यूपी के बिजनौर जिले के थाना बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम चड़वाला में पिछले कई दिनों से आतंक का पर्याय बन चुका खूंखार गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया है। गुलदार के पकड़े जाने से ग
Published at : 27 May 2026, 02:29 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 05:28 AM
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Fierce Leopard Caught In Forest Department Cage In Bijnor Badhapur
बिजनौर (Bijnor News) / रिपोर्टर - शकील अहमद: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष (Man-Animal Conflict) का सिलसिला लगातार जारी है। खासकर गुलदार (Leopard) के हमलों ने पूरे जिले में खौफ का माहौल पैदा कर रखा है। लेकिन इस बीच, जिले के थाना बढ़ापुर क्षेत्र से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। बढ़ापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम चड़वाला में पिछले कई दिनों से आतंक मचाने वाला एक खूंखार और विशालकाय गुलदार आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गया है।READ ALSO:-मेरठ में बिजली विभाग के खिलाफ बड़ा आक्रोश: संविदा लाइनमैनों का अल्टीमेटम, 'मांगें पूरी नहीं हुईं तो 7 दिन बाद करेंगे कार्य बहिष्कार'
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गुलदार के पिंजरे में कैद होने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, ग्रामीणों की खुशी और राहत का ठिकाना नहीं रहा। महीनों से खौफ के साए में जी रहे किसानों, महिलाओं और बच्चों ने चैन की सांस ली है। इस सफलता के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गुलदार का सफल रेस्क्यू किया और उसे जंगल के सुरक्षित इलाके में ले जाने की प्रक्रिया पूरी की।
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@Shakeel57767846 UP के बिजनौर जिले के थाना बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम चड़वाला में पिछले कई दिनों से आतंक का पर्याय बन चुका खूंखार गुलदार आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया है। गुलदार के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। pic.twitter.com/XsAg0JwUvB
दहशत के साए में जी रहा था चड़वाला गांव (The Reign of Terror)
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ग्राम चड़वाला और उसके आस-पास के सटे हुए ग्रामीण इलाकों में पिछले काफी समय से इस गुलदार ने भारी आतंक मचा रखा था। बिजनौर का यह इलाका जंगलों और अमानगढ़ टाइगर रिजर्व (Amangarh Tiger Reserve) के बफर जोन के करीब होने के कारण अक्सर वन्यजीवों की आवाजाही का गवाह बनता है। लेकिन यह विशेष गुलदार अपनी हदें पार करते हुए सीधे रिहायशी इलाकों और खेतों तक पहुंच गया था।
खेतों में जाना हुआ था दुश्वार: चड़वाला गांव के किसान अपने खेतों में जाने से कतराने लगे थे। गन्ने के बड़े-बड़े और घने खेत गुलदार के छिपने का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गए थे। दिन के उजाले में भी किसानों को झुंड बनाकर हाथों में लाठी-डंडे लेकर खेतों में सिंचाई या कटाई के लिए जाना पड़ रहा था।
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शाम ढलते ही पसर जाता था सन्नाटा: गुलदार का खौफ इस कदर हावी था कि शाम होते ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर जाता था। लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर नहीं निकलने देते थे। पशुपालक भी अपने पालतू जानवरों (गाय, भैंस, बकरी) की सुरक्षा को लेकर हर रात खौफ में गुजारते थे, क्योंकि यह गुलदार कई बार पालतू कुत्तों और बछड़ों को अपना निवाला बना चुका था।
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वन विभाग की रणनीति: कैसे बिछाया गया जाल? (Forest Department's Action)
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लगातार मिल रही शिकायतों और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए बिजनौर वन प्रभाग (Bijnor Forest Division) के अधिकारी हरकत में आए। ग्रामीणों ने वन विभाग को चेतावनी दी थी कि अगर जल्द ही इस गुलदार को नहीं पकड़ा गया, तो गांव में कोई भी बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
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स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वन विभाग की एक विशेष टीम ने ग्राम चड़वाला का दौरा किया। टीम ने गुलदार के पगमार्क (पंजों के निशान) ट्रेस किए और उसकी आवाजाही के रास्तों (Route) का बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद, वन विभाग ने गांव के बाहरी छोर पर, जहां से गन्ने के खेत शुरू होते हैं, एक बड़ा लोहे का पिंजरा (Trap Cage) लगा दिया। गुलदार को आकर्षित करने के लिए पिंजरे के अंदर एक बकरे को चारे (Bait) के रूप में बांधा गया था।
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वह रात जब पिंजरे में फंसा खूंखार शिकारी (The Capture)
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ग्रामीणों के अनुसार, बीती रात गांव के बाहरी इलाके से जोर-जोर से कुत्तों के भौंकने और फिर एक खूंखार जानवर के दहाड़ने की आवाजें आने लगीं। गांव वाले समझ गए कि गुलदार शिकार की तलाश में फिर से गांव की तरफ आ गया है। डर के मारे रात में कोई भी ग्रामीण अपने घर से बाहर नहीं निकला, लेकिन सभी की नजरें सुबह होने का इंतजार कर रही थीं।
