खबरीलाल डेस्क
बिजनेस / यूटिलिटी डेस्क: भारतीय परिवारों में आपसी विश्वास और प्रेम इतना गहरा होता है कि आमतौर पर माता-पिता, पति-पत्नी या घर के बड़े-बुजुर्ग अपने बैंक खातों की जानकारी, एटीएम (ATM) कार्ड और यहां तक कि अपना गोपनीय पिन (PIN) नंबर भी अपने बच्चों या परिजनों के साथ आसानी से साझा कर देते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि जरूरत पड़ने पर या किसी आपातकालीन स्थिति में परिवार का कोई भी सदस्य आसानी से पैसे निकाल सके। जीते-जी यह प्रक्रिया बेहद सामान्य, सुविधाजनक और व्यावहारिक लगती है।REAS ALSO:-बिजनौर में खत्म हुआ खूंखार गुलदार का खौफ: वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ 'मौत का साया', ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
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लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि किसी परिजन के अचानक निधन के बाद उसी एटीएम कार्ड या यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करके पैसे निकालना आपको सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है? जी हां, यह बिल्कुल सच है। भले ही आप उस बैंक खाते के इकलौते नॉमिनी (Nominee) हों या कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) ही क्यों न हों, बिना बैंक को आधिकारिक रूप से सूचित किए मृतक के खाते से एक रुपया भी निकालना कानूनन जुर्म माना जाता है। आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि इस संवेदनशील मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कानून के कड़े नियम क्या कहते हैं।
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निधन के तुरंत बाद फ्रीज (Freeze) हो जाता है बैंक अकाउंट

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कानूनी दृष्टिकोण से समझें तो, जैसे ही किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, उसके सभी व्यक्तिगत कानूनी अधिकार उसी क्षण समाप्त हो जाते हैं।
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    खाते का निष्क्रिय होना: नियमों के मुताबिक, किसी भी खाताधारक के निधन के तुरंत बाद उसका बैंक खाता कानूनी रूप से निष्क्रिय (Inactive) या फ्रीज मान लिया जाता है।
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    डिजिटल लेन-देन पर रोक: व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही उसके नाम पर जारी किए गए डेबिट कार्ड (Debit Card), क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई (UPI) के इस्तेमाल का अधिकार भी पूरी तरह से खत्म हो जाता है।
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    अवैध निकासी: अगर मृत्यु के बाद कोई भी व्यक्ति (चाहे वह बेटा, बेटी या पत्नी ही क्यों न हो) मृतक के एटीएम का इस्तेमाल करके पैसे निकालता है, तो बैंक की नजर में यह एक अनधिकृत (Unauthorized) और अवैध लेन-देन (Illegal Transaction) है।
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सबसे बड़ा भ्रम: नॉमिनी भी सीधे एटीएम से नहीं निकाल सकता पैसा

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हमारे समाज में बैंकिंग नियमों को लेकर एक बहुत बड़ी गलतफहमी यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर किसी बैंक खाते में उनका नाम 'नॉमिनी' (Nominee) के तौर पर दर्ज है, तो खाताधारक की मृत्यु के बाद वे उस पैसे के इकलौते मालिक बन जाते हैं और जब चाहें एटीएम जाकर पैसे निकाल सकते हैं।
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कानून क्या कहता है? भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार, नॉमिनी केवल एक 'ट्रस्टी' (Trustee) या 'संरक्षक' होता है, न कि उस पैसे का पूर्ण मालिक। नॉमिनी की जिम्मेदारी होती है कि वह बैंक से कानूनी प्रक्रिया के तहत पैसा प्राप्त करे और फिर उसे मृतक के असली कानूनी उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) के बीच कानून के अनुसार बांट दे। इसलिए, नॉमिनी होने के बावजूद आपको सबसे पहले बैंक को व्यक्ति के निधन की आधिकारिक सूचना देनी होती है। बिना बैंक को बताए चुपके से एटीएम से पैसे निकालना सीधे तौर पर धोखाधड़ी (Fraud) की श्रेणी में आता है।
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बैंक क्यों लगाता है ऐसी कड़ी पाबंदी? जानिए असली वजह

