मेरठ (ब्यूरो): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सस्ता और सुलभ न्याय पाने की दशकों पुरानी कसक अब एक निर्णायक जनआंदोलन में बदल चुकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच (High Court Bench) स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में इतिहास रचा गया। 'हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति' के आह्वान पर हुए इस बंद का व्यापक और अभूतपूर्व असर देखने को मिला। मेरठ, जो इस आंदोलन का केंद्र बिंदु है, वहां सुबह से ही बाजार, शिक्षण संस्थान और न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहे। वकीलों के इस संघर्ष को 1200 से अधिक व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने अपना समर्थन देकर यह साबित कर दिया कि यह लड़ाई अब केवल काले कोट वालों की नहीं, बल्कि आम जनता की है।READ ALSO:-संसद में गूंजा मेरठ का दर्द: 'ट्रायल पूरा, स्टेशन तैयार, फिर खाली क्यों दौड़ रहीं रैपिड रेल?', गंगा एक्सप्रेसवे के 'जंबो' प्लॉटों पर भी लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने उठाए सवाल
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बाजारों में सन्नाटा, सड़कों पर इंकलाब बुधवार की सुबह मेरठ के लिए अन्य दिनों से अलग थी। शहर के ऐतिहासिक और व्यस्ततम इलाके जैसे खैरनगर, सुमित बुढ़ाना गेट, और जिमखाना मैदान सुबह 11 बजे तक पूरी तरह बंद रहे। खास बात यह रही कि अधिवक्ताओं को बाजार बंद कराने के लिए जोर-जबरदस्ती नहीं करनी पड़ी। व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखकर इस मांग का समर्थन किया। व्यापारी नेता और भाजपा से जुड़े अजय गुप्ता ने स्पष्ट कहा, "पश्चिमी यूपी को 4 बेंच मिलनी चाहिए। यह 50 साल पुरानी मांग है जो अब जनआंदोलन बन चुकी है। व्यापारी इस बंद में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।"
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शिक्षा और स्वास्थ्य: परीक्षाएं टलीं, ओपीडी बंद बंद का असर केवल बाजारों तक सीमित नहीं रहा। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने स्थिति की गंभीरता और छात्र नेताओं की मांग को देखते हुए बुधवार को होने वाली सभी परीक्षाएं स्थगित कर दीं। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, अब ये परीक्षाएं 12 जनवरी को पूर्व निर्धारित केंद्रों और पालियों में आयोजित की जाएंगी। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं पर भी आंशिक असर पड़ा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और निजी डॉक्टरों ने ओपीडी (OPD) सेवाएं बंद रखकर आंदोलन का समर्थन किया, हालांकि मानवीय आधार पर इमरजेंसी सेवाओं को बहाल रखा गया ताकि किसी मरीज की जान पर न बनाए।
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नारा गूंजा- 'बेंच नहीं तो वोट नहीं' कचहरी स्थित हनुमान मंदिर से अधिवक्ताओं का हुजूम टोलियों में निकला। संघर्ष समिति ने आंदोलन को अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए 35 विशेष टोलियां और 20 मोबाइल वैन तैनात की थीं। महिला अधिवक्ताओं ने बेगमपुल चौराहे पर मोर्चा संभाला। महिला अधिवक्ता उर्वशी सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, "हाईकोर्ट बेंच में देरी का कारण यह है कि पश्चिमी यूपी पर पूर्वांचल की राजनीति हावी है। हमारे जनप्रतिनिधि शायद हमारी आवाज उतनी बुलंदी से नहीं उठा पा रहे, लेकिन आज जनता जाग चुकी है।" वकीलों ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि अगर बेंच नहीं मिली, तो आगामी चुनावों में वोट की चोट दी जाएगी।
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आंकड़ों में पश्चिमी यूपी का दर्द: राज्यसभा सांसद का तर्क राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने इस मांग को आंकड़ों के साथ मजबूती से रखा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कुल लंबित मुकदमों में से लगभग 63% अकेले पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं। उन्होंने तुलनात्मक तर्क देते हुए कहा, "महाराष्ट्र की जनसंख्या और क्षेत्रफल यूपी से कम है, फिर भी मुंबई हाईकोर्ट की एक बेंच कोल्हापुर में दी गई है। जबकि यूपी में 10 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं और पश्चिमी यूपी की जनता को न्याय के लिए 700-800 किलोमीटर दूर इलाहाबाद जाना पड़ता है। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और जस्टिस जसवंत सिंह आयोग ने भी यहां बेंच की सिफारिश की थी।"
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राजनीतिक लामबंदी: पक्ष और विपक्ष एक सुर में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की दीवारें भी टूटती नजर आईं।
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    बसपा: मेरठ मंडल को-आर्डिनेटर जगरूप सिंह ने कहा कि बसपा शुरू से इस आंदोलन के साथ है और रहेगी। उन्होंने मौजूदा सरकार पर बेंच न देने का आरोप लगाया।
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    कांग्रेस: महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने भौगोलिक तर्क देते हुए कहा कि यहां से लाहौर और दिल्ली हाईकोर्ट पास हैं, लेकिन अपने ही राज्य का हाईकोर्ट (इलाहाबाद) दूर है। यह अन्याय समाप्त होना चाहिए।
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5 दशकों का संघर्ष, अब आर-पार की लड़ाई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने बताया कि वे पिछले 50 वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से मांग कर रहे हैं। जेल भरो आंदोलन से लेकर जनप्रतिनिधियों के घेराव तक सब किया गया, लेकिन 'पूरब की लॉबी' हमेशा आड़े आती रही। संघर्ष समिति का कहना है कि 22 जिलों में आज जो एकता दिखी है, वह सरकार के लिए एक चेतावनी है। 1200 संगठनों का समर्थन यह बताता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
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नोट: सीसीएसयू की स्थगित परीक्षाओं की नई तिथि 12 जनवरी निर्धारित की गई है। छात्र विवि की वेबसाइट पर अपडेट चेक करते रहें।
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