खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के दिल में स्थित और विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले 'जंतर-मंतर' पर हाल ही में हुए सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के दौरान भड़की हिंसा ने एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। इस पूरे बवाल में सबसे बड़ा विवाद 'पैलेट गन' (Pellet Gun) के इस्तेमाल को लेकर खड़ा हुआ है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और प्रत्यक्षदर्शियों ने यह सनसनीखेज दावा किया था कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने पैलेट गन से 8 राउंड फायर किए थे।
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पैलेट गन का इस्तेमाल अमूमन बेहद गंभीर और बेकाबू हालातों में किया जाता है, इसलिए राजधानी दिल्ली में इसके इस्तेमाल की खबर ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का एक बड़ा मौका दे दिया। लेकिन अब, दिल्ली पुलिस ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, जंतर-मंतर पर किसी भी तरह की पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
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क्या कहता है दिल्ली पुलिस का प्रोटोकॉल और डीसीपी का बयान?

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इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने स्थिति को स्पष्ट करने के लिए अपनी कार्यप्रणाली का विस्तृत ब्यौरा दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली इलाके के डीसीपी (DCP) सचिन शर्मा ने पैलेट गन चलाने का कोई आदेश जारी नहीं किया था। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस के साथ तैनात आरएएफ (RAF) की कंपनी ने भी अपनी तरफ से किसी भी प्रकार की फायरिंग नहीं की है।

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दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने सुरक्षा बलों की तैनाती और कार्रवाई के 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, "जब भी इस तरह के बड़े विरोध-प्रदर्शन या आंदोलन की कॉल होती है, तो एक निर्धारित फॉर्मेट का पालन किया जाता है। संबंधित आउटसोर्स फोर्स (जैसे RAF या CRPF) की कंपनी इलाके के डीसीपी के पास रिपोर्ट करती है। इस तरह के संवेदनशील फैसले या तो हालात बिगड़ने से पहले लिए जाते हैं या फिर अचानक मैदान पर (Field) पैदा हुई परिस्थितियों के अनुसार सडन डिसीजन (Sudden Decision) लिए जाते हैं।"
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अधिकारियों ने आगे बताया कि कार्रवाई के बाद पेपर वर्क पूरा किया जाता है। किसी भी बड़े मार्च या आंदोलन से पहले डीसीपी पूरी फोर्स को ब्रीफ करते हैं कि जरूरत पड़ने पर क्या-क्या एक्शन लेने हैं। इसके लिए एक फॉर्म होता है जिसमें आंसू गैस (Tear Gas), लाठीचार्ज या बैरिकेडिंग जैसे विकल्पों पर टिक करना होता है और उस पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं। डीसीपी सचिन शर्मा ने जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, वे पूरी तरह से 'नॉर्मल फॉर्मेट' थे, जिनमें पैलेट गन के इस्तेमाल का कोई जिक्र या अनुमति नहीं थी।
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आयोजकों की घोर लापरवाही: 1000 की क्षमता, पहुंच गए 5000 लोग

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दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए पैलेट गन के इस्तेमाल से तो इनकार किया ही है, साथ ही इस पूरी हिंसा और अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के आयोजकों को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस का कहना है कि आयोजकों ने न केवल नियमों की अनदेखी की, बल्कि भीड़ नियंत्रण के लिए कोई बुनियादी ढांचा भी तैयार नहीं किया।
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आयोजकों की लापरवाही को लेकर पुलिस ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
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क्षमता से अधिक भीड़ जुटाना: पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर जिस जगह प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, वहां अधिकतम 1000 लोगों के खड़े होने की क्षमता है। इसके बावजूद, आयोजकों ने वहां 5000 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटा ली। जब भीड़ बढ़ने लगी, तो पुलिस ने आयोजकों से बार-बार अनुरोध किया कि वे लोगों को रामलीला मैदान की तरफ ले जाएं, जहां अधिक जगह है, लेकिन आयोजकों ने पुलिस की एक न सुनी।
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वॉलंटियर्स की गैरमौजूदगी: किसी भी बड़े प्रदर्शन के लिए आयोजकों को अपने वॉलंटियर्स तैनात करने होते हैं ताकि वे भीड़ को अनुशासित रख सकें। अभिजीत की ओर से सौरभ दास ने इस प्रदर्शन की परमिशन ली थी। पुलिस ने उन्हें कई बार कहा था कि वे अपने वॉलंटियर्स की सूची और उनकी तैनाती सुनिश्चित करें, लेकिन आयोजकों की तरफ से इसका कोई जवाब नहीं आया और न ही कोई वॉलंटियर वहां मौजूद था।
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लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम का न होना: पुलिस ने यह भी बताया कि 5000 की भारी भीड़ को नियंत्रित करने या उन्हें कोई निर्देश देने के लिए सीजेपी की ओर से किसी भी तरह के स्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम की उचित व्यवस्था नहीं की गई थी।
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जब पुलिस को ही बनने पड़े वॉलंटियर

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आयोजकों की तरफ से जब भीड़ को शांत करने की कोई कोशिश नहीं की गई, तो हालात को बेकाबू होने से बचाने के लिए आखिरकार दिल्ली पुलिस को ही मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस को मजबूरन अपने ही जवानों और अधिकारियों को सादे कपड़ों में या वॉलंटियर के रूप में आंदोलनकारियों के बीच भेजना पड़ा। इन पुलिसकर्मियों ने भीड़ के बीच जाकर लोगों से हाथ जोड़कर विनती की और उन्हें समझाया कि वे पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान न पहुंचाएं और शांति बनाए रखें। पुलिस का दावा है कि अगर उन्होंने यह कदम नहीं उठाया होता, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।
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राजनीतिक बवाल: विपक्ष ने मांगा अमित शाह से जवाब

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भले ही दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है, लेकिन इस मुद्दे ने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन चलने की कथित खबरों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है।
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विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर इस तरह के घातक हथियारों के इस्तेमाल की बात बेहद डराने वाली है। विपक्ष ने इस पूरे मामले को संसद में भी जोर-शोर से उठाया है और गृह मंत्री अमित शाह से इस घटना पर आधिकारिक बयान देने की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए इस पूरे मामले की जवाबदेही गृह मंत्री की बनती है।
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आगे क्या? 

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वर्तमान स्थिति में, सीआरपीएफ (CRPF) और आरएएफ (RAF) ने अभी तक इस पूरे घटनाक्रम और पैलेट गन के इस्तेमाल के दावों पर अपनी तरफ से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि दिल्ली पुलिस का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि पैलेट गन के दावे भ्रामक हैं और असली दोषी आयोजक हैं जिन्होंने नियमों की धज्जियां उड़ाईं।
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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले में किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग उठती है या फिर संसद में सरकार की ओर से क्या जवाब पेश किया जाता है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और आगे के प्रदर्शनों के लिए दिल्ली पुलिस नई और सख्त गाइडलाइंस जारी करने पर विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। खबरीलाल की टीम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर नया अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाती रहेगी।