भारतीय बाजार में 'शुद्धता' (Purity) हमेशा से सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट रहा है। सुबह की चाय के साथ खाए जाने वाले बिस्किट से लेकर, बच्चों को दिए जाने वाले शहद और घर में इस्तेमाल होने वाले घी तक—हर कंपनी अपने प्रोडक्ट को '100% शुद्ध' बताने की होड़ में लगी है। लेकिन क्या सच में ये उत्पाद शत-प्रतिशत शुद्ध होते हैं? इसी सवाल का जवाब तलाशते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश की कई नामी-गिरामी फूड और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों पर अपनी नजरें टेढ़ी कर ली हैं।
\r\n\r\nFSSAI ने साफ कर दिया है कि हवा-हवाई दावों के दिन अब लद गए हैं। यदि कोई कंपनी पैकेट पर '100% प्योर' या '100% नेचुरल' लिख रही है, तो उसे वैज्ञानिक और तय मानकों की कसौटी पर इसे साबित भी करना होगा।
\r\n\r\nइन 5 बड़ी कंपनियों ने टेके घुटने, विज्ञापनों से हटाए '100%' के दावे
\r\n\r\nFSSAI की सख्त चेतावनी और लगातार हो रही मॉनिटरिंग के बाद, देश की कई बड़ी कंपनियों में हड़कंप मच गया है। अथॉरिटी के रडार पर आते ही 5 प्रमुख कंपनियों ने बैकफुट पर आते हुए अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापनों से '100%' शुद्धता वाले दावे रातों-रात हटा लिए हैं। जिन कंपनियों पर यह सीधा असर पड़ा है, उनमें शामिल हैं:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n\r\nFSSAI has initiated action against FBOs to discontinue the use of the term “100%” on labels, packaging & promotional or advertising materials. Following FSSAI’s intervention, 5 FBOs have taken corrective action & withdrawn “100%” claims from their products and advertisements. pic.twitter.com/i778Ph15lA
\r\n— FSSAI (@fssaiindia) August 19, 2026
- \r\n
- \r\n Zandu Honey (झंडू हनी): शहद के बाजार में बड़ा नाम रखने वाले झंडू ब्रांड को अपने दावों में बदलाव करना पड़ा है।\r\n \r\n
- \r\n AMWAY INDIA (एमवे इंडिया): हेल्थ और वेलनेस सप्लीमेंट्स के लिए मशहूर एमवे को भी FSSAI के नियमों के आगे झुकना पड़ा।\r\n \r\n
- \r\n BONN BISCUITS (बॉन बिस्किट्स): बेकरी और बिस्किट सेगमेंट के इस बड़े ब्रांड ने भी अपने विज्ञापनों से भ्रामक दावे वापस ले लिए हैं।\r\n \r\n
- \r\n JUZA FOODS (जूजा फूड्स): इस कंपनी को भी अपनी पैकेजिंग से 100% के दावे मिटाने पड़े हैं।\r\n \r\n
- \r\n (एक अन्य प्रमुख फूड ब्रांड): इसके अलावा भी कई छोटी-बड़ी कंपनियों को नोटिस भेजकर दावों को सुधारने का अल्टीमेटम दिया गया है।\r\n \r\n
FSSAI की एक विशेष टीम लगातार टेलीविजन, अखबारों, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर खाद्य कंपनियों के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर पैनी नजर रख रही है। अथॉरिटी का स्पष्ट निर्देश है कि— "दावे साफ, सही और ऐसे होने चाहिए जिन्हें प्रयोगशाला (Lab) में जांचकर साबित किया जा सके।"
\r\n\r\nइससे पहले Dabur (डाबर) को भी खानी पड़ी थी मात
\r\n\r\n'100% शुद्धता' के नाम पर ग्राहकों को लुभाने के मामले में FSSAI की गाज गिरने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India) को FSSAI के भारी गुस्से का शिकार होना पड़ा था।
\r\n\r\nFSSAI ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए डाबर को अपने कई महत्वपूर्ण खाद्य उत्पादों की बिक्री (Sales) तुरंत प्रभाव से रोकने का निर्देश दे दिया था। यह तब तक के लिए था जब तक कि कंपनी अपने पैकेट्स से भ्रामक दावे हटा न ले। डाबर के जिन उत्पादों पर FSSAI ने आपत्ति जताई थी, उनमें शामिल थे:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n डाबर शहद (Dabur Honey)\r\n \r\n
- \r\n एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar)\r\n \r\n
- \r\n वर्जिन कोकोनट ऑयल (Virgin Coconut Oil)\r\n \r\n
- \r\n गाय का घी (Cow Ghee)\r\n \r\n
- \r\n तिल का तेल (Sesame Oil)\r\n \r\n
- \r\n नारियल पानी और नारियल दूध (Tender Coconut Water & Milk)\r\n \r\n
\r\n\r\nइन प्रोडक्ट्स के फ्रंट लेबल पर कंपनी ने बड़े-बड़े अक्षरों में 100% Natural, 100% Pure, 100% Purity Guaranteed, 100% Organic जैसे लुभावने दावे किए थे। FSSAI के एक्शन के बाद डाबर को अपनी पूरी पैकेजिंग रणनीति में बदलाव करना पड़ा।
\r\n\r\n
\r\n\r\nआखिर FSSAI को '100%' दावों पर आपत्ति क्यों है?