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कई बार लोगों को लगता है कि बैंक जानबूझकर पैसे देने में आनाकानी करता है या कागजी कार्रवाई में उलझाता है। लेकिन वास्तव में, बैंक यह कड़ा नियम मृत व्यक्ति की जीवन भर की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए ही लागू करता है।
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    उत्तराधिकारियों के हितों की रक्षा: अक्सर देखा गया है कि मृत व्यक्ति के एक से ज्यादा कानूनी वारिस होते हैं (जैसे- कई भाई-बहन या पत्नी)। ऐसी स्थिति में अगर कोई एक व्यक्ति जिसके पास एटीएम कार्ड है, वह चुपके से सारे पैसे निकाल लेता है, तो बाकी वारिसों के हक का हनन होता है।
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    पारिवारिक विवादों से बचाव: पैसे को लेकर परिवारों में विवाद होना बहुत आम बात है। बैंक एक निष्पक्ष संस्था के रूप में कार्य करता है। बैंक सभी उत्तराधिकारियों के दावों की विधिवत जांच करने के बाद ही, एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पैसा रिलीज करता है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी पचड़ा न फंसे।
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बिना बताए पैसे निकालने पर क्या हो सकती है जेल?

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यह सवाल सबसे अहम है कि अगर किसी ने अज्ञानतावश या जानबूझकर मृतक के एटीएम से पैसे निकाल लिए, तो उसके परिणाम क्या हो सकते हैं?
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यदि कोई व्यक्ति बैंक को जानकारी दिए बिना किसी मृत व्यक्ति के खाते से पैसे निकालता है, तो शुरुआत में शायद बैंक को इसका पता न चले। लेकिन, यदि बाद में परिवार का कोई दूसरा सदस्य (जैसे कोई भाई या बहन जिसे हिस्सेदारी नहीं मिली) या फिर खुद बैंक इस निकासी पर आपत्ति जताता है, तो गंभीर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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    आपराधिक मुकदमा: इस मामले में पैसे निकालने वाले व्यक्ति पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) या आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery), और अमानत में खयानत (Breach of Trust) के आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है।
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    सजा का प्रावधान: दोष सिद्ध होने पर आरोपी व्यक्ति को न केवल वह पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना पड़ सकता है, बल्कि उसे भारी जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है और जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
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पैसों पर क्लेम करने का क्या है सही और कानूनी तरीका?

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अगर आपके किसी करीबी या परिजन का निधन हो गया है, तो शोक के इस समय में जल्दबाजी में कोई भी ऐसा कदम न उठाएं जो बाद में कानूनी परेशानी का सबब बने। मृतक के बैंक खाते में जमा राशि प्राप्त करने का एक बहुत ही सरल और व्यवस्थित कानूनी तरीका है:
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    मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate): सबसे पहले नगर निगम या संबंधित विभाग से मृतक का आधिकारिक 'डेथ सर्टिफिकेट' बनवाएं।
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    बैंक को सूचना दें: बैंक शाखा में जाकर मैनेजर को खाताधारक के निधन की लिखित सूचना दें, ताकि खाते से कोई अनधिकृत लेन-देन न हो सके।
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    क्लेम फॉर्म भरें: बैंक से 'डिसीज्ड क्लेम फॉर्म' (Deceased Claim Form) लें।
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    दस्तावेज जमा करें: इस फॉर्म के साथ मृतक का डेथ सर्टिफिकेट, अपना आईडी प्रूफ (आधार कार्ड/पैन कार्ड), नॉमिनी होने का सबूत (पासबुक की कॉपी) संलग्न करके जमा करें।
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    वेरिफिकेशन और भुगतान: यदि खाते में नॉमिनी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है, तो बैंक आपके सभी दस्तावेजों को वेरीफाई करेगा और आरबीआई की गाइडलाइंस के अनुसार अधिकतम 15 दिनों के भीतर पूरा पैसा कानूनी तौर पर आपके (नॉमिनी के) बैंक खाते में ट्रांसफर कर देगा।
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यदि खाते में कोई नॉमिनी नहीं है, तो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) या लीगल हेयर सर्टिफिकेट (Legal Heir Certificate) की आवश्यकता पड़ सकती है।
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वित्तीय मामलों में हमेशा सावधानी बरतना ही समझदारी है। भावनात्मक जुड़ाव अपनी जगह है, लेकिन जब बात बैंक और कानून की आती है, तो नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है। किसी अपने के गुजर जाने के बाद, उनके एटीएम या यूपीआई का इस्तेमाल करने से बचें और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह बैंकिंग प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही क्लेम हासिल करें।