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जैसे ही सुबह की पहली किरण फूटी, कुछ निडर युवा लाठी-डंडे लेकर उस जगह पर पहुंचे जहां वन विभाग ने पिंजरा लगाया था। वहां का नजारा देखकर उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। वह खूंखार गुलदार, जिसने पूरे इलाके की रातों की नींद हराम कर रखी थी, अब वन विभाग के मजबूत लोहे के पिंजरे में कैद होकर दहाड़ें मार रहा था। पिंजरे के अंदर फंसने के कारण वह बुरी तरह झटपटा रहा था और सलाखों पर अपने पंजे मार रहा था।
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गुलदार को देखने उमड़ा जनसैलाब (Huge Crowd Gathered)
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गुलदार के पकड़े जाने की खबर जंगल में आग की तरह पूरे चड़वाला गांव और आस-पास के दर्जनों गांवों (जैसे- मंडावली, स्योहारा के सीमावर्ती क्षेत्र आदि) में फैल गई। सुबह-सुबह ही सैकड़ों की संख्या में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं की भारी भीड़ उस खूंखार जानवर को देखने के लिए घटना स्थल पर उमड़ पड़ी।
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हर कोई अपने मोबाइल फोन से पिंजरे में कैद उस गुलदार की तस्वीरें और वीडियो बनाने में लगा था। भीड़ का शोर और लोगों की मौजूदगी से पिंजरे में कैद गुलदार और भी ज्यादा आक्रामक हो रहा था। हालांकि, पिंजरा बेहद मजबूत था, इसलिए किसी तरह के खतरे की कोई गुंजाइश नहीं थी। ग्रामीणों के चेहरों पर जो डर पिछले कई महीनों से हावी था, वह आज पिंजरे में बंद इस जानवर को देखकर सुकून और मुस्कान में बदल गया था।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा (The Rescue Operation)
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भीड़ के बेकाबू होने और गुलदार के हिंसक व्यवहार को देखते हुए ग्राम प्रधान और स्थानीय लोगों ने तुरंत बढ़ापुर थाना पुलिस और वन विभाग को इसकी सूचना दी।
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"सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम, जिसमें रेंज अधिकारी, वन दरोगा, पशु चिकित्सक और ट्रेंकुलाइजर (बेहोश करने वाली बंदूक) विशेषज्ञ शामिल थे, पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंच गए। साथ ही थाना बढ़ापुर की पुलिस ने भी मौके पर पहुंचकर भीड़ को काबू में किया और पिंजरे से दूर किया।"
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रेस्क्यू की प्रक्रिया:
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भीड़ नियंत्रण: सबसे पहले पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने सुरक्षा घेरा बनाकर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ को पिंजरे से सुरक्षित दूरी पर पीछे धकेला।
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प्राथमिक जांच: मौके पर मौजूद पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) ने बाहर से ही गुलदार की स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लिया। यह देखा गया कि पिंजरे में झटपटाने के कारण उसे कोई गंभीर चोट तो नहीं आई है। पकड़े गए गुलदार की उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष के बीच बताई जा रही है और वह पूरी तरह से स्वस्थ और पूर्ण वयस्क (Adult) है।
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सुरक्षित स्थानांतरण: इसके बाद, वन विभाग के कर्मचारियों ने बड़ी सावधानी के साथ पिंजरे को तिरपाल से ढक दिया ताकि जानवर का तनाव (Stress) कम हो सके। फिर पिंजरे को क्रेन और रस्सियों की मदद से वन विभाग के सुरक्षित वाहन (पिकअप ट्रक) में लोड किया गया।
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वन अधिकारियों ने बताया कि इस गुलदार को उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार किसी सुरक्षित और घने जंगल (संभवतः अमानगढ़ टाइगर रिजर्व या कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे किसी कोर एरिया) में ले जाकर छोड़ दिया जाएगा, जहां से इसके दोबारा रिहायशी इलाकों में लौटने की कोई संभावना न रहे।
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खतरा अभी टला है, खत्म नहीं हुआ (A Warning for the Future)
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हालांकि चड़वाला गांव के लोग आज बेहद खुश हैं, लेकिन वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बिजनौर जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां गन्ने की खेती बहुत बड़े पैमाने पर होती है। गन्ने के खेत गुलदारों के लिए एक 'मिनी फॉरेस्ट' (Mini Forest) का काम करते हैं, जहां उन्हें छिपने की जगह, पानी और शिकार (जैसे- जंगली सूअर, नीलगाय, और लावारिस कुत्ते) आसानी से मिल जाते हैं।
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अक्सर देखा गया है कि एक इलाके में एक से ज्यादा गुलदार भी हो सकते हैं। इसलिए वन रक्षकों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अभी भी रात के समय अकेले खेतों की तरफ न जाएं, बच्चों को अकेला न छोड़ें, और रात के समय घरों के बाहर पर्याप्त रोशनी का प्रबंध रखें।
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बिजनौर के थाना बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम चड़वाला में वन विभाग द्वारा चलाया गया यह पिंजरा अभियान पूरी तरह से सफल रहा। रिपोर्टर शकील अहमद की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि सही समय पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई से न केवल इंसानी जानें बचाई जा सकती हैं, बल्कि वन्यजीवों का भी सुरक्षित संरक्षण (Conservation) किया जा सकता है। अब चड़वाला गांव के किसान बिना किसी खौफ के अपने खेतों में जा सकेंगे और बच्चे निडर होकर गांव की पगडंडियों पर खेल सकेंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.