\r\n\r\nआपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि अगर कोई चीज शुद्ध है, तो उसे '100% शुद्ध' कहने में क्या बुराई है? इसके पीछे FSSAI के बेहद तार्किक और वैज्ञानिक कारण हैं:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n ग्राहकों का भ्रम (Consumer Confusion): किसी भी प्रोडक्ट पर "100% प्योर" या "100% नैचुरल" पढ़ने के बाद, एक आम ग्राहक के मन में यह धारणा बन जाती है कि उस उत्पाद में किसी भी तरह की कोई मिलावट, प्रिजर्वेटिव (Preservatives) या कृत्रिम रंग (Artificial color) नहीं है। यह उपभोक्ता मनोविज्ञान (Consumer Psychology) के साथ एक बड़ा खेल है।\r\n \r\n
- \r\n वैज्ञानिक प्रमाण की कमी (Lack of Scientific Proof): प्रकृति से प्राप्त होने वाली हर चीज (जैसे दूध, शहद, या तेल) जब फैक्ट्रियों में प्रोसेस (Process) की जाती है, तो उसकी शेल्फ लाइफ (Shelf Life) बढ़ाने के लिए उसमें कई प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में अंतिम उत्पाद (Final Product) को 100% प्राकृतिक साबित करना वैज्ञानिक रूप से लगभग असंभव हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n विज्ञापनों की भाषा का दुरुपयोग: फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन के अनुसार, कंपनियों को विज्ञापन और पैकेजिंग में ऐसी किसी भी भाषा, शब्द या चित्र का उपयोग करने की मनाही है, जिससे उत्पाद के गुण, मात्रा या प्रकृति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n ऑर्गेनिक के नाम पर धोखा: '100% Organic' लिखने के लिए कंपनियों को सख्त सर्टिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होता है, लेकिन कई कंपनियां बिना सही प्रमाणीकरण के ही ऐसे शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही थीं।\r\n \r\n
\r\n\r\nग्राहकों के लिए इसके क्या मायने हैं? (स्मार्ट खरीदार बनें)
\r\n\r\nFSSAI के इस कदम से आम ग्राहकों को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है। अब कंपनियों के लिए महज एक आकर्षक पैकेट के दम पर घटिया या मिलावटी सामान बेचना मुश्किल हो जाएगा। एक जागरूक उपभोक्ता के रूप में आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n फ्रंट लेबल बनाम बैक लेबल: कभी भी पैकेट के सामने लिखे बड़े दावों (जैसे- 0% Fat, 100% Pure, Immunity Booster) पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। हमेशा पैकेट के पीछे दी गई 'Ingredients' (सामग्री) की सूची पढ़ें।\r\n \r\n
- \r\n FSSAI लोगो और लाइसेंस: कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय उस पर FSSAI का लोगो और 14 अंकों का लाइसेंस नंबर जरूर चेक करें।\r\n \r\n
- \r\n शिकायत दर्ज करें: अगर आपको लगता है कि कोई कंपनी भ्रामक विज्ञापन दे रही है या प्रोडक्ट की गुणवत्ता खराब है, तो आप FSSAI के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' (Food Safety Connect) पोर्टल या ऐप पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\nआज के दौर में जहां स्वास्थ्य हर किसी की पहली प्राथमिकता है, वहां 'शुद्धता' के नाम पर किया जाने वाला खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। FSSAI द्वारा डाबर, झंडू, एमवे और बॉन बिस्किट्स जैसी दिग्गजों पर कसा गया यह शिकंजा पूरे एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के लिए एक कड़ा संदेश है। कंपनियों को यह समझना होगा कि वे '100%' का झूठा लेबल चिपकाकर अब ग्राहकों को बेवकूफ नहीं बना सकतीं। स्वाद और सेहत का सौदा अब केवल सच्चाई और तय मानकों के आधार पर ही होगा।