंटा हो जाती है।\r\n \r\n
- \r\n उत्पादन लक्ष्य: इस प्रणाली से सालाना लगभग 17500 किलोवाट प्रति घंटा बिजली उत्पन्न होने की उम्मीद है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 16 टन प्रति वर्ष की कमी आएगी।\r\n \r\n
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स्थायी बुनियादी ढांचे की ओर NCRTC का कदम
\r\n\r\nNCRTC के प्रवक्ता के अनुसार, यह पहल संगठन की स्थायी बुनियादी ढांचे और कुशल ऊर्जा उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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- \r\n प्रवक्ता का बयान: "पटरियों से सीधे सौर ऊर्जा का उपयोग करके, NCRTC न केवल स्थान का अधिकतम उपयोग कर रहा है, बल्कि अपनी सभी सुविधाओं में ऊर्जा खपत प्राप्त करने के अपने मिशन को भी मजबूत कर रहा है।"\r\n \r\n
- \r\n सौर नीति का लक्ष्य: 'सोलर ऑन ट्रैक' परियोजना NCRTC की सौर नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका लक्ष्य संगठन की 70 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं को सौर ऊर्जा से पूरा करना है।\r\n \r\n
- \r\n वर्तमान क्षमता: वर्तमान में, NCRTC विभिन्न स्टेशनों, डिपो और इमारतों में 5.5 मेगावाट की रूफटॉप सौर क्षमता का उपयोग कर रहा है, जिसका लक्ष्य 15 मेगावाट अधिकतम आंतरिक उत्पादन है।\r\n \r\n
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ब्रेकिंग तकनीक से ऊर्जा बचत
\r\n\r\nNCRTC केवल Solar Panel System पर ही काम नहीं कर रहा है, बल्कि यह विकास के लिए कई अन्य पर्यावरण-हितैषी तकनीकों को भी अपना रहा है:
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- \r\n पुनर्योजी ब्रेकिंग (Regenerative Braking): नमो भारत ट्रेनों में इस तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो ब्रेक लगाने के पर पैदा होने वाली ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है।\r\n \r\n
- \r\n अन्य पहलें: NCRTC के विकास प्रयासों में वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ (Rainwater Harvesting), सीवेज उपचार संयंत्र (STP) भी शामिल हैं।\r\n \r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.