श्रावण (सावन) मास का पवित्र महीना शुरू होते ही उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर का माहौल पूरी तरह से शिवमय हो जाता है। हरिद्वार, ऋषिकेश और गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर नंगे पैर बढ़ने वाले लाखों शिवभक्तों (कांवड़ियों) की सेवा और सुरक्षा के लिए शासन-प्रशासन कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता।READ ALSO:-बिजनौर में रफ्तार का कहर: NH-74 पर दो बाइकों की आमने-सामने भीषण टक्कर, 1 की मौके पर ही दर्दनाक मौत, मची चीख-पुकार!
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इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अहम पड़ाव माने जाने वाले गाजियाबाद (Ghaziabad) जिले में आबकारी विभाग (Excise Department) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया है। कांवड़ यात्रा के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और शिवभक्तों की आस्था का सम्मान करने के उद्देश्य से, कांवड़ मार्ग पर स्थित शराब, बीयर और भांग की दुकानों को बाहर से ढंकने (Covering) का निर्णय लिया गया है। आइए, प्रशासन की इस पूरी तैयारी, इसके पीछे के कारणों और जमीनी एक्शन प्लान को विस्तार से समझते हैं।
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क्यों जरूरी था यह फैसला? (धार्मिक आस्था और सुरक्षा का तालमेल)

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कांवड़ यात्रा एक बेहद कठिन और तपस्या पूर्ण यात्रा होती है। शिवभक्त कई सौ किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं, व्रत रखते हैं और पूरी तरह से सात्विक जीवन जीते हैं। ऐसे में जब वे हाईवे या मुख्य मार्गों से गुजरते हैं, तो रास्ते में खुली हुई शराब या भांग की दुकानें उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं।
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अतीत से लिया गया सबक: प्रशासन ने यह निर्णय अतीत की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। पूर्व के वर्षों में कई बार ऐसा देखा गया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों या उत्तेजित भीड़ द्वारा शराब की दुकानों पर तोड़फोड़ की गई है, जिससे कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसलिए, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने यह बीच का रास्ता निकाला है कि दुकानें पूरी तरह से बंद नहीं की जाएंगी (जिससे राजस्व का नुकसान न हो), बल्कि उनकी बाहरी दृश्यता (Outer Visibility) को मोटे पर्दे, तिरपाल या फ्लेक्स से पूरी तरह कवर कर दिया जाएगा।
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गाजियाबाद का डेटा: 481 में से 170 दुकानों पर सीधा एक्शन

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गाजियाबाद जिला आबकारी अधिकारी (District Excise Officer) संजय सिंह ने इस विशेष कार्ययोजना की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में शराब और भांग की कुल 481 अधिकृत दुकानें संचालित होती हैं। विभाग ने पूरे कांवड़ रूट का बारीकी से सर्वे किया है, जिसके आधार पर उन दुकानों को चिन्हित किया गया है जो सीधे कांवड़ियों के रास्ते में आती हैं।
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कांवड़ मार्ग पर स्थित 170 दुकानों का विवरण इस प्रकार है:

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    देसी शराब की दुकानें (Country Liquor Shops): 77
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    कंपोजिट शॉप्स (Composite Shops): 75 (जहां देसी और अंग्रेजी दोनों शराब मिलती है)
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    मॉडल शॉप्स (Model Shops): 11 (प्रीमियम शराब की दुकानें)
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    भांग की दुकानें (Bhang Shops): 7
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इन सभी 170 दुकानों के अनुज्ञापियों (लाइसेंस धारकों) को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे अपनी दुकानों के साइनबोर्ड, डिस्प्ले और बाहरी हिस्से को इस तरह से ढक लें कि सड़क से गुजरने वाले किसी भी शिवभक्त को अंदर रखी शराब या दुकान का नाम दिखाई न दे।
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29 जुलाई की शाम है 'डेडलाइन' (Strict Timeline)

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आबकारी विभाग ने इस आदेश को लागू करने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है। चूंकि इस वर्ष कांवड़ यात्रा का मुख्य चरण 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है, इसलिए आबकारी विभाग का लक्ष्य है कि 29 जुलाई की शाम तक सभी चिन्हित 170 दुकानों को पूरी तरह से ढकने का काम मुकम्मल कर लिया जाए।
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30 जुलाई की सुबह से जब शिवभक्तों के जत्थे गाजियाबाद की सीमा में प्रवेश करना शुरू करेंगे, तो उन्हें मार्ग पर कोई भी शराब या भांग की दुकान खुली या प्रदर्शित अवस्था में दिखाई नहीं देगी। इस डेडलाइन का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस का निलंबन (Suspension) भी शामिल हो सकता है।
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निगरानी के लिए बनी 6 स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें

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केवल आदेश जारी करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे धरातल पर लागू कराना असली चुनौती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आबकारी विभाग ने व्यवस्था की कड़ी निगरानी के लिए छह विशेष टीमों (Special Teams/Flying Squads) का गठन किया है।
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इन टीमों की मुख्य जिम्मेदारियां:

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    लगातार पेट्रोलिंग: ये टीमें कांवड़ यात्रा के दौरान अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों और राजमार्गों पर दिन-रात लगातार निरीक्षण (Patrolling) करेंगी।
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    कवर की स्थिति जांचना: टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी दुकानों पर लगाए गए कवर (पर्दे/तिरपाल) सही स्थिति में रहें। हवा या बारिश से अगर कवर हट जाता है, तो उसे तुरंत दुरुस्त कराया जाएगा।
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    शासन के निर्देशों का पालन: यदि कोई दुकानदार चोरी-छिपे डिस्प्ले खोलता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो मौके पर ही चालान या सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
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    अवैध शराब पर रोक: इसके साथ ही ये टीमें कांवड़ यात्रा की आड़ में किसी भी प्रकार की अवैध शराब की तस्करी पर भी पैनी नजर रखेंगी।
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जिला अधिकारी का स्पष्ट संदेश: "भावनाओं को नहीं पहुंचने देंगे ठेस"

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गाजियाबाद के जिला अधिकारी (DM) रविंद्र कुमार मांदड़ ने कांवड़ यात्रा को लेकर पहले ही सभी संबंधित विभागों— पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और आबकारी विभाग के साथ एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक की थी।
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जिला अधिकारी ने आबकारी अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कांवड़ मार्ग पर शराब की दुकानों के कारण किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न नहीं होना चाहिए। उसी के अनुपालन में आबकारी अधिकारी संजय सिंह ने आश्वासन दिया है कि "कहीं भी, किसी भी शिवभक्त या कांवड़िये की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी।" प्रशासन का मुख्य उद्देश्य एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सद्भावपूर्ण कांवड़ यात्रा संपन्न कराना है।
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गाजियाबाद प्रशासन का यह कदम न केवल कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बेहतरीन प्रशासनिक पहल है, बल्कि यह करोड़ों शिवभक्तों की आस्था के प्रति सरकार के सम्मान को भी दर्शाता है। कांवड़ रूट पर शराब की दुकानों को ढकने से जहां एक ओर धार्मिक उल्लास का वातावरण शुद्ध बना रहेगा, वहीं दूसरी ओर किसी भी अवांछित विवाद या दुर्घटना की आशंका भी लगभग समाप्त हो जाएगी। उम्मीद है कि प्रशासन की इस चुस्त व्यवस्था के चलते इस वर्ष की कांवड़ यात्रा पूरी तरह से निर्विघ्न और सफल रहेगी।